reason behind avoiding garlic onlion by brahmin

0
248

brahmin आज के वक्त में तो सब कुछ खाने में मिक्स सा हो गया है लेकिन आज भी जो अपने आपको बड़ा ही सच्चा ब्राह्मण मानते है आपने देखा होगा कि अगर किसी भी खाने में प्याज या फिर लहसुन होगा तो फिर वो उसका सेवन नही करेंगे। कही पर कचौड़ी खायेंगे तो बिना प्याज की कचौड़ी खायेंगे और सब्जी में भी लहसुन डालने से मना करेंगे भला ऐसा क्यों? प्याज और लहसुन में ऐसी कौनसी बुराई है भला? तो इसके पीछे एक बड़ी ही मानी हुई कथा है जिसका वर्णन हिन्दू पुस्तको में मिलता है।

ये तब का समय है जब देवता और दानव दोनों ही समुद्र मंथन करके अमृत निकाल रहे थे और जब अमृत निकला तो फिर भगवान् विष्णु ने सुन्दरी का रूप धरके अमृत अपने कब्जे में कर लिया जिसके बाद वो सबको अमृत पिलाने लगे जिस दौरान राहू केतु भी देवता का वेश धरकर वहां आकर बैठ गये।

विष्णु भगवान् ने गलती से उन्हें भी थोडा सा अमृत पिला दिया लेकिन उन्हें जैसे ही पता चला तो उन्होंने एक सेकेण्ड से भी कम के समय में अमृत गले से उतरने से पहले ही दोनों का सर धड से अलग कर दिया। ऐसा करने से उनका शरीर तो मर गया लेकिन सर सर अमर रह गये और इसी दौरान जब उनका सर कटा तो उनके गले से खून की काफी बूंदे धरती पर जा गिरी। जहाँ जहाँ पर ये बूंदे गिरी तो राहू की बूंदों से प्याज की उत्पति हुई जबकि केतु की बूंदों से लहसुन की उत्पति हुई।

अब ऐसे में ब्राहमण ईश्वर के पूजक होते है तो फिर वो राक्षस द्वारा उत्पन्न किसी चीज का सेवन कैसे करते है इसलिए इसमें राक्षस कावास और प्रवृति मानते हुए ब्राह्मण प्याज और लहसुन का सेवन नही करते है इसलिए से तामसिक भोजन की श्रेणी में भी रखा जाता है।