God country

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केरल गॉड्स ओन कंट्री कहलाता है। देवताओं का देश। केरल में कम्युनिस्ट पार्टी का शासन है। कम्युनिस्ट भी देवता होते हैं। गरीब , मजलूम , किसान , मजदूर , मुसलमान , महिलाओं के भगवान्। कम्युनिस्ट लोग हम दुष्टों से किसान , मजदूर , मुस्लमान और महिलाओं की सुरक्षा करते हैं।

केरल में पिन्नारी विजयन सिहांसन पर बैठते हैं। न्याय करते हैं। पिछले साल उनके सामने कई बार न्याय करने की विकट स्थिति पैदा हुई।

जैसे केंद्र में बीजेपी नहीं NDA सरकार है वैसे ही केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार है , जिसमे दो विधायकों वाली नेशनल कांग्रेस पार्टी ( शरद पवार) भी सदस्य है। और गठबंधन के मुताबिक मंत्रिमंडल में उसका एक मंत्री होना जरूरी है।

विजयन साहब की सरकार में एनसीपी की तरफ से शशिधरन मंत्री बनाये गए। पिछले साल मार्च में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर शशिधरन के खिलाफ एक नए शुरू हुए टेलीविज़न चैनल मंगलम में एक स्टिंग ऑपेरशन कर दिया।

मंगलम की एक महिला पत्रकार ने 71 वर्षीय शशिधरन को फोन किये , कुछ मामलों में उनकी सहायता मांगी। फोन पर अंतरंग बातें की। शशिधरन भावनाओं में बह गए , बहुत दूर तक चले गए। जाने क्या क्या सेक्सुअल एक्सप्लिसिट बातें फोन पर बोल गए।

और वो सारी बातें कुछ दिन में मंगलम न्यूज़ चैनल ने अपने प्रसारण के पहले दिन ऑन एयर पूरा दिन चलायी।

महिलाओं के लिए देवता समान कम्युनिस्ट लोगों के लिए डूब मरने की स्थिति थी। विजयन साहब ने डोलते सिहासन को बचाने के लिए शशिधरन का इस्तीफ़ा ले लिया।

लेकिन एनसीपी के साथ समझौता भी था। अब दुसरे विधायक थॉमस चांडी मंत्री बने।

थॉमस साहब कम्युनिस्ट नहीं थे। एनसीपी के आदमी थे। बड़े बिजनेसमैन थे। तमाम चीजों में दखल रखते थे। जिसमे टूर ट्रेवलिंग , होटल , रिजॉर्ट भी थे।

केरल में बैक वाटर रिजॉर्ट बहुत फेमस होते हैं।

चांडी साहब का भी एक ऐसा ही रिजॉर्ट था। लेकिन बैक वाटर में होने की वजह से सुविधाएँ थोड़ी कम थीं। रिजॉर्ट पहुँचने के लिए ढंग की सड़क नहीं थी। कारों के लिए पार्किंग स्पेस नहीं था।

लेकिन अब चांडी साहब खुद सरकार थे , देवता थे।

उन्होंने रिजॉर्ट तक सड़क बनवाने के लिए गरीब किसानो के खेतों का सरकारी अधिग्रहण करवाया। फिर सरकारी फंड्स से ही सड़क भी बनवा दी। नदी का रास्ता मुड़वा कर खाली हुई जमीन पर पार्किंग बनवा दी।

एनवायरमेंट जाये भाड़ में। चांडी साहब अब खुद भगवान् समान थे।

किसान बेचारे धरने पर बैठे। उनके अपने देवता उनके खिलाफ हो गए थे।

बहरहाल हंगामा मचना ही था। विपक्ष ने बवाल काट दिया। विधानसभा में भी , और कोर्ट में भी।

सरकार ने जांच बैठायी। जिला के कलेक्टर मिस अनुपमा ने जांच कर आरोपों बताते हुए रिपोर्ट दाखिल कर दी।

सरकार ने अधिग्रहण रद्द कर दिया।

चांडी साहब जो अब खुद देवता थे , इंद्र देवता के खिलाफ हाई कोर्ट चले गए।

चांडी साहब , विजयन सरकार में मंत्री , ने अपनी ही सरकार के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में केस कर दिया।

हाई कोर्ट ने पहली सुनवाई में मामला ख़ारिज कर दिया। चांडी से कहा की आप खुद सरकार हो , अपने खिलाफ केस नहीं कर सकते।

हर जगह विजयन सरकार की थू थू हो रही थी। देवताओं का मजाक उड़ रहा था। लेकिन विजयन मजबूर थे। ठगबंधन का धर्म भी निभाना था। एक पापी को देवता का रूप देकर रखना ही था।

दबाव रोज बढ़ता जा रहा था। जनता , विपक्ष , मीडिया का।

अब गठबंधन की एक अन्य पार्टी सीपीआई ने भी चांडी साहब के खिलाफ बिगुल फूँक दिया। उसने विजयन साहब को साफ़ कह दिया की अगर मंत्रिमंडल की बैठक में चांडी साहब रहेंगे तो उसका कोई मंत्री बैठक में शामिल नहीं होगा।

अपनी धमकी पर सीपीआई ने अमल करके भी दिखाया।

इतने दबाओ , थुक्का फजीहत , छीछालेदर के बाद पिछले साल नवंबर में विजयन साहब को अंत में चांडी का इस्तीफ़ा लेना ही पड़ा।

विजयन साहब के सामने ठगबंधन धर्म फिर मुंह बाए खड़ा था। एनसीपी का एक विधायक मिनिस्टर होना जरूरी था।

अब क्या हो ? कैसी विकट स्थिति।

खैर

उस महिला पत्रकार से संपर्क किया गया। कोर्ट में ऑलरेडी शशिधरन के खिलाफ केस चल रहा था। जाने कैसे कैसे करके कोर्ट में अर्जेंट सुनवाई करवाई गई।

महिला पत्रकार ने अदालत अपनी गवाही फिर से दी की वो निश्चय पूर्वक नहीं कह सकती की फोन पर उसने शशिधरन साहब की ही आवाज सुनी थी या किसी और की।

कोर्ट ने तत्काल फैसला देते हुए शशिधरन को बाइज्जत बरी किया। अदालत ने कहा ये दो लोगों के बीच निजी मामला था जिसमे किसी तीसरे पक्ष को कुछ कहने की जरूरत नहीं।

इस प्रकार शशिधरन साहब के खिलाफ मामला खत्म कराया गया और फिर पिछले महीने फरवरी में शशिधरन साहब ने विजयन साहब का दरबार फिर ज्वाइन कर लिया।

यही कहानी है इन पापियों की जो अपने आपको किसानो , मजदूरों , मुस्लिम , महिलाओं की आवाज समझते हैं , अपने आपको इन लोगों का हमदर्द बताते हैं। लेकिन असल राक्षस हैं।

लेकिन फिर प्रचार का जमाना है , यहाँ सच्चाई से ऊपर प्रचार चलता है। इसीलिए ऐसे रंगे सियार देवरूप में सत्ता पर काबिज हैं।