baba saheb

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बाबा साहेब डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर को लेकर मेरे मन पहले बहुत नफरत थी, कारण था ”आरक्षण” ! पर जब सोशल मीडिया ज्वाइन किया और बाबा साहेब को गहराई से पढ़ने का मौका मिला तो धीरे धीरे नफरत प्यार और सम्मान में बदलने लगा ! दरसल बाबा साहेब के बारे में उनकी असलियत हम लोगो में से बहुत कम लोग है जो जानते है ! सन 2005 में संस्कृत के मूर्धन्य विद्वान् चामू कृष्ण शास्त्री जी के अनुसार बाबा साहब अम्बेडकर भारत की आधिकारिक भाषा “संस्कृत” रखना चाहते थे उनका मानना था कि संस्कृत केवल उच्च तब के की भाषा नहीं है.balki भारतीय भाषाओं की मूल (जड़) संस्कृत ही है ! आपको ये सुनकर हैरानी होगी कि,अम्बेडकर सरनेम ‘अम्बावडेकर’ से बना है,जो की एक ब्राह्मण सरनेम है ! ये नाम उनके गाँव के नाम पर पड़ा जो की महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले मे है ! डॉ.अम्बेडकर के पिता पूरी तरह शाकाहारी थे.बाद के वर्षों में भी उनका पूरा परिवार शाकाहारी रहा.आज के परिवेश में जहाँ तथाकथित उच्चवर रहा.जहाँ तथाकथित उच्चवर्गीय लोग गौ-मांस के लिए उपवास कर रहे हैं,वहाँ अम्बेडकर अनुकरणीय हैं ! नेहरु अम्बेडकर को लोकसभा में आने से रोकना चाहते थे,तभी तो 1952 और 1954 दोनों चुनावों में उनके खिलाफ कांग्रेस ने कड़े प्रतिद्वंदी उतारे जिससे वे हार गए. किन्तु राज्य सभा में भी प्रवेश उन्हें जन संघ के माध्यम से मिला ! भीमराव अम्बेडकर की दूसरी पत्नी श्रीमती सविता अम्बेडकर सारस्वत ब्राह्मण थीं.अपने जीवन के उत्तरार्ध काल में एक ब्राह्मण महिला के साथ जीवन यापन करना,साफ़ संकेत है कि बाबा साहब ब्राह्मणों के विरोधी नहीं थे,वे विरोधी थे तो असमानता के.! केवल ब्राह्मणों और सवर्णों के संगठन के रूप में बदनाम किये जाने वाले आरएसएस और हिंदुत्व के खिलाफ कभी नहीं थे,वे वीर सावरकर की जाति व्यवस्था को ख़त्म करने की मुहिम को अपना समर्थन प्रदान किया.वे संघ की शाखाओं और शिविरों का भ्रमण भी करते रहे.! बाबा साहब अम्बेडकर मुस्लिम समुदाय पर ज्यादा भरोसा नहीं करते थे उन्होंने यहाँ तक कहा था कि इनकी मांगे बढती ही जा रही हैं और इसके लिए उन्होंने हिन्दुओ के उदाहरण हनुमान जी की पूँछ का उदाहरण दिया था ! अपनी पुस्तकों और लेखों में वे कई बार जिक्र करते रहे कि मुस्लिम समाज में कुरीतियाँ,हिन्दू समाज से कहीं ज्यादा है ! अनुच्क्षेद-370 की सबसे पहले आलोचना बाबा साहब ने ही की थी .कश्मीर मामले में वे नेहरु की राय का खुला विरोध करने वाले पहले व्यक्ति थे !
बाबा साहब साम्यवाद के धुर विरोधी थे,इसे वो स्वयं जीवन भर स्वीकारते रहे.उनके अनुसार साम्यवाद भारत की प्रगति में बाधक सिद्ध होगा ! डॉ.अम्बेडकर ने बहुत पहले ही नेहरु को चीन से सावधान रहने की सलाह दी थी.वे पंचशील और तिब्बत नीति से सहमत नहीं थे.कालांतर में चीन के प्रति उनकी आशंका सत्य साबित हुई ! 1913 में बडौदा के सायजी गायकवाड कालेज से छात्रवृत्ति पाने वाले बाबा अम्बेडकर जी ने न्यूयार्क स्थित कोलम्बिया कालेज का हॉस्टल सिर्फ इसलिए छोड़ दिया था क्योकि उसमे गौ मांस मिलता था और उन्होंने उसको खाने से किसी भी हाल में मना कर दिया था ! हैदराबाद के निजाम ने उनके आगे अपना खजाना खोल दिया था सिर्फ मतान्तर होने पर इस्लाम कबूल करने के लिए लेकिन बाबा भीमराव अम्बेडकर जी हिंदुत्व के ही एक अंग माने जाने वाले बौद्ध मत में गये और आजीवन उसी में रहे ! इतना ही नहीं उन्होंने अपने अन्य अनुयायी लोगों को भी साफ़ साफ़ कहा कि वो कुछ भी कर लेना लेकिन मुस्लमान मत बनना ये तथ्य हैदराबाद के लिए थे जब कईयों को लालच दे कर मतांतरित किया जा रहा था ! आज उन्ही बाबा भीमराव अम्बेडकर को उनके जन्मदिवस पर मैं बारम्बार नमन करता है और उनके उस सच को मित्रो के आगे लाने का संकल्प भी लेता है जो छिपा कर उस निष्पक्ष जीवन पर सवाल उठाने का मौका दे रहे हैं !
वोट बैंक की तुच्छ राजनीति से कहीं आगे और दूर बाबा अम्बेडकर जी के नाम को राजनीति में इस प्रकार से प्रयोग करने का विरोध भी मैं करता हूँ और सवाल करता हूँ उन झोलाछाप इतिहासकारों से कि उन्होंने ये सच क्यों नही रखा उस जनता के आगे जो उनकी भक्त होते हुए भी उनकी तमाम महानताओं से अभी तक परिचित नहीं हुई !

पर एक बात यहां और स्पष्ट करना चाहता हूँ, बाबा के अनुयाई जिस तरह से हमारे देवी देवताओं का अपमान कर रहे है उससे बाबा की इज्जत कम होगी, बढ़ेगी नहीं ! और हम ये जगह जगह जो बाबा भीमराव अम्बेडकर जी की मूर्तियां तोड़ी जा रही है न, ये सिर्फ और सिर्फ बाबावादी और हिंदूवादी, राष्ट्रवादियों को आपस में लड़ाने का कुत्सित प्रयास ”जय भीम-जय मीम” का नारा लगाने वालों का है ! अतः इन मीम से सावधान रहो भीम भाइयों ! क्योकि मीमों की नजर में आप सिर्फ और सिर्फ काफिर है !
बाबा भीमराव रामजी अम्बेडकर जी के जन्म दिवस पर सभी को बहुत बहुत शुभ कामनायें, आये बाबा को भीमटों के एकाधिकार से मुक्ति दिलाये ! जय जय श्री राम ! ! जय भीम जय भारत !