सुनिए साहेब!

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नेहरू ने केवल राज नहीं किया भारत पर, उसने 17 साल में एक नया भारत गढ़ दिया!
वह भारत जहां जो नेहरू कहे वही नीति, जो नेहरू चाहे वही धर्म और जो नेहरू सोचे वही इतिहास बन गया!

उसने एक नई तालीम, एक नया रिवाज और एक नई संस्कृति तक गढ़ दिया, जो हजारों साल के सांस्कृतिक विरासत को हाशिए पर ला खड़ा किया!

अकबर ने एक नई दीन की रचना की कोशिश की लेकिन वह केवल अपने दरबारियों तक इसे मनवाने में सफल नहीं हो पाया भारतवासी तो दूर की बात!

लेकिन #नेहरू ने अपने दीन को भारत में मनवा भी लिया और सारे धर्म के ऊपर भी रख दिया जिसे हम आप सब मानने को तैयार हैं या विवश है, वह दीन है #संविधान!

संविधान का आर्टिकल 26, 27, 28 और 29 ऐसे धर्म की स्थापना करता है जो सनातन (हिंदू) धर्म को लाचार और बेबस कर देता है!
आदिवासी और जनजातीय समुदाय की आड़ में आर्टिकल 29 बड़ी चालाकी से केवल इस्लाम और इसाईयत की रक्षा करता है!

आर्टिकल 29 (1) के अनुसार, अल्पसंख्यक समुदाय वह होगा, जिसकी अपनी भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा!
अब जरा ध्यान दें भारतीय मुसलमानों की लिपि, भाषा और संस्कृति “अरबी” है, जाहिर है यह उनकी नहीं बल्कि आयातित है!
भारतीय क्रिश्चियनों की लिपि, भाषा रोमन और संस्कृति ब्रिटिश है जो उनकी नहीं आयातित है!
फिर भी बेतहाशा मदरसा और पेंटाकोस्टल एसेंबलीज (मिशनरीज) भारत में फैले हैं!
अलीगढ़ “मुस्लिम” विश्वविद्यालय है! और उसके अपने नाम और गुणों पर संचालित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय जहां वामपंथ की आड़ में केवल गैर-हिंदुत्व योजनाएं बनाकर नई पीढ़ी के दिमाग में भरी जाती है।

नेहरू ने शिक्षण-प्रणाली, न्यायपालिका और संचार-तंत्र को अपनी सोच के अनुसार तैयार किया, इसका परिणाम हुआ कि लोग उसकी जबान बोलते हैं और उसी की संस्कृति को मानते हैं।
15 अगस्त 1946 को जब जिन्ना ने #डायरेक्ट_एक्शन की घोषणा की तो बंगाल के वे मुसलमान जिन्होंने मात्र पचास साल पहले इस्लाम कबूला था, अपने हिंदू पड़ोसियों को बेरहमी से काट रहे थे!
नेहरू समझ गया था कि यह कौम उसके बड़े काम की है!
उसने इस खूंखार आदम नस्ल को साधने का ऐसा मंत्र निकाला कि पचास साल तक उसका खानदान अक्षुण्ण इस देश पर राज किया!

उसकी बनाई मीडिया कभी भी अपराधिक कृत्य को अंजाम देनेवाले मुसलमानों को #मुसलमान नहीं कहती बल्कि उसे #विशेष_समुदाय का छद्म नाम देकर उसका बचाव करती है!

न्यायपालिका उस पर इतना नरम रहती है कि आधी रात को सर्वोच्च न्यायालय खोल देती है।

सामाजिक संगठन उस “विशेष समुदाय” की ढाल बन कर खड़े हो जाते हैं!

उसकी बनाई कार्य-संस्कृति का अंदाजा जरा लगाइए, एक अखलाक मारा जाए तो ये तमाम संस्थान देश को #हाइजैक कर लेते हैं, और अखलाक के परिवार को रातों रात करोड़पति बना देते हैं!

उसकी संस्कृति आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और करणी सेना जैसे संगठन को आतंकी और गुंडे कहकर कोहराम मचा देती है, तो #कैराना और #कासगंज में हत्या करनेवाले दंगाई को उसका मजहब तक नहीं बताती।
दंगाइयों को छोड़िए यह #नेहरूवियन_संस्कृति तो आतंकियों का धर्म तक छिपा लेती है!

आप बाहरी दुनिया के विरोधियों को साधने में शानदार हैं लेकिन भीतर के उपद्रवियों का साधने का साधन आपके पास नहीं है, क्योंकि जिस साधन से आप सत्ता चला रहे हो, वह तो उसी नेहरू का गढ़ा हुआ है!

इसलिए वर्षों के दमित जन-भावना को आपसे बड़ी उम्मीदें हैं, आप उनकी ताकत को संबल दीजिए, उन्हें लड़ने का जोश दिलाइए अन्यथा एक बार यदि इनका मनोबल गिर गया तो पता नहीं कितने सालों के बाद यह खड़ा होगा!
तब तक तो गंगा का कितना पानी बह चुका होगा!
(किंकर)