बाइबिल, नारी और विज्ञान

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चिता की प्रचण्ड ज्वाला से अचानक निकले एक क्रोधित शव ने अघोरी को पकड़ लिया और बोला- स्त्रियों की दुर्दशा पर मौन क्यों हो तुम? पुण्यभूमि भारत के गौरव-गान में नारियों की चीत्कार का स्वर दब जाता है और तुम्हारे पास भी कोई उत्तर नही?

अघोरी ने शांत स्वर में कहना शुरू किया- “स्त्री की पीड़ा को देखता हूँ और दुखी हूँ पर कोई समाधान की बात नही सुनता।”

-”भारत में नारीवाद की एक आंधी चल पड़ी है, यह आंधी चर्च के सहयोग से बड़ी हो रही है। इस्लाम और ईसाइयत वाली सरकारों ने हमें बताया कि महिलाओं का पहला विद्यालय सावित्री बाई फुले ने चलाया। यह जानना रोचक है कि अंग्रेजी दस्तावेजों के आधार पर ही धर्मपाल जी ने बताया कि अठारहवीं सदी में भारत के गुरुकुलों में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक थी।

वैसे अघोरी आज बाइबल के बारे में बात करने वाला है, वहीं से समाधान की ओर चलेंगे। बाइबल पढ़ने वाले देश के लोग ही ज्ञान विज्ञान का डंका पीटते रहते हैं अतः उनके विषय में चर्चा अवश्य होनी चाहिए। बाइबल कहता है कि महिलाओं को पुरुषों के बाद बनाया गया अतः उनमें आत्मा नही होती, तभी तो भारत की स्वतंत्रता के बाद तक अनेक पश्चिमी देशों में महिलाओं को मताधिकार नही दिया गया था। पुरुष के निर्माण के बाद गॉड ने उसकी पसलियों से नारी को बनाया, नारी स्वर्ग से मानव को निकाले जाने की दोषी है अतः उसे पीड़ित करना उचित है। चर्च और बाइबिल की शिक्षा का पालन ईसाइयों ने भरपूर किया और लाखों औरतों को डायन बताकर मार डाला।

प्रमाण सहित बताता हूँ की विज्ञान कहता है पहले नारी बनी, उसके बाद पुरूष बना। जैव रसायनों के चरणबद्ध निर्माण प्रक्रिया व प्रभाव(Bioassay) को यदि हम देखें तो इससे एक बड़ी समस्या का भी समाधान मिलेगा। नारी सुरक्षा और सम्मान से जूझते विश्व को भी मार्ग मिलेगा।

बच्चे का शरीर स्त्री या पुरुष के रूप में ढलने के लिए रासायनिक तंत्र पर निर्भर है जिसे हॉर्मोन कहते हैं। लैंगिक गुणों को तय करने वाले ये सभी हॉर्मोन कोलेस्ट्रॉल से बनते हैं। नीचे दिए चित्र से भी यह स्पष्ट है इन हॉर्मोन में जो पहला रसायन बनता है वह प्रोजेस्टेरोन है, इसे मातृत्व का रसायन कहते हैं जो गर्भावस्था में शिशु और माता का पालन करता है। प्रोजेस्टेरोन में रासायनिक परिवर्तन से टेस्टोस्टेरोन बनता है जो पुरुषत्व का विकास करता है, तभी माता महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके बिना पुरुष का अस्तित्व नही है, महत्व नही है। माता मूल है, प्रोजेस्टेरोन मूल है। माता की करुणा, स्नेह और वात्सल्य का रसायन है प्रोजेस्टेरोन।

प्रोजेस्टेरोन से टेस्टोस्टेरोन बनने के बाद की प्रक्रिया में एस्ट्रोजन बनता है जो नारीत्व का विकास करता है। नारी के शारीरिक विकास और सौंदर्य का गुण एस्ट्रोजन से आता है जो इस जैव-रासायनिक श्रृंखला के अंत में बनने वाला हॉर्मोन है।

पश्चिम के बाजारवाद ने मातृत्व को गौण करके नारीवाद को अनावश्यक रूप से उभारा, एस्ट्रोजन के दिए आकार प्रकार को चित्रों में उभार कर बताया कि तुम मनुष्य नही, केवल कुछ अंगविशेष हो। पुरुषों को भी बताया गया कि देखो नारी क्या है, और स्त्री-पुरुष के मध्य एक अंतहीन युद्ध शुरू करा दिया।

“ पुरुष को समझना है कि टेस्टोस्टेरोन के बाद एस्ट्रोजन बनता है अतः पुरुष नारी की सुरक्षा और सम्मान के लिए सजग रहे और नारी को समझना है कि मातृत्व ही उसका मूल स्वरूप है, उसका नाश करके नारीत्व नहीं बचाया जा सकता है। इसका यह अर्थ कदापि नही की मैं नारी स्वतंत्रता का विरोधी हूँ, मैं बाहरी आवरण के गुण को भूलकर आंतरिक गुणों पर केंद्रित होने से ही समाधान देख रहा हूँ।”

शव ने कहा- चलते चलते लोगों को इतना तो समझा दो की गॉड बड़ा मूर्ख था जिसने नारी को इतना अवैज्ञानिक रूप दे दिया। तभी तो मैं कहता हूँ गॉड कभी ईश्वर नही हो सकता।

#अघोरी की विज्ञान कक्षा।

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बाइबिल, नारी और विज्ञानचिता की प्रचण्ड ज्वाला से अचानक निकले एक क्रोधित शव ने अघोरी को पकड़ लिया और बोला- स्त्रियों की…

Opslået af Kunwar Digvijay Singh på 10. marts 2018