नरेंद्र मोदी जी की सरकार

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जब से यह नरेंद्र मोदी जी की सरकार बनी है तभी से उनके समर्थकों के एक बड़े वर्ग को इस बात पर रोष रहा है की स्कूलों और विश्विद्यालयों में पढ़ाये जाने वाले गलत इतिहास को ठीक करने के लिये कोई काम नही किया है। मैं तब यही कहता था कि यह कार्य इतना आसान नही है जितना लोग समझते है और इसमे लगने वाला समय भी लोगो की अपेक्षायों के अनकूल नही हो सकता है।

आज का मेरा लेख विशेष रूप से उन राष्ट्रवादी और हिंदुत्वादी मित्रो को समर्पित है जो बात बात पर नेतृत्व के प्रति अविश्वास और खुद के अहंकार से त्रस्त रहते है।

कल यह समाचार आया है की पिछले वर्ष जनवरी में दिल्ली के एक सफेद बंगले में भारत के कुछ विद्वानों/इतिहासकारों की बैठक हुई थी और उस बैठक में इस बात की चर्चा हुई थी की कैसे प्रमाणिक रूप से भारत के इतिहास को दोबारा से लिखा जाये।

उस बैठक में हुई चर्चा का परिणाम यह हुआ था की इस संदर्भ में आज से 6 माह पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने शांतिपूर्वक विद्वानों/इतिहासकारों की 14 सदस्यीय एक कमेटी का गठन किया था जो इस विषय पर अध्ययन करके अपनी संतुति देगी। यह कार्य इतनी गोपनीयता से किया गया था कि इस कमेटी के अस्तित्व के बारे में स्वयं सरकार के अंदर बहुत कम लोगो को पता था। इस कमेटी के अस्तित्व के बारे में तब जाकर लोगी को जानकारी मिली है जब रायटर में रूपम जैन और टॉम लससेटर के एक लेख ने इस पर प्रकाश डाला है।

लेखकों द्वारा कमेटी के मिनट्स के अध्यन करने व इस विषय के बारे में कमेटी के सदस्यों से हुई वार्ता के आधार पर यह बात सामने आयी है कि मोदी सरकार द्वारा सृजित इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य है कि अब तक पुरातत्व की खुदाई में मिले साक्ष्यों और डीएनए के आधार यह प्रमाणिक रूप से सिद्ध करना की, भारत की इस भूमि पर हज़ारों वर्ष पूर्व निवास करने वाले प्रथम निवासी ही आज के हिन्दुओ के पूर्वज थे और भारत के प्राचीन धर्मग्रन्थ और शास्त्र पौराणिक न हो कर सत्य और भारत के प्राचीन इतिहास का हिस्सा है।

कमेटी के सदस्यों और सरकार के मंत्रियों से हुई वार्ता में जो बात स्पष्टता से सामने आयी है वह यह है की नरेंद्र मोदी जी की सरकार की महत्वकांशा राजनैतिक पटल से आगे जाकर, राष्ट्रीय व्यष्टित्व(आइडेंटिटी) को अपने उस दर्शन से मिलाना है जो दृढ़ता से कहता है की भारत एक राष्ट्र है और वह हिन्दुओ का राष्ट्र है। सरकार का उद्देश्य, ब्रिटिश राज के समय से चल रहे उस बहुसांस्कृतिक कथानक को चुनौती देना है जो कहती आरही है कि वर्तमान का भारत 3000-4000 वर्ष पूर्व सेंट्रल एशिया से आये लोगो(माइग्रेशन), सेंट्रल एशिया और मध्य पूर्व से आये आक्रमणकारियों के अतिक्रमण(आक्रमण) और विजेताओं द्वारा धर्मांतरण के कारण बना है। ब्रिटिश राज ने भारत पर राज्य करने और भारतीय संस्कृति को मिटाने के लिये इस कथानक को जनसांख्यिकी(डेमोग्राफी) के आधार पर प्रतिपादित किया गया था क्योंकि यहां जहां हिन्दू बहुसंख्यक थे वहीं उसकी जनसंख्या में मुस्लिम व अन्य धर्मों के लोग भी थे।

कमेटी के अध्यक्ष के.एन. दीक्षित है, जिन्होंने बताया है कि सरकार ने कमेटी से एक तथ्यपरक रिपोर्ट की अपेक्षा की है जिससे सरकार को प्राचीन इतिहास के कुछ मुद्दों को दोबारा से लिखने में मदद मिल सके। इस कमेटी को गठित करने वाले सांस्कृतिक मंत्री महेश शर्मा जी ने बताया है कि इस गठित की गयी कमेटी द्वारा किया गया कार्य, सरकार की उस परियोजना का एक हिस्सा है जिसमे वृहत रूप से भारतीय इतिहास को फिर से लिखना है।

सरकार का यह मानना है की अब समय आगया है की जब भारत के प्राचीन गौरव को फिर से स्थापित किया जाय और उसके प्राचीन ग्रंथों को जिन्हें पाश्चात्य के लोगो ने कपोल कल्पना बना रक्खा है उसे इस झूठ से निकाल कर एक सत्य के रूप प्रतिष्ठित किया जाय। इस कमेटी की जो रिपोर्ट आयेगी उसको भारतीय विद्यालयों की किताबो और पाठ्क्रम में सम्मलित किया जायेगा।