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यूरिन इंफेक्शन से बचना है तो अपनाएं ये घरेलू उपाय
घरेलू नुस्‍ख By : findinall , Onlymyhealth Editorial Team / Date : Jan 05, 2019

खूब पानी पियें
यूरिन इंफेक्शन में मूत्राशय में बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। ज्यादा पानी पीने से ज्यादा मूत्र बनता है और ये बैक्टीरिया यूरिन के साथ-साथ बाहर निकल जाते हैं। पानी ज्यादा पीने से पेशाब के दौरान होने वाली जलन में भी आराम मिलता है।

खट्टे फल खाएं
खट्टे फलों में साइट्रिक एसिड होता है जिससे शरीर में मौजूद बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। इसलिए यूरिन इंफेक्शन को दूर करने के लिए खट्टे फलों का सेवन करना अच्छा होता है। आप चाहें तो खट्टे फलों का जूस भी पी सकती हैं।

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सेब का सिरका
एप्पल साइडर विनेगर भी यूरिन इंफेक्शन को ठीक करता है। इसके लिए दो चम्मच सेब का सिरका और एक चम्मच शहद को एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर पियें। इससे शरीर के बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं और यूरिन के सहारे बाहर निकल जाते हैं।

इलायची
इलायची में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं इसलिए ये यूरिन इंफेक्शन को ठीक करती है। इसके लिए इलायची के दानों को सोंठ के साथ पीसकर चूर्ण बना लें और अनार के रस में मिलाएं। इसके बाद इसमें थोड़ा सा सेंधा नमक डालकर पियें। इंफेक्शन दो दिन में खत्म हो जाएगा।

बचने के उपाय
यूरिन इंफेक्शन होने न हो, इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे तेज यूरिन आने पर भी उसे रोकना नहीं चाहिए, पानी खूब पीना चाहिए, बाथरूम को हमेशा साफ रखना चाहिए और पीरियड्स के दौरान सैनिटरी पैड बदलते रहना चाहिए।

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पेचिश या पतले दस्त को तुरंत ठीक करते हैं ये 5 उपाय, घर पर करें इलाज

पेचिश में पाएं राहत
पेचिश (लूज मोशन) की समस्या में बार-बार पतले दस्त होते हैं। अक्सर खान-पान की गड़बड़ी या अपच के कारण ये समस्या होती है। पेचिश के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। कई बार पेचिश के साथ-साथ मल में खून और म्यूकस भी आता है, जो खतरनाक संकेत हो सकता है। इसलिए इसे तुरंत रोकना बहुत जरूरी है। आयुर्वेद में पेचिश की समस्या के लिए कई आसान उपचार बताए गए हैं, जो दस्त में तुरंत राहत दिलाते हैं।

एक ग्लास छाछ पिएं
पेचिश होने पर बार-बार पतली दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसलिए पेचिश होने पर एक ग्लास छाछ में 4 चुटकी सेंधा नमक और दो चुटकी जीरा पाउडर डालकर पी लें। यह पेट के लिए अनुकूल बैक्टीरिया विकसित करने में मदद करता है। वैकल्पिक रूप से, आप भी दही भी खा सकते है। छाछ और दही दोनों में अच्छे बैक्टीरिया होते हैं। जो पेट में एसिटिक एसिड का उत्‍पादन कर हानिकारक बैक्टीरिया को नष्‍ट करते हैं। इससे पेचिश तुरंत बंद हो जाएगी और शरीर भी हाइड्रेट रहेगा। पेचिश में लापरवाही बरतने पर पानी की कमी कई बार आपको डिहाइड्रेशन का शिकार बना सकती है। डिहाइड्रेशन कई बार जानलेवा भी हो सकता है।

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केला खाएं
केला एनर्जी का सबसे अच्छा स्रोत है। इसके साथ ही ये पेट की समस्याओं में भी फायदेमंद है। पेचिश होने पर तुरंत 2-3 केला खाएं। केले में मौजूद पोटैशियम, जिंक और मैग्नीशियम पेट की सभी समस्याओं में फायदेमंद होते हैं। केला मल को बांधता है, जिससे पतले दस्त आसानी से बंद हो जाते हैं।

तरल पदार्थ ज्यादा लें
पेचिश होने पर आपको भारी खाना खाने से बचना चाहिए और तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करना चाहिए। पानी, नारियल पानी, लस्सी, दही, और नींबू पानी लेना पेचिश में फायदेमंद होता है। इसका कारण यह है कि पेचिश के कारण शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर कमजोर होने लगता है और अंगों को काम करने में मुश्किल आती है। छोटे बच्चों को अगर पेचिश हो तो नमक और चीनी पानी का घोल डिहाइड्रेशन के इलाज में उपयोगी है।

ईसबगोल की भूसी
ईसबगोल को आयुर्वेद में पेचिश का रामबाण इलाज माना जाता है। इसके प्रयोग के लिए एक कटोरी दही में दो चम्मम ईसबगोल की भूसी, 2 चुटकी काला नमक और 1 चुटकी पिसा जीरा मिलाकर पिएं। इसके अलावा ईसबगोल की भूसी को खोए की मिठाई या किसी भी गीले आहार के साथ मिलाकर खा सकते हैं। खाने के कुछ ही देर में ईसबगोल अपना कमाल दिखाता है और आपकी पेचिश बंद हो जाती है।

बेल का शर्बत और आम का पना
गर्मी के दिनों में पेचिश की समस्या होने पर डिहाइड्रेशन का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में पेचिश में अगर आप बेल का जूस या आम का पना पीते हैं, तो आपको तुरंत राहत मिलती है। बेल का फल पेट के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा आम के पने में भी पुदीना, जीरा, काला नमक आदि तत्व फायदेमंद होते हैं इसलिए पेचिश में आराम मिलता है।

मसूड़ों का सूजन और दर्द को कम करने के 5 घरेलू उपचार, तुरंत मिलेगा आराम

मसूड़ों की सूजन
मसूड़ों की सूजन एक आम समस्या है। मुंह के खराब स्वास्थ्य के कारण मसूड़ों में सूजन आ जाती है। मसूड़ों की सूजन के अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे कि मसूड़ों की ऐंठन, धूम्रपान, दांतों के बीच अधिक जगह, दांत और मसूड़े, एलर्जी आदि इसके कई कारण हैं। इसके अलावा, बहुत अधिक धूम्रपान करने से मसूड़ों की समस्या हो सकती है। तो आप कुछ घरेलू उपचार का उपयोग कर सकते हैं और मसूड़ों की सूजन को कम कर सकते हैं।

लौंग और लौंग का तेल:
लौंग के तेल में क्रिनोलिन होता है जो एक एंटीऑक्सीडेंट है, इसलिए लौंग का तेल मसूड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है।

कैसे इस्तेमाल करे: लौंग के तेल में 2-3 छोटे काली मिर्च पाउडर मिलाएं और मसूड़ों पर लगाएं। इस उपाय को आप दिन में 2-3 बार कर सकते हैं।

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हल्दी
हल्दी में करक्‍यूमिन होता है, जो एक एंटीऑक्सीडेंट है और इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं। इसीलिए यह मसूड़ों की सूजन को कम करता है।

कैसे इस्तेमाल करे : एक चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं और इसे मसूड़ों पर लगाएं और 5 मिनट बाद इसे रगड़ें। इसे दिन में दो बार करें।

खारा पानी
दांतों और मुंह की समस्याओं के लिए नमक सबसे प्रभावी उपाय है। नमक रोगाणुओं को समाप्त करता है और सूजन को कम करता है, इसलिए यह मसूड़ों की सूजन को दूर करने के लिए उपयोगी है।

कैसे इस्तेमाल करे : आधा गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच नमक डालें और इस पानी से दांतों को कुल्ला करें। आप इसे दिन में 2-3 बार कर सकते हैं।

बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडा में प्राकृतिक रूप से बैक्टीरिया को खत्म करने की शक्ति होती है। यह मुंह में बैक्टीरिया के प्रभाव को खत्म करता है।

कैसे इस्तेमाल करे : बेकिंग सोडा को मसूड़ों पर पेस्ट की तरह लगाएं। बेकिंग सोडा में हल्दी मिलाकर पेस्ट की तरह मसूड़ों पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

नींबू
नींबू के रस में पर्याप्त मात्रा में पोटेशियम, विटामिन सी, विटामिन ए, पोटेशियम, कैल्शियम, साथ ही साथ विरोधी भड़काऊ और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। नींबू मसूड़ों की सूजन को कम करने के लिए उपयोगी है।

कैसे इस्तेमाल करे: गर्म पानी में एक नींबू निचोड़ें और इससे कुल्ला करें। आप इसे दिन में 2-3 बार भी कर सकते हैं।

सफर में जाने से पहले पीएं प्याज का रस, कभी नहीं होगी उल्टी और सिर दर्द

उल्टी रोकने का रामबाण नुस्खा
अगर किसी को सफर के दौरान उल्टियां, जी मचलना या सिर दर्द की समस्या होती है तो उसके लिए सफर करना एक जेल बन जाता है। वह व्यक्ति सोचता है कि जितनी जल्दी हो वह अपनी मंजिल तक पहुंचे। ऐसे लोग न तो सफर का मजा ले पाता है और न ही दोस्तों के साथ इन्ज्वॉय कर पाते हैं। अगर आप भी घूमने के बहुत शौकीन हैं लेकिन उल्टी की वजह से जाना अवॉइड करते हैं तो अब ऐसा नहीं करना पड़ेगा। आज हम आपको उल्टी रोकने का एक ऐसा नुस्खा बता रहे हैं जिसे जानने के बाद आप वाकई बहुत खुश होंगे।

प्‍याज का रस
सफर में होने वाली उल्टियों से बचने के लिए सफर पर जाने से आधे घंटे पहले 1 चम्‍मच प्‍याज के रस में 1 चम्‍मच अदरक के रस को मिलाकर लेना चाहिए। इससे आपको सफर के दौरान उल्टियां नहीं आयेगी। लेकिन अगर सफर लंबा है तो यह रस साथ में बनाकर भी रख सकते हैं।

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लौंग का जादू
सफर के दौरान जैसे ही आपको लगे कि आपका जी मिचलाने लगा है तो आपको तुंरत ही अपने मुंह में लौंग रखकर चूसनी चाहिए। ऐसा करने से आपका जी मिचलाना बंद हो जायेगा।

इसे भी पढ़ें : लौंग के फायदे

एंटीमेटिक गुण वाली अदरक
अदरक में एंटीमेटिक गुण होते हैं। एंटीमेटिक एक ऐसा पदार्थ है जो उल्‍टी और चक्कर आने से बचाता है। सफर के दौरान जी मिचलाने पर अदरक की गोलियां या फिर अदरक की चाय का सेवन करें। इससे आपको उल्टी नहीं होगी। अगर हो सके तो अदरक अपने साथ ही रखे। अगर घबराहट हो तो इसे थोड़ा-थोड़ा खाते रहे।

बेहद मददगार पुदीना
पुदीना आपके पेट की मांसपेशियों को आराम देता है और इस तरह चक्कर आने और यात्रा के दौरान तबीयत के खराब लगने की स्थिति को भी समाप्त करता है। पुदीने के तेल भी उल्टियों को रोकने में बेहद मददगार है। इसके लिए रुमाल पर पुदीने के तेल की कुछ बूंदे छिड़के और सफर के दौरान उसे सूंघते रहे। सूखे पुदीने के पत्तों को गर्म पानी में मिलाकर खुद के लिए पुदीने की चाय बनाएं। इस मिश्रण को अच्छे से मिलाएं और इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं। कहीं निकलने से पहले इस मिश्रण को पियें। इसके अलावा इससे आपको काफी आराम मिलेगा।

छोटे से नींबू के कमाल
नींबू एक असरदार औषधि है, इसमें मौजूद सिट्रिक एसिड उल्‍टी और जी मिचलाने की समस्‍या को रोकते हैं। एक छोटे कप में गर्म पानी लें और उसमें 1 नींबू का रस तथा थोड़ा सा नमक मिलाएं। इसे अच्छे से मिलाकर पियें। या आप नींबू के रस को गर्म पानी में मिलाकर तथा शहद डालकर भी पी सकते हैं। यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों को दूर करने का यह एक कारगर इलाज है।

न्यूमोनिया को ठीक करने के 5 घरेलू उपचार, जानें

न्यूमोनिया
न्यूमोनिया एक खतरनाक बीमारी है और अगर इससे तुरंत ना लड़ा जाए तो, यह फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आपको या आपके परिवार में किसी को न्यूमोनिया है तो आप नीचे दिये गए कुछ आसान से घरेलू नुस्‍खों का प्रयोग कर सकते हैं। न्यूमोनिया फेफड़ों में असाधारण तौर पर सूजन आने के कारण होता है। इसमें फेफड़ों में पानी भी भर जाता है। आमतौर पर न्यूमोनिया कई कारणों से होता है जिनमें प्रमुख हैं बैक्टीरिया, वायरस, फंगी या अन्य कुछ परजीवी। इनके अलावा कुछ रसायनों और फेफड़ों पर लगी चोट के कारण भी न्यूमोनिया होता है।

लहसुन
लहसुन कुदरती रूप से बैक्‍टीरिया से लड़ने की क्षमता रखता है। यह वायरस और फंगस से भी शरीर की रक्षा करता है। लहसुन में शरीर का तापमान कम करने और छाती व फेफड़ों में जमा बलगम को बाहर निकालने की क्षमता होती है।

कैसे करे उपयोग
एक कप दूध में चार कप पानी डालें और इसमें आधा चम्‍मच पिसा हुआ लहसुन डाल दें। इसे तब तक उबालें जब तक मिश्रण का एक चौथाई न रह जाए। इस मिश्रण को दिन में तीन बार पियें।
पिसे हुए लहसुन की कलियों में समान मात्रा में ताजा नींबू का रस और शहद मिला लें। दिन में तीन-चार बार, दो से तीन चम्‍मच इस मिश्रण का सेवन करें।
छाती पर लहसुन का रस या पेस्‍ट मलने से भी आराम होता है।
अदरक की चाय पीने से भी लाभ होता है।

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मेथी के बीज
मेथी के बीज म्‍यूको‍लिटिक गुण होते हैं, जो छाती में जमने वाली बलगम को पतला करने में मदद करते हैं। इसलिए मेथी का सेवन करने से बंद छाती खुल जाती है। मेथी के सेवन से पसीना आता है, जिससे बुखार कम होता है और शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं।

कैसे करें उपयोग
दो कप पानी में एक चम्‍मच मेथी के दाने डालकर उनकी चाय बना लें। इस चाय को छानकर दिन में चार बार पियें। स्‍वाद में इजाफा करने के लिए इसमें नींबू का रस मिलाया जा सकता है। जैसे जैसे आपको अपनी सेहत में सुधार दिखने लगे आप इसकी मात्रा कम कर सकते हैं।
एक कप पानी में मेथी के दाने, एक चम्‍मच अदरक का पेस्‍ट, एक लहसुन की कली पिसी हुई, और थोड़ी सी काली मिर्च डालकर पांच मिनट तक उबालें। इसे छान लें और फिर इसमें आधा चम्‍मच नींबू का रस डाल दें। आप चाहें तो इसमें शहद भी मिला सकते हैं। दिन में तीन चार बार इसका सेवन कीजिये। आराम होगा।

सब्जियों का जूस पियें
गाजर का ताजा जूस, पालक का रस, चकुंदर का जूस, खीरे का जूस और अन्‍य सब्जियों के जूस हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। और न्यूमोनिया के दौरान तो इनके लाभ और बढ़ जाते हैं। इनसे इम्‍यूनिटी बढ़ती है, कफ कम होता है और शरीर से विषैले पदार्थ कम हो जाते हैं। इनमें फास्‍फोरस की मात्रा अधिक होती है और साथ ही ये पचने में भी आसान होते हैं।

कैसे करें उपयोग
पालक और गाजर के जूस को 2:3 में मिलाकर आधा लीटर जूस बना लें। रोज इसका सेवन करें।
आप चाहें तो रोजाना एक कप चकुंदर के जूस का भी सेवन कर सकते हैं।

हल्‍दी
हल्‍दी भी सांस की तकलीफ के लिए मददगार होती है। यह कफ को कम करती है। इसके साथ ही इसमें एंटीवायरल और एंटी बैक्‍टीरियल गुण होते हैं जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।

कैसे करें उपयोग
गुनगुने सरसों के तेल में हल्‍दी का पाउडर मिलायें और इससे अपनी छाती पर मसाज करें।
दिन में दो तीन बार गर्म दूध में हल्‍दी पाउडर डालकर उसका सेवन करें।
आधा चम्‍मच हल्‍दी और चौथाई चम्‍मच काली मिर्च पाउडर को एक गिलास गुनगुने पानी में मिला लें। दिन में एक बार इसका सेवन करें ।

तुलसी और काली मिर्च
ये दोनों ही तत्‍व हमारे फेफड़ों के लिए फायदेमंद होते हैं। और ये कुदरती रूप से निमोनिया को दूर करने में मददगार है।

कैसे करें उपयोग
तुलसी के पत्‍तों का रस लेकर उसमें ताजी पिसी काली मिर्च मिलाइये और हर छह घंटे बाद इसका सेवन कीजिये।
इसके साथ ही खांसी की कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्‍टर से सलाह जरूर लें। खांसी कई मायनों में आपके लिए फायदेमेंद हो सकती है क्‍योंकि यह शरीर से कफ को बाहर निकालती है।

अर्थराइटिस के इलाज के लिए कौन-से हर्ब्स का सेवन करें, जानें यहां

अर्थराइटिस के इलाज
अगर आप किसी भी तरह के अर्थराइटिस से ग्रस्‍त हैं तो ठंड के मौसम में होने वाला अर्थराइटिस का दर्द असहनीय हो जाता है। कई तरह के अर्थराइटिस है, जैसे – ऑस्टियो अर्थराइटिस, रूमेटॉइड अर्थराइटिस, सोराइटिक अर्थराइटिस, पोलिमायल्गिया रूमेटिका, एन्‍कायलॉजिंग स्पोंडिलाइटिस, थ्रोएक्टिव अर्थराइटिस, गाउट, सिउडोगाउट, पोलिमायोसाइटिस आदि। लेकिन सबसे अधिक दर्द रूमेटाइड और ऑस्टियो अर्थराइटिस में होता है।

तुलसी के पत्ते
वैसे तो तुलसी के पत्तों के फायदों की फेहरिस्त बहुत लंबी है लेकिन यहां हम अर्थराइटिस के लिए इसके फायदों की बात कर रहे हैं। तुलसी में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो अर्थराइटिस में होने वाले दर्द को दूर करते हैं। इसके लिए तुलसी के पत्तों को उबालें। भाप उठने दें। प्रभावी अंग पर यह भाप पड़ने दें। बाद में इसका पानी जब सहन करने योग्य गर्म रह जाए तो इससे प्रभावी अंग की सिकाई करें। धोयें। आराम मिलेगा।

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सौंठ है असरदार
सौंठ एक बहुत उपयोगी घरेलू औषधि है। दरअसल सौंठ अदरक का ही एक रूप है, अदरक को सुखाकर सौंठ बनाई जाती है। सौंठ का सेवन करने से गठिया के रोग में आराम मिलता है, इसे आप किसी भी रूप में पकाकर या किसी चीज में मिलाकर खा सकते हैं। ये थोड़ी तीखी होती है लेकिन अर्थराइटिस के मरीजों को इसके नियमित सेवन से काफी लाभ मिलता है।

लहसुन के फायदे
गठिया के रोग में लहसुन बेहद लाभकारी होता है। इसके सेवन से गठिया के रोग में आराम मिलता है। वैसे अगर इसे खाना पसंद न हो तो इसमें सेंधा नमक, जीरा, हींग, पीपल, काली मिर्च और सौंठ की सभी की 2-2 ग्राम मात्रा लेकर अच्‍छे से पीस लें। इस पेस्‍ट को अरंडी के तेल में भून लें और बॉटल में भ लें। दर्द होने पर लगा लें। आराम मिलेगा। लहसुन की पांच कलियां मामूली कूटकर दूध में उबालें। इसकी दो खुराक प्रतिदिन लेने से गठिया रोग का प्रभाव नहीं रहता।

ऐलोवेरा और अर्थराइटिस
गांव की पथरीली जमीन में उगने वाला या फिर घर की छत पर लटाकाया जाने वाला ऐलोवेरा आज आज कई औषधियों में इस्तेमाल किया जा रहा है। अर्थराइटिस में भी इसका इस्तेमाल राहत देता है। एलोविरा के पत्‍ते को काटकर उसका जेल दर्द होने वाली जगह पर लगाएं। इससे काफी राहत मिलेगी।

दांतों की कैविटी से छुटकारा दिलाते हैं ये 5 घरेलू उपचार, दर्द भी होता है दूर

कैविटी से छुटकारा पाने के उपाय
दांतों में छेद होने को वैज्ञानिक भाषा में दन्त क्षय या कैविटी कहते है। मुंह में मौजूद एसिड के कारण दांतों के इनेमल खोखले होने लगते हैं जिसके कारण कैविटी का निर्माण होता है। मुंह में मौजूद बैक्‍टीरिया (लार, खाद्य कणों एवं अन्य पदार्थों के साथ) दांतों कि सतह पर जमा होने लगते हैं जिसे प्लॉक कहा जाता है। प्‍लॉक में मौजूद बैक्‍टीरिया आपके खाने में मौजूद शुगर एवं कार्बोहाइडेट को अम्ल में परिवर्तित कर देता है इसी अम्ल के कारण दांत खोखले होने लगते हैं, फलत: कैविटी का निर्माण होता है। लेकिन कुछ घरेलू उपायों को अपनाकर दांतों में मजबूती बनाने के साथ प्राकृतिक रूप से कैविटी से लड़ा जा सकता है।

लौंग
लौंग कैविटी के साथ-साथ किसी भी प्रकार की दांतों से जुडी समस्‍याओं के लिए रामबाण होता है। एंटी-इंफ्लेमेंटरी, एनाल्‍जेसिक और एंटी-बैक्‍ट‍ीरियल गुणों के कारण लौंग दर्द को कम करने और कैविटी को फैलने से रोकता है। समस्‍या होने पर 1/4 चम्‍मच तिल के तेल में 2 से 3 बूंदें लौंग के तेल की मिलाकर लें। इस मिश्रण को रात को सोने से पहले कॉटन बॉल में लेकर प्रभावित दांत में लगाये।

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नमक
नमक में मौजूद एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुणों के कारण यह कैविटी के इलाज के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है। यह दर्द और सूजन को कम करने, किसी भी प्रकार के संक्रमण और मुंह में बैक्‍टीरिया की वृद्धि को रोकने में मदद करता है। इसके लिए एक चम्‍मच नमक को गर्म पानी में मिला लें। फिर इस पानी को मुंह में कुल्‍ला करें। समस्‍या के दूर होने तक इस उपाय को दिन में तीन बार करें। इसके अलावा, आधा चम्‍मच नमक, थोड़ा सा सरसों का तेल और नींबू का रस मिलाकर पेस्‍ट बना लें। इस पेस्‍ट से कुछ मिनटों तक मसूड़ों पर मसाज करें। बैक्‍टीरिया को मारने के लिए इस उपाय को कुछ दिन तक दिन में दो बार करें।

ऑयल पुलिंग
ऑयल पुलिंग बहुत ही पुराना नुस्‍खा है जो कैविटी को कम करने के साथ-साथ मसूढ़ों से खून बहना और सांस की बदबू को भी दूर करता है। साथ ही यह दंत समस्याओं के विभिन्न प्रकारों के लिए जिम्मेदार हानिकारक बैक्‍टीरिया को मुंह से साफ करने में मदद करता है। इसके लिए तिल के तेल की एक चम्‍मच को मुंह में रखें। फिर इससे 20 मिनट तक मुंह में रखकर थूक दें। लेकिन इसे निगलने से बचें। फिर अपने मुंह को गुनगुने पानी से धो लें। रोगाणुरोधी लाभ पाने के लिए नमक के पानी का प्रयोग करें। फिर हमेशा की तरह अपने दांतों को ब्रश करें। इस उपाय को रोजाना सुबह खाली पेट करें। यह उपाय सूरजमुखी या नारियल के तेल के साथ भी किया जा सकता है।

लहसुन
एंटी बैक्‍टीरियल के साथ-साथ एंटीबायोटिग गुणों से समृद्ध होने के कारण, लहसुन दांतों के टूटने और कैविटी की समस्‍या को दूर करने में मदद करता है। यह दर्द से राहत देने और स्‍वस्‍थ मसूड़ों और दांतों के लिए भी अच्‍छा होता है। 3 से 4 लहसुन की कली को कुचलकर और 1/4 चम्‍मच सेंधा नमक मिलाकर पेस्ट बना लें। फिर इसे संक्रमित दांत पर लगाकर 10 के लिए छोड़ दें। कैविटी को कम करने के लिए इस उपाय को कुछ दिनों के लिए दिन में दो बार करें।

मुलेठी
अमेरिकन केमिकल सोसायटी के जर्नल ऑफ नेचुरल प्रोडक्ट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मुलेठी की जड़ दांतों को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करती है। मुलेठी में मौजूद एंटी-बैक्‍टीरियल गुण बैक्‍टीरिया के कारण होने वाली कैविटी के विकास को रोकने में मदद करता है। इसके अलावा यह जडी-बूटी प्‍लॉक को कम करने में भी मदद करती है। नियमित रूप से दांतों में ब्रश करने के लिए मुलेठी की जड़ के पाउडर का प्रयोग करें। इसके अलावा आप टूशब्रश करने के लिए मुलेठी की स्‍टीक का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

हल्दी
आयुर्वेद में, हल्दी को कैविटी दर्द से राहत प्रदान करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसमें मौजूद एंटी-बैक्‍टीरियल गुणों के साथ एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण मसूढ़ों को स्‍वस्‍थ रखने के साथ बैक्‍टीरियल संक्रमण के कारण दांतों के गिरने की समस्‍या को भी रोकता है। प्रभावित दांत पर थोड़ी सा हल्‍दी पाउडर लगाकर इसे कुछ मिनटों के लिए छोड़ दें। फिर गुनगुने पानी से अच्‍छे से कुल्‍ला कर लें।

नीम
नीम भी कैविटी के इलाज के लिए एक अन्‍य लोकप्रिय उपाय है। इसकी एंटी-बैक्‍टीरियल गुण बैक्‍ट‍ीरिया के कारण होने वाली कैविटी को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा यह दांतों और मसूड़ों को स्‍वस्‍थ और मजबूत बनाने में भी मदद करता है। दांतों और मसूड़ों पर नीम के पत्तों के रस रगड़ें, कुछ मिनट के लिए छोड़ दें और फिर गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। इस उपाय को दिन में एक या दो बार करें। इसके अलावा आप नीम की स्टिक का इस्‍तेमाल दांतों में ब्रश करने के लिए भी कर सकते हैं।

आंवला
आंवला जैसी जड़ी-बूटी भी कैविटी के इलाज में मददगार होती है। इसमें भरपूर मात्रा में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट और विटामिन सी के कारण यह बैक्‍टीरिया और संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। यह संयोजी ऊतक के विकास को बढ़ावा देकर मसूड़ों के लिए बहुत लाभकारी होती है। इसके अलावा, यह मुंह को साफ करने और बदबूदार सांस से छुटकारा पाने में आपी मदद करता है। नियमित रूप से ताजा आंवला खाये। यह आधा गिलास पानी के साथ आधा चम्‍मच आंवला पाउडर नियमित रूप से लें।

आंखों की सूजन, दर्द और कालेपन को सही करते हैं ये 7 घरेलू नुस्खे

आंखों की चोट दूर करें
आंखों के नीचे और आसपास की जगहों पर कालापन ( ब्लैक आई) एक प्रकार की समस्या होती है। यह कई कारणों से हो सकती है जैसे नाक पर या चेहरे पर लगी चोट, जबड़े की सर्जरी, आंखों के पास स्किन इंफेक्शन या किसी प्रकार के एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है। यह बहुत ही तकलीफ देह होने के साथ देखने की क्षमता पर भी असर डालता है। आइए जानें इससे निजात पाने के घरेलू नुस्खों के बारे में-

आइस पैक
आंखों के आसपास सूजन पर कालापन होने पर आइस पैक की मदद लें। यह सूजन में आराम दिलाएगा साथ ही रक्त धमनियों को में रुकावट पैदा करता है जिससे इंटरनल ब्लीडिंग बंद हो जाएगी। यह दर्द में बहुत जल्द ही आराम दिलाएगा। बर्फ को किसी कपड़े में बांध कर ही सिकाई करें।

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मोटी से मोटी तोंद भी नौवें दिन गायब हो जाएगी! बस सुबह ये करे

गर्म पानी से सिंकाई
चोट लगने के एक या दो दिन बाद आंखों के आसपास कालापन दिखाई देता है। ऐसे में गर्म सेंक भी बहुत फायदेमंद हो सकती है। इससे आंखों के आस पास के ऊतकों में रक्त प्रवाह बढ़ता है जिससे चोट को ठीक होने में मदद मिलती है। इसके लिए एक साफ कपड़े को गर्म पानी में भीगोएं फिर उसे अच्छे से निचोड़ ले जिससे उसमें पानी ना रहे फिर इसे चोट वाली जगह पर तब तक रखें जब तक कपड़ा ठंडा ना हो जाए। इससे दिन में कई बार कर सकते हैं।

विटामिन सी
अगर आप इस समस्या से ग्रस्त हैं तों अपने आहार में विटामिन सी को जरूर शामिल करें। कई सारे खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जिनमें विटामिन सी की पर्याप्त मात्रा पायी जाती है जैसे अमरूद, आंवला, संतरा, नींबू, ब्रोकली, मीठे आलू और आम आदि। विटामिन सी के सेवन से रक्त धमनियों की दीवार मोटी होती है जिससे चोट को जल्द ठीक होने में मदद मिलती है।

अननास
अननास के से ब्लैक आई की समस्या से निजात पाना आसान हो जाता है। अननास एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जिसकी वजह से यह त्वचा के रंग में आए बदलाव को ठीक करता है। इसमें मौजूद विशेष प्रकार एंजाइम त्वचा को मुलायम कर जल्द ही ठीक करता है। अननास के एक टुकड़े को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं या इसका जूस भी पी सकते हैं।

विटामिन के
विटामि के सेवन से सूजन में कमी आती है। अगर विटामिन के की गोलियां या आहार का सेवन किया जाए तो चोट के कारण होने वाली सूजन में बहुत कमी देखी जा सकती है। विटामिन के से भरपूर आहार में आप पालक, अजमोद, ब्रोकली, शलजम, स्प्राउट्स आदि का सेवन कर सकते हैं।

लाल मिर्च पाउडर व वैस्लीन
ज्यादातर लोग ब्लैक आई से बचने के लिए लाल मिर्च पाउडर को वैस्लीन में मिलाकर लगाते हैं। लेकिन इसे लगाते वक्त बहुत सर्तक रहने की जरूरत है मिश्रण को प्रभावित क्षेत्र पर ही लगाएं ध्यान रहे यह आंखों में ना जाए। कुछ घंटे बाद इसे टिश्यू या कपड़े से अच्छे से साफ कर लें। दिन में तीन बार इस मिश्रण को चोट वाली जगह पर लगाएं।

अर्निका
अर्निका एक प्रकार का हर्ब है जो सूजन को कम करता है। इसके साथ ही यह आंखों की मांसपेशियों और अन्य ऊतकों पर लगी चोट को ठीक करता है। जल्द से जल्द अर्निका का प्रयोग करने से चोट को गंभीर होने से बचाया जा सकता है। अर्निका क्रीम व तेल दोनों रुप में बाजार में उपलब्ध होता है।

प्राकृतिक तेल
प्राकृतिक तेल की मदद से ब्लैक आई से छुटकारा पाना आसान हो जाता है। प्राकृतिक तेल की मदद से सूजन और दर्द में आराम मिलता है। आप चाहें तो नारियल तेल, अरंडी का तेल का प्रयोग कर सकते हैं। इस प्राकृतिक तेल का प्रयोग दिन में दो तीन बार भी कर सकते हैं। इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते हैं।

आलू
आलू में दर्द खींचने की क्षमता होती हैं। इसके साथ ही यह सूजन को भी कम करता है। आलू के स्लाइस को फ्रीज में दो-तीन घंटे के लिए रखें। उसके बाद ठंडी हुई आलू की स्लाइ स को प्रभावित क्षेत्र पर आधे घंटे के लिए रखें। आप चाहें तो आलू के रस का भी प्रयोग कर सकते हैं।

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मधुमेह और घरेलू उपचार
मधुमेह चयापचयी विकारों से पनपने वाला रोग है जो शरीर की इन्सुलिन पैदा करने या इन्सुलिन का उपयोग करने की क्षमता को प्रभावित करता है। तेजी से बदल रहे परिवेश और रहन-सहन ने देश और दुनिया में मधुमेह के मरीजों की संख्या में इजाफा किया है। हालांकि खान-पान पर नियंत्रण कर व कुछ घरेलू उपचार व नुस्खों की मदद से इस रोग का सामना किया जा सकता है। चलिये जानें कैसे…..

तुलसी के पत्ते
तुलसी के पत्तों में काफी एन्टीऑक्‍सीडेंट व बाकी जरूरी तत्व मौजूद होते हैं जो इजिनॉल, मेथिल इजिनॉल और कैरियोफ़ैलिन बनते हैं। ये सारे तत्व मिलकर इन्सुलिन जमा करने वाली और छोड़ने वाली कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करते हैं। अतः शुगर के स्तर को कम करने के लिए रोज दो से तीन तुलसी के पत्ते खाली पेट लें। आप इसका जूस भी ले सकते हैं।

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गेहूं के जवारे
गेहूं के पौधों में रोगनाशक गुण समाए होते हैं। गेहूं के छोटे-छोटे पौधों का रस असाध्य बीमारियों को भी मिटा सकता है। इसके रस को ग्रीन ब्लड के नाम से भी जाना जाता है। गेहूं के जवारे का आधा कप ताजा रस रोगी को रोज सुबह-शाम पिलाने से डायबिटीज में लाभ होता है।

मेथी
मधुमेह के उपचार के लिए मेथीदाने के प्रयोग भी लाभदायक होता है। यदि कारण है कि दवा कंपनियां भी मेथी के पावडर को बाजार में लाई हैं। उपयोग के लिए मेथीदानों का चूर्ण बना लें और रोज सुबह खाली पेट दो टी-स्पून चूर्ण पानी के साथ फंकी कर लें। कुछ दिनों में आपको लाभ महसूस होने लगेगा।

अलसी के बीज (फ्लेक्स सीड)
अलसी के बीजों में फाइबर प्रचर मात्रा में पाया जाता है जो पाचन में तो मदद करता ही है साथ ही फैट और शुगर के अवशोषण में भी सहायक सिद्ध होता है। अलसी के बीजों के आटे के सेवन से मधुमेह के मरीजों में शुगर की मात्रा लगभग 28 प्रतिशत तक कम हो सकती है।

दालचीनी
दालचीनी इंसुलिन की संवेदनशीलता को ठीक करने के साथ-साथ ब्लड ग्लूकोज के स्तर को भी कम करता है। आधी चम्मच दालचीनी रोज लेने से इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को ठीक किया जा सकता है और वज़न को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

ग्रीन टी
ग्रीन टी में पॉलीफिनोल्स काफी होते हैं। ये पॉलीफिनोल्स एक मजबूत एंटी-ऑक्सीडेंट और हाइपो-ग्लाइसेमिक तत्व होते हैं, इससे ब्लड शुगर को मुक्त करने में सहायता मिलती है और शरीर इन्सुलिन का बेहतर ढंग से इस्तेमाल कर पाता है।

नीलबदरी के पत्ते
आयुर्वेद में नीलबदरी के पत्ते का उपयोग मधुमेह के उपचार में सदियों से होता रहा है। जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन के मुताबिक इसकी पत्तियों में एंथोसियानीडीनस काफी मात्रा में होते हैं जो चयापचय की प्रक्रिया और ग्लूकोज़ को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को बेहतर करता है।

सहजन के पत्ते
सहजन के पत्तों को मोरिंगा भी कहा जाता है। इसके पत्तों में दूध की तुलना में चार गुना अधिक कैलशियम और दो गुना प्रोटीन पाया जाता है। मधुमेह के रोगियों द्वारा सहजन के पत्तों के सेवन से भोजन के पाचन को बेहतर और रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है।

करेला
करेले में इन्सुलिन-पोलिपेपटाइड पाया जाता है, साथ ही ये एक ऐसा बायो-कैमिकल तत्व है जो ब्लड-शुगर को कम करने में कारगर है। इसीलिये प्राचीन काल से करेले को मधुमेह की औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। एक सप्ताह में कम से कम एक बार करेले की सब्जी खाएं। बेहतर परिणामों के लिए खाली पेट करेले का जूस पियें।

त्‍वचा के सभी रोगों का नाश करती है मड थैरेपी, जानें इसके 5 स्‍वास्‍थ्‍य लाभ

मड थेरेपी के फायदे
प्राकृतिक चिकित्सा में माटी का प्रयोग कई रोगों के निवारण में प्राचीन काल से ही होता आया है। नए वैज्ञानिक शोध भी प्रमाणित करते हैं कि माटी चिकित्सा (मड थेरेपी) की शरीर को तरो ताजा करने जीवंत और उर्जावान बनाने में महत्वपूर्ण उपयोगिता होती है। चर्म रोग व सौंदर्य संबंधी समस्याओं को ठीक करने में मड थेरेपी कारगर है। यह एक महत्वपूर्ण नेचुरोपैथी है। मड के प्रयोग से ही शरीर की कई बीमारियों को दूर किया जा सकता है।

मुंहासों के इलाज में
अच्छी तरह से साफ करने वाली तथा कोमल मड, जैसे मुलतानी मिट्टी का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पैक मुंहासों से छुटकारा पाने तथा त्वचा को प्राकृतिक चमक प्रदान करने में सहायक होता है।

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