घरेलू उपाय 5 home medicine

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सेंधा नमक अपनाएं, चेहरे के गढ्ड़ों को दूर भगाएं

त्‍वचा को बेदाग बनाता है सेंधा नमक
क्‍या आप भी अपनी त्‍वचा पर होने वाले कील-मुंहासों के बाद होने वाले गढ्ढों से परेशान है और इन्‍हें दूर करने के लिए उपायों की खोज कर रहे हैं तो सॉल्‍ट स्‍क्रब आपकी इस समस्‍या को बहुत आसानी से दूर कर सकता है। जी हां अब आपको खूबसूरत त्‍वचा पाने के लिए बाजार में मौजूद महंगे कॉस्‍मेटिक का सहारा लेने की जरूरत नहीं है। आप सेंधा नमक स्‍क्रब की मदद से खूबसूरत त्‍वचा पा सकते हैं। सेंधा नमक एक बेहतरीन ब्यूटी प्रोडक्ट है। इसके इस्तेमाल से डेड स्क‍िन तो साफ होती है साथ ही ब्लैकहेड्स भी दूर हो जाते हैं और चेहरे के गढ्ढे भी तेजी से भरता है। आइए जानें त्‍वचा के दाग-धब्‍बों को दूर करने के लिए सेंधा नमक का इस्‍तेमाल कैसे किया जाता है।

सेंधा नमक और ओटमील स्‍क्रब
नमक और ओटमील का स्‍क्रब ऑयली त्‍वचा के लिए बहुत अच्‍छा होता है। इसके लिए आप ओटमील और सेंधा नमक को अच्छी तरह मिला लें और इसमें कुछ बूंदे नींबू के रस और बादाम के तेल की मिक्स कर लें। फिर इस स्‍क्रब से अपने चेहरे पर हल्‍के हाथों से स्‍क्रब करें। कुछ देर स्क्रब करने के बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें।

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सेंधा नमक और जैतून के तेल का स्‍क्रब
सेंधा नमक को अगर आप जैतून के तेल में मिलाकर चेहरे पर लगाते हैं तो इससे आपके चेहरे में निखार आता है। जी हां अगर आपकी त्‍वचा ड्राई है तो सॉल्‍ट और ऑयल का यह पेस्‍ट आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। क्‍योंकि यह आपके चेहरे को नमी प्रदान करता है।

सेंधा नमक और नींबू का स्‍क्रब
त्‍वचा के दाग-धब्‍बों से छुटकारा पाने के लिए सेंधा नमक में कुछ बूंदे नींबू की मिलाकर पेस्‍ट बना लें। फिर इससे अपने चेहरे पर स्‍क्रब करें। हफ्ते में दो बार ऐसा करने से आप मुंहासों, ब्‍लड हैड्स और व्‍हाइटहेड्स को आसानी से दूर कर सकते हैं।

सेंधा नमक और शहद का स्‍क्रब
सेंधा नमक और शहद का स्‍क्रब त्‍वचा में निखार लाने में मदद करता है। शहद टैनिंग को दूर करने का काम करता है और यह त्‍वचा को नमी भी प्रदान करता है। इस स्‍क्रब को बनाने के लिए एक कटोरी में सेंधा नमक लेकर उसमें कुछ बूंदें शहद की मिलाएं। अब इसे अच्‍छी तरह से मिक्‍स करके चेहरे पर लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद त्‍वचा को पानी से धो लें। इस उपाय को हफ्ते में दो बार करें।

बेदाग निखार चाहिये तो लगाएं मूंग दाल फेस पैक

मूंग की दाल से पाएं बेदाग निखार
मेरे पड़ोस में रहने वाली गीता की त्‍वचा में दिनों-दिन निखार आ रहा था। एक दिन मेरे से रहा नहीं गया और मैंने गीता से उसके निखार का राज जानना चाहा। तो उसने बोला कि इस निखार के पीछे का कारण जानकर शायद तुम्‍हें यकीन नहीं होगा। क्‍योंकि इस निखार का कारण कोई ब्‍यूटी क्रीम नहीं बल्कि हमारी किचन में मौजूद मूंग की दाल है। जी हां वही मूंग की दाल जिसे देखकर ज्‍यादातर लोग नाक-मुंह सिकोड़ने लगते है। लेकिन प्रोटीन से भरपूर यह दाल न केवल सेहत बल्कि त्‍वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है। इससे बने मास्‍क की मदद से मेरी त्‍वचा में इतना निखार आ रहा है। आइए मेरी तरह आप भी गीता से मूंग की दाल से बने फेस मास्‍क को बनाने और लगाने के फायदे के बारे में जानें।

त्‍वचा में निखार लाये
मूंग की दाल से बना स्‍क्रब त्‍वचा की रंगत में निखार लाता है। मूंग की दाल में मौजूद विटामिन ए और सी त्‍वचा को सुरक्षा प्रदान करते हैं, इसके अलावा मूंग की दाल में त्‍वचा को एक्‍सफोलिएट गुण होते है। त्‍वचा में निखार के लिए 2 चम्मच मूंग दाल को रात भर पानी में भिगोकर रख दें। फिर अगले दिन सुबह इसका पेस्ट बना लें और इस पेस्‍ट में 1 चम्‍मच बादाम का तेल और 1 चम्मच शहद अच्छी तरह मिलाकर चेहरे पर लगा लें। 15 मिनट के बाद में चेहरे को पानी से धो लें।

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त्‍वचा को मुलायम बनाये
अगर आपको भी अपनी त्‍वचा को मुलायम बनाना है तो मूंग की दाल से बना स्‍क्रब इस्‍तेमाल करें। इस स्‍क्रब को बनाने के लिए आपको मूंग की दाल को अच्‍छे से पीसकर इसका पाउडर बना लें। फिर इसमें एक चम्‍मच शहद को मिलाकर बना लें। फिर इस स्‍क्रब से अपने चेहरे की स्‍क्रबिंग करें। फिर कुछ देर ऐसे की छोड़ दें। जब यह सूख जाये तो कॉटन से साफ कर लें और पानी से धो लें। कुछ दिनों के इस्‍तेमाल से ही आपकी त्‍वचा मुलायम हो जायेगी।

डेड स्किन हटाये
मूंग की दाल से बना स्‍क्रब आपकी त्‍वचा से डेड स्किन को निकालता है। अगर आपको भी अपनी त्‍वचा से डेड स्किन को निकालना है, तो मूंग की दाल के पेस्‍ट में एक चम्‍मच घी की मिलानी है। फिर इस स्‍क्रब को अपने चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगा लें। बाद में अपने चेहरे को पानी से धो लें। अगर इस स्‍क्रब को हफ्ते में दो बार भी ट्राई करेंगे तो आपकी त्‍वचा से डेड सेल्‍स और जर्म्‍स निकाल जायेगें।

टैनिंग का उपचार
टैनिंग को दूर करने में मूंग की दाल का पैक बेहद ही उपयोगी है। इसके लिए मूंग की दाल के पेस्‍ट में 2 चम्‍मच दही डालकर अच्‍छे से मिला लें। इस पैक को प्रभावित त्वचा पर अच्छी तरह लगायें और 10 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर इसे ठंडे पानी से धो डालें। यह पैक सनबर्न के उपचार में सहायक होता है।
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तो इसलिए भीगी किशमिश, सूखी किशमिश से अधिक फायदेमंद है?

किशमिश के अलग-अलग फायदे
यूं तो किशमिश कई लोगों को पसंद है, लेकिन कई लोग ड्राई फ्रूट की तुलना में इसे कमतर आंकते हैं। इसी वजह से इसे खाना भी पसंद नहीं करते। लेकिन आपको जब इसकी खासियतों का पता चलेगा तो न सिर्फ आप इसे खाना पसंद करेंगी बल्कि अपने नियमित जीवनशैली में इसे सम्मीलित भी करेंगी। इसके अलावा आपको यह भी बता दें कि सूखे और भीगे किशमिश के अलग-अलग फायदे होते हैं।

भीगे किशमिश पौष्टिक तत्वों का स्रोत
भीगे हुए किशमिश आयरन, पोटाशियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम और फाइबर से भरपूर होते हैं। इसलिए इन्हें हेल्दी डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसमें प्राकृतिक शुगर भी बहुतायत में मौजूद होता है। किशमिश वास्तव में सूखे हुए अंगूर होते हैं। ये कई रंगों में मौजूद होत हैं मसलन गोल्डर, हरा और काला। इसके अलावा आप कई सब्जियों के स्वाद को बेहतर बनाने के लिए भी किशमिश का इस्तेमाल कर सकती हैं।

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बेहतर डाइजेशन
भीगे हुए किशमिश में कैलोरी की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि इसे ज्यादा मात्रा में न लें। इसे नियमित अपने आहार में शामिल करने से डाइजेशन की समस्या से निजात मिलता है। असल में यह फाइबर से भरपूर होता है। इसे आप एक गिलास पानी में 1 से 12 किशमिश भिगो सकते हैं जिससे पेट साफ हाता है।

बेहतर इम्युनिटी पावर
इससे इम्युनिटी भी बढ़ती है। दरअसल भीगे हुए किशमिश में सभी तरह के पौष्टिक तत्व उपलब्ध होते हैं जिसके सेवन से आपकी इम्युनिटी पावर बेहतर होती है। साथ ही यह बैक्टीरियर और संक्रमण से लड़ने में भी मदद करता है।

मुंह से बदबू
मुंह से आ रही बदबू को भी किशमिश के सेवन से खत्म किया जा सकता है। खासकर यदि किसी महिला को नियमित मुंह से बदबू आने की शिकायत रहती है तो उन्हें इसका उपयोग आवश्यक तौर पर करना चाहिए।

सूखे किशमिशन वजन बढना
अगर आपका बहुत कोशिशों के बावजूद वजन न बढ़ रहा हो तो आप सूखे किशमिशन को रोजाना डाइट में शामिल करें। इससे आसानी से वजन बढ़ सकता है। यही नहीं इसमें एनर्जी बढ़ाने की क्षमता भी होती है।

कैंसर के बचाव
सूखे किशमिश में इतनी क्षमता होती है कि यदि किसी के शरीर में कैंसर सेल डेवलेप हो रहे होते हैं, तो उसे रोकता है और आपको स्वस्थ बनाता है। दरअसल में इसमें केचिन्स भारी मात्रा में पाई जाती है जो कि रक्त में पाया जाने वाला पोलीफेनोलिक एंटीआक्सीडेंट है।

हाइपरटेंशन से बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि किशमिश के सेवन से आप हाइपरटेंशन की स्थिति से लड़ सकते हैं। जैसा कि पहले ही जिक्र किया गया है कि इसमें कई तरह के लाभदायक तत्व मौजूद होते हैं। इसी तरह इसमें पोटाशियम भी होता है। इसके सेवन से हाइपरटेंशन की स्थिति में सुधार होता है।

अनीमिया से बचाव
माना जाता है कि किशमिश के सेवन से आप अनीमिया से भी लड़ सकते हैं। असल में किशमिश आयरन का बेहतरीन स्रोता होता है। साथ ही इसमें विटामिन बी काम्प्लेक्स भी बहुतायत में पाया जाता है। ये सभी तत्व रक्त फार्मेशन में उपयोगी हैं। इतना ही नहीं इसमें कापर भी होता है जिससे रेड ब्लड सेल्स बनने में मदद मिलती है। अतः आप इसे अपने खानपान में निश्चित रूप से सेवन करें।

चुभती घमौरियों को 5 मिनट में दूर करेंगी ये 5 औषधियां

नीम की पत्तियां
नीम में एंटीबायोटिक गुण पाए जाते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं, इसलिए घमौरियां होने पर नीम की कुछ पत्तियों को उबाल कर, उस पानी से स्नान करें। ऐसा करने से आप को घमौरियों से राहत मिलती है। नीम और तुलसी की पत्तियों को लेकर एक पेस्ट तैयार करें फिर उसे घमौरियों वाले स्थान पर लगायें। ऐसा करने से आप को ठंडक के साथ-साथ राहत का एहसास होगा।

फलों के रस का सेवन
गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी और त्‍वचा के छिद्र बंद होने से घमौरियां होने लगती है। इससे बचने के लिए हमें अधिक मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए और रोगी को अधिक मात्रा में फलों के रस का सेवन करना चाहिए। ऐसे में घमौरियां ठीक होने लगती है।

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मुल्तानी मिट्टी का लेप
मुल्तानी मिट्टी में पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। उस पेस्ट को अपने शरीर पर अच्छे से लगाये और सूखने के बाद स्नान करें। इससे आप को गर्मी से होने वाली जलन से छुटकारा मिलेगा।

एलोवेरा
एलोवेरा से त्वचा की परेशानी को आसानी से दूर किया जा सकता है और यह घमौरियों को ठीक करने के लिए भी एक अच्छा विकल्प है। इसका गुदा निकाल कर लगाने से घमौरियां ठीक हो जाती है।

चंदन का लेप
चंदन से हमें ठंडक का एहसास होता है इसलिए घमौरियां होने पर चंदन का लेप लगाएं। आराम मिलेगा।

कुत्‍ता काटे तो झट से लगाएं लाल मिर्च, दूर होगा जहर

लाल मिर्च
पिसी हुई लाल मिर्च को सरसो के तेल में मिलाकर तुरंत ही कुत्ते के काटे वाले जगह पर लेप लगाने से कुत्ते का जहर नहीं फैलता है। इसका प्रयोग प्राचीन समय से होता आया है, जिसका कोई दुष्परिणाम देखने को नहीं मिलता है।

प्‍याज
प्याज का रस, अखरोट की गिरी को बराबर मात्रा में पिस कर उसमें नमक मिला लें और फिर इसे शहद में मिलाकर कुत्ते के काटे स्थान पर लेप करके पट्टी कर लें। एैसा करने से शरीर पर कुत्ते के जहर का प्रभाव नहीं पड़ता।

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शहद
शहद के साथ पीसी हुई प्याज को मिलाकर कुत्ते के काटी हुई जगह पर लगाने से जहर का असर खत्म हो जाता है।

काली मिर्च
10 से 15 दाने काली मिर्च और 2 चम्मच जीरा को पानी में डालकर इसे पीसकर कुत्ते के काटे वाले स्थान पर लगाते रहने से कुछ दिनों में जहर खत्म हो जाता है।

हींग
हींग का भी उपयोग आप कुत्ते के काटने के बाद कर सकते हैं। यदि आपको पागल कुत्ते ने काट लिया हैं तो कुत्ते के जहर के प्रभाव से बचने के लिए हिंग की ही सहायता से सर्वोत्तम उपचार किया जा सकता है। इसके लिए थोड़ी सी हींग लें और उसे पानी के साथ पीस लें। अब इसे घाव पर लगा लें। हींग के प्रयोग करने से घाव का सारा जहर खत्म हो जायेगा।

गर्दन की झुर्रियों को ‘1 हफ्ते’ में दूर करते हैं ये मास्‍क

गर्दन की झुर्रियों से तुरंत राहत देते हैं ये मास्‍क
सुडौल व तने हुए कंधे और सुराहीदार गर्दन चेहरे को और भी आकर्षक बना देते हैं। लेकिन अगर गर्दन में झुर्रियां पड़ने लगें तो सुंदरता फीकी पड़ने लगती है। गर्दन पर उम्र का प्रभाव भी जल्दी पड़ता है। चेहरे की तरह गर्दन भी धूल, मिट्टी व धुएं की चपेट में आती है। इससे गर्दन पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं और इसकी त्वचा कांतिहीन हो जाती है। अतः आपको अपना अच्छा ख्याल रखना चाहिए, जिससे ना सिर्फ आपको चेहरे की बल्कि गले की झुर्रियों से भी छुटकारा मिले। आइए इस स्‍लाइड शो के माध्‍यम से गर्दन की झुर्रियों को दूर करने वाले प्राकृतिक मास्‍क की जानकारी लेते हैं।

एंटी-ऑक्‍सीडेंट से भरपूर ऑलिव ऑयल
ऑलिव ऑयल एंटी-ऑक्‍सीडेंट और विटामिन ई और ए से भरपूर होने के कारण त्‍वचा की हानिकारक फ्री रेडिकल्‍स के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।
इस्‍तेमाल का तरीका- एक चम्‍मच ऑलिव ऑयल को आधा चम्‍मच आर्गेनिक शहद मिलाकर इसमें कुछ बूंदे ग्लिसरीन की मिलायें। फिर इस मिश्रण से गर्दन की त्‍वचा पर ऊपर की दिशा में मसाज करें।

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अंडे की सफेदी का मास्‍क
गर्दन की झुर्रियों को दूर करने के लिए अंडे की सफेदी का पैक भी काफी फायदेमंद साबित होता है। इसके त्वचा-पौष्टिक घटक हाइड्रो लिपिड ढीली त्वचा को लिफ्ट करने में मदद करता है। साथ ही अंडे में मौजूद प्रोटीन से आपके चेहरे को प्रोटीन मिलता है जिससे झुर्रियां दूर होती हैं।
इस्‍तेमाल का तरीका- एक अंडा लेकर उसका सफेद भाग निकाल लें। अब इस सफेद भाग के ऊपर एक चम्मच बादाम का तेल डालें और इसे तब तक फेंटें जब तक इस मिश्रण का कोई एक रंग ना हो जाए। अब इसे गले के उस स्थान पर लगाएं जहां आपको झुर्रियां दिख रही हैं।

मेथी का मास्‍क
मेथी के बीज से लेकर छाल, पत्‍ते और यहां तक की मेथी का हर हिस्‍सा फाइन लाइन को दूर करने में मददगार होता है।
इस्‍तेमाल का तरीका- मेथी के दानों को पानी में उबालकर उसे ठंडा कर लें और उससे अपना चेहरा साफ करें। या मेथी के हरे पत्तों को अच्छे से पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसे अपने चेहरे पर 15 मिनट तक लगाकर सूखने दें। और फिर अपना चेहरा पानी से धो लें। एक हफ्ते के भीतर ही आपको अपनी त्‍वचा में कसाव दिखाई देने लगेगा।

केले का मास्‍क
केले में बहुत अधिक मात्रा में विटामिन, मिनरल और एंटी-ऑक्‍सीडेंट होते हैं जो त्‍वचा के कोलेजन के उत्‍पादन को बढ़ाता हैं।
इस्‍तेमाल का तरीका – इसके लिए 1 पका हुआ केला लीजिये और इसे अच्छी तरह मसल लीजिये। अब इसमें 1 चम्मच शहद और 10 बूंद जैतून के तेल की डालकर अच्छी तरह मिला लीजिए। फिर इस केले के मास्‍क को चेहरे व गर्दन पर लगाकर 15 मिनट के लिए छोड़ दीजिए और फिर सादे पानी से धो लीजिए। ऐसा सप्ताह में 2 बार करने से गर्दन की झुर्रियां खत्म हो जाती हैं।

शहद का मास्‍क
शहद झुर्रियों एवं फाईन लाइन्स के लिए एक कारगर औषधि है। त्‍वचा को मॉइश्‍चराइज करने के अलावा शहद त्‍वचा की गहरी परतों में व्याप्त हो जाता है। साथ ही शहद में मौजूद विटामिन बी और पोटेशियम त्‍वचा की लोच में सुधार करने का काम करता है।
इस्‍तेमाल का तरीका- गर्दन की त्‍वचा पर कार्बनिक शहद से कुछ देर मसाज करें। एक चम्मच शहद लिजिए तथा अपने चेहरे पर पांच मिनट तक मालिश कीजिए। 20 मिनट रहने दे, पानी से धो ले। झुर्रियों और फाइन लाइन झुर्रियों को कम करने के लिए प्रतिदिन दोहराएं।

हर्निया से ग्रस्‍त लोगों के लिए वरदान है ये अचूक घरेलू नुस्‍खे

हर्निया के लिए घरेलू नुस्‍खे
जब पेट की मसल्‍स कमजोर हो जाने से आंत बाहर निकल जाती है तो उसे हर्निया कहते हैं। यानि आंत का एक हिस्सा पेट की मसल्‍स के एक कमजोर हिस्से से बाहर आ जाता है। इसमें पेट की त्वचा के नीचे एक असामान्य उभार आ जाता है, जो नाभि के नीचे होता है। लंबे समय से खांसते रहने या लगातार भारी सामान उठाने से भी पेट की मसल्‍स कमजोर हो जाने से हर्निया की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि इसके कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते हैं लेकिन कुछ लोग सूजन और दर्द का अनुभव करते हैं, जो खड़े होने पर और मसल्‍स में खिंचाव या भारी सामान उठाने पर बढ़ सकता है।यूं तो बड़ी हर्निया जिसमें सूजन और काफी दर्द हो रहा हो, उसका इलाज बिना सर्जरी के संभव नहीं है। लेकिन हर्निया के लक्षण पता लगने पर आप उसे घरेलू इलाज से कम कर सकते हैं।

बर्फ का जादू
बर्फ से हर्निया का इलाज बहुत ही पुराना, आसान और प्रचलित उपाय है। जी हां बर्फ को हर्निया वाली जगह पर लगाने से काफी आराम मिलता है। दर्द के साथ-साथ सूजन भी कम होती है। तो क्‍यों न आज से ही शुरू कर दें बर्फ से हर्निया का इलाज।

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कैमोमाइल चाय
कैमोमाइल को एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है, यह हर्निया के लिए बहुत ही अच्‍छा प्राकृतिक उपाय है। हर्निया की समस्‍या से एसिडिटी और गैस काफी बनने लगती है। इस स्थिति में कैमोमाइल की चाय के सेवन से काफी आराम मिलता है। यह पाचन तंत्र को ठीक करता है और एसिड बनने की प्रक्रिया को कम करता है। समस्‍या होने पर एक चम्‍मच सूखे कैमोमाइल को एक कप गर्म पानी में मिलाकर 5 मिनट के लिए ढककर रख दें। फिर इसमें अपने स्‍वादानुसार शहद मिला लें। इस चाय का सेवन दिन में 4 बार करें।

अदरक की जड़
अदरक की जड़ पेट में गैस्ट्रिक एसिड हुए नुकसान से सुरक्षा प्रदान करता है। यह हर्निया से हुए दर्द में भी काम करता है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण यह अन्‍य चीजों की तरह ही प्रभावी है। आप इसका सेवन तरल रूप से कर सकते हैं या इस स्थिति में होने वाले दर्द और असुविधा को कम करने के लिए कच्‍ची अदरक भी खा सकते हैं।

रामबाण मुलेठी
कफ और खांसी में मुलेठी रामबाण की तरह काम करता है लेकिन यह हर्निया के इलाज में भी बेहद ही कारगर है। हर्निया पेट की परत और अणुओं को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन मुलेठी की जड़ शरीर के इन हिस्सों के उपचार उत्तेजक के रूप में लंबे समय से जाना जाता है। मुलेठी की चाय सेवन करने से क्षतिग्रस्त ऊतकों को तेजी से ठीक किया जाता है और अपने एनाल्‍जेसिक गुणों के कारण यह दर्द और सूजन को भी दूर करता है।

एप्‍पल साइडर सिरका
एप्‍पल साइडर सिरका हर्निया के कारण होने वाले लक्षण जैसे हार्टबर्न और एसिडिटी को कम करने का एक उत्‍कृष्‍ट उपाय है। एसिडिक गुण होने के कारण एप्‍पल साइडर सिरका शरीर पर एक क्षारीय प्रभाव छोड़ता है। जब भी आपको एसिडिटी या हार्टबर्न महसूस हो तो एप्‍पल साइडर सिरके की 1 से 2 चम्‍मच को गर्म पानी में मिलाकर, घूट-घूट करके पीएं।

इस तेल में छिपा है हर रोग का इलाज

नीम के तेल के फायदे
नीम की प्रयोग आयुर्वेदिक औषधि के रूप में किया जाता है। नीम के बीज से निकाला हुआ तेल हमारे कई काम आ सकता है। नीम के तेल में बहुत सारे औषधीय गुण छुपे हुए हैं। यह तेल बेहद ही सुगंध वाला होता है। ये सेहत और सौंदर्य दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा यह कई बीमारियों के लिए भी कारगर होता है। इसके बारे में विस्‍तार से बताते हैं।

मोतियाबिंद की बीमारी
आंखों में मोतियाबिंद और रतौंधी हो जाने पर नीम के तेल को सलाई से आंखों में अंजन की तरह से लगाएं। आंखों में सूजन हो जाने पर नीम के पत्ते को पीस कर अगर दाई आंख में है तो बाएं पैर के अंगूठे पर नीम की पत्ती को पीस कर लेप करें। ऐसा अगर बाई आंख में हो तो दाएं अंगूठे पर लेप करें, आंखों की लाली व सूजन ठीक हो जाएगी।

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मलेरिया से बचाव
नीम से मलेरिया भगाया जा सकता है। इससे मच्छर और पैदा होने वाले लार्वा को खत्म किया जा सकता है। मच्छरों पर यह बहुत असरदार होता है। नीम के तेल से मलेरिया पर काबू पाया जा सकता है। किसानों के लिए यह जैविक कीटनाशक का काम करता है। यह पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता। यह जमीन या पानी की आपूर्ति में कोई हानिकारक पदार्थ नहीं मिलाता, यह बायोडीग्रेडेबल है। यह मधुमक्खियों और केंचुए के रूप में उपयोगी कीड़े को नुकसान नहीं पहुंचाता।

स्वस्थ त्वचा
रूखी सूखी त्वचा के लिए नीम बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। एक्जिमा से स्किन पर सूजन और खुजली होती है। इसके लिए इफेक्टिड एरिया में नीम का तेल लगाएं। जलने की वजह से शरीर में जख्म बन जाने पर नीम का तेल लगाने से जख्म जल्दी ठीक हो जाते हैं।इन्फेक्शन से बचाता है। कील-मुंहासों और त्वचा के दाग भी दूर हो जाते है।

रक्तप्रदर मे लाभ
आधा चम्मच नीम का तेल दूध में मिलाकर सुबह-शाम को पीने से रक्तप्रदर और सभी प्रकार के प्रदर बन्द हो जाता है। एथलीट फूट, नाखून कवक जैसे त्वचा रोग फंगल संक्रमण के कारण होते हैं। नीम में पाए जाने वाले दो योगिक ‘गेदुनिन’ और ‘निबिडोल’ त्वचा में पाए जाने वाले फफूंद को समाप्त करते हैं और संक्रमण को कम करते हैं।

रुसी दूर करे
बालों को चमकदार, स्वस्थ बाल के लिए,सूखापन दूर करने के लिए नीम के तेल का प्रयोग करें। नीम का तेल नियमित लगाने से सिर की खुशकी दूर होगी जिससे रूसी की समस्‍या ठीक हो जाएगी। इसके तेल से बाल दो मुंहे भी नहीं होते।गंजेपन की समस्या है तो सिर में नीम का तेल लगाएं। इससे जूएं-लीखें भी दूर हो जाती हैं।

दांतों और मसूड़ों की मजबूती
दांतों और मसूड़ों की समस्या में नीम का तेल की कुछ बूंदों मंजन में मिला कर मले। नीम के तेल में एंटी बेक्टीरियन तत्व पाए जाते हैं जो दांतों में होने वाली समस्यओं जैसे दांतों के दर्द, दांतों का कैंसर, दांतों में सड़न आदि में राहत देता है।

रोके बढ़ती हुई उम्र
नीम में पाये जाने वाले तत्व ऑक्सीकरण रोधक होते हैं जो चेहरे में होने वाले परिवर्तनों को रोक देते हैं। नीम के तेल लगाने से चेहरे की झुर्रियां कम होती है। और आपकी बढ़ती हुई उम्र रूक जाती है।

क्यों दवाओं से अधिक गुणकारी हैं ये पत्तियों, छुपा है कई बीमारियों का इलाज

आम की पत्तियां के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ
गर्मियों में सबसे ज्‍यादा मिलने और पसंद किये जाने वाले फलों के राजा आम के बिना गर्मियां अधूरी सी लगती है। यह काफी स्वादिष्ट होने के साथ सेहत के लिए लाभकारी भी होता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि आम के साथ-साथ इसकी पत्तियों भी हमारे लिए बहुत ही गुणकारी होती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण होने के कारण यह लगभग हर बीमारी का आसानी से इलाज कर सकती है। इसके अलावा इसमें बहुत अधिक मात्रा में विटामिन सी, बी और ए भी पाया जाता है। आम की पत्‍तियां एक ऐसा खजाना हैं, जो आपको फ्री में ही मिलता है। इसलिये इसे अच्‍छी ढंग से प्रयोग करें।

आम की पत्तियां इस्‍तेमाल करने का तरीका
आप आम की पत्तियों का कई तरीके से इस्‍तेमाल कर सकते हैं। जैसे हल्के हरे रंग के छोटे आकार की आम की पत्तियों को तो़ड़ लें, उन्हें अच्छे से धोएं और छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर चबाइये। या आम के कुछ पत्तों को तोड़िये और रात भर के लिये हल्‍के गुनगुने पानी में डालकर भिगो दें। अगली सुबह इसका सेवन करें। साथ ही पत्तियों को धोकर धूप में सुखाएं और पाउडर बना लें। इस पाउडर की एक चम्मच लें और एक गिलास पानी में मिलाकर पी लें। ध्यान रखें इसका सेवन खाली पेट ही करें।

पेट की चर्बी 9 दिनों में गायब हो जाएगी!(सोने से पहले इसे आजमायें)

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ब्लड-शुगर पर नियंत्रण
आम के पत्‍तों की मदद से आप ब्‍लड-शुगर को भी कंट्रोल कर सकते हैं। ऐसा आम के पत्तों में मौजूद टैनिन के कारण होता है। आम के पत्तों से निकला अर्क इंसुलिन उत्पादन और ग्लूकोज को बढ़ने से रोक कर ब्लड शुगर का स्तर घटाता है। इसके अलावा आम के पत्‍तों में मौजूद हाइपोग्‍लाइसेमिक प्रभाव से ब्‍लड शुगर का स्‍तर कम हो जाता है। रोज सुबह एक चम्मच आम की पत्तियों का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।

गॉल ब्‍लैडर और किडनी स्‍टोन से बचाये
आम की पत्तियों से किडनी में पथरी की समस्या को हल करने और किडनी को सेहतमंद रखने में मदद मिलती है। इसी तरह यह आपको गॉल ब्‍लैडर की पथरी से निजात पाने और लिवर को सेहतमंद रखने में भी मदद करता है। रोजाना आम की पत्‍तियों के पाउडर से बना घोल पीने से किडनी के स्‍टोन दूर करने में मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल को कम करें
कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर आपके दिल को नुकसान पहुंचा सकता है। यदि आप शुगर की बीमारी से पीड़ित हैं, तो आपको बाकी चीजों का भी ध्‍यान रखना होगा। चूंकि आम के पत्तों में फाइबर, पेक्टिन और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है इसलिए यह आपके कोलेस्ट्रॉल, खासतौर पर एलडीएल या हानिकारक कोलेस्ट्रॉल के स्‍तर को घटाता है। इसके अलावा इससे आपकी धमनियां मजबूत और स्वस्थ बनती है।

अस्‍थमा से बचाये
आम की पत्तियां अस्‍थमा की बीमारी को कंट्रोल और इससे आपको बचाती हैं। आम की पत्तियां चाइनीज दवाओं में भी बहुत प्रयोग की जाती हैं, आप अस्थमा से निजात पाने के लिए इसकी पत्तियों का काढ़ा बनाकर थोड़ा सा शहद मिलाकर प्रयोग कर सकते हैं।

पेट के लिये रामबाण
प्रकृति हमें कई बीमारियों का उपचार स्वयं उपलब्ध कराती है, आमतौर पर प्राकृतिक उपचार के कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होते हैं। पेट की बीमारी के लिये में आम के मुलायम पत्ते आपके लिये संजीवनी का काम करते हैं। थोड़ी सी आम की पत्‍तियों को गर्म पानी में डालें, बर्तन को ढंक दें और रातभर के लिये इसे ऐसे ही छोड़ दें। अगली सुबह पानी को छान कर खाली पेट पी जाएं। इसे नियमित पीने से पेट की सारी गंदगी बाहर निकल जाती है और पेट का कोई रोग नहीं होता।

दूध में 1 छुआरा खाएं, स्‍वाद और सेहत पाएं

दूध में छुआारा
कैल्शियम से भरपूर दूध और छुआरा सेहत के लिए फायदेमंद होता है, यह बात तो सभी जानते हैं। और ज्‍यादातर लोग छुआरे को कच्‍चा खाते है लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि छुआरे को दूध में उबालकर खाने और दूध को पीने से इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं। जी हां विटामिन्‍स और मिनरल्‍स जैसे फाइबर, आयरन, कैल्शियम, जिंक, मैग्‍नीशियम आदि से भरपूर छुआरा अगर दूध में उबालकर खाया जाता है तो यह आपको कैंसर, दिल और पेट जैसी कई बीमारियों से बचाता है। इतना ही नहीं इस तरह से छुआरे को खाने से आपका वजन भी बढ़ता है। छुहारे का सेवन सालभर किया जा सकता है, क्योंकि यह सूखा फल बाजार में सालभर मिलता है। अगर इसके फायदों के बारे में आप नहीं जानते तो आइए जानें……

पेट के लिए फायदेमंद
छुआरे में डाइटरी फाइबर की मौजूदगी के कारण यह पेट के लिए बहुत अच्‍छा होता है। रोजाना दूध में छुआरा डालकर लेने से आपका पाचन तंत्र ठीक रहता है। इसके अलावा छुआरे में पोटेशियम होता है, इसे दूध के साथ लेने से कब्‍ज, पेट दर्द और डायरिया जैसी समस्‍याएं नहीं होती है।

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हड्डियों में मजबूती
छुआरे में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। कैल्शियम की कमी से उत्‍पन्‍न होने वाले रोग जैसे हड्डियों की कमजोरी, दांतों की समस्‍या आदि दूध में छुआरा लेने से ठीक हो जाती है। इसे रोजाना दूध में डाल कर पीने से हड्डियां मजबूत होती है। बढ़ती उम्र के बच्‍चों में स्‍वास्‍थ्‍य और मजबूती के लिए छुआरा बहु‍त उपयोगी होता है। अपने बच्‍चों को दूध में छुआरा मिलाकर खाने से मांसपेशियों को निर्माण होता है और हड्डियां मजबूत होती है।

त्‍वचा और बालों के लिए वरदान
छुआरा विटामिन बी का अच्छा स्रोत होने के कारण त्‍वचा को हेल्दी और फ्रेश बनाता है। इसमें मिलने वाला विटामिन ‘ए’ नई स्किन सेल्स बनाता है। साथ ही छुआरे से मिलने वाला विटामिन बी-5 बालों को झड़ने और दो मुंहे जैसी समस्याओं को दूर करता है। यह बालों को लंबा और घना बनाने में मदद करता है।

कफ काटता है छुआरे वाला दूध
अगर आप अस्‍थमा से परेशान हैं तो छुआरे वाला दूध आपके लिए लाभकारी है। रोजाना 2 से 4 छुआरा मिश्री मिले हुए दूध में उबालकर खाने के बाद दूध पीना बहुत ही फायदेमंद होता है। इससे आपको ताकत मिलती है और बलगम निकल जाता है, जिससे अस्‍थमा से राहत मिलती है। छुआरे की तासीर गर्म होने के कारण फेफड़ों और सीने को ताकत देता है।

पीठ के दाग-धब्‍बों को तुरंत हटाते हैं ये 5 घरेलू उपाय

घरेलू उपायों से हटाएं पीठ के दाग-धब्‍बे
डीप कट ब्‍लाउज हो या डीप बैक कट गाउन या फिर डीप बैक ड्रेस, यह आपको कमाल का खूबसूरत लुक देती है। लेकिन पीठ पर मौजूद दाग-धब्बों के कारण कुछ महिलाएं डीप बैक कट ड्रेस पहन ही नहीं पाती। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं क्योंकि आज हम आपको कुछ ऐसे उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी मदद से आप अपनी पीठ पर मौजूद दाग-धब्‍बों से छुटकारा पा सकेंगी और अपनी मन पसंद कोई भी ड्रेस पहन सकेंगी। तो देर किस बात की, आइए जानें।

जायफल
जायफल में एंटी-फंगल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं इसलिए यह दाग-धब्‍बों को दूर करने में सहायक होता है। दाग को हटाने के लिए जायफल का पाउडर लें और इसमें एक चम्मच शहद और दालचीनी पाउडर मिलाएं। फिर सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर इसे दाग-धब्‍बों वाली जगह पर लगायें और बाद में पानी से धो डालें।

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नीबू का रस
नीबू में पाया जाने वाला सिट्रिक एसिड और एस्ट्रिजेंट गुण पीठ के दाग-धब्‍बों को दूर करने में सहायक होता है। दाग-धब्‍बों को दूर करने के लिए 1 नीबू लें और इसके टुकडें कर लें। फिर इसका रस पीठ पर लगायें या टुकड़ें को पीठ पर रगड़ें। रस को हवा से सूखने दें और फिर पानी से धो डालें। नीबू का रस त्वचा के पीएच स्तर को बना कर रखता है।

प्याज
प्याज में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटी-वायरल गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण यह दाग धब्बों को दूर करता है। दो सफेद प्याज लेकर, उनका रस निकालें। इसमें एक बूंद नींबू का रस और एक बूंद शहद मिलाएं। सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं। इस मास्क को त्वचा पर लगायें और 15-20 मिनट बाद धो डालें।

खीरा
खीरा त्वचा को नमी प्रदान करता है, त्वचा से अशुद्धियों को दूर करता है और इसके नियमित उपयोग से बंद रोमछिद्रों को भी खोलता है। कुछ खीरे लें और उन्हें टुकड़ों में काटें। अब इसे पीसकर पेस्ट बनायें और पीठ पर लगायें। कुछ देर तक इंतजार करें और बाद में ठंडे पानी से धो डालें।

मुल्तानी मिट्टी
मुल्तानी मिट्टी त्वचा से अतिरिक्त तेल सोखने में मदद करती है। यह रोमछिद्रों को खोलती है और पीठ के दाग-धब्‍बों का उपचार करती है। दाग-धब्‍बों को दूर करने के लिए थोड़ी सी मुल्तानी मिट्टी पाउडर लेकर उसका पेस्‍ट बना लें और इसे अपनी पीठ पर लगायें। आप चाहे तो मुल्तानी मिट्टी में चन्दन पाउडर भी मिला सकते हैं।
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सावधान! त्‍वचा को नुकसान भी पहुंचा सकता है जैतून का तेल

त्‍वचा के लिए खतरनाक जैतून का तेल
लगभग हर चीज के फायदे के साथ-साथ नुकसान भी होते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं जैतून के तेल के बारे में। हालांकि जैतून के तेल को स्‍वास्‍थ्‍य और त्‍वचा के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। लेकिन आप त्‍वचा के लिए इसके साइड-इफेक्ट का नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। बाजार में मिलने वाले जैतून के तले में कई प्रकार के केमिकल होते हैं जो त्‍वचा के लिए बहुत नुकसानदायक होते हैं। अगर आपको त्‍वचा पर इसके होने वाले साइड इफेक्‍ट की जानकारी हो तो आप सावधानी बरत सकते हैं और इसके इस्‍तेमाल का सही तरीका जान सकते हैं। आइए त्‍वचा से जुड़े इसके साइड इफेक्‍ट की जानकारी लेते हैं।

एलर्जी की समस्‍या
एलर्जी के समस्‍या होने पर जैतून के तेल को त्‍वचा पर इस्‍तेमाल करने से बचें, नहीं तो आपकी समस्‍या ज्‍यादा हो सकती है। अगर आपने इस्‍तेमाल कर लिया है तो किसी भी तरह की एलर्जी से बचने के लिए डॉक्‍टर से सलाह लें।

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त्वचा पर रैशेज
हालांकि जैतून तेल को लगाने से चेहरे पर चमक आती है। लेकिन सिबम के अतिरिक्‍त स्राव के कारण ऑयली स्किन वालों को इसे लगाने से बचना चाहिए, क्‍योंकि जैतून के तेल के इस्‍‍तेमाल से त्‍वचा पर चकत्‍ते, खुजली या लाल निशान हो सकते है।

मुहांसों की समस्‍या
जैतून के तेल से आपकी त्‍वचा पर मुहांसों की समस्‍या भी हो सकती है। अगर आप इसे त्‍वचा पर लगाते हैं तो जैतून का तेल भारी होने के कारण त्‍वचा में आसानी से अवशोषित नहीं होता, जिससे त्‍वचा की ऊपरी सतह पर परत इकट्ठी हो जाती है और धूल-मिट्टी त्‍वचा पर जमने के कारण कील मुहांसे हो सकते है।

ड्राई स्किन पर नुकसान
ऑयली स्किन के साथ-साथ जैतून का तेल ड्राई स्किन के लिए भी नुकसानदायक होता है। कुछ शोधों के अनुसार, जैतून के तेल में ऑलिक एसिड की मौजूदगी ड्राई स्किन के प्राकृतिक मॉश्चराइजर को खत्म कर देता है।

ब्‍लैक हैड्स की समस्‍या
जैतून का तेल ज्यादा ऑयली होने के कारण त्वचा पर ब्‍लैक हैड्स की समस्‍या का कारण भी बन सकता है। जैतून के तेल को लगाने से त्वचा में रोम छिद्रों में मिट्टी जमा होती और कोशिकाएं भी मृत हो जाती हैं।

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एसिडिटी भगाए, पाचन सही करे
इस जूस को पीने से एसिडिटी खत्‍म हो जाती है। अगर आपको जलन और एसिडिटी बनने की दिक्‍कत है तो यह जूस आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। इस प्राकृतिक ड्रिंक में ओमेगा-3 फैट्टी एसिड होता है जो शरीर की पाचन क्रिया को दुरूस्‍त बना देता है।

दिल का स्‍वास्‍थ्‍य
इस जूस को पेय को पीने से शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल नहीं बढ़ता है और ओमेगा-3 होने की वजह से रक्‍त का संचार भी सही से होता रहता है। ऐसे में दिल के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के लिए यह सबसे अचछा पेय पदार्थ है।

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हाइपरटेंशन दूर करना
उच्‍च रक्‍तचाप और हाइपरटेंशन की समस्‍या से जो लोग परेशान रहते हैं उन्‍हें इसके सेवन से फायदा होगा क्‍योंकि इसमें पौटेशियम की भरपूर मात्रा होती है और इसके सेवन से रक्‍तचाप सही हो जाता है।

कब्‍ज दूर भगाएं
कब्‍ज की समस्‍या को यह पेय कुछ ही समय में दूर कर देता है क्‍योंकि इसमें फाइबर की मात्रा काफी अच्‍छी होती है। अगर किसी को पाइल्‍स की दिक्‍कत है तो उसमें भी यह पेय लाभकरी होता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए
इस पेय को प्रतिदिन पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, और शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। साथ ही संक्रमित बीमारियों की चपेट में जल्‍दी आने से बचाव भी होता है।

कैस्टर ऑयल और बेकिंग सोडा के 4 अद्भुत फायदे

कैस्‍टर ऑयल और बेकिंग सोडा
वर्षों से इस्तेमाल हो रही प्राकृतिक उपचार औषधियों के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ने लगी है, एलोपैथी दवाओं के दुष्‍परिणाम से बचने के लिए लोग फिर से पुरानी व गुणकारी औषधियों को अपना रहे हैं। इसी का एक और उदाहरण है अरंडी का तेल और बेकिंग सोडा का ये मिश्रण जो बहुत सारी समस्‍याओं को राहत दे सकता है। अरंडी के तेल के अनगिनत स्वास्थ्य फायदे हैं। इस तेल का एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव पड़ता है। इस तेल को बेकिंग सोडा के साथ मिलाकर इस्‍तेमाल करने से कई प्रकार के रोगों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। तो आइए हम आपको इस स्‍लाइड शो के माध्‍यम से ऐसी ही कुछ बीमारियों के बारे में बता रहें है जिसमें कैस्‍टर ऑयल और बेकिंग सोडा बहुत ही फायदेमंद हैं।

अल्‍सर से दिलाए छुटकारा
कैस्टर ऑयल को बेकिंग सोडा के साथ मिलाकर लगाने से मिनटों अल्सर से राहत मिलती है। ये कॉर्न के प्रभावी इलाज में भी सहायक है। इसमें फैटी एसिड होता है, जिसे त्वचा आसानी से अवशोषित कर लेती है। ये ओवेरियन सिस्ट को भी खत्म करता है।

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काले धब्‍बे दूर करे
बेकिंग सोडा और कैस्‍टर ऑयल मिलाकर चेहरे पर लगाने से काले धब्बे समाप्त हो जाते हैं। साथ ही चेहरे की रंगत को बढ़ा देता है।

स्किन कैंसर में है लाभदायक
बेकिंग सोडा और कैस्‍टर ऑयल का इस्‍तेमाल स्किन कैंसर के इलाज के लिए बहुत प्रभावशाली काम करता है, इसके मिश्रण को रेगुलर मालिश करने से स्किन कैंसर जैसी बीमारी को दूर किया जा सकता है।

बालों के लिए है चमत्‍कारी
पुराने समय में कैस्टर ऑयल बालों के तेल के रूप में उपयोग किया जाता था, लेकिन उसका स्‍थान अब नारियल ने ले लिया है। क्योंकि कैस्‍टर ऑयल प्रकृति में मोटा है और यह खुशबूदार नही होता है। जबकि कैस्‍टर ऑयल को सिर में लगाया जाए तो इससे बाल घने, काले होते हैं। यहां तक कि जिनके बाल झड़ चुके हैं उनके दोबारा उगने की संभावना बढ़ जाती है। खोपड़ी पर अरंडी के तेल को लगायें। खोपड़ी के बालों पर गर्म अरंडी के तेल का उपयोग करना बेहतर है। एक घंटे के बाद शैंपू से धो डालें।

शहद में भीगे आंवले के हैं ये 7 अद्भुत फायदे

शहद में भीगे आंवले के सेहतमंद गुण
आंवला के स्‍वास्‍थ्‍य लाभों के बारे में तो आपने सुना ही होगा। लेकिन आंवला के साथ शहद का सेवन कहीं अधिक स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक होता है। साथ शहद में मिलाने से आंवले का खट्टा स्‍वाद स्‍वादिष्‍ट हो जाता है। शहद में आंवला भिगोने से न केवल आंवला कई महीनों तक प्रिजर्व रहता है, बल्कि उसके स्‍वास्‍थ्‍य लाभ और स्‍वाद भी बढ़ जाता है। आंवले और शहद के संयोजन से आप दोनों के स्‍वास्‍थ्‍य लाभों को फायदा उठा सकते हैं। इसे बनाने के लिए एक जार को आधा शहद से भर लें फिर उसमें आंवला भिगोकर, ढक्‍कन को बंद कर दें। कुछ दिनों के बाद आप पायेंगे बिल्‍कुल घर में बने मुरब्‍बे जैसे थोड़ी से मिश्रण के साथ नर्म आंवला। आइए इस स्‍लाइड शो के माध्‍यम से जानें शहद में भीगे आंवले के अद्भुत स्‍वास्‍थ्‍य लाभों के बारे में।

बालों को बनाये हेल्‍दी
शहद और आंवले के मिश्रण को बालों में लगाने से बाल सुंदर, मुलायम और कहीं अधिक घने होते है। साथ ही यह उपाय बालों को झड़ने से बचाता है और कमजोर बालों को मजबूत बनाता है। प्रभावी परिणाम पाने के लिए आप अपने कंडीशनर को शहद और आंवला के मिश्रण से बदल सकते हैं।

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एजिंग के लक्षण को रोकें
नियमित रूप से शहद में भीगे आंवला की एक चम्‍मच खाना आपको सदा जवां बनाये रखने में मदद करता है। यह आपको जरूरी एनर्जी प्रदान कर शरीर को फिर से जवां रखता है। साथ ही चेहरे से झुर्रियों और फाइन लाइन को भी हटाता है। तो देर किस बात कि अगर आप फिर से जवां बने रहना चाहते हैं तो इस उपाय को आज से ही अपनायें।

लिवर को मजबूत बनाये और पीलिया रोकें
शहद में भीगे आंवले को खाने से लिवर स्‍वस्‍थ रहता है, और पीलिया के इलाज में भी मदद मिलती है। यह शरीर में संचित पित्‍त दोष और लिवर से विषाक्‍त पदार्थों को दूर करता है, जिससे लिवर को प्रभावी ढंग से काम करने में मदद मिलती है।

पाचन समस्याओं में लाभकारी
शहद में भीगा आंवला अपच और एसिडिटी का सबसे अच्‍छा उपाय है। यह आपकी भूख को बढ़ाने के साथ आहार के उचित पाचन में भी मदद करता है। शहद में भीगे आंवला और इसका मिश्रण पीने से कब्‍ज और बवासीर से राहत मिलती है।

अस्थमा से बचाव
शहद में आंवला खाने से अस्‍थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस संबंधी अन्‍य समस्‍याओं से राहत मिलती है। एंटीऑक्‍टसीडेंट से भरपूर होने के कारण यह उपाय फेफड़ों से विषाक्‍त पदार्थों और मुक्‍त कणों को हटाने में मदद करता है, इस तरह फेफड़ों से रक्‍त वाहिआकाओं के संकुचन का कारण बन, अस्‍थमा के अटैक को रोकता है।

सर्दी, खांसी और गले के संक्रमण को दूर करें
शहद में भीगे आंवला की एक बड़ी चम्‍मच खाने से सर्दी, खांसी और गले में खराश से जल्‍द राहत मिलती है। तुरंत राहत पाने के लिए आप इसमें थोड़ा सा अदरक का रस भी मिला सकते हैं। अपने एंटी-इंफेक्टिव गुणों के कारण शहद और आंवला सभी तरह के संक्रमण को दूर करता है।

शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालें
आंवला और शहद से बना काढ़ा शरीर से विषाक्‍त पदार्थ निकालने के साथ सभी हानिकारक मुक्‍त कणों को हटाता है। इससे वजन बढ़ने और अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याओं का जोखिम कम होता है। नियमित रूप से सुबह के समय काढ़ा पीने और शहद में भी‍गा आंवला खाने से आंतों और खून से सभी विषाक्‍त पदार्थ दूर होते हैं।

अंगूठी के निशान से छुटकारा पाने के टिप्स

क्यों पड़ता है अंगूठी का निशान
अंगूठी कई कारणों से लोग पहनते हैं, किसी के लिए यह शादी की निशानी है तो किसी के लिए धर्म का तमगा तो किसी की मुराद पूरी करने वाली इच्छा शक्ति। कारण कोई भी हो लोग अंगूठी एक दिन के लिए नहीं बल्कि कई महीनों या फिर कई सालों के लिए पहनते हैं। इतने लंबे समय तक अंगूठी पहनने के कारण उंगली पर निशान पड़ना स्वाभाविक है। लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाये तो इसके कारण ये निशान हमेशा के लिए रह सकते हैं। इनके निशान को हटाना कोई मुश्किल काम नहीं है। आप इसे आसानी से अपने घर पर भी हटा सकते हैं। इस स्लाइडशो में हम आपको अंगूठी के निशान हटाने के तरीके बता रहे हैं।

एक्सफोलिएट करें
अंगूठी के निशान हो हटाने का यह सबसे आसान तरीका है। एक्सफोलिएट करने से त्वचा की बाहरी यानी मृत कोशिकायें हट जाती हैं और इसके साथ त्वचा के दाग-धब्बे भी हट जाते हैं। हफ्ते में कम से कम दो बार अंगूठी वाले हिस्से को एक्ससफोलिएट करें।
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सनस्क्रीन लगायें
उंगली पर जब भी अंगूठी के निशान पड़ते हैं तो वे अलग ही दिखायी पड़ते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्यों कि अंगूठी वाले हिस्से पर त्वचा में सूर्य की किरणों का असर नहीं पड़ता और बाकी त्वचा टैन हो जाती है। इसलिए अगर आप अंगूठी पहनते हैं तो बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लोशन जरूर लगायें। त्वचा को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाने के लिए भी सनस्क्रीन लगाना जरूरी है।

घरेलू नुस्खे भी हैं
सामान्य समस्या से लेकर खतरनाक बीमारी तक का उपचार आपके किचन में ही मौजूद होता है। अंगूठी के निशान को हटाने के लिए आप घरेलू नुस्खों को आजमायें। एक कटोरी में एक नींबू और एक चम्मच शहद मिलायें। इसका मिश्रण बनाकर निशान वाले हिस्से पर लगायें और 15 मिनट के लिए छोड़ दें। इस तरीके को सप्ताह में तीन दिन प्रयोग करें, इससे त्व‍चा मुलायम भी हो जायेगी।

हर्बल तरीके
अंगूठी के निशान को हटाने का यह सबसे आसान और कारगर तरीका है। एलोवेरा जेल को निशान वाली जगह पर अच्छे से लगायें। एलोवेरा जेल को हर रोज कम से कम तीन बार प्रयोग करें। इससे जल्द से जल्द अंगूठी के निशान से छुटकारा मिल जायेगा।

ये तरीके भी हैं
बहुत ही कसी हुई अंगूठी न पहनें, इससे बहुत जल्दीन निशान बन जाता है। कोशिश करें कि अंगूठी हल्की और ढीली हो। अंगूठी पहनने के बाद इस हिस्से को रोज एक्सफोलिएट करें। नियमित रूप से मैनीक्योकर करायें, मैनीक्योर कराने से त्वचा में निशान नहीं बनते। आप चाहें तो पार्लर में या फिर घर पर ही मैनीक्योर कर सकते हैं।

सेहत के लिए अमृत है घड़े का पानी

अमृत है घड़े का पानी
पीढ़ियों से, भारतीय घरों में पानी स्‍टोर करने के लिए मिट्टी के बर्तन यानी घड़े का इस्तेमाल किया जाता है। आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो इन्हीं मिट्टी से बने बर्तनो में पानी पीते है। ऐसे लोगों का मानना है कि मिट्टी की भीनी-भीनी खुशबू के कारण घड़े का पानी पीने का आनंद और इसका लाभ अलग है। दरअसल, मिट्टी में कई प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता पाई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी के बर्तनों में पानी रखा जाए, तो उसमें मिट्टी के गुण आ जाते हैं। इसलिए घड़े में रखा पानी हमें स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

चयापचय को बढ़ावा
नियमित रूप से घड़े का पानी पीने से प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। प्‍लास्टिक की बोतलों में पानी स्‍टोर करने से, उसमें प्‍लास्टिक से अशुद्धियां इकट्ठी हो जाती है और वह पानी को अशुद्ध कर देता है। साथ ही यह भी पाया गया है कि घड़े में पानी स्‍टोर करने से शरीर में टेस्‍टोस्‍टेरोन का स्‍तर बढ़ जाता है।

पानी में पीएच का संतुलन
घड़े का पानी पीने का एक और लाभ यह भी है कि इसमें मिट्टी में क्षारीय गुण विद्यमान होते है। क्षारीय पानी की अम्लता के साथ प्रभावित होकर, उचित पीएच संतुलन प्रदान करता है। इस पानी को पीने से एसिडिटी पर अंकुश लगाने और पेट के दर्द से राहत प्रदान पाने में मदद मिलती हैं।

गले को ठीक रखे
आमतौर पर हमें गर्मियों में ठंडा पानी पीने की तलब होती है और हम फिज्र से ठंडा पानी ले कर पीते हैं। ठंडा पानी हम पी तो लेते हैं लेकिन बहुत ज्‍यादा ठंडा होने के कारण यह गले और शरीर के अंगों को एक दम से ठंडा कर शरीर पर बहुत बुरा प्रभावित करता है। गले की कोशिकाओं का ताप अचानक गिर जाता है जिस कारण व्याधियां उत्पन्न होती है। गले का पकने और ग्रंथियों में सूजन आने लगती है और शुरू होता है शरीर की क्रियाओं का बिगड़ना। जबकि घडें को पानी गले पर सूदिंग प्रभाव देता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद
गर्भवती को फ्रिज में रखे, बेहद ठंडे पानी को पीने की सलाह नहीं दी जाती। उनसे कहा जाता है कि वे घड़े या सुराही का पानी पिएं। इनमें रखा पानी न सिर्फ उनकी सेहत के लिए अच्‍छा होता है, बल्कि पानी में मिट्टी का सौंधापन बस जाने के कारण गर्भवती को बहुत अच्‍छा लगता है।

वात को नियंत्रित करे
गर्मियों में लोग फ्रिज का या बर्फ का पानी पीते है, इसकी तासीर गर्म होती है। यह वात भी बढाता है। बर्फीला पानी पीने से कब्ज हो जाती है तथा अक्सर गला खराब हो जाता है। मटके का पानी बहुत अधिक ठंडा ना होने से वात नहीं बढाता, इसका पानी संतुष्टि देता है। मटके को रंगने के लिए गेरू का इस्तेमाल होता है जो गर्मी में शीतलता प्रदान करता है। मटके के पानी से कब्ज ,गला ख़राब होना आदि रोग नहीं होते

विषैले पदार्थ सोखने की शक्ति
मिटटी में शुद्धि करने का गुण होता है यह सभी विषैले पदार्थ सोख लेती है तथा पानी में सभी जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाती है। इसमें पानी सही तापमान पर रहता है, ना बहुत अधिक ठंडा ना गर्म

कैसे ठंडा रहता है पानी
मिट्टी के बने मटके में सूक्ष्म छिद्र होते हैं। ये छिद्र इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हें नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता। पानी का ठंडा होना वाष्पीकरण की क्रिया पर निर्भर करता है। जितना ज्यादा वाष्पीकरण होगा, उतना ही ज्यादा पानी भी ठंडा होगा। इन सूक्ष्म छिद्रों द्वारा मटके का पानी बाहर निकलता रहता है। गर्मी के कारण पानी वाष्प बन कर उड़ जाता है। वाष्प बनने के लिए गर्मी यह मटके के पानी से लेता है। इस पूरी प्रक्रिया में मटके का तापमान कम हो जाता है और पानी ठंडा रहता है।

पेशाब की जलन को तुरंत दूर करते हैं ये 5 घरेलू उपाय

पेशाब की जलन के लिए घरेलू उपाय
मेरी सहेली पुष्‍पा अक्‍सर पेशाब में जलन की शिकायत करती है, गर्मी के दिनों में तो उसे अक्‍सर यह समस्‍या होती है। लेकिन इस बारे में किसी से बात नहीं करती। पुष्‍पा की तरह बहुत से लोगों को यह समस्‍या होती है, लेकिन वह इसे नजरअंदाज कर देते है। हालांकि पेशाब में जलन बहुत ही आम समस्‍या है, जो मूत्र मार्ग में संक्रमण, किडनी में स्‍टोन और हिहाइड्रेशन आदि के कारण होती है। लेकिन गर्मी के दिनों में कई बार अत्‍यधिक गर्म चीजों का सेवन करने से शरीर का ताप बढ़ने से भी यह समस्‍या हो सकती है। आइए जानते हैं कि पेशाब में जलन को कौन से घरेलू उपायों द्वारा ठीक किया जा सकता है।

पानी और नारियल पानी
शरीर में पानी की कमी से भी पेशाब का रंग पीला और उसमें जलन होने लगती है, इसलिए दिनभर में खूब सारा पानी पीने की आदत डालें। साथ ही नारियल पानी का सेवन भी करें क्‍योंकि यह डिहाइड्रेशन तथा पेशाब की जलन को ठीक करता है। आप चाहें तो नारियल पानी में गुड और धनिया पाउडर मिलाकर भी पी सकते हैं।

गुणों का भंडार ककड़ी
ककड़ी को गुणों का भंडार माना जाता है। यह शीतल व पाचक होने के कारण इसका सेवन करने से पेशाब खुलकर आता है और पेशाब में जलन भी नहीं होती। ककड़ी में क्षारीय तत्व भी पाए जाते है, जो मूत्र की कार्यप्रणाली के सुचारु रूप से संचालन में सहायक होती हैं।

विटामिन सी से भरपूर फलों का सेवन
विटामिन सी से भरपूर फल यानी सिट्रिक फ्रूट मूत्र संक्रमण पैदा करने वाले बैक्‍टीरिया को मारता है। जिससे पेशाब में जलन नहीं होती। इसलिए विटामिन सी से भरपूर फल खाइये। इसके अलावा विटामिन सी से भरपूर आंवला भी पेशाब की जलन को ठीक करने में सहायक होता है। इलायची और आंवले के चूर्ण समान भाग में मिलाकर पानी के साथ लेने से पेशाब की जलन ठीक होती है।

मलाई रहित ठंडा दूध और कलमी शोरा
कलमी शोरा, बड़ी इलायची के दाने, मलाई रहित ठंडा दूध व पानी पेशाब की जलन को दूर करने में मदद करता है। कलमी शोरा व बड़ी इलायची के दाने पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। एक चम्‍मच चूर्ण लेकर उसपर एक भाग दूध व एक भाग ठंडा पानी मिक्‍स करके पी लें। इस उपाय को दिन में तीन बार लें। बस दो दिन तक इस उपाय को इस्‍तेमाल करने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है।

अन्‍य उपाय
अनार का जूस नियमित रूप से दिन में दो बार पीने से पेशाब की जलन दूर होती है। फालसा भी पेशाब की जलन दूर करने में मददगार होता है। पिसी हुई हल्दी को एक-एक चम्मच सुबह-शाम लेने से लाभ होता है। इस रोग में सत्तू खाना भी काफी लाभकारी माना जाता है।

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7 अद्भुत एंटीवायरल फूड के बारे में जानें

प्राकृतिक एंटीवायरल चीज़ें
हम सभी जानते हैं कि आम सर्दी और फ्लू जैसे वायरस जनित संक्रमण हमें मौसमी में परिवर्तन के साथ कैसे परेशान करते हैं। एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करने पर भी वे वायरस को प्रभावित नहीं कर पाते हैं। ऐसे में एंटी-वायरल गुणों वाले कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन इस तरह के मामूली संक्रमण के खिलाफ शरीर की रक्षा करने के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि बुखार, सर्दी या खांसी आदि से लड़ने में दवाएं अच्छी तरह से काम करती हैं, तो ऐसे में एंटी-वायरल गुणों वाले ये खाद्य पदार्थों का सेवन आपके शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। चलिए आज ऐसी ही कमाल की 7 प्राकृतिक एंटीवायरल चीज़ों के बारे में जानते हैं।

अदरक (GINGER)
अदरक एक शक्तिशाली मसाला है जिसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। अदरक और शहद का सेवन कई प्रकार की मौसमी स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए किया जाता है। साथ ही जब आप फ्लू या सर्दी से पीड़ित होते हैं तो अदरक की चाय पीने से काफी राहत मिलती है।

हल्दी (TURMERIC)
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन (Curcumin) नाम का तत्व एक अच्छा प्राकृतिक एंटी-वायरल होता है। अपने भोजन में हल्दी का प्रयोग करने से कई स्वास्थ्य समस्या को रोकने में मदद मिलती है। फ्लू या सर्दी आदि समस्याओं में भी हल्दी के दूध का सेवन बेहद लाभदायक होता है।

लहसुन (GARLIC)
लहसुन भी एक कमाल का औषधीय घटक होता है, जिसमें जीवाणुरोधी और एंटी-वायरल दोनों ही गुण पाए जाते हैं। कुछ सूत्रों का कहना है कि कच्चे लहसुन खाने से वायरल संक्रमण होने का जोखिम 60 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

मशरूम (MUSHROOMS)

अधिकांश खाए जा सकने वाले मशरूम एंटीवायरल यौगिकों के भरपूर होते हैं। एंटीवायरल गुणों के मामले में शिटाकी मशरूम सबसे अच्छे होते हैं। इसका सेवन करने से फ्लू या सर्दी जैसी वायरल समस्याओं में लाभ होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत बनती हैं।

ग्रीन टी, ऑलिव की पत्ततियां और लीकोरिस (LICORICE)

ग्रीन टी में कैटेचिन्स (catechins) होते हैं। माना जाता है कि इनसे वायरस के कुछ प्रकारों को रोका जा सकता है। इसलिए रोज़ाना एक कप ग्रीन टी का सेवन करें। इसके अलावा जैतून की पत्तियों में भी जीवाणुरोधी और एंटी-वायरल दोनों ही गुण पाए जाते हैं। इससे वायरल को रोका जा सकता है। लीकोरिस (Licorice) में भी शक्तिशाली एंटीवायरल गुण होते हैं और ये वायरस को कोशिका झिल्ली पर हमला करने से रोकता है।

6 प्राकृतिक तरीकों से कम करें मसूड़ों की सूजन

मसूड़ों की सूजन दूर करें प्राकृतिक उपाय
मसूड़ों की सूजन एक बहुत ही आम समस्‍या है। इसके कई कारण हो सकते है जैसे जिंजीवाइटिस, पोषक तत्वों की कमी, मुंह में होने वाले इंफेक्‍शन आदि। सामान्यत मसूड़ों का रंग गुलाबी होता है लेकिन समस्‍या होने पर मसूड़ों का रंग लाल हो जाता है। कुछ मामलों में तो मसूड़ों से खून भी आने लगता है। इससे बहुत तकलीफ होती है। इससे बहुत अधिक दर्द तथा असुविधा होती है। यहां तक कि इससे ब्रश करने और खाना चबाने में भी कठिनाई आती है। सूजन होने से मसूड़े ढीले पड़ जातें हैं जिससे दांतों का नुकसान होता है। इसका इलाज न होने पर दांत हिलकर गिरने लगते हैं। हालांकि समस्‍या से बचने के लिए बाजार में कई तरह के माउथवॉश और पेस्‍ट उपलब्ध हैं, लेकिन यह दर्द और सूजन को कम करने में बहुत समय लेते हैं। इस समस्या से तुरंत आराम पाने के लिए आप घरेलू उपचार अपना सकती है। जो बहुत सरल और प्रभावकारी होते है।

बबूल की छाल
मसूड़ों की सूजन से छुटकारा पाने के लिए यह बहुत ही पुराना दादी मां का नुस्‍खा है। बबूल की छाल मसूड़ों की सूजन दूर करने में जादू की तरह काम करती है। समस्‍या होने पर बबूल की छाल को पानी में उबालकर माउथवॉश बनाकर इस्‍तेमाल करें। तुरंत राहत पाने के लिए दिन में दो से तीन बार इस घरेलू माउथवॉश से कुल्‍ला करें।
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बढि़या घरेलू उपचार लौंग
मसूड़ों की सूजन दूर करने के लिए यह पारंपरिक उपाय बहुत प्रभावकारी है। लौंग में मौजूद यूगेनोल में एंटीऑक्सीडेंट तथा सूजन दूर करने के गुण होते है जो सूजन से आराम दिलाने में बहुत प्रभावी होते है। समस्‍या होने पर एक लौंग लेकर उसे मसूड़ों पर धीरे-धीरे रगड़ें। इसके अलावा आप लौंग की जोड़ी को मसूड़ों के पास रखकर कुछ समय के लिए छोड़ दें। लौंग का तेल भी मसूड़ों की सूजन के उपचार में लाभदाय‍क होता है।

कैस्टर ऑयल
कैस्‍टर ऑयल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मसूड़ों की सूजन से राहत दिलाने में एक प्रभावी घरेलू उपचार है। सूजन वाले मसूड़े पर इसे लगाने से दर्द तथा सूजन से आराम मिलता है।

एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण वाला नींबू
विटामिन सी से भरपूर नींबू का सिट्रिक प्रभाव और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मुंह में बैक्‍टीरिया को पनपने से रोकता है। समस्‍या होने पर एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू निचोड़कर, दांतों में ब्रश करने के बाद इसे माउथवॉश के रूप में उपयोग करना चाहिए।

लगभग हर बीमारी में उपयोगी एलोवेरा
एलोवेरा हर बीमारी से लड़ने वाली औषधि है। एलोवेरा जैल में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण मौजूद होते है। यह मसूड़ों की सूजन को दूर करने, मसूड़ों से खून आने तथा मुंह के इंफेक्‍शन जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायक होती है। समस्‍या से बचने के लिए एलोवेरा जैल को मसूड़ों पर लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। फिर पानी से कुल्‍ला कर लें। इस उपचार को तब तक दोहराये जब तक समस्‍या ठीक न हो जाये।

सरसों का तेल
सरसों के तेल में एंटी-बैक्टीरियल गुण सूजन को दूर करने तथा मसूड़ों की सूजन से राहत पहुंचाने में सहायक होते है। समस्‍या होने पर सरसों के तेल में थोडा नमक मिलाकर, इस पेस्‍ट को मसूड़ों पर लगायें। इस उपचार का बार बार उपयोग करने से आपको जल्द ही इंफेक्‍शन से छुटकारा मिल जाएगा।

जानें, रोगों के इलाज में कैसे करें मिट्टी का उपयोग

रोगों के इलाज में मिट्टी का उपयोग
धरती के साथ मां शब्द को जोड़कर प्रयोग किया जाता है। कहा जता है कि सभी मिट्टी से पैदा हुए हैं और मिट् में ही विलीन हो जाते हैं। हो भी क्यों ना, मिट्टी दुनिया का सारा कूड़ा और सभी प्रकार की गन्दगी को भीतर समा लेती है और खुद को शुद्ध भी रखती है। जमीन के अंदर जो भी दबाया वो मिट्टी ही बन जाता है। मिट्टी में बड़ी ताकत होती है, और इसका उपयोग कई तरह के रोगों के इलाज में भी किया जाता है।

मिट्टी के चिकित्सीय गुण
मट्टी नमें अनेक चिकित्सकीय गुण होते हैं, जैसे इसमें विषाक्त पदार्थों को भीतर खींच लेने का गुण होता है। त्वचा रोगों जैसे फोड़े-फुंसी, सूजन, दर्द आदि होने पर भी मड बथ काफी लाभदायक होती है। मिट्टी जलन, स्राव और तनाव आदि को दूर करती है। शरीर की अतिरिक्त ताप को मिट्टी सामान्य करती है। मिट्टी शरीर को ठंडक पहुंचाती है। यह तन की दुर्गंध और दर्द आदि को भी दूर करने वाली होती है। इसके अलावा यह शरीर को चुम्बकीय ताकत देती है जिससे उसमें चुस्ती-फुर्ती और ताकत आती है।

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इस्तेमाल में आने वाली मिट्टी
‘मिट्टी चाहे कोई सी भी किस्म की क्यों न हो लेकिन होनी साफ-सुथरी जगह की चाहिए जैसे जहां सूरज की रोशनी पहुंचती हो तथा जमीन से दो या ढाई फुट से निकाली हुई हो। हर मिट्टी को धूप में सुखाकर और छानकर इस्तेमाल करना सबसे अच्छा है। इसके अलावा दीमक के टीले की भुरभुरी मिट्टी भी बहुत गुणकारी होती है। नहाने, सिर धोने या तैलीय त्वचा के फेस पैक के लिए मुलतानी मिट्टी बहुत लाभकारी होती है।

क्या हैं मिट्टी के अलग-अलग प्रयोग
मिट्टी में सोने से कई फायदे होते हैं। इससे नींद न आना, स्नायु की कमजोरी और खून की खराबी आदि रोग दूर होते हैं। इसके अलावा मिट्टी की मालिश-मिट्टी को शरीर पर अच्छी तरह से मलने से और शरीर पर लगाने से जहरीले तत्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं। साबुन के स्थान पर शुद्ध मिट्टी लगाकर नहाने से कई प्रकार के रोगों में फायदा होता है। मिट्टी पर नंगे पैर चलने से गुर्दे के रोगों में आराम होता है, आंखों की रोशनी बढ़ती है और शरीर को चुम्बकीय शक्ति प्राप्त होती है।

जानें क्या हैं हरड के कमाल के फायदे

हरड के कमाल के फायदे
हरड़ एक प्रकार की आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है, जो त्रिफला चूर्ण का एक अंग है और कई प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभों वाली होती है। इसे हरीतकी भी कहा जाता है। देखने में छोटी सी हरड़ अनेक गुणों का भंडार होती है। इसे हमेशा असरदार साबित होने वाली औषधि कहा जाता है। एक हरड का नित्य सेवन लम्बी आयु देता है, इसी लिए देसी कहावत में कहा भी जाता है कि एक बार को मां नाराज हो सकती है, लेकिन हरड नहीं। चलिए आज हरड के कुछ कमाल के फायदों के बारे में जानते हैं और साथ ही जानते हैं कि हरड का सेवन कैसे फायदा पहुंचाता है।

वजन कम करने में है कमाल
माना जाता है कि हरड़ अधिकांश रोगों का हरण करने की क्षमता वाली होती है, इसलिए इसे हरीतकी कहा जाता है। हरड़ पेट को साफ करने और पाचन तंत्र को सुधार कर इसे मजबूत करने के लिए जानी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार यह जड़ी-बूटी खाए गए पोषक तत्‍वों का अच्‍छे से समावेश कर शरीर को स्‍वस्‍थ बनाती है। इसके अलावा यह जड़ी बूटी शरीर को डिटॉक्‍स कर (विशेष रूप से पेट को), वजन कम करने में भी मददगार साबित होती है।

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त्वचा संबंधी समस्याओं को दूर करें और सौंदर्य बनाए
हरड का काढ़ा बनाकर पीने से यह त्वचा संबंधी एलर्जी आदि में लाभ देती है। इसके सेवन के लिए हरड़ के फल को पानी में उबालकर इसका काढ़ा बनाएं और दिन में दो बार इसाका नियमित रूप से सेवन करें। फंगल एलर्जी होने पर उपचार के लिए हरड़ के फल और हल्दी को पीस कर बनाए लेप को प्रभावित अंग पर दिन में दो बार लगाएं, एलर्जी जल्द ठीक हो जाएगी। इसके इस्तेमाल से बाल काले, चमकीले बनते हैं। उपयोग के लिए हरड़ के फल को नारियल तेल में उबालकर लेप बनाएं और इसे अपने बालों पर लगाएं।

कब्ज से राहत दिलाने में असरदार
कब्ज की समस्या से परेशान लोगों के लिए हरड़ का प्रयोग वरदान की तरह होता है। जर्नल केमिको बायोलॉजिकल इंटरेक्शन में प्रकाशित एक अध्‍ययन के मुताबिक, हरड़ में गल्लिक एसिड नाम का तत्‍व मौजूद होता है जो एचडीएल और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है और रक्त में प्लाज्मा इंसुलिन बढ़ जाता है। कब्ज़ दूर करने के लिए हरड़ के पल्प को चुटकीभर नमक के साथ खाएं या फिर 1/2 ग्राम लौंग अथवा दालचीनी के साथ लें।

हरड के कुछ अन्य लाभ

हरड़ का लेप पतले छाछ के साथ मिलाकर गरारे करने से मसूढ़ों की सूजन से राहत मिलती है और दांत दर्द में भी आराम होता है। उल्टी होने पर हरड़ और शहद का सेवन करने से उल्टियां रुक जाती हैं। वहीं हरड़ को पीसकर इसके लेप को आंखों के आसपास लगाने से आंखों के रोगों दूर होते हैं। छोटी हरड़ को पानी में घिसकर छालों पर लगाने से छाले ठीक होते हैं।

गाय का दूध सबसे खास, जानें इसके अमृत जैसे फायदे

गाय का दूध सबसे खास
गाय का दूध सर्वोत्‍तम आहार है इसे अमृत के सामान माना जाता है। गाय के दूध में कैल्शियम, प्रोटीन, आयोडीन, पोटैशियम, फैट, विटामिन डी, विटामिन बी और मिनरल्स होते हैं। साथ ही गाय के दूध में विटामिन ‘ए’ भी होता है जो किसी अन्‍य पशु के दूध में नहीं होता है। इसके अलावा गाय के दूध में पाया जाने वाला प्रोटीन हृदय रोग, डायबिटीज से लड़ने में कारगर और मानसिक विकास में सहायक होता है। गाय के दूध को पूर्ण भोजन माना गया है यानी कई दिन तक केवल गाय का दूध पीकर कोई भी एकदम स्‍वस्‍थ और ताकतवर बना रह सकता है। उसके शरीर में किसी आवश्‍यक तत्‍व की कमी नहीं पड़ेगी। आइए गाय के दूध के अमृत जैसे फायदों के बारे में जानें।

कभी नहीं होगा कैंसर
कैंसर का नाम सुनते ही अच्‍छे-अच्‍छों के पसीने छूटने लगते हैं। लेकिन अगर आपको कहा जाये कि गाय का दूध पीने से कैंसर से बचा जा सकता है तो आपको कैसा लगेगा! निस्संदेह शायद आप इस बात को जानने के बाद आज से ही गाय का दूध पीना शुरू कर देंगे। जी हां, देशी गाय की पीठ पर मोटा सा हम्प होता है! जिसमें सूर्य ग्रंथि यानी सन ग्लैंड्स पाई जाती है। इसकी खासियत यह है कि यह दूध को बेहद गुणकारी और अमूल्य औषधि के रूप में बदल देती है। यह सूर्य की किरणों के संपर्क में आते ही दूध में स्वर्ण का प्रभाव छोड़ती हैं। जिससे गाय के दूध में स्वर्ण तत्व समा जाते हैं। और अगर आप देशी गाय का दूध पीते हैं तो आपको कभी भी कैंसर का रोग नहीं होगा।

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अनेक प्रकार के मिनरल और पोषक तत्वों से भरपूर
वैज्ञानिकों के अनुसार गाय के दूध में लगभग 8 प्रकार के प्रोटीन, 6 प्रकार के विटामिन, 21 प्रकार के एमिनो एसिड, 11 प्रकार के चर्बीयुक्त एसिड, 25 प्रकार के मिनरल तत्‍व, 16 प्रकार के नाइट्रोजन, 4 प्रकार के फास्फोरस, इसके अलावा मुख्य मिनरल जैसे कॉपर, आयरन, कैल्शियम, आयोडीन, फ्लोरिन, सिलिकॉन आदि भी पाये जाते हैं।

तुरंत शक्ति देता है गाय का दूध
प्रतिदिन गाय के दूध के सेवन से तमाम प्रकार के रोग नष्ट हो जाते हैं। एलोपैथी दवाओं, प्रदूषण आदि के कारण हवा, पानी एवं आहार के द्वारा शरीर में जो विष एकत्रित होता है, गाय के दूध में इसको नष्‍ट करने की शक्ति होती है। एक गिलास दूध में एक चम्मच देशी घी तथा तीन चम्मच शहद मिलाकर नित्य रात को दो माह तक पियें। बुढ़ापा शीघ्र नहीं आयेगा। शक्ति के साथ और सौंदर्य में वृद्धि होती रहेगी।

अन्‍य फायदे
कब्‍ज में गाय के दूध से बनी ताजी छाछ लगभग 5 ग्राम अजवाइन के साथ मिलाकर सुबह खाली पेट पिएं, आराम होगा।
पीलिया में गाय के दूध से बनी 50 ग्राम दही में 10 ग्राम हल्दी मिलाकर रोज सुबह खाली पेट खाने से आराम मिलता है।
आयुर्वेद के अनुसार गाय के दूध की छाछ में मसूर की दाल का उबला पानी मिलाकर पिएं। इससे भी बवासीर में होने वाला रक्तस्राव कम होता है।
गाय का दूध पीने से पेट में गैस की समस्या खत्म होती है क्योंकि इससे पाचन सही रहता है। साथ ही इससे शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है।
अगर आप बाल झड़ने की समस्‍या से परेशान है तो गाय के दूध से बना मट्ठा कुछ दिन रखकर इससे बाल धोएं, बाल झड़ने की समस्‍या दूर हो जाएगी।

आंखों के नीचे के डार्क सर्कल्स को कहें बाय-बाय, अपनाएं ये घरेलू नुस्खें

डार्क सर्कल से कैसे बचें
आंखों के नीचे पड़ने वाले डार्क सर्कल आपकी खूबसूरती बिगाड़ सकते हैं। यह समस्या कई वजहों जैसे शरीर में पोषक तत्वों की कमी होना, नींद न आना, मानसिक तनाव या फिर बहुत ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर काम करने के कारण भी हो सकती है। इन डार्क सर्कल की वजह से आपकी सुंदरता तो कम होती ही है साथ ही व्यक्ति थका हुआ और उम्रदराज भी नजर आता है। आइए जानें डार्क सर्कल को दूर करने के घरेलू नुस्खों के बारे में।

टमाटर
टमाटर के रस में, नींबू का रस,चुटकीभर बेसन और हल्‍दी मिला लें। इस पेस्‍ट को अपनी आंखों के चारों ओर लगाएं और 20 मिनट के बाद चेहरे को धो लें। ऐसा हफ्ते में 3 बार जरुर करें। इससे डार्क सर्कल धीरे-धीरे कम होने लगेगा।

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आलू
यह बहुत ही असरकारी नुस्खा है। रात में सोने से पहले चेहरा को अच्छे से साफ करें। इसके बाद आलू की पतली स्लाइस काटकर उन्हें आंखों पर 20 से 25 मिनट रखें। इसके बाद चेहरा को अच्छे से साफ कर लें।

गुलाब जल
गुलाब जल की मदद से डार्क सर्कल की समस्या से निजात पा सकते हैं। बंद आंखों पर गुलाब जल में भिगोई हुई रूई को आंखों पर रखें। ऐसा केवल 10 मिनट तक करें। ऐसा करने से आंखों के आस पास की त्‍वचा चमक उठेगी।

बादाम का तेल
काले घेरे से छुटकारा पाने के लिए बादाम के तेल बहुत फायदेमंद है। बादाम के तेल को आंखों के आस-पास लगाकर कुछ मिनटों के लिए छोड़ दें। फिर उंगलियों से 10 मिनट तक हल्की मालिश करें। इसके बाद चेहरा साफ कर लें।

चाय का पानी
चायपत्ती को पानी के साथ उबाल लें और फिर ठंडा होने के लिए रख दें। इसके बाद रुई के फाहे को उसमें भिगोकर आंखों के नीचे और आस-पास लगाएं। थोड़ी देर बाद पानी से चेहरा साफ कर लें। नियमित रूप से ऐसा करने से चेहरे के काले घेरे तेजी से कम हो जाएंगे।

टी बैग
डार्क सर्कल्स को दूर करने के लिए प्रयोग किए गए ठंडे टी-बैग्स का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। टी-बैग्स में मौजूद तत्व टैनिन आंखों के आसपास की सूजन और काली त्वचा को पहले जैसे करता है और आपको डार्क सर्कल से निजात मिलता है।

शहद और बादाम का तेल
बादाम के तेल और शहद को अच्छी तरह मिलाकर सोने के पहले आंखों के आसपास लगाएं और सारी रात लगा रहने दें। सुबह उठकर सामान्य पानी से चेहरा धो लें। हर रोज इस नुस्खे को आजमाने से कुछ ही दिनों में डार्क सर्कल दूर हो जाएगा।

पुदीना पत्‍ता
पुदीने की पत्‍तियों को पीस लें और आंखों के आस पास लगा लें। इसे कुछ देर तक इस पेस्ट को ऐसे ही छोड़ दें और फिर आंखों को पानी से धो लें। इससे आपको डार्क सर्कल से निजात पाने में काफी सहायता मिलेगी।

संतरे का रस और ग्‍िलसरीन
संतरे का रस विटामिन सी से भरपूर होता है जो कि त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है। संतरे के रस में ग्लिसरीन की कुछ बूंदे मिलाएं और इस पेस्ट को हर रोज आंखों और आस पास के एरिया पर लगाएं। यह डार्क सर्कल से निजात दिलाने का प्रभावशाली तरीका है।

मादक पदार्थों को छोड़ने के बाद की स्थिति से निपटने के 5 घरेलू नुस्‍खे

क्‍या है मादक पदार्थों को छोड़ने के बाद की स्थिति
मादक पदार्थों को छोड़ने के बाद की स्थिति ऐसी अवस्‍था है, जब लंबे समय की खपत के बाद आप नशीली दवाओं के उपयोग को अचानक से कम या कम कर देते हैं। इसके लक्षणों मे उल्‍टी, डायरिया, भूख की कमी, डिप्रेशन, पेट में ऐंठन आदि शामिल है। जब रोगी मादक पदार्थों की वापसी की तरफ रूख करता है, तो उसे ड्रग्‍स के लिए तीव्र लालसा का अनुभव होता है। लेकिन अगर आप किसी को बहुत प्‍यार करते हैं, और चाहते हैं वह पुरानी आदतों में वापस न जाये तो नशा वापसी के लिए घरेलू उपायों का इस्‍तेमाल कर उसे भयानक लक्षणों से बाहर ला सकते हैं। किसी भी नशे से बाहर आना सच में बहुत दर्दनाक होता है। लेकिन मादक पदार्थों को छोड़ने के बाद की स्थिति से निपटने के लिए घरेलू उपाय बहुत मददगार होते है। यह लत को सफलतापूर्वक छोड़ने में मरीज की मदद करते हैं।
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शरीर को डिटॉक्‍स करें पानी
यह बात तो हम सभी जानते हैं कि पानी में कई प्रकार के चिकित्‍सीय गुण होते हैं। इसलिए आपको इस बात को जानकार आश्‍चर्य नहीं होगा कि पानी मादक पदार्थों को छोड़ने और इसके कई लक्षणों से राहत देने में मदद करता है। चिकित्‍सा गुणों के अलावा इसमें डिटॉक्‍सीफाइंग गुण भी मौजूद होते है, जो शरीर से विषाक्‍त पदार्थों को दूर करने और मादक पदार्थों से होने वाले नकारात्‍मक प्रभाव से लड़ने में मदद करते है। एक दिन में कम से कम तीन लीटर पानी पीने से प्राकृतिक रूप से शरीर को डिटॉक्‍स कर नशा वापसी का सामना करने में मदद मिलती है।

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विटामिन सी से भरपूर नींबू
विटामिन सी से भरपूर नींबू, एक ऐसा पोषक तत्‍व है, जो शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्‍स करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्‍तेजित करने में मदद करता है। यह विटामिन रोगी को देने का सबसे अच्‍छा तरीका सुबह 3 से 4 ताजे नींबू का रस निकालकर खाली पेट देना है। हालांकि यह अपने आप में बहुत ही प्रभावी है, लेकिन इसे गर्म पानी में देने से इसके प्रभाव बहुत ज्‍यादा बढ़ जाते है। यह विषाक्‍त पदार्थों, अतिरिक्‍त फैट और मिनरल अपशिष्‍ट को शरीर से प्रभावी रूप से दूर करने में मदद करता है।

कैमोमाइल चाय
जैसा कि आप जानते हैं कि कैमोमाइल चाय में शांतिदायक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह व्‍यक्ति की मादक पदार्थों से वापसी का सामना करने में बहुत मदद करते है। यह फायदेमंद हर्बल चाय इस समस्‍या में होने वाले आम लक्षणों जैसे डायरिया, पेचिश और मतली से राहत देने में मदद करतीहै। कैमोमाइल चाय के शांतिदायक प्रभाव चिंता और तंत्रिका के तनाव को कम करने में मदद करते हैं। नियमित रूप से 4 से 5 कप पीना नशा वापसी के लिए मददगार होते हैं।

मेथी के बीज
मादक पदार्थों को छोड़ने के बाद होने वाले सबसे आम लक्षणों में से एक मतली है। मेथी इस समस्या के लिए एक प्रभावी घरेलू उपाय है। इसके लक्षणों को कम करने के लिए आप रोगी को एक लीटर पानी में एक मुठ्ठी बीज को उबालकर, और फिर थोड़ा ठंडा करके पिलाये। या मेथी के बीज का पेस्‍ट बनाकर इसे रात को पानी में भिगो दें और सुबह इसे खाली पेट खाना, मतली और अन्‍य लक्षणों को दूर करने का एक शानदार तरीका है।

अत्यधिक प्रभावी उपाय अदरक
यह मतली के लिए एक और अत्यधिक प्रभावी उपाय है। यह नशा वापसी के दौरान आने वाले अन्‍य लक्षणों को दूर करने में प्रभावी होता है। अदरक एक निश्चित डिग्री तक दर्द को दूर करने में भी मददगार होता है। दिन भर में अदरक की चाय पीने से काफी मदद मिलती हैं। पानी के एक कप में अदरक का टुकड़ा कुचलकर और उबालकर लेने से मतली दूर होती है। अदरक का स्वाद और गंध तंत्रिकाओं पर काम करती है और रोगी में होने वाली लालसा को दूर करने में मदद करती है।

पुराने गहनों को नया बनाते हैं ये 5 आसान घरेलू उपाय

पुराने गहनों को चमकदार बनाते हैं ये घरेलू उपाय
गहने महिलाओं की खूबसूरती होते है और गहनों की चमक उनकी खूबसूरती को दोगुना कर देती है। यानी गहनों से महिलाओं की सुंदरता में चार-चांद लग जाता है और उनकी चमक उनके रंग और त्‍वचा में ओर भी निखार लाती है। किसी की शादी हो या घर का कोई छोटा सा फंक्‍शन या फिर घर में छोटी सी पूजा, सभी में महिलाएं गहने पहनना बहुत पसंद करती है। जी हां गहने चाहे चांदी के हो या सोने के, महिलाओं को गहनों से कुछ खास ही लगाव होता है। कुछ महिलाएं तो इसे नियमित रूप से पहनना पसंद करती है। लेकिन नियमित रूप से गहनों का इस्‍तेमाल करने से वह गंदे दिखने लगते है। जिससे गहनों की चमक कम पड़ने लगती है। अगर आप भी अपने गहनों की चमक को बढ़ाना चाहती है तो आज हम आपको कुछ ऐसे आसान घरेलू उपाय बताएंगे जिनकी मदद से आप घर बैठे आसानी से इन्‍हें साफ कर चमकदार बना सकती है।

टूथपेस्‍ट का जादू
गहनों को साफ करने के लिए टूथपेस्‍ट का इस्‍तेमाल सबसे ज्‍यादा किया जाता है, क्‍योंकि यह आपके गहनों से मैल आसानी से निकालने में मदद करता है। और इसके लिए आपको कुछ ज्‍यादा करने की जरूरत नहीं होती है। इसके लिए एक कटोरी में थोड़े से टूथपेस्‍ट को मिलाकर पतला घोल तैयार कर लें। अब किसी भी मुलायम टूथब्रश से गहनों को हल्‍के हाथों से साफ करें। टूथपेस्‍ट लगाना न भूलें।

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स्‍ट्रॉग क्‍लीनर है अमोनिया
हल्के गर्म पानी में अमोनिया का पाउडर मिला लें। इस पानी में 1 मिनट के लिए गहने को भीगा दें। फिर ब्रश से अच्छे से साफ करें। ध्यान रखें कि आप जो भी गहने अमोनिया पाउडर से साफ कर रहे हैं, उसमें कोई मोती या रत्न का नहीं होना चाहिए। क्योंकि इससे रत्न खराब हो जाते हैं। हालांकि अमोनिया एक स्‍ट्रॉग क्‍लीनर है, परंतु केमिकल तौर पर यह अत्‍यंत कठोर हो सकता है।

डिश वाशिंग पाउडर
आपके गहनों को साफ करने का यह सबसे सस्ता, आसान और बहुत ही पुराना तरीका है। इसमें मौजूद कार्बोनेशन गहनों में जमा गंदगी और मैल को साफ करने का काम करती है। सोने के गहनों को साफ करने के लिए एक बाउल में हल्का गर्म पानी लेकर, इसमें डिशवाशिंग पाउडर मिला लें। अब अपने गहनों को थोड़ी देर के लिए इसमें डाल कर रख दें। कुछ देर के बाद टूथब्रश से इसे रगड़ कर साफ कर लें। फिर साफ पानी से धो लें।

बेकिंग सोडा और नमक
पसीने के कारण अक्‍सर आपके चांदी के गहने काले हो गए है। तो इन्‍हें साफ करने में बेकिंग सोडा बहुत मददगार होता है। इसके इस्‍तेमाल से गहनों का कालापन दूर होता है। गहनों को साफ करने के लिए आप बेकिंग सोडा में पानी मिलाकर बना पेस्‍ट गहनों पर रगडि़ये और साफ पानी से धो लीजिये। इसके अलावा नमक भी गहनों को साफ करने के लिए बहुत मददगार है। गर्म पानी में थोड़ा सा नमक लें। चांदी के गहने को डुबोकर रख दें। गहने को ब्रश से साफ करें। और फिर सूखे कपड़े से अच्छे से पोछ लें। यह चांदी की छुपी हुई चमक को दोगुना कर देगा।

इन 10 घरेलू नुस्खों को अपनाएं बलगम की समस्या से छुटकारा पाएं

अगर पाना हो बलगम की समस्या से छुटकारा
क्या आपको गले और छाती में कुछ जमा हुआ सा महसूस हो रहा है? सांस लेने में तकलीफ और लगातार ठींके आ रही हैं? ये सारे लक्षण बलगम जमा होने के होते हैं। साथी ही, नाक बहना और बुखार आना भी इस समस्या के प्रमुख लक्षण हैं। बलगम हालांकि खतरनाक नहीं होता लेकिन अगर ये लंबे वक्त तक जना रहे तो इससे आपको श्वास संबंधी अन्य समस्याएं हो सकती हैं। बलगम जमने के बहुत सारे कारण हो सकते हैं, जैसे कि सर्दी-जुकाम, फ्लू, वायरल इन्फेक्शन, साइनस, अत्यधिक स्मोकिंग। इस समस्या से निपटने के लिए बहुत सारे घरेलू उपाय मौजूद हैं, आइये जानते हैं उनके बारे में।

अदरक और शहद
अदरक में ऐसे बहुत से तत्व होते हैं जो बहुत सारी बीमारियों का सामना कर सकते हैं। इसके सेवन से सर्दी खांसी में फायदा होता है और श्वसन प्रक्रिया ठीक हो जाती है। 100 ग्राम ग्राम अदरक को कूट लें। दो-तीन चम्मच शहद को उसमें मिला लें। इस पेस्ट को दो-दो चम्मच दिन में दो बार लें। समस्या दूर हो जाएगी।

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सफेद-मिर्च
आधी चम्मच सफेद कालीमिर्च को पीस लें। इसमें 1 चम्मच शहद मिला लें। इस मिक्सचर को 10-15 सेकेंड माइक्रोवेव करें। फिर पी लें। इसे पीते ही आपको फौरन आराम मिलेगा। बलगम से पूरी तरह छुटकारा पाने के लिए इस मिक्चर को एक हफ्ते तक दिन में तीन बार जरूर लें।

अंगूर का जूस
अंगूर की प्रकृति एक्सपेक्टोरेंट होता हैं और इसलिए ये आपके फेफड़ों के लिए और बलगम दूर करने में फायदा पहुंचाता है। दो चम्मच अंगूर के जूस में दो चम्मच शहद मिला लें। इस मिक्चर को एक हफ्ते तक दिन में तीन बार लें।

लेमन टी
नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड और शहद के एंटीसेप्टिक तत्व बलगम कम करने और गले का दर्द दूर करने में मदद करते हैं। ब्लैक टी बनाइये, और उसमें एक चम्मच ताजे नींबू का रस और एक चम्मच शहद का मिला दीजिए।

गरारे
एक ग्लास गर्म पानी में एक चम्मच नमक मिलाएं। अपनी गर्दन थोड़ी सी पीछे की तरफ गिराएं और फिर इस नमक के पानी से गरारे करें। इस पानी को निगलें न। कुछ देर तक गले में रखकर गरारे करने के बाद आप निश्चित रूप से अच्छा महसूस करेंगे।

गाजर
गाजर में विटामिन सी की प्रचुर मात्रा होती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्वों की वजह से ये आपके इम्यून सिस्टम को बढ़ाता है। इसके अलावा इसमें ऐसे बहुत से विटामिन और पोषक तत्व होते हैं जो खांसी और बलगम की समस्या को दूर करते हैं। 3-4 ताजी गाजर का जूस निकालें। उसमें थोड़ा पानी और दो-तीन चम्मच शहद मिलाएं। अच्छी तरह इस मिश्रण को मिलाएं। इस मिश्रण को एक दिन में दो से तीन बार पियें, आपकी बलगम की समस्या ठीक हो जाएगी।

लहसुन और नींबू
लहसुन में सूजन दूर करने वाले तत्व मौजूद होते हैं और नींबू में सिट्रिक एसिड। जब दोनों का इस्तेमाल किया जाता है तो ये बलगम दूर करने में हमारी मदद करते हैं। एक कम पानी उबालें। उसमें तीन नींबू निचोड़ें। थोड़ा सा कुटा हुआ अदरक मिलाएं। साथ में आधी चम्मच काली मिर्च का पाउडर और एक चुटकी नमक। इन सब को अच्छे से मिला लें और पी लें। इससे आपको बलगम की समस्या से फौरन निजात मिल जाएगी।

चिकन सूप
गर्मागर्म चिकन सूप बलगम की समस्या को दूर करता है और आपकी श्वास की नली को मॉइश्चुराइज करता है। ये बलगम को पतला कर सकता है। इसलिए अपना गला साफ करने के लिे दिन में दो से तीन बार गर्म चिकन का सूप पियें। आप इसमें अलग से अदरक और लहसुन भी मिला सकते हैं, अधिक और जल्दी फायदा होगा।

हल्दी
बलगम के उपचार के लिए हल्दी सबसे अधिक प्रभाव डालने वाली चीज है। ये एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करती है और इसमें कर्क्यूमिन होता है जो शरीर की बहुत सारी आंतरिक और बाहरी समस्याओं में फायदा पहुंचाता है। एक ग्लास गर्म दूध में हल्की और आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर मिलाएं। अब इसमें एक चम्मच शहद मिलाएं। बलगम को दूर करने के लिए इसे रोज पियें।

इस घरेलू नुस्खे से करें बैक्टीरियल वेजिनोसिस का उपचार

बैक्टीरियल वेजिनोसिस
बैक्‍टीरियल वेजिनोसिस योन‍ि संक्रमण का एक बहुत ही आम प्रकार है। योनि में सामान्‍य रूप से बहुत से ‘अच्छे’ बैक्टीरिया के साथ ही कुछ ‘बुरे’ बैक्टीरिया भी उपस्थित होते हैं। अच्‍छे और बुरे बैक्‍टीरिया के बीच संतुलन में परेशानी के कारण संक्रमण होता है। आम लक्षणों में खुजली और कभी कभी दर्द के साथ यूरीन, मछली जैसी गंध के साथ अत्यधिक योनि स्राव शामिल है।

बैक्टीरियल वेजिनोसिस के कारण
बैक्‍टीरिया के संतुलन से बाहर होने के बारे में विशेषज्ञ यकीन के साथ कुछ नहीं कहते, लेकिन कुछ कारक संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकते हैं। इस कारकों में एक से अधिक पार्टनर के साथ सेक्‍स, नया सेक्‍स साथी, अत्‍यधिक धूम्रपान और सफाई न करना शामिल है।

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बैक्टीरियल वेजिनोसिस के लिए घरेलू उपचार
बैक्टीरियल वेजिनोसिस आमतौर पर गंभीर नहीं होता और अक्सर अपने आप ही दूर हो जाता है। लेकिन जैसे ही इसके लक्षण दिखाई दें, तुरंत उपचार शुरू कर देना चाहिए। कुछ सरल घरेलू उपचार इस कष्टप्रद समस्या से छुटकारा दिलाने में आपकी मदद कर सकते हैं। यहां बैक्टीरियल वेजिनोसिस की समस्‍या को दूर करने के 10 घरेलू उपचार दिये गये हैं।

सेब साइडर सिरका
सेब साइडर सिरका, बैक्टीरियल वेजिनोसिस के लिए एक शानदार घरेलू उपाय है। इसकी अम्लीय प्रकृति के कारण, सेब साइडर सिरका योनि अम्लता बढ़ाने में मदद करता है। इससे बुरे बैक्टीरिया का जीवित रहना मुश्किल हो जाता है। और अच्छे बैक्टीरिया को कामयाब बनाये रखने के लिए एक बेहतर माहौल पैदा करता है। बैक्‍टीरियल वेजिनोसिस की समस्‍या से बचने के लिए अपने नहाने के पानी में एक या दो कप सेब साइडर सिरके की मिलाये। फिर इस पानी में 20 मिनट के लिए बैठें। इसके बाद योनि क्षेत्र को अच्‍छे से सूखा लें। हालत में सुधार होने तक इस उपाय को दिन में एक बार करें।

दही
दही बैक्टीरियल वेजिनोसिस के लिए सबसे आम घरेलू उपचारों में से एक है। दही में लैक्टोबैसिलस नामक फायदेमंद बैक्टीरिया पाया जाता हैं। जिससे बुरे बैक्टीरिया से लड़ने और स्वस्थ योनि पीएच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। दही में कॉटन पैड को भिगो कर इसे प्रभावित हिस्‍से में लगाकर, कम से कम आधे घंटे के लिए छोड़ दें। फिर ताजे पानी से इस हिस्‍से को अच्‍छे से धो लें। जब तक इसके लक्षण खत्‍म नहीं हो जाते, इस उपाय को एक दिन में तीन बार दोहराये। इसके अलावा योन‍ि के पीएच संतुलन को सामान्‍य बनाये रखने और बुरे बैक्‍टीरिया की वृद्धि को कम करने के लिए एक दिन में कम से कम दो कम दही की खायें।

टीट्री ऑयल
टीट्री ऑयल में नैचुरल एंटीबैक्‍टीरियल के साथ एंटीफंगल गुण होते है, जो बैक्‍टीरियल वेजिनोसिस के कारण होने वाले बैक्‍टीरिया को मारने में मदद करते है। इसके अलावा यह भयंकर गंध को दूर करने में भी मददगार होता है। इस उपाय को करने के लिए एक छोटे बाउल गर्म पानी में दो बड़े चम्‍मच टीट्री ऑयल की मिला लें। फिर इस मिश्रण से योनि को अच्‍छे से धो लें। इस उपाय को तीन से चार सप्‍ताह तक नियमित रूप से करें।

लहसुन
लहुसन एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है, बैक्‍टीरियल वेजिनोसिस के इलाज में मदद करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीफंगल गुण बुरे बैक्‍टीरिया को जांच में रखता है। तीन से चार लहसुन की कली को क्रश करके प्रभावित क्षेत्र पर लगाकर 20 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर गुनगुने पानी से उस हिस्‍से को अच्‍छे से धो लें। इस उपाय को कई महीनों के लिए करें। इसके अलावा, लहसुन का सेवन नियमित रूप से कच्‍चा या पका कर करें।

मेथी
बैक्‍टीरियल वेजिनोसिस के इलाज के लिए मेथी बहुत ही फायदेमंद होती है। यह योनि में पीएच स्तर को बेहतर बनाने और घाव को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है। एक गिलास पानी में मेथी के दो बड़े चम्‍मच को रात भर के लिए भिगो लें। सुबह, इस पानी को खाली पेट पी लें। इस उपाय को कम से कम एक महीने तक करें। या एक कप दही में एक चम्‍मच मेथी पाउडर को मिलाकर दिन में दो बार तब तक लें जब कि बैक्‍टीरियल वेजिनोसिस के लक्षण कम न हो जाये।

दूध
दूध में लेक्‍टोबेकिली नामक बैक्‍टीरिया की मौजूदगी बैक्‍टीरियल वेजिनोसिस का एक उत्‍कृष्‍ट प्राकृतिक उपचार है। इसके अलावा, दूध प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करता है। संक्रमण होने पर कॉटन के टूकड़े को ठंडे दूध में डिबोकर योनि में लगाये। कॉटन को एक से दो घंटे रखने के बाद हटा दें। लक्षणों से राहत पाने के लिए दिन में एक बार कई दिनों के लिए इस उपाय को करें। इसके अलावा वैकल्पिक रूप से, गर्म दूध के एक गिलास में एक चम्‍मच हल्दी पाउडर को मिलाकर लें।

नारियल का तेल
नारियल तेल में प्राकृतिक एंटीवायरल, एंटीबैक्‍टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं, यह बैक्‍टीरिया को मारने और इसकी आवर्ती को रोकने में मदद करते हैं। अपनी समस्‍या में सुधार लाने के लिए कार्बनिक नारियल तेल को प्रभावित हिस्‍से में दिन में तीन बार लगाये। या कार्बनिक नारियल के तेल में कॉटन को डूबोकर योनि में रखें, कुछ घंटे लगा रहने के बाद योनि को अच्‍छे से गुनगुने पानी से धो लें। इसके अलावा, अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने और उपचार प्रक्रिया को तेज करने के लिए, जितना संभव हो खाना पकाने में नारियल के तेल का उपयोग करें।

बहते खून को तुरंत रोकेंगे ये आसान और साधारण घरेलू उपाय

चोट के बाद खून का बहना
हल्की चोट लगना बड़ी बात नहीं है, लेकिन अगर चोट के कारण बहने वाले खून को सही तरीके से रोका न जाये तो यह घाव और संक्रमण का कारण बनता है। जब हमें चोट लगती है तब हम या तो पानी के नीचे इसे रखते हैं या फिर पट्टी से बांध देते हैं। अगर हल्की चोट के कारण खून निकल रहा है तो इसे रोकना बहुत मुश्किल काम नहीं है। आपके घर में मौजूद नुस्खों से आप इस पर आसानी से काबू पा सकते हैं। लेकिन अगर चोट गहरी है तो चिकित्सक से सलाह जरूरी है। हल्की चोट से निकलने वाले खून को रोकने के लिए हम आपको कुछ आसान घरेलू नुस्खे बता रहे हैं।

हल्दी खून रोके जल्दी
हल्दी से अच्छा एंटी-ऑक्सीडेंट दूसरा कोई नहीं है। हल्दी के पाउडर का प्रयोग न केवल खून रोकने के लिए बल्कि घाव भरने के लिए भी किया जाता है। चोट लगने पर हल्दी का पाउडर लगाने से खून तुरंत बंद हो जायेगा और हल्दी लगाने पर संक्रमण का खतरा भी बहुत कम हो जायेगा।

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कॉफी पाउडर
अगर आपको लगता है कॉफी एक पेय पदार्थ है तो आप गलत हैं। कॉफी बहते खून को रोकने में भी कारगर है। इसमें एस्ट्रीजेंट जैसा गुण होता है जो घाव को जल्दी भरने में मदद करता है। इसलिए अगर अगली बार आपको चोट लगे तो कॉफी पाउडर को चोट पर लगायें। इससे तुरंत खून बंद हो जायेगा।

टी-बैग से रुक जायेगा खून
टी-बैग से आप कहीं भी चाय की चुस्कीग ले सकते हैं। लेकिन शायद यह आपको जानकारी न हो कि टी-बैग से चोट लगने के बाद बहते खून को भी रोका जा सकता है। अगर आपको चोट लग जाये तो ठंडे पानी में टी-बैग को डुबोकर रख दीजिए और उस टी-बैग को घाव पर लगाकर हल्केत हाथ से दबा दीजिए। इससे खून का बहना तुरंत बंद हो जायेगा।

टूथपेस्ट‍ लगायें
टूथपेस्ट‍ केवल दांत साफ करने के काम नहीं आता है बल्कि इसका प्रयोग आप कई दूसरे कामों में भी कर सकते हैं। चोट लगने के बाद बहते खून पर टूथपेस्ट लगाने से भी खून बंद हो जाता है। इतना ही नहीं चोट पर टूथपेस्ट लगाने से घाव जल्दी भरता भी है। इसलिए अगली बार जब चोट लगे तो तुरंत उसपर टूथपेस्ट लगायें।

बर्फ के टुकड़े
दरअसल बहता खून तभी रुकता है जब खून का थक्का बनने लगे। खून का थक्का तभी बनेगा जब उसे ठंडी चीज मिले। इसलिए बर्फ इस मामले में बहुत कारगर है। चोट लगने के बाद बहते खून पर बर्फ के टुकड़े मलने से भी घाव से बहता खून बंद हो जाता है। तो अगली बार चोट लगने के बाद घबरायें नहीं बल्कि इन आसान नुस्खों को आजमायें।

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किशमिश 1 फायदे अनेक, छिपा रखा है सेहत का मीठा खजाना

ड्राई फ्रूट का राजा हैं किशमिश
किशमिश को ड्राई फ्रूट का राजा कहा जाता है। गोल्‍डन ब्राउन रंग का रिंगक्ली ड्राई फ्रूट स्वास्थ्य टॉनिक, स्‍नैंक्‍स और एनर्जी के लिए अनिवार्य खाद्य पदार्थ है। दुनिया भर के सभी सांस्कृतिक खाने में इस मीठी और चिपचिपी बनावट वाली किशमिश का उपयोग होता है। सूखने के बाद अंगूर से प्राप्त, किशमिश को उसके पोषण तत्‍वों और स्वास्थ्य लाभों के कारण “हीरा” माना जाता है। किशमिश खाने से ब्‍लड बनता है, वायु, पित्त और कफ दोष दूर होता है और यह हृदय के लिये बहुत लाभकारी होती है।

पाचन तंत्र के लिए लाभकारी
किशमिश लैक्सटिव के रूप में कार्य करती है। यह पेट में जाकर पानी को अवशोषित करती है, जिससे कब्‍ज से राहत मिलती है और पाचन तंत्र सुचारू रूप से कार्य करता है। नियमित रूप से किशमिश का उपयोग करने से आपका हाजमा ठीक रहता है। किशमिश में मौजूद फाइबर गैस्ट्रोइंटेस्टिनल मार्ग से विषाक्त और अपशिष्‍ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं।

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मुंह स्वास्थ्य को बढ़ावा
अक्‍सर लोगों का मानना है कि मीठी होने के कारण किशमिश कैंडी की तरह मुंह स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छी नहीं है। इससे दांतों में कीड़ा लगने और दांतों के टूटने की समस्‍या हो सकती हैं। लेकिन किशमिश में ओलीनोलिक एसिड होता है जो मुंह से जुड़ी समस्‍याओं के लिए बहुत उपयोगी होता है। साथ ही यह मसूडे की सूजन पैदा करने वाले हानिकारक बैक्‍टीरिया से रक्षा करता है।

हड्डियों में मजबूती
कैल्शियम का एक समृद्ध स्रोत होने के कारण किशमिश हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाती है। किशमिश में बोरोन नामक माइक्रो न्‍यूट्रियंट भी प्रचुर मात्रा में होता है जो कैल्‍शियम सोखने और हड्डी गठन को अवशोषित करने में मदद करता है। बोरोन के कारण ऑस्टियोपोरोसिस से राहत मिलती है। साथ ही किशमिश खाने से घुटनों में दर्द की समस्‍या भी नहीं होती हैं।

एसिडिटी दूर भगाएं
अगर कोई व्‍यक्ति एसिडोसिस (रक्त में एसिडिटी की वृद्धि) से ग्रस्‍त है, तो उसको नाश्‍ते में किशमिश को शामिल करना चाहिए। किशमिश में पोटेशियम और मैग्नीशियम दो महत्वपूर्ण तत्‍व होते है। यह दोनों मिनरल एसिड को निष्क्रिय करने और एसिडोसिस को दूर करने में मदद करते हैं।

एनिमिया ठीक करें
किशमिश में आयरन काफी मात्रा में होता है जो सीधे एनीमिया से लड़ने की शक्‍ति रखता है। नए ब्‍लड के गठन के लिए जरूरी विटामिन बी कॉमप्‍लेक्‍स की जरुरत को भी किशमिश पूरी करती है। इसके अलावा किशमिश में मौजूद भरपूर मात्रा में कॉपर, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है।

आंखों के लिए गुणकारी
किशमिश में विटामिन ए, ए-बीटा कैरोटीन और ए-कैरोटीनॉइड होता है, जो आंखों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत आवश्‍यक होता है। इसमें एंटी ऑक्‍सीडेंट गुण होते है जो आंखों को फ्री रैडिकल्‍स से लड़ने में मदद करता है। किशमिश खाने से उम्र बढने की वजह से आंखों की कमजोरी, मसल्‍स डैमेज, मोतियाबिंद आदि नहीं होता।

मस्तिष्‍क के लिए उपयोगी
बोरान का बहुत अच्‍छा स्रोत होने के कारण किशमिश आपके ब्रेन के लिए भी बहुत अच्‍छा होता है। बोरान एक ऐसा तत्‍व है जो ध्यान और याद्दाश्त में सुधार करने में मदद करता है। बोरान के अन्य अच्छे स्रोत अखरोट, बादाम और सूखी खुबानी भी है।

कोलेस्ट्रोल विरोधी
क्‍या आप इस बात को जानते हैं कि किशमिश पूरी तरह से कोलेस्‍ट्रॉल मुक्त होता है। किशमिश में घुलनशील फाइबर बहुत अधिक मात्रा में होता है। यह घुलनशील फाइबर बुरे कोलेस्‍ट्रॉल से लड़ता है। इसके अलावा किशमिश पोलीफेनोल्स एंजाइम को भी दबाता है जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल को अवशोषित के लिए जिम्मेदार होता है।

कैंसररोधी
फ्री रेडिकल्‍स प्राइमरी कारणों में से एक हैं जो कैंसर कोशिकाओं के सहज विकास का नेतृत्व करते है। साथ ही यह मेटास्टेसिस को भी प्रोत्साहित करते हैं। किशमिश में उच्‍च स्‍तर में काट्चिंस तत्‍व होता है यह तत्‍व रक्त में पॉलीफेनोलिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। एंटीऑक्‍सीडेंट शरीर के आस-पास रहने वाले फ्री रेडिकल्‍स को शरीर से बाहर निकालता है।

थायराइड में बालों का झड़ना रोकने में मददगार ये 8 चमत्कारिक नुस्खे

थायराइड और बालों का झड़ना
थायराइड तितली के आकार की एक ग्रंथि है जो गले में पायी जाती है, इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है, क्‍योंकि इसके लक्षण तब दिखाई देते हैं जब यह समस्‍या गंभीर हो जाती है। थायराइड पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होती है। बालों के झड़ने की समस्या थायराइड हार्मोन असंतुलित होने की ओर संकेत करता है। बहुत ज्यादा थायराइड हार्मोन बालों को पतला और हल्का बना देता है। हालांकि, बहुत कम थायराइड हार्मोन खोपड़ी और शरीर के बालों के झड़ने का कारण बनता है। थायराइड की वजह से हो रही इस समस्या को दूर करने के लिए कुछ आसान व प्राकृतिक तरीके अपनाए जा सकते हैं।

विटामिन सी
विटामिन सी का सेवन करने से इम्‍यूनिटी की क्षमता बढ़ती है और थायराइड के कारण बालों का झड़ना काफी हद तक कम किया जा सकता है। विटामिन सी ऐसा एंटीऑक्‍सीडेंट है जो फ्री रेडिकल्‍स के खिलाफ बालों को झड़ने से बचाता है। इसके लिए नियमित नींबू जा जूस पियें, नींबू के जूस में 2 चम्‍मच शहद डालने से बालों का झड़ना तेजी से कम हो जाता है।

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विटामिन ई
बालों का गिरना रोकने में विटामिन ई भी मददगार है। इसके अलावा विटामिन ई बालों को तेजी से उगने में भी मदद करता है। चिकित्‍सक की सलाह से बाद विटामिन ई का सप्‍लीमेंट भी आप ले सकते हैं।

प्रोटीन की मात्रा अधिक लीजिए
बालों के लिए प्रोटीन बहुत फायदेमंद है, बालों के विकास के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है। कई शोधों में भी यह बात साबित हो चुकी है कि प्रोटीन का स्‍तर बेहतर होने से बालों के गिरने की समस्‍या नहीं होती है। प्रोटीन की कमी पूरा करने के लिए सूखे मेवे, समुद्री मछली, अंडे, डेयरी उत्‍पाद आदि का सेवन कीजिए।

ओट्स खायें
ओट्स एक बेहतर ब्रेकफास्‍ट है, इसमें घुलनशील फाइबर, विटामिन बी के साथ एमिनो एसिड भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। ये सभी थायराइड के लिए बहुत ही प्रभावी आहार हैं। शरीर में अगर पर्याप्‍त मात्रा में विटामिन और एमिनो एसिड है तो बालों के गिरने की समस्‍या कम होगी।

ओमेगा-3 फैटी एसिड
ओमेगा 3 फैटी एसिड शरीर के लिए स्‍वस्‍थ आहार माना जाता है, यह थायराइड ग्रंथि को संतुलित बनाये रखता है। मछली, वालनट, अखरोट आदि में यह पर्याप्‍त मात्रा में पाया जाता है। जो लोग समुद्री मछली का सेवन करते हैं उनमें ओमेगा 3 फैटी एसिड की कमी नहीं होती है। लेकिन अगर आप मछली का सेवन नहीं करते हैं तब दूसरे विकल्‍प आपके काम के हैं।

नियमित व्‍यायाम करें
शरीर के साथ बालों को भी स्‍वस्‍थ रखने में व्‍यायाम की भूमिका होती है। इसके अलावा थायराइड ग्रंथि को सुचारु करने में भी व्‍यायाम योगदान करता है। तो नियमित व्‍यायाम करके आप बालों के गिरने की समस्‍या को रोक सकते हैं। हर रोज 30-40 मिनट व्‍यायाम बहुत जरूरी है।

योग करें
थायराइड की समस्‍या के उपचार में दूसरे विकल्‍पों की तरह योग भी बहुत प्रभावी और फायदेमंद है। नियमित योग करने से थायराइड ग्रंथि सही तरीके से काम करती है। योग के विभिन्‍न आसन आपको फिट भी रखते हैं और बालों के गिरने की समस्‍या से भी बचाते हैं। इसके लिए आप नियमित मार्जरीआसन और भुजंगासन क्रिया करें।

ये 8 घरेलू उपाय दिलाएंगे जननांग की खुजली से छुटकारा

महिलाओं को होती है जननांग की खुजली
महिलाओं को अक्सर जननांग में खुजली की समस्या हो जाती है। जननांग की खुजली तब सबसे ज्यादा परेशानी पैदा करती है जब आप काम के सिलसिले में बाहर हों तथा खुजली पर नियंत्रण न कर पा रही हो। इससे महिलाओं को शर्मिंदगी और खिन्नता महसूस हो सकती है इसलिए इस समस्या को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। जननांग में खुजली के कई कारण हो सकते हैं। इसका सबसे आम कारण मासिक धर्म के समय उपयोग में लाये जाने पैड्स में उपस्थित केमिकल्स हो सकते हैं। बहुत अधिक कसे हुए कपडे पहनने से भी योनि की खुजली की समस्या हो सकती है। सेक्स संबंध बनाने के बाद स्वच्छता की ओर ध्यान न देना भी योनि में खुजली का कारण बन सकता है। जननांग में खुजली की समस्या से निपटने के लिए आप इन 8 घरेलू उपायों को अपना सकती हैं।

बर्फ से सेंक दें
जननांग की खुजली रात के समय अधिक परेशान है। इससे आपकी नींद में बाधा पहुँचती है तथा खुजली के साथ-साथ आप थकान और सुस्ती महसूस करते हैं। रात में अधिक होने वाली इस खुजली को रोकने के लिए योनि पर सीधे ही बर्फ लगायें या योनि को ठंडा सेंक दें। यह काम थका देने वाला हो सकता है।

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ऐप्पल सीडर विनेगर
ऐप्पल सीडर विनेग एंटीबैक्टीरियल और एंटी फंगल होता है। यदि जननांग की खुजली बैक्टीरियल या फंगल संक्रमण के कारण है तो ऐप्पल सीडर विनेगर से उसे दूर किया जा सकता है। ऐप्पल सीडर विनेगर का लाभ उठाने के लिए दो चम्मच ऐप्पल सीडर विनेगर को गर्म पानी में मिलाएं। दो तीन दिन तक दिन में दो बार जननांग को इस मिश्रण से धोएं।

लहसुन
लहसुन 2-3 लहसुन की कलियाँ चबाकर खाएं। लहसुन का पेस्ट बनायें तथा जाली के एक कपड़े में इसे बांधकर योनि के अंदर लगायें। इससे दुर्गन्ध आ सकती है परंतु इससे मिलने वाला आराम बहुत आश्चर्यजनक होता है।

दही
जनगांग की खुजली के उपचार के लिए प्रतिदिन एक कप बिना शक्कर वाला दही खाएं। दही के उपयोग का अन्य तरीका यह है कि इसे योनि पर लगाया जाए जिससे तुरंत आराम मिलता है। सीधे दही उस स्थान पर लगाने से योनि की खुजली तुरंत बंद हो जाती है। नियमित उपयोग से समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाती है।

नमक से स्नान
नमक में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। नमक के ये गुण खुजली तथा बैक्टीरिया को प्रभावी रूप से दूर कर सकते हैं। जब भी आपको खुजली महसूस हो तब नमक के गाढ़े घोल से जननांग को धो लें। इससे आपको तुरंत आराम मिलेगा और यह बैक्टीरिया को आगे बढ़ने से भी रोकेगा। या ऐसा भी कर सकती हैं कि टब को गर्म पानी से आधा भरें तथा इसमें आधा कप नमक डालें। टब में पालथी मारकर बैठें।

तुलसी की पत्तियां
तुलसी की पत्तियों में एंटी माइक्रोबियल, एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं। तुलसी की कुछ पत्तियां लें तथा इसे दो कप पानी में उबालें। इसे 20 मिनिट तक भिगो कर रखें जब तक पानी गाढ़ा न हो जाए। योनि की खुजली दूर करने के लिए इस पानी को दिन में दो बार पीयें।

सूखा रखें जननांग
पसीने और पानी के कारण यदि योनि में नमी रहती है तो इससे उस स्थान पर बैक्टीरिया और फंगस पैदा होते हैं, जिसके कारण संक्रमण और शर्मिन्दगी पैदा करने वाली स्थिति उत्पन्न होती है। हमेशा ध्यान रखें कि संक्रमण को रोकने के लिए योनि को नमी से मुक्त रखें।

ढीले कपडे पहनें
कहा जाता है कि इलाज से बेहतर है रोकथाम करना। यदि आपको कभी भी योनि में खुजली की समस्या हुई है तो तो आप जानेंगे कि इस समस्या को दूर रखने के लिए यह सलाह क्यों उपयुक्त है। ढीले कपड़े पहनने से आपको योनि में खुजली की समस्या नहीं होती।

हाथों को मुलायम बनाएं ये आसान घरेलू उपचार

हाथों को मुलायम बनायें
सामान्‍यतया हम अपने चेहरे की देखभाल के आगे शरीर के दूसरे अंगों को भूल जाते हैं। इसका सबसे बुरा असर हाथों और पैरों में होता है। आप अपने पैर तो छुपा सकते हैं लेकिन हाथ सबके सामने होता है और जब आप किसी से हाथ मिलाते हैं तो कठोर हाथ होने से आपकी नकारात्‍मक छवि सामने आती है। इसलिए अपने हाथों को मुलायम बनायें और उनकी रंगत को भी निखारें। आइए हम आपको कुछ घरेलू उपचार बता रहे हैं जिनसे कठोर हाथों को मुलायम बना सकते हैं।

नींबू का रस और दूध
आपके घर में दूध और नींबू आसानी से मिल जायेगा। अब थोड़ा सा दूध उबालें और इसे ठंडा होने के लिए छोड़ दीजिए। ठंडा होने पर इसमें ग्लिसरीन की कुछ बूंदें और नींबू का रस डालें। इस मिश्रण को आधे घंटे तक अच्छे से रखें। अब इस मिश्रण को अच्‍छे से अपने हाथों पर धीरे-धीरे मालिश कीजिए। नियमित ऐसा करने से कुछ दिनों में हाथों की त्‍वचा मुलायम हो जायेगी।

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दलिये का मास्क
दलिया को बहुत ही हेल्‍दी आहार माना जाता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं इसके प्रयोग से त्‍वचा में निखार लाकर आप उनको मुलायम बना सकते हैं। इसके लिए दलिये का मास्‍क बनायें। इस मास्क को बनाने के लिए जैतून का तेल, दलिया और ग्लिसरीन का प्रयोग करें। मास्‍क बनने के बाद इसे हाथों में लगाकर 30 मिनट के लिए छोड़ दीजिए और फिर हल्‍के गुनगुने पानी से मास्‍क को निकालिये।

कोकम मक्खन
दोपहर का खाना बनाते समय हॉट प्लेट या गर्म पानी के ऊपर मक्खन का पात्र उलटा रखकर 2 चम्मच मक्खन को पिघला लीजिए। मक्खन पिघलने के बाद उसमें 5-10 चम्मच खीरे का रस तथा बादाम के तेल की कुछ बूंदें डाल दीजिए। अब एक चम्मच की सहायता से इसे अच्छे से मिलाएं और इस मिश्रण को अपनी हथेलियों पर लगाएं। 15 मिनट बाद इसे धो लें। मक्खन को धोने के लिए गर्म पानी या उसके साथ दूध का साबुन इस्तेमाल कर सकते हैं।
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सादा मक्खन
इस मक्‍खन का प्रयोग आप ब्रेकफास्‍ट में जरूर करते होंगे। आप उस मक्खन को रसोई में काम करते समय या कहीं और अपने हथेलियों में लगा सकते हैं। इससे आपकी त्वचा लम्बे समय के लिए नरम और स्वस्थ रहेगी।

नारियल का तेल
नारियल का तेल बालों के साथ हाथों के लिए भी बहुत अच्‍छा होता है। हाथों में नारियल के तेल की कुछ बूंदें लगायें। इस तेल को सोने से पहले अपनी त्वचा पर लगाएं और सुबह उठकर आप देखेंगे कि हथेलियां मुलायम हो गईं हैं।

जैतून का तेल
खाने के लिए इसका प्रयोग ज्‍यादा होता है। हथेलियों को मुलायम बनाने के लिए भी इसका प्रयोग कर सकते हैं। एक छोटे बरतन में 1 चम्मच जैतून का तेल लेकर इसमें इसमें अपनी उंगलियां डालें और इसे हाथों में भी लगायें। इसे अच्छे से मसाज करें ताकि आपका शरीर सारा तेल शरीर में सोख ले और उसे स्वस्थ और सुन्दर बनाए। अब 10 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें। अगर आपको लग रहा है कि यह ज़्यादा चिकना हो गया है तो आप दूध युक्त साबुन से भी हाथ धो सकते हैं।

शहद लगायें
शहद एक बेहतरीन मॉइश्‍चराइजर है, इससे त्‍वचा को नमी भी मिलती है। आधे मैश किये हुए आलू, 3 चम्मच शहद और कुछ चम्मच दूध लीजिए। इन सब को अच्छे से मिलाकर अपनी हथेलियों एवं एड़ियों पर लगाएं। इसे 15 मिनट तक लगा रहने दें और फिर धो लीजिए।

आर्मपिट की गांठ के उपचार के घरेलू नुस्‍खे

आर्मपिट के गांठ के लिए घरेलू उपाय
पार्टी में जाने के लिए हेमा ने जैसे ही स्‍लीवलेस ड्रेस पहनी, वह अपनी आर्मपिट में गांठ को देखकर निराश हो गई। क्‍योंकि पार्टी में जाने के लिए इसे इतनी जल्‍दी हटाया नहीं जा सकता। आर्मपिट में गांठ, आर्मपिट में एक या एक से अधिक लिम्‍फ नोड्स के बढ़ने के कारण होता है। लिम्‍फ नोड्स कई विभिन्‍न कारणों जैसे वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण, एलर्जी, कवक विकास, आदि, जो सभी काफी हानिरहित, के कारण होता है। लेकिन कई बार आर्मपिट में गांठ कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि के कारण हो सकता है या अधिक गंभीर विकारों का लक्षण हो सकता है। इसलिए जब आप आर्मपिट में गांठ को नोटिस करें तो कोई भी अन्‍य कदम उठाने से पहले अपने डॉक्‍टर से परामर्श जरूर लें। हालांकि अगर आपको लगता है कि आर्मपिट में गांठ सिर्फ संक्रमण, कवक विकास, स्‍वच्‍छता की कमी के कारण है तो यहां दिये कुछ घरेलू उपाय इसे दूर करने में आपकी मदद कर सकते हैं।

गर्मी पानी से सिकाई और मसाज
गर्म पानी से सिकाई करने से सूजन और दर्द कम होता है और बैक्‍टीरिया को दूर करने में मदद मिलती है। इसके लिए आप एक साफ कपड़े को गर्म पानी में डुबोकर इसे कुछ मिनटों के लिये बगल की गांठ पर रखें। इसके अलावा मसाज से भी फायदा मिलता है। मसाज से ब्‍लड सर्कुलेशन अच्‍छा होता है और सूजन नहीं होती। जीं हां अगर आर्मपिट में ब्‍लड सर्कुलेशन सही तरीके से हो रहता है तो गांठ बनने का मौका ही नहीं मिलता। इसके लिए आप विटामिन ई युक्‍त तेल या नारियल के तेल से आर्मपिट की मसाज करें।

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हॉट एंड कोल्‍ड बॉथ
हॉट एंड कोल्‍ड बॉथ लेने से भी आर्मपिट की गांठ को दूर किया जा सकता है। गर्म पानी से बैक्‍टीरिया मर जाते हैं और ब्‍लड सर्कुलेशन होने लगता है। वहीं ठंडे पानी से सूजन कम होती है। इसके लिए दिन में कम से कम एक बार हॉट या कोल्‍ड बॉथ लें। शॉवर से ऐसा करेगें तो आपके लिए बहुत अच्‍छा रहेगा।

नींबू का रस और पानी
नींबू के रस में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है जो त्‍वचा में चमक लाता है। साथ ही यह त्‍वचा पर किसी भी प्रकार की गांठ पड़ने से रोकता है। नींबू का सेवन अपने आहार में नियमित रूप से करें और गांठ से छुटकारा पाएं। इसके अलावा पानी से भी आर्मपिट की गांठ को दूर किया जा सकता है। पानी, शरीर को हाईड्रेट रखता है और इससे गांठ की सूजन भी कम होने लगती है। बॉडी हाईड्रेट रहने से ब्‍लड सर्कुलेशन अच्‍छी तरह होता है। जिससे किसी भी गांठ से निजात पाई जा सकती हैं।

प्‍याज और हल्‍दी
प्‍याज का नियमित सेवन भी आर्मपिट की त्‍वचा को साफ और गांठ रहित रखने में मदद करता है। प्‍याज में मौजूद एंटी-बैक्‍टीरियल और एंटी-माइक्रोबिल गुणों के कारण यह बैक्‍टीरिया को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा हल्‍दी में भी एंटी-बैक्‍टीरियल और एंटी-माइक्रोबिल गुण होते हैं जो सूजन को कम करते हैं जिससे धीरे-धीरे गांठ ठीक हो जाती है। आप चाहे तो इस जगह पर हल्‍दी का पेस्‍ट हल्‍का गर्म करके लगा सकते हैं या फिर अपने आहार में डाइट को शामिल करें।

विटामिन ई का सेवन
विटामिन ई की मदद से आर्मपिट गांठ सहित विभिन्‍न प्रकार के त्‍वचा रोग से राहत पाई जा सकती हैं। इसलिए अपने आहार में विटामिन ई युक्‍त आहार जैसे दूध, सब्जियां, मछली आदि को शामिल करें।

जानें सेहत के लिए कितनी फायदेमंद है तुरई

बीमारियों की रामबाण दवा है तुरई
सेहतमंद रहने के लिए हरी सब्जियां खाने की सलाह सभी डॉक्‍टर देते हैं। ताजा हरी सब्जियों की उचित मात्रा आहार में शामिल करने से शरीर में ब्‍लड का निर्माण होता हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हैं। शरीर को रोगों से लड़ने के लिए हमारे ब्‍लड में हीमोग्लोबिन की अच्‍छी होनी चाहिए। रक्त और हीमोग्लोबिन की मात्रा सही रखने के लिए हरी सब्जियों से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
इसके लिए आप तुरई पर भरोसा कर सकते हैं। गर्मियों में हरी सब्जियों की जरूरत अन्य मौसमों की तुलना में अधिक होती है क्योंकि गर्मी के दिनों में हमारे शरीर से पसीना और नमक निकलता रहना है इस वजह से रक्त की कमी भी अन्य मौसम की तुलना में ज्यादा हो सकती है। तुरई की सब्जी पचने में आसान होती है इसलिए अस्वस्थ व बीमार लोगों के लिए भी यह काफी फायदेमंद होती है। आइए इस स्‍लाइड शो के माध्‍यम से जानते हैं इसके फायदों के बारे में…
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डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद
तुरई ब्‍लड और यूरीन दोनों में शुगर के स्‍तर को कम करने में मदद करती है। इसलिए यह डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद होती है। तुरई में इन्सुलिन की तरह पेप्टाईड्स पाए जाते हैं। इसलिए इसे डायबिटीज नियंत्रण के लिए एक अच्छे उपाय के तौर पर देखा जाता है। इसलिए सब्जी के तौर पर इसके इस्तेमाल से डायबिटीज में फायदा होता है।

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वजन कम करने में सहायक
एक तुरई में लगभग 95 प्रतिशत पानी और केवल 25 प्रतिशत कैलोरी होती है। जिससे वजन नहीं बढ़ता। इसमें संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल की भी बहुत ही सीमित मात्रा होती है जो वजन कम करने में सहायक होती है।

त्‍वचा संबंधी रोगों में लाभकारी
यह मुंहासे, एक्जिमा, सोरायसिस और अन्य त्वचा संबंधी रोगों के उपचार में सहायक होती है। कुष्ठ रोग में भी तुरई उपयोगी होती है। तुरई की सब्जी खाने से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। इसके सेवन से रक्‍त शुद्ध होता है जिससे त्‍वचा संबंधी रोगों से राहत मिलती है।

आंखों की रोशनी बढ़ाये
तुरई में बीटा कैरोटीन पाया जाता है जो नेत्र दृष्टि बढ़ाने में मदद करता है। अगर आप अपनी आंखों की रोशनी बढ़ाना चाहते हैं तो अपने आहार में तुरई को शामिल करें।

लिवर के लिए गुणकारी
लगातार तुरई का सेवन करना सेहत के लिए बेहद हितकर होता है। तुरई रक्त शुद्धिकरण के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। साथ ही यह लिवर के लिए भी गुणकारी होता है। साथ ही पीलिया होने पर अगर रोगी की नाक में 2 बूंद तोरई के फल का रस डाल दें, तो नाक से पीले रंग का द्रव बाहर निकलता है। जिससे पीलिया रोग जल्दी समाप्त हो जाता है।

बालों को काला करने में मददगार
बालों को काला करने में भी तुरई बहुत फायदेमंद होती है। इसके लिए तुरई के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर छांव में सूखा लें। फिर इन सूखे टुकड़ों को नारियल के तेल में मिलाकर 5 दिन तक रख लें। बाद में इसे गर्म कर लें। इस तेल को छानकर प्रतिदिन बालों पर लगाकर मालिश करें, इससे उपाय को अपनाने से आपके बाल धीरे-धीरे काले होने लगेगें।

अन्‍य लाभ
इसका नियमित प्रयोग करने से कब्ज नहीं होता और पेट भी साफ रहता है। इसके अलावा तुरई पित्त, सांस संबंधी रोगों, बुखार, खांसी और पेट के कीड़ों को दूर करने में लाभकारी है।

पित्त की पथरी को दूर करने के लिए पियें ये जूस

प्राकृतिक तरीकों से करें पित्त की पथरी दूर
पित्ताशय हमारे शरीर का एक छोटा सा अंग होता है जो लीवर के ठीक पीछे होता है। पित्ताशय यकृत द्वारा उत्पन्न पित्त को संग्रहित करता है। इसका कार्य पित्त को संग्रहित करना तथा भोजन के बाद पित्त नली के माध्यम से छोटी आंत में पित्त का स्त्राव करना है। पित्त रस वसा के अवशोषण में मदद करता है। कभी-कभी पित्ताशय में कोलेस्ट्राल, बिलीरुबिन और पित्त लवणों का जमाव हो जाता है। अस्सी प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्राल की बनी होती है। धीरे धीरे वे कठोर हो जाती हैं तथा पित्ताशय के अंदर पत्थर का रूप ले लेती हैं। पित्त की पथरी का घरेलू उपचार संभव है और काफी आसान। आइये जानते हैं ऐसे कौन से जूस हैं जो प्राकृतिक रूप से पित्त की पथरी को दूर कर देते हैं।

चुकंदर, नाशपाती और सेब का जूस
इन रसों के द्वारा पथरी का प्राकृतिक तरीके से प्रभावी उपचार किया जा सकता है। विभिन्न रस जैसे चुकंदर का रस, नाशपाती का रस और सेब का रस लीवर को स्वच्छ करते हैं। पथरी बनने से रोकने के लिए इन तीनों रसों के मिश्रण का सेवन करें।

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ऐप्पल सीडर विनेगर
ऐप्पल सीडर विनेगर की अम्लीय प्रकृति लीवर को कोलेस्ट्राल बनाने से रोकती है जो अधिकाँश पथरियों का कारण होता है। यह पथरी को विघटित करने तथा दर्द को समाप्त करने में सहायक होता है।

विटामिन सी जूस
विटामिन सी शरीर के कोलेस्ट्राल को पित्त अम्ल में परिवर्तित करती है जो पथरी को विघटित करता है। आप विटामिन सी संपूरक ले सकते हैं या ऐसे फलों का जूस पी सकते हैं जिनमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में हो जैसे संतरा, टमाटर आदि। पथरी के दर्द के लिए यह एक उत्तम घरेलू उपचार है।

गाजर और ककड़ी का जूस
अगर आपको पित्ती की पथरी की समस्या है तो गाजर और ककड़ी का रस प्रत्येक 100 मिलिलिटर की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीयें। इस समस्या में ये अत्यन्त लाभदायक घरेलू नुस्खा माना जाता है।

हल्दी
पथरी के लिए यह एक उत्तम घरेलू उपचार है। यह एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेमेट्री होती है। हल्दी पित्त, पित्त यौगिकों और पथरी को आसानी से विघटित कर देती है। ऐसा माना जाता है कि एक चम्मच हल्दी लेने से लगभग 80 प्रतिशत पथरी खत्म हो जाती हैं।

इस जादुई तरीके से गर्मी में कोल्ड से पायें छुटकारा

गर्मी और कोल्ड
कोल्ड की समस्या सिर्फ सर्दियों में भी नहीं होती है, यह गर्मी के मौसम में भी होती है। गर्मी के मौसम में कोल्ड होना कोई बड़ी बात नहीं है। बदलते मौसम के कारण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित होती है जिसके कारण कोल्ड और कफ की समस्या हो जाती है। इससे छुटकारा पाने के लिए आप घरेलू नूस्खों को आजमायें और फिर देखिये कैसे आपके मेटाबॉलिज्म का स्तर बढ़ जाता है। गर्मी के मौसम में अगर कोल्ड की समस्या हुई है तो पानी से दूरी न बनायें बल्कि पानी का अधिक से अधिक सेवन करें। इस स्लाइडशो में हम आपको बता रहे हैं कि कैसे गर्मी के मौसम में आसानी से आप कोल्ड से छुटकारा पा सकते हैं।

नारियल का पानी
गर्मी के मौसम में नारियल का पानी आसानी से उपलब्ध हो जाता है। नारियल का पानी कई गुणों से भरपूर है इसलिए गर्मी में इसे पीने की सलाह भी दी जाती है। गर्मी में कोल्ड को दूर करने के लिए यह बहुत ही शानदार मीठा पेय है। इसमें मौजूद विटामिन और प्रोटीन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और कोल्ड से छुटकारा भी मिलता है। इसका सेवन दिन में दो बार करने से जल्दी आराम मिलेगा।

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गुलाबजल
गुलाबजल का प्रयोग इससे पहले आपने केवल सौंदर्य को निखारने के लिए ही किया होगा। लेकिन यह गर्मी में होने वाले कोल्ड से राहत दिलाने में बहुत मददगार घरेलू नुस्खा है। इसका सेवन दिन में दो बार करने से शरीर का तापमान कम होता है। गुलाबजल में शहद की कुछ बूंदे भी डाल सकते हैं। इसके अलावा गुलाबजल में गुड़ का एक छोटा सा टुकड़ा डालकर इसका सेवन करें। इससे जल्दी आराम मिलेगा।

फलों का जूस
गर्मी के मौसम में फलों का सेवन शरीर के तापमान को कम करने के लिए किया जाता है साथ ही यह डीहाइड्रेशन से भी बचने का अच्छा तरीका भी है। फलों के जूस में विटामिन होता है जो कोल्डी की समस्या से आसानी छुटकारा दिलाता है। संतरा, अनानास, तरबूज, खीरा आदि का सेवन करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। विटामिन सी कोल्ड के लिए जिम्मेदार संक्रमण से लड़ने में मददगार है।

ग्रीन टी पियें
ग्रीन टी का सेवन वजन कम करने के लिए नहीं होता है बल्कि इसमें कई तरह के औषधीय गुण भी होते हैं। गर्मी में अगर कोल्ड के कारण सीने में जकड़न और नाक बंद की समस्या हो तो दिन में दो बार ग्रीन टी पियें। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट बैक्टीरिया के संक्रमण को कम करने में मददगार है।

ऐसा हो आहार
गर्मी में कोल्ड की समस्या होने पर खान-पान में थोड़ा सा बदलाव कर लें। साबुत अनाज और ब्राउन राइस का सेवन करें, इसमें मौजूद फाइबर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। इसके अलावा विटामिन ए युक्त आहार का सेवन करें। हरी और पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें, ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं। गर्मी के मौसम में हरी सब्जियां जैसे- लौकी, पालक, आदि का सेवन करें। इसके अलावा भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करें जिससे बंद नाक की समस्या दूर होगी और शरीर हाइड्रेटेड रहेगा।

मुंह की बदबू दूर करने के लिए घर पर कैसे बनायें माउथ वॉश

माउथवॉश से करें मुंह की बदबू दूर
सांसों की ताज़गी न सिर्फ आपको तरो-ताज़ा रखती है, बल्कि आप जब लोगों से बात करते हैं तब भी एक अच्छा इंप्रेशन छोड़ती है। लेकिन कई बार दांतों और मुंह की सही तरह से सफाई ना हो पाने के चलते मुंह से दुर्गंध आने लगती है। जिससे हमें लोगों से बात करते में भी असहज महसूस होता है और आत्मविश्वास में कमी आने लगती है। लेकिन यदि आप माउथवॉश का इस्तेमाल करें तो इस समस्या को दूर कर सकते हैं और तरो-ताज़ा सांसे व चमकदार दांत पा सकते हैं। कमाल की बात तो ये कि आपको इसके लिये बाज़ार से माउथवॉश खरीदने की जरूरत नहीं है। आप घर पर ही अच्छा माउथवॉश बना सकते हैं। तो चलिये जानें घर पर माउथवॉश कैसे बनाएं।

बेकिंग सोडा, टी ट्री व पिपरमेंट ऑयल और पानी का माउथवॉश
इस माउथवॉश को बनाने के लिये बेकिंग सोडा, टी ट्री ऑयल, पिपरमेंट ऑयल और पानी की जरूरत होती है। ये माउथवॉश, दांतों को साफ और चमकदार बनाता है और इसमें मौजूद पिपरमेंट मुंह और सांसों को फ्रेश बनाएं रखता है। इस माउथवॉश को बनाने के लिये दो चम्‍मच बेकिंग सोडा, दो बूंद टी ट्री ऑयल और दो ही बूंद पिपरमेंट ऑयल लेकर इसमें थोड़ा गर्म पानी डालें और अच्‍छे से मिला लें। आपका माउथवॉश तैयार है, दिन में दो से तीन बार इससे कुल्‍ला करें।

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लौंग, दालचीनी ऑयल और पानी का माउथवॉश
इस माउथवॉश से कुल्‍ला करने पर सांसों को ताजगी मिलती है उनसे बदबू आना बंद हो जाती है। साथ ही इस माउथवॉश में मौजूद एंटी-बैक्‍टीरियल गुण दांतों में कीटाणुओं से बचाते हैं। इस माउथवॉश को बनाने के लिये एक कप में थोड़े गर्म पानी लें और इसमें दोनो तरह के तेलों को मिला लें। इस मिश्रण से परोड़ाना दिन में दो बार (सुबह और शाम) कुल्‍ला करें। आप आप इसे ज्‍यादा मात्रा में बनाकर रखना चाहते हैं तो इसे फ्रिज में भी स्‍टोर कर सकते हैं।

सेब का सिरका और पानी का माउथवॉश
सेब के सिरके से दांतों और मुंह के कीटाणुओं से मुक्ति मिलती है और दांत तमकदार बनते हैं। इस माउथवॉश के उपयोग से सांसों की बदबू दूर होती है और दांत भी स्वस्थ रहते हैं। इसे बनाने के लिये तीन चम्‍मच सेब के सिरके को गर्म पानी में मिलाकर अच्‍छे से मिला लें और दिन में इस माउथवॉश से तीन से चार बार कुल्‍ला करें।

नींबू, ग्लिसरीन और पानी का माउथवॉश

नींबू में काफी अम्‍लीय गुण होते हैं, इसके माउथवॉश के उपयोग से न सिर्फ दांतों को सफेदी मिलती है, बल्कि सांसों को भी ताज़गी मिलती है। वहीं ग्लिसरीन से दांत संक्रमण से बचे रहते हैं। इस माउथवॉश को बनाने के लिये दो चम्‍मच ग्लिसरीन लेकर इसमें कुछ बूंद नींबू का रस मिलाएं और फिर इससे दिन में दो से तीन बार कुल्‍ला करें।

एलोवेरा, बेकिंग सोडा, पिपरमेंट तेल और पानी का माउथवॉश

इस माउथवॉश के नियमित इस्‍तेमाल से हानिकारक माइक्रोबेस दूर हो जाते हैं और गंदगी भी दूर हो जाती है। इस माउथवॉश में एंटी-इंफ्लामेंट्री गुण होते हैं जिससे मसूडे स्वस्थ बनते हैं और मुंह की गंदगी भी साफ होती है। इसे बनाने के लिये दो चम्‍मच बेकिंग सोडा और दो चम्‍मच पिपरमेंट तेल लेकर एलोवेरा जूस में इसे ठीक से मिला लें। अब इस मिश्रण में थोड़ा गर्म पानी भी मिला लें। आपका माउथवॉश तैयार है, बेहतर परिणाम के लिये इससे नियमित दिन में दो बार कुल्‍ला करें।

इन 5 वजह से है एलोवेरा स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक

एलोवेरा के साइड-इफेक्‍ट
ऐलोवेरा का अपयोग अनेक स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने व सौंदर्य उत्पादों में होता है। आमतौर पर इसे मुंहासों, शुष्क त्वचा, स्ट्रेच मार्क्स, जलने पर या फिर चेहरे के दाग धब्बों आदि को दूर करने के लिए किया जाता है। लेकिन एलोवेरा के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। अगर आप शुद्ध ऐलोवेरा का जरूरत से ज्यादा मात्रा का सेवन करते हैं तो आपको इससे कुछ नुकसान भी हो सकते हैं।

पोटेशियम का स्तर कम होना
अगर ऐलोवेरा का जरूरत से अधिक मात्रा में या गलत तरीके से सेवन किया जाए तो इससे शरीर का पोटैशियम स्तर घट सकता है। ऐसा होने से दिल की धड़कन अनियमित हो सकती हैं और कमज़ोरी महसूस हो सकती है।

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दस्त लग सकते हैं
ऐलोवेरा में लैक्सेटिव (laxative) एंथ्राक्विनोन (anthraquinone) आदि तत्व मौजूद होते हैं, इसका ज्यादा मात्रा में सेवन करने से दस्त लग सकते हैं। तो ध्यान रहे कि यदि आपको इरेटेबल बोवेल सिंड्रोम (irritable bowel syndrome ) या गैस की समस्या हो तो ऐलोवेरा का सेवन न करें।

गर्भपात हो सकता है
यदि आप गर्भवती हैं या फिर अपने शिशु को स्तनपान करा रही हैं तो ऐलोवेरा के सवन से बिल्कुल दूर रहें। गर्भवती महिलाओं द्वारा इसका सेवन करने पर गर्भपात या बच्चे में कोई जन्म दोष हो सकता है। 12 साल से छोटे बच्चों के लिए भी एलोवेरा का सेवन सुरक्षित नहीं माना जाता है।

दवाओं का असर को रोकता है
ऐलोवेरा में मौजूद लैक्सेटिव शरीर में कुछ दवाओं को अवषोषित होने से भी रोक सकता है। तो यदि आप दवाओं पर हैं तो ऐलोवेरा को किसी भी रूप में लेने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह अवश्य ले लें।

शरीर को कितना साइड इफेक्‍ट करती है अदरक की चाय, जानें

अदरक की चाय के साइड इफेक्‍ट
अदरक में मौजूद तत्‍व मतली, पेट और आंतों की समस्‍या और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। प्राचीन आयुर्वेद और चीनी दवाओं में भी करीब 3 हजार सालों से अदरक का इस्‍तेमाल औषधि के रूप में किया जा रहा है। और अदरक की चाय अपच, सूजन, जलन, माइग्रेन, डायरिया और कई अन्‍य प्रकार की समस्‍याओं का कुदरती तौर पर इलाज करने के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है। अदरक की चाय पीने से सेहत को कई तरह से फायदा होता है, लेकिन कहते हैं न अति हर चीज की बुरी होती है। जीं हां अदरक की चाय को अधिक मात्रा में पीने से कुछ लोगों को सीने में जलन, पेट खराब होना जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आइए जानें सेहत के लिए फायदेमंद अदरक की चाय आपकी दुश्‍मन कैसे हो सकती है।

पेट में खराबी
हालांकि अदरक की चाय पेट की समस्‍याओं को दूर करती है, लेकिन अदरक की चाय की उचित मात्रा हर व्‍यक्ति के हिसाब से अलग-अलग होती है। तो ऐसे में यह कहना जरा मुश्किल है कि इस समस्‍या से बचने के लिए अदरक की चाय की कितनी मात्रा उपयोगी साबित होगी। खाली पेट अदरक की चाय का सेवन करने से आपका पेट खराब हो सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर के अनुसार, ऐसा करने से गस्ट्रोइंटेस्टिनल खराब हो जाता है।

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गर्भपात का खतरा
गर्भावस्‍था में अदरक की चाय का सेवन करना चाहिये अथवा नहीं यह एक विवादास्‍पद मुद्दा है। कुछ लोगों का मानना है कि मॉर्निंग सिकनेस के लिए अदरक की चाय बहुत मददगार होती है। लेकिन कई जानकार गर्भस्‍थ शिशु पर बुरा असर होने के कारण गर्भवती को अदरक का सेवन न करने की सलाह देते है। गर्भावस्‍था के दौरान अदरक का सेवन मां और शिशु दोनों के लिए खतरनाक क्‍योंकि इससे गर्भपात भी हो सकता है। इसलिए बेहतर है कि गर्भावस्‍था में अदरक की चाय का सेवन करने से पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह ले लें।

ब्‍लीडिंग का खतरा
ब्‍लड पतला करने वाली किसी भी दवा के साथ अदरक की चाय के सेवन से बचना चाहिए। यानी जो लोग हाई ब्‍लड प्रेशर की दवा का सेवन कर रहे हैं, उन्‍हें किसी भी रूप में अदरक का सेवन नहीं करना चाहिये क्‍योंकि यह ब्‍लड प्रेशर को कम करता है, जिससे हार्ट पल्‍पीटेशन की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा अदरक के सेवन से लोगों में हीमोफिलिया जैसे रक्‍त विकार हो सकते हैं। इसलिए दवाओं के साथ अदरक की चाय पीने से पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह जरूर लें।

जलन, डायरिया और मतली की समस्‍या
अदरक की चाय का अधिक सेवन आपकी पाचन क्रिया को बिगाड़ सकता है। इसके कारण मुंह में जलन, डायरिया, मतली और यहां तक कि सीने में जलन की समस्‍या भी हो सकती है। इसके साथ ही इसके अधिक सेवन से शरीर में एसिड का निर्माण होने से एसिडिटी होती है। इसके अलावा डायबिटीज से ग्रस्‍त लोगों को किसी भी रूप में अदरक का अधिक सेवन नहीं करना चाहिये। क्‍योंकि अदरक शरीर में शुगर की मात्रा को कम कर देता है, जिससे हायपोग्‍लासेमिया हो सकता है।

भूख करती है कम
2012 में मेटाबाल्जिम : क्‍लीनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल में प्रकाशित एक पायलट अध्‍ययन के अनुसार अदरक का सेवन आपकी भूख को कम करता है। अध्‍ययन में शोधकर्ताओं को संदेह है कि अदरक में सेरोटोनिन हार्मोंन की सांद्रता, भूख को दबाने में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता हैं। इसलिए अगर आप अपना वजन बढ़ाने चाहते हैं तो अदरक की चाय पीने से बचें क्‍योंकि यह आपकी भूख को कम कर सकती हैं।

स्वाद और सेहत से भरपूर है हल्दी वाला दूध

बहुत फायदेमंद हैं हल्‍दी वाला दूध
दूध जहां कैल्शियम से भरपूर होता है वहीं दूसरी तरफ हल्‍दी में एंटीबायोटिक होता है। दोनों ही आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। और अगर दोनों को एक साथ मिला लिया जाये तो इनके लाभ दोगुना हो जायेगें। आइए हल्‍दी वाले दूध के ऐसे फायदों को जानकर आप इसे पीने से खुद को रोक नहीं पायेगें। image courtesy : womansworld.in

सांस संबंधी समस्‍याओं में लाभकारी
हल्दी में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते है, इसलिए इसे गर्म दूध के साथ लेने से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम होता है। यह मसाला आपके शरीर में गरमाहट लाता है और फेफड़े तथा साइनस में जकड़न से तुरन्त राहत मिलती है। साथ ही यह बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है।

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मोटापा कम करें
हल्दी वाले दूध को पीने से शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी घटती है। इसमें मौजूद कैल्शियम और मिनिरल और अन्‍य पोषक तत्व वजन घटाने में मदगार होते है।

हडि्डयों को मजबूत बनाये
दूध में कैल्शियम और हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी के कारण हल्दी वाला दूध पीने से हडि्डयां मजबूत होती है और साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। हल्दी वाले दूध को पीने से हड्डियों में होने वाले नुकसान और ऑस्टियोपोरेसिस की समस्‍या में कमी आती है।

खून साफ करें
आयुर्वेदिक परम्‍परा में हल्‍दी वाले दूध को एक बेहतरीन रक्त शुद्ध करने वाला माना जाता है। यह रक्त को पतला कर रक्त वाहिकाओं की गन्दगी को साफ करता है। और शरीर में रक्त परिसंचरण को मजबूत बनाता है।

पाचन संबंधी समस्‍याओं में लाभकारी
हल्‍दी वाला दूध एक शक्तिशाली एंटी-सेप्टिक होता है। यह आंतों को स्‍वस्‍थ बनाने के साथ पेअ के अल्‍सर और कोलाइटिस के उपचार में भी मदद करता है। इसके सेवन से पाचन बेहतर होता है और अल्‍सर, डायरिया और अपच की समस्‍या नहीं होती है।

दर्द कम करें
हल्दी वाले दूध के सेवन से गठिया का निदान होता हैं। साथ ही इसका रियूमेटॉइड गठिया के कारण होने वाली सूजन के उपचार के लिये प्रयोग किया जाता है। यह जोड़ो और मांसपेशियों को लचीला बनाता है जिससे दर्द कम हो जाता है।

गहरी नींद में सहायक
हल्‍दी शरीर में ट्रीप्टोफन नामक अमीनो अम्ल को बनाता है जो शान्तिपूर्वक और गहरी नींद में सहायक होता है। इसलिए अगर आप रात में ठीक से सो नहीं पा रहें है या आपको बैचेनी हो रही है तो सोने से आधा घंटा पहले हल्दी वाला दूध पीएं। इससे आपको गहरी नींद आएगी और नींद ना आने की समस्या दूर हो जाएगी।

इन 10 घरेलू नुस्खों से होगी पेट की चर्बी छुमंतर

योग के माध्यम से पाएं सपाट पेट
अगर आपका पूरा शरीर फिट है, लेकिन सिर्फ पेट की चर्बी बढ़ी है तो आपका पूरा लुक प्रभावित हो सकता है। अक्सर लोगों के साथ होता है कि उनके पेट पर बाकी शरीर की तुलना में अधिक चर्बी जम जाती है, जिससे पेट बाहर की तरफ लटका हुआ प्रतीत होता है। अगर आप भी अपने पेट की बढ़ती चर्बी से परेशान हैं और इसे कम करने के लिए किसी कारगर उपाय की तलाश में हैं तो योग आपके लिए बहुत मददगार हो सकता है। योगासनों से न सिर्फ आपको पेट की चर्बी कम करने में मदद मिलेगी बल्कि आपकी मांसपेशियां मजबूत होंगी और शरीर लचीला होगा। आइये पेट की चर्बी घटाने वाले आसनों के बारे में जानते हैं।

भुजंगासन
भुजंगासन से पेट की चर्बी कम होती है। साथ ही साथ, बाजुओं, कमर और पेट की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और शरीर लचीला बनता है। इसके लिए पहले पेट के बल सीधा लेट जाएं और दोनों हाथों को माथे के नीचे टिकाएं। दोनों पैरों के पंजों को साथ रखें। अब माथे को सामने की ओर उठाएं और दोनों बाजुओं को कंधों के समानांतर रखें जिससे शरीर का भार बाजुओं पर पड़े। शरीर के अग्रभाग को बाजुओं के सहारे उठाएं। शरीर को स्ट्रेच करें और लंबी सांस लें। कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहने के बाद वापस पेट के बल लेट जाएं।

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बलासन
बलासन उन लोगों के लिए सबसे अच्छा आसन है जिन्होंने योगासन की शुरुआत की हो। इससे पेट की चर्बी भी कम होती है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसके लिए, घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं जिससे शरीर का सारा भाग एड़ियों पर हो। गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें। आपका सीना जांघों से छूना चाहिए और माथे से फर्श छूने की कोशिश करें। कुछ सेकेंड इस अवस्था में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए वापस उसी अवस्था में आ जाएं। गर्भवती महिलाएं या घुटने के रोग से पीड़ित लोग इसे न करें।

पश्चिमोत्तानासन
पश्चिमोत्तानासन पेट की चर्बी कम करने के लिए बेहद आसान और प्रभावी आसन है। इसके लिए, सबसे पहले सीधा बैठ जाएं और दोनों पैरों को सामने की ओर सटाकर सीधा फैलाएं। दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और कमर को बिल्कुल सीधा रखें। फिर झुककर दोनों हाथों से पैरों के दोनों अंगूठे पकड़ने की कोशिश करें। ध्यान रहे इस दौरान आपके घुटने न मुड़ें और न ही आपके पैर जमीन से ऊपर उठें। कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं।

कपालभाति
इस प्राणायाम से पेट की चर्बी कम होती है। इसके लिए, सबसे पहले पद्मासन या सुखासन जैसे किसी ध्यानात्मक आसन में बैठ जाएं। कमर व गर्दन को सीधा कर लें। यहां छाती आगे की ओर उभरी रहेगी। हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रख लें। आंखें बंद करके आराम से बैठ जाएं व ध्यान को श्वास की गति पर ले आएं। यहां पेट ढीली अवस्था में होगा। अब कपालभाति प्रारंभ करें। इसके लिए नाभि से नीचे के पेट को पीछे की ओर पिचकाएं या धक्का दें। इसमें पेट की मांसपेशियां आकुंचित होती हैं। साथ ही, सांस को नाक से बलपूर्वक बाहर की ओर फेंकें, इससे सांस के बाहर निकलने की आवाज भी पैदा होगी। अब अंदर की ओर दबे हुए पेट को ढीला छोड़ दें और सांस को बिना आवाज भीतर जाने दें। सांस भरने के लिए जोर न लगाएं, वह स्वयं ही अंदर जाएगी। फिर से पेट अंदर की ओर दबाते हुए तेजी से सांस बाहर निकालें।

धनुरासन
यह आसन पेट की चर्बी काटने में काफी कारगर है। इससे आपके शरीर में लचीलापन भी आता है। उल्टा लेटकर व अपने दोनों पैरों को मोड़कर हाथ से पकड़ें और नीचे व ऊपर से खुद को स्ट्रेच करें। इसी अवस्था में 30-60 सेकंड तक रुकें और नीचे आ जाएं व दोहराएं।

पादहस्तासन
इस आसन से पेट के आसपास के हिस्से पर जमा फैट्स बर्न करने में मदद मिलती है। साथ ही, इससे शरीर लचीला होता है। इसे करने के लिए, दोनों पैरों के बीच थोड़ा गैप रखें और सीधे खड़े हो जाएं। अब सांस खींचते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और सांस छोड़ते हुए नीचे ले जाएं। दोनों हाथों से पंजे छूने की कोशिश करें और ध्यान रखें कि घुटने न मुड़ें।

उष्ट्रासन
ये आसन पेट को सपाट करने में मदद करता है। इसके लिए, वज्रासन में बैठें। फिर घुटनों के बल खड़े हो जायें। घुटनों से कमर तक का भाग सीधा रखें व पीठ को पीछे की ओर मोड़कर हाथों से पैरों की एड़ियां पकड़ लें। अब सिर को पीछे झुका दें। श्वास सामान्य, दृष्टि जमीन पर व ध्यान विशुद्धाख्य चक्र (कंठस्थान) में हो। इस अवस्था में 10-15 सेकेंड रुकें। आसन छोड़ते समय हाथों की एड़ियों से हटाते हुए सावधानीपूर्वक वज्रासन में बैठें व सिर को सीधा करें। ऐसा 2-3 बार करें। क्रमशः अभ्यास बढ़ाकर एक साथ 1 से 3 मिनट तक यह आसन कर सकते हैं।

पुरूषों के बाल झड़ने से बचाएंगे ये सीक्रेट टिप्‍स

पुरुषों में बाल झड़ने की समस्या
बालों के झड़ने की समस्या पुरुषों में काफी सामान्य होती है। इसके पीछे कई कारण होते हैं। पुरुषों के हेयर फलिकल के गायब होने में पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन की भी अहम भूमिका होती है। बाल झड़ने का एक मुख्य कारण एधिक तनाव से भरा जीवन भी है। गंजेपन को चिकित्सकीय भाषा में एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया कहते हैं। हालांकि कुछ घरेलू उपचारों की मदद से पुरुष बाल झड़ने की समस्या से बच सकते हैं। चलिये जानें कौंन से हैं वे उपचार….

टेस्टोस्टेरॉन और पुरुषों में गंजापन
कई आधुनिक शोधों से यह बात सामने आई है कि टेस्टोस्टेरॉन और गंजेपन में संबंध होता है। गंजे पुरुषों में सामान्यत: टेस्टोस्टेरॉन का स्तर अधिक होता है। हालांकि महिलाओं में भी टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन पाया जाता है, लेकिन उनमें इसका स्तर कम होता है, इसलिये उनमें गंजेपन की समस्या भी पुरुषों के मुकाबले कम होती है।

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दही और काली मिर्च
बाल झड़ने की समस्या को रोकने में यह उपाय बहुत कारगर साबित होगा। तीन चम्मच दही के साथ काली मिर्च पाउडर के 2 चम्मच को मिलाएं। मिश्रण को अच्छे से मिलाने के बाद इस पेस्ट की सिर पर हल्के से मसाज करें और फिर एक घंटे छोड़ने के बाद शैम्पू कर लें।

फ्लेक्स सीड
लगभग पांच दिनों के लिए तीन से चार बड़े चम्मच फ्लेक्स सीड को पानी में भिगोकर रख दें। अब इस पानी को कॉटन बॉल की मदद से स्कैल्प पर लगाएं और आधे घंटे तक छोड़ देने के बाद सिर को गुनगुने पानी से धो लें।

तेल मसाज
एक कप सरसों के तेल को गर्म करे और इसमें चार टेबल स्पून मेहंदी की पत्तियां मिला लें। इस मिश्रण को छानकर बोतल में रख लें। फिर अपने सिर के गंजे हिस्सों पर इस घरेलू उपचार से रोजाना मालिश करें। इसके अलावा आप बदाम, नारियल व ऑलिव ऑयल से से हफ्ते में दो बार मसाज भी कर सकते हैं।

कोकोनट मिल्क
नारियल का दूध (कोकोनट मिल्क) बालों को पोषण देता है और उनके बेहतर विकास में मदद करता है। इसके अलावा, यह बालों को मुलायम बनाने में भी मदद करता है। बस बालों इसे लगाएं और मसाज करें और आधे घंटे बाद धो दें।

एलो वेरा
यदि आप चाहते हैं कि आपके बाल झड़ने कम हो जाएं और बालों को मजबूत मिले तो स्कैल्प पर ऐलो जैल से मसाज करें। सप्ताह में दो बार ऐलोवेरा जैल से मालिश करने से बालों के झड़ने की समस्या से निजात मिलती है और संक्रमण भी दूर होता है।

नीम पेस्ट
चिकित्सकीय गुणों से भरपूर नींम पेस्ट स्काल्प के क्षारीय संतुलन को बहाल करने में मदद करता हैं और बालों को झड़ने से रोकता है। इसे और भी ज्यादा असरदार बनाने के लिए नीम पेस्ट में शहद और जैतून के तेल को भी मिला लें।

अंडे
प्रोटीन उपचार बालों की देखभाल के लिए एक प्राथमिक चरण होता है। तो यदि आप मजबूत और चमकदार बाल चाहते हैं, तो बालों को एक सप्ताह में तीन से चार बार प्रोटीन उपचार दें। इसके लिए बस आपको एक कच्चे अंडे को तोड़कर गीले बालों पर लगाना है और पंद्रह मिनट के बाद गुनगुने पानी से धो देना है।

मेथी के बीज
मेथी के बीज के दो से तीन बड़े चम्मच लेकर पानी में आठ से दस घंटे तक भिगो कर रख दें। अब इसका पेस्ट बना लें और बालों की जड़ों में लगाएं। ये पेस्ट न सिर्फ बालों को झड़ने से रोकता है बल्कि बालों को मजबूत बनाकर डेंड्रफ की समस्या को भी दूर करता है।

अपर लिप हेयर को हटाने के लिए अपनाएं ये 10 आसान उपाए

चेहरे की सुंदरता को कम करते, अपर लिप पर बाल
अपर लिप पर बाल आना महिलाओं की आम समस्‍या है। महिलाओं में अनचाहे बालों का विकास हार्मोनल या आनुवंशिक कारणों से होने लगता है। हालांकि अपर लिप के बालों को हटाना थोड़ा दर्दनाक होता है लेकिन इन्‍हें हटाना बहुत जरुरी होता है क्‍योंकि इससे चेहरा भद्दा और गंदा लगता है। अगर अपर लिप के बाल आपको भी अक्‍सर शर्मिंदगी में डाल देते हैं, और विभिन्‍न उत्‍पादों को इस्‍तेमाल करने के बाद भी आपको प्रभावी ढंग से होंठों के बालों से छुटकारा नहीं मिल पा रहा हैं? तो यहां दिये कुछ घरेलू उपायों को अपनाकर आप बिना दर्द के इस समस्‍या से निजात पा सकती हैं।
Image Courtesy : beautyheaven.com

हल्दी और पानी
अपर लिप के बालों को हटाने के लिए हल्‍दी सबसे अच्‍छा उपाय है। इसके लिए एक बड़ी चम्‍मच हल्‍दी में इतना पानी मिलाये कि इससे गाढ़ा पेस्‍ट बना जाये। फिर इस पेस्‍ट को अपने होंठों के ऊपरी हिस्‍से में धीरे-धीरे लगाये। आधा घंटे इस पेस्‍ट को ऐसे ही लगा रहने दें फिर धीरे-धीरे रगड़कर इसे साफ कर दें। इस उपाय को चार सप्‍ताह तक नियमित रूप से करने से अपर लिप पर नये बालों का विकास रूक जाता है।

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नींबू, चीनी और पानी
दो नींबू के रस को निचोड़कर इसमें थोड़ा सा पानी और चीनी मिला लें। और इस पेस्‍ट को तबतक मिलाते रहें जब तक कि इसका पतला पेस्‍ट न बन जाये। अब तैयार पेस्‍ट को अपने होंठों के ऊपरी हिस्‍से में लगा लें। 15 मिनट तक लगा रहने के बाद इसे पानी से धो लें।

अंडे की सफेदी
अपर लिप के बाल को हटाने के लिए अंडे की सफेदी एक और अच्‍छा उपाय है। इस पेस्‍ट को बनाने के लिए आप एक अंडे की सफेदी में एक चम्‍मच आटा और चीनी को मिला लें। फिर इस पेस्‍ट को अपने होठों के ऊपरी हिस्‍से में लगा लें। इस पेस्‍ट को कम से कम 30 मिनट के लिए लगा रहने दें। अच्‍छे परिणाम पाने के लिए, एक सप्ताह में दो बार इस थेरेपी को दोहराएं। एक महीने के अंदर आपके बालों को विकास काफी कम हो जायेगा।

हल्दी और दूध
यह ऊपरी होंठ के बाल हटाने का सबसे अच्छा उपाय है। इसके लिए आप एक चम्‍मच हल्‍दी में थोड़ा सा दूध मिलाकर पतला पेस्‍ट बना लें। फिर इस पेस्‍ट को अधिक मात्रा में लेकर अपर लिप पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने पर इस पेस्‍ट को रगड़कर हटा दें।

गेंहू का चोकर
गेंहू का आटा छानने के बाद जो चोकर बच जाता है वह भी अपर लिप के बाल हटाने में फायदेमंद होता है। इसके लिए 3 चम्मच गेंहू के चोकर में 1 चम्मच गुलाबजल और एक बड़ा चम्मच दूध मिलाएं। फिर इसका पेस्ट बनाकर चेहरे पर स्क्रब करें। इसे कुछ मिनट सूखने दें और फिर चेहरा धो लें। एक हफ्ते तक रोज इस उपाय को अपनाएं। धीरे-धीरे आपके अपर लिप के बाल हटने लगेंगे।

चीनी
चीनी के कई उपयोग हैं, और उनमें से एक अपर लिप के बालों को हटाने में मदद करना भी है। चीनी मृत त्‍वचा को हटाकर अनचाहे बालों को जड़ से निकाल देती है। इसके लिए एक कड़ाही में कुछ बूंदे नींबू का रस और एक बड़ी चम्‍मच चीनी को मिलाकर तब तक उबालें जब तक कि चीनी अच्‍छे से घुल न जाये। फिर इसे ठंडा करने के लिए रख दें। ठंडा होने के बाद इसे कॉटन की मदद से अपर लिप पर लगा दें। फिर होठों के ऊपरी हिस्‍से को कपड़े से सर्कुलर मूवमेट में रगड़कर साफ कर दें।

दही, बेसन और हल्दी
बेसन और दही को मिलाकर त्‍वचा पर लगाने से त्‍वचा मुलायम होने के साथ ही बाल रहित भी होती है। इसके लिए थोड़ा सा दही लेकर उसमें एक चम्‍मच बेसन में एक चुटकी हल्दी मिलाकर पेस्‍ट बना लें। फिर इस पेस्‍ट को सूखने तक अपने अपर लिप पर लगाये। सूखने के बाद पेस्‍ट को हल्‍के हाथों से रगड़कर पानी से धो लें। इस पैक को आप रोज भी लगा सकते हैं। नियमित रूप से इस पेस्‍ट को लगाने से अपर लिप के बाल धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे।

कच्‍चा पपीता
कच्‍चे पपीते में पैपेन नामक सक्रिय एंजाइम होता है जो बालों के रोमकूप को निष्‍पक्ष करने और बालों के विकास को कम करने में मदद करते है। पपीते के पैक को बनाने के लिए दो बड़े चम्‍मच पपीते का पेस्ट और आधा चम्मच हल्दी पाउडर लेकर पेस्‍ट बना लें। 15 मिनट के लिए इस पेस्ट से अपने अपर लिप पर मसाज करें और फिर पानी से धो लें। बेहतर परिणाम पाने के लिए इसे एक सप्ताह में दो बार करें।

ओटमील
1 चम्मच ओटमील में 1 चम्मच शहद और नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को अपरलिप पर लगाकर 15-20 मिनट के लिए रखें। 20 मिनट बाद गोलाई में बालों की विपरीत दिशा में मसाज करें। फिर गुनगुने पानी से इसे साफ कर लें। हफ्ते में 2-3 बार इसका उपयोग करने से अपरलिप के बाल पूरी तरह से साफ हो जाएंगे।

इन नुस्खों को अपनाएं और यूरिक एसिड घटाएं

यूरिक एसिड का बढ़ना
यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला एक रसायन है, यह पाचन प्रक्रिया के दौरान प्रोटीन के टूटने से बनता है। ज्यादातर यूरिक एसिड खून में घुलकर किडनी तक पहुंचता है। सामान्यतया यह पेशाब के जरिये बाहर निकल जाता है। लेकिन जब यह अधिक मात्रा में बनने लगता है तब पूरी तरह से निकल नहीं पाता। युरिक एसिड अधिक जमा हो जाये तो गाउट बन जाता है। आलस, नॉनवेज अधिक खाने के अलावा आनुवांशिक कारणों से शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने लगता है। यूरिक एसिड बढ़ने से जोड़ों में दर्द बढ़ जाता है। इससे पथरी होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए समय पर इसे नियंत्रित करना बहुत जरूरी है। यूरिक एसिड कम करने के लिए आप घरेलू नुस्खों को आजमा सकते हैं।

नींबू का पानी
नींबू का सेवन सेहत के लिहाज से बहुत फायदेमंद है। जिनका यूरिक एसिड बढ़ गया हो उनके लिए यह रामबाण है। नींबू में विटामिन सी काफी मात्रा में पाया जाता है, जिसके सेवन से यह एसिडिक प्रभाव पैदा करता है। इसके कारण यूरिक एसिड का स्तर कम होने लगता है। एक गिलास हल्के गुनगुने पानी में एक नींबू निचोड़ लीजिए और सुबह-सुबह खाली पेट इसका सेवन कीजिए।

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बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडा से भी शरीर में बढ़े यूरिक एसिड की मात्रा को कम किया जा सकता है। बेकिंग सोडा शरीर में बेहतर एल्काइन स्तर बनाकर पेशाब के रास्तें यूरिक एसिड को निकालने में मदद करता है। एक गिलास पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा घोलकर दो सप्ताह सेवन करने से यूरिक एसिड का स्तर कम हो जाता है।

अजवाइन का बीज
अजवाइन के सेवन से भी यूरिक एसिड का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। खाली पेट अजवाइन के बीजों का सेवन आप सीधे नहीं कर सकते हैं तो खाना पकाते वक्त इसका प्रयोग करें।

सेब का सिरका
सेब ही नहीं बल्कि सेब का सिरका कई बीमारियों को दूर करने में मदद करता है। शरीर में बढ़े यूरिक एसिड को कम करने के लिए सेब के सिरके का सेवन करें। इसके लिए एक गिलास पानी में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाकर दिन में दो बार सेवन कीजिए।

बथुए के पत्ते
बथुए के पत्ते का जूस निकालकर सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। इस जूस को पीने के बाद दो घंटे तक कुछ भी न खायें। एक सप्ताह तक इस जूस का सेवन करने से शरीर में यूरिक एसिड का स्तर सामान्य हो जाता है।

सफेद दाग दूर करने के अपनाएं ये 6 सीक्रेट्स

सफेद दाग की समस्या
सफेद दाग एक तरह का त्वचा रोग है जो किसी एलर्जी या त्वचा की समस्या के कारण होता है। कई बार ये आनुवांशिक भी होता है। दुनिया के दो प्रतिशत लोग इस समस्या से ग्रस्त हैं और भारत में चार प्रतिशत तक लोग इस समस्या से पीड़ित हैं। इसे ठीक करने के लिए काफी धैर्य की जरूरत है। इन घरेलू उपायों में इस समस्या का समाधान छुपा है जिसे धैर्य के साथ अपनाने की जरूरत है।

नीम का उपयोग
नीम की पत्तियां और फल कई प्रकार के रोगों के लिए फलदायक है। नीम के पत्ती को पीसकर उसका पेस्ट बनाये और उसे दाग वाले जगह में एक महीने तक लगायें। साथ ही नीम के फल को रोज खायें और नीम के पत्तों का जूस पिएं। इससे खून साफ होगा और सफेद दाग के साथ त्वचा की सारे रोग खत्म हो जाएंगे।

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शरीर शुद्ध रखें
कई बार लोग मल-मूत्र को रोक कर रखते हैं। जो कि बहुत गलत है। इससे शरीर के अंदर अपशिष्ट पदार्थों का जमावड़ा बन जाता है जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए हमेशा शरीर के विषैले तत्‍व को बाहर निकालें और शरीर को शुद्ध रखें।

फायदेमंद बथुआ
ज्यादा से ज्यादा अपने खाने में बथुआ शामिल करें। रोज बथुआ उबाल कर उसके पानी से शरीर के सफेद दाग को धोयें। कच्चे बथुआ का रस दो कप निकाल कर, उसमें आधा कप तिल का तेल मिलाकर धीमी आंच पर पकायें। जब केवल तेल रह जाये तो उसे उतार ले। अब इसे रोज दाग में लगायें।

अखरोट खाएं
अखरोट सफेद दाग में काफी फायदेमंद है। अखरोट रोज खायें। यह सफेद पड़ चुकी त्वचा को काली करने में मदद करेगी।

अदरक
रोजाना अदरक का जूस पीएं और अदरक के एक टुकड़े को खाली पेट चबाएं। साथ ही अधरक को पीसकर सफेद त्वचा पर लगाएं।

ये ना खाएं
इन घरेलू उपायों के साथ ही कई खाने की चीजों से परहेज भी करना चाहिए जिससे सफेद दाग की समस्या बढ़े ना। मिठाई, रबड़ी, दूध व दही का एक साथ सेवन न करें। साथ ही दूध की किसी चीज के साथ मछली ना खाएं।

जानें कितना फायदेमंद है कोकोआ बटर

कोकोआ बटर के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ
कोकोआ बटर प्राकृतिक फैट है, जो कोको बीन्स से प्राप्त होती है। इसके अलावा इसे थियाब्रोंमा तेल के रूप में जाना जाता है, कोकोआ बटर का रंग हल्का पीला होता है और इसे कोको बीन्‍स से निकाला जाता है। मध्‍य और दक्षिण अमेरिका में इसकी उपज होती है और कोकोआ बीन्‍स का इस्‍तेमाल कोकोआ बटर बनाने में होता है। यह लगभग हर सौंदर्य प्रोडक्‍ट का सबसे लोकप्रिय घटक होता है, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि यह हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

शुष्‍क त्वचा के लिए फायदेमंद
कोकोआ बटर त्‍वचा को अच्‍छे से मॉश्‍चराइज करता है और यह न केवल अपनी त्‍वचा को हाइड्रेट करता है बल्कि त्‍वचा में भीतर से कसाव लाने में मदद करता है। यह एंटीऑक्‍सीडेंट का बहुत बड़ा स्रोत; कोकोआ बटर शुष्‍क, परतदार और फटी त्‍वचा की मरम्‍मत करता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ई और विटामिन ए भरपूर मात्रा में होता है। इन दोनों विटामिन से चेहरे पर रौनक आती है और त्‍वचा सम्‍बंधी समस्‍याएं दूर हो जाती है।

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होंठों के लिए बेस्ट
कोकोआ बटर होंठों के लिए भी अच्‍छा होता है, यह फटे और सूखें होंठों को ठीक करने में मदद करता है। इसे अपने घरेलू लिप बॉम में अन्‍य आवश्‍यक तेलों के साथ एक घटक के रूप में मिला सकते हैं। या दो बड़े चम्मच कोकोआ बटर, आधा छोटा चम्मच मधु वैक्स लीजिए। उबलते पानी पर एक बर्तन में वैक्स डालकर पिघला दीजिए। इसमें कोकोआ बटर मिलाएं। अब इस मिश्रण को ठंडा होने के बाद ब्रश की मदद से होठों पर लगाइए। इससे आपके होंठ मुलायम हो जायेगें।

उम्र के निशान को कम करें
कोकोआ बटर में ओलिक एसिड, पामिटिक एसिड, और स्टीयरिक अम्ल सहित एंटीऑक्सीडेंट तत्‍व उच्च मात्रा में होने के कारण यह एजिंग के निशान को रोकता है। अध्‍ययन के अनुसार, कोकोआ बटर में बड़े पैमाने में पॉलीफेनोल्स होता है जो उम्र बढ़ने के संकेत को रोकता है। यह त्‍वचा की टोन, लोच में सुधार और त्‍वचा को हाइड्रेट्स कर उम्र बढ़ने के असर को धीमा करता है। अगर आप अपनी त्‍वचा को हमेशा जवां दिखाना चाहती है तो इसका इस्‍तेमाल जरूर करें।

चकत्ते, संक्रमण और जलन कम करें
अगर आप थोड़ी सी शुद्ध कोकोआ मक्‍खन को प्रभावित हिस्‍से पर लगते हो तो यइ इसे जल्‍द ठीक कर सकता है। हालांकि कोकोआ बटर का केवल शुद्ध रूप ही चकत्‍ते, संक्रमण और जलन को ठीक करने में मदद करता है क्‍योंकि मिलावट वाले कोकोआ बटर में अल्‍कोहल और सुगंध होती है जो समस्‍या को खराब कर सकती है।

मुंह के घावों को भरें
अगर आप मुंह के छालों से परेशान हो तो कोकोआ बटर आपकी इस समस्‍या को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है। मुंह में छाले होने पर थोड़ी सी मात्रा में कोकोआ बटर लेकर अपने छालों पर लगा लें। कुछ देर ऐसे ही रखने के बाद कुल्‍ला कर लें।

केले के ये 9 रहस्‍यमयी फायदे जानकर चौंक जाएंगे आप!

केले के अनजाने उपयोग
केले के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के बारे में हम सभी जानते हैं, लेकिन केले के बहुत सारे ऐसे फायदे भी हैं जिनसे हम अनजान हैं। केला न केवल हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा होता है बल्कि इससे आप अपनी त्‍वचा, बालों और बहुत सारे घरेलू कामों में भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। आइए इस स्‍लाइड शो के जरिए जाने केले अनजाने उपयोगों के बारे में।

तनाव कम करें
केला तनाव को कम करने में मदद करता है। केले में ट्राइप्टोफान नामक एमिनो एसिड होता है, जो मूड को रिलैक्स करता है। तनाव से पीड़‍ित व्‍यक्ति को केला खाने से अच्छा महसूस होता है।

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जूते चमकाएं केला
केला जूते, लेदर, सिल्‍वर पर पॉलिश का काम करता है। क्‍या आप केले के इस अद्भुत लाभ के बारे में जानते है। नहीं तो हम आपको बताते है कि केले के छिलके को जूते, चमड़े और सिल्‍वर ज्‍वैलरी पर रगड़ने से उसमें चमक आ जाती है।

दांत को मोतियों सा चमकाएं
अगर आप चाहते हैं कि आपके दांत मोतियों से चमकने लगें तो केले के छिलके का इस्‍तेमाल करें। ब्रश करने के बाद केले के छिलके को हर दिन दांत में रगड़ने से उनमें चमक आ जाती है।

त्‍वचा के लिए फायदेमंद
अभी तक आपने केले का इस्तेमाल केवल खाने के लिए किया होगा। लेकिन इस बार इसका उपयोग त्‍वचा को स्‍वस्‍थ व चमकदार बनाने के लिए करें। केले में विटामिन सी, ए, पोटैशियम, कैल्शियम, फास्फोरस व कार्बोहाइड्रेट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो त्‍वचा के लिए कई तरह से फायदेमंद होते है।

त्‍वचा के लिए मॉइस्चराइजर है केला
केला न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट है, बल्कि एक अच्छा मॉइश्‍चराइजर भी है। घर पर केले का फेस पैक बनाने के लिए एक चौथाई पका हुआ केला लें और उसमें एक चम्मच शहद और आधा चम्मच दही मिला लें। इसे अच्‍छी तरह से मिक्‍स करके अपने चेहरे पर फेस पैक की तरह लगाएं। लगभग 10 से 15 मिनट बाद गुनगुने पानी से चेहरा साफ कर लें। आपकी त्वचा की खोयी हुई चमक वापस लौट आएगी।

बालों में लाएं नए जान
लगातार कलरिंग और केमिकल्‍स से खराब हुए बालों को केले से ठीक किया जा सकता है। विटामिन बी और सी का स्रोत होने के कारण यह बेहतरीन पोषण देता है। पोटैशियम से भरपूर केला बालों को मुलायम भी करता है। अगर आपके बाल बहुत रूखे हैं तो एक केले के गूदे में एक चम्‍मच ग्लिसरीन या शहद मिलाकर पैक बना कर अपने बालों में लगायें।

जलन कम करें केला
जल जाने पर केले के इस्‍तेमाल से जलन कम होती हैं। छिलके के कारण केला नैसर्गिक रूप में हमेशा शुद्ध और संक्रमण मुक्त रहता है। अच्छे पके केले का गूदा शरीर के जले हुए हिस्से पर लगाकर कपड़ा बांध दिया जाय तो तुरंत आराम मिलता है।

फटी एडियों से दिलाएं निजात
अगर आप फटी एडियों की समस्‍या से परेशान है तो केला आपको राहत देगा। इसके लिए पैरों को गरम पानी में डाल कर प्‍यूमिक स्‍टोन से साफ करें। उसके बाद उसपर केले और नारियल तेल मिला पैक बनाकर लगा दें। कुछ देर बाद इसे धो लें। नारियल और केला वसा और विटामिन से भरपूर होते हैं जिससे पैरों को नमी मिलती है।

वार्ट्स दूर भगाएं
वार्ट्स जिसे मस्‍सों की समस्‍या भी कहते है। जो अक्‍सर पैरों या हाथों में निकल आते हैं। इसे दूर करने के लिए केला बहुत ही लाभकारी होता है। इसके लिए आपको केले के छिलके को केवल उस जगह पर रगड़ना होगा और रातभर ऐसे ही छोड़ देना होगा। इससे दुबारा उस जगह पर वार्ट्स नहीं निकलते।

बट्ट पर होने वाले मुंहासों को दूर करने के असरदार घरेलू उपचार

नितंब के मुंहासों को दूर करने के उपाय
चेहरे पर होने वाले मुंहासों के इलाज के बारे में सुना होगा, लेकिन क्‍या कभी आपने बट्ट पर होने वाले उपायों के बारे में सुना है। बट्ट या नितंबों पर होने वाले मुंहासों को सबसे बड़ा कारण, गीले या गंदे कपड़े पहनना है, जिसके कारण त्‍वचा पर संक्रमण होने से मुंहासे हो जाते हैं। कई बार तो इन मुंहासों में पस पड़ने से कील बन जाती है और अंदर ही अंदर घाव बन जाता है। अगर समस्‍या गंभीर है तो तुरंत अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें। लेकिन अगर मुंहासे छोटे है तो आप कुछ घरेलू उपचारों को अपनाकर इस समस्‍या से छुटकारा पा सकते हैं।

बट्ट की सफाई
अगर आपको लगातार ये समस्‍या रहती है तो इसका सबसे बड़ा कारण सफाई का अभाव है। अगर बट्ट की त्‍वचा साफ रहती है तो दाने और फोड़े होने से बचाव करती है। इसलिए शुगर व ओट्स के मिश्रण या लूफा से निंतबों को समय-समय पर साफ करें। इससे गंदगी और धूल साफ हो जाती है और मृत त्‍वचा निकल जाती है जिससे मुंहासे नहीं पड़ते हैं।

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एस्प्रिन का लेप या बर्फ
एस्प्रिन की मदद से भी आप इस समस्‍या से छुटकारा पा सकते हैं। इसके लिए जहां मुंहासा निकला हो, उस जगह पर एस्प्रिन का लेप बनाकर लगा लें। एस्प्रिन का लेप बनाने के लिए एस्प्रिन में शहद और गुनगुने पानी को मिला लें। इस लेप को 15 मिनट तक मुंहासों पर लगा रहने दें। इससे इंफेक्‍शन सही हो जाता है और मुंहासा दब जाता है। इसके अलावा बट्ट पर होने वाले दानों पर बर्फ लगाएं। इससे दिन में तीन से चार बार 5 मिनट तक लगाने से दाने और दर्द दोनों से राहत मिलती है।

टी ट्री और नारियल तेल का पैक
टी ट्री और नारियल के तेल में एंटी-बैक्‍टीरियल गुण होते हैं जो मुंहासों सही करने के लिए सबसे अच्‍छे होता है। टी ट्री और नारियल के तेल को बराबर मात्रा में मिला लें। इस पेस्‍ट को मुंहासों वाली जगह पर लगाकर छोड़ दें। 15 मिनट बाद इसे गुनगुने पानी से धो लें। ऐसा दिन में दो बार करें।

नींबू का रस और एप्‍पल साइडर सिरका
आधे कप पानी में एक चम्‍मच नींबू का रस और एक चम्‍मच एप्‍पल साइडर सिरका मिला लें। फिर इस घोल से मुंहासों वाली जगह को दिन में दो से तीन बार धोये। इससे आपको काफी राहत मिलेगी। समस्‍या के ठीक होने तक इस उपाय को नियमित रूप से करें।

रोजाना बदलें अंडरवियर
गंदे कपड़े पहनने से भी मुंहासों की समस्‍या होती है इसलिए गंदे कपड़े बिल्‍कुल भी न पहनें। बट्ट पर मुंहासे होने पर नियमित रूप नहाये और दिन में दो बार अंडरवियर बदलें। अगर इन उपायों को अपनाने के बावजूद समस्‍या ठीक नहीं होती, तो डर्मेटोलॉजिस्‍ट से संपर्क करें।
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हार्ट अटैक से होने वाली ब्लॉकेज को पीपल के पत्तों से करें दूर

पीपल के पत्तों से हार्ट अटैक का इलाज
अनियमित जीवनशैली, खराब खानपान व एक्सरसाइज ना करने के चलते हार्ट अटैक अर्थात हृदय आघात के मामले काफी बढ़े हैं। हार्ट अटैक घातक होता है, लेकिन अटैक का सामना कर लेने के बाद भी समस्याएं खतम नहीं होती हैं। पहले हार्ट अटैक के बाद शारीरिक को दोबारा सामान्य होने में थोड़ा समय लगता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसा घरेलू नुस्खा बता रहे हैं जिसकी मदद से हार्ट अटैक के बाद होने वाली समस्याओं को ठीक करने में काफी मदद मिलती है, वो भी बहुत कम समय में। ये नुस्खा है पीपल के पत्तों का काढ़ा। चलिये जानें इसे बनाने व प्रयोग करने के तरीके के बारे में –

पीपल के पत्तों का असरदार नुस्खा
सबसे पहले पीपल के लगभग 15 पत्ते ले लें और इन्हें धो-पौंछ कर साफ कर लें। सुनिश्चित कर लें कि यह पत्ते मुरझाए ना हों, या कहीं से सड़े-कटे ना हों और ताज़े हों।

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कैसे करें इसे तैयार
अब इन पत्तों के नीचे व ऊपर के भाग को काटकर अलग कर दें और अब इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आंच पर पकने के लिये रख दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई हो जाए, तो इस नुस्खे को आंच से उतारकर ठंडा होने के लिए रख दें।

तैयार है काढ़ा
यह एक प्रकार का काढ़ा बन कर तैयार हो जाता है और रोगी अब इसका सेवन कर सकता है। इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर रोगी को दिन में तीन बार देना चाहिये। 15 दिनों तक ऐसा करने से ब्लॉकेज कम होती है और रोगी को काफी फायदा होता है। लेकिन यह एक घरेलू नुस्खा ही है, और आपको इसे अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से इसकी मंज़ूरी ज़रूर ले लेनी चाहिये।

चेहरे से रैशेज दूर करने के प्रभावी व आसान घरेलू उपचार

चेहरे के रैशेज के घरेलू उपचार
चकत्ते त्वचा पर लाल छाले या धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं, और जलन और खुजली का कारण बनते हैं। ये एक बेहद आम समस्या है, जो किसी को भी और कभी भी हो सकती है। यह गंभीर नहीं है, हालांकि कभी-कभी यह गंभीर हो सकते हैं। ये चकत्ते, चिकने, परतदार या ऊबड़-खाबड़ हो सकते हैं। अच्छी बात तो यह है कि हल्के चकत्ते को बिना डॉक्टर के पास जाए कुछ घरेलू उपचार कर स्वाभाविक रूप से ठीक किया जा सकता है। तो चलिये जानें क्या हैं चेहरे के रैशेज दूर करने के प्रभावी व आसान घरेलू उपचार।

चेहरे के रैशेज के कारण
चेहरे के रैशेज के निम्न कारण हो सकते हैं –

चेचक, खसरा, रूबेला और मौसा जैसे वायरल संक्रमण
जीवाण्विक संक्रमण (बैक्टीरियल इन्फेक्शन)
दाद
खुजली
कीटाणुओं का काटना
कुछ दवाएं
एलर्जी आदि।

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चेहरे के रैशेज के लक्षण
चेहरे के रैशेज होने पर निम्न प्रकार के लक्षण हो सकते हैं –

खुजली
लालिमा
त्वचा पर छोटे फफोले
जलन या सनसनी या फिर चुभन
त्वचा में सूजन
लाल रंग के छल्ले
बुखार आदि।

एलोवेरा
एलोवेरा चेहरे पर चकत्ते होने पर बहुत ही कारगर उपाय होता है। ये एंटी-बैक्टीरियल, जलन रोधी तथा जीवाणु रोधी गुणों से भरा होता है। यह त्वचा की समस्याओं के सभी प्रकार के इलाज के लिए सबसे उपयुक्त होता है। जल्दी से चकत्ते से राहत पाने के लिए ताजा एलो वेरा जेल चहरे पर लगाएं।

जैतून का तेल
चकत्ते के कारण उत्पन्न खुजली से राहत पाने के लिए जैतून का तेल लगाकर त्वचा पर धीरे से समाज करें। इसके नियमित इस्तेमाल से तव्चा पर हुए चकत्तों से जल्द ही राहत मिल जाती है।

विच हैज़ल
विच हैज़ल चकत्ते, एक्जिमा और छालरोग आदि त्वचा संक्रमण के इलाज के लिए बेहद प्रभावी ढंग से से काम करता है। इसे लगाने के लिए एक कोटन बॉल को विच हैज़ल में डुबोएं और फिर चकत्तों पर लगाएं। कुछ समय में ही समस्या में आराम होने लगेगा।

कैमोमाइल टी
कैमोमाइल चाय बनाएं और खुजली और जलन से राहत पाने के लिए इसे चकत्ते पर लगाएं। इसके अलावा आप कैमोमाइल तेल का उपयोग भी कर सकते हैं। इसे लगाने से जल्द ही चकत्ते ठीक होने लगते हैं।

विटामिन ई का ऑयल
विटामिन ई त्वचा के लिये बेहद फायदेमंद होता है। चकत्ते की समस्या होने पर भी यह बहुत लाभ पहुंचाता है। इसे लगाने के लिये एक विटामिन ई कैप्सूल को तोड़ें और चकत्ते प्रभावित त्वचा पर इसका तेल लागाकर हल्के से मसाज करें और थोड़ी देर बाद धो लें।

कैलेंडुला तेल (CALENDULA ESSENTIAL OIL)
दो बूंद कैलेंडुला तेल को गर्म पानी में मिलाएं और फिर लगभग दस मिनट तक इसे उबालें। इसके बाद पानी को ठंडा होने रख दें और ठंडा हो जाने पर त्वचा पर लगाएं। ये त्वचा पर चकत्ते का कारण बनने वाले हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने में मदद करता है।

दलिया
चकत्तों को दूर करने के लिये पानी की एक बाल्टी में कच्चे दलिया के एक कप को अच्छे से मिक्स कर लें और इससे स्नान करें। इसके अलावा आप चकत्तों से जल्दी राहत पाने के लिए दलिये का तेल भी इन पर लगा सकते हैं।

सांसो की दुर्गंध से बचने के घरेलू उपाय

घरेलू नुस्खों में है दम
सांसो की बदबू से छुटकारा पाने के लिए किसी महंगे माउथवॉश की जरूरत नहीं बल्कि शरीर में जल का स्तर बनाए रखने की जरूरत है। विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थो का सेवन कर और घरेलू उपायों की मदद से आप अपने सांसों की बदबू पर काबू पा सकते हैं।

पुदीने के पत्ते
पुदीने के पत्ते बेहतरीन माउथ फ्रेशनर हैं जिनसे आप ‌मिनटों में सांसों की दुर्गंध से छुटकारा पा सकते हैं। पुदीने के पत्ते न सिर्फ आपकी सांसों की दुर्गंध दूर करेंगे बल्कि आपको तरोताजा रखेंगे। इनमें मौजूद क्लोरोफिल सांसों की दुर्गंध को तेजी से रोकने में सहायक है।

मोटी से मोटी तोंद भी नौवें दिन गायब हो जाएगी! बस सुबह ये करें

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जीभ की सफाई
सांसो की बदबू का मुख्य कारण जीभ की सफाई ना करना भी हो सकता है। कई बार भोजन के बाद कुछ बारीक कण जीभ पर लगे रह जाते हैं जिन्हें अगर सही तरीके से साफ न करें तो भी सांसो से दुर्गंध आती है। ऐसे में ब्रश करते वक्त जीभ को अच्छे से साफ करें।

गरारा करें
पानी में नमक घोलकर गरारे करने से मुंह के बैक्टीरिया समाप्त हो जाते हैं और मुंह में मौजूद भोजन के बारीक कण निकल जाते हैं। हल्के गुनगुने पानी में एक चम्मच नमक मिलाएं और रोज ब्रश करने के बाद नमकीन पानी से गरारा करें।

बेकिंग सोडा
किचन में मौजूद बेकिंग सोडा काफी काम आता है। इसके प्रयोग से सांसों की दुर्गंध दूर होती है। इसमें मौजूद हाइड्रोजन पेरोक्साइड मुंह में मौजूद बैक्टेरिया को खत्म करता है। आप चाहें तो टूथ पेस्ट से ब्रश करने के बाद एक बार बेकिंग सोडा से ब्रश कर सकते हैं।

विटामिन सी युक्त आहार
विटामिन सी युक्त फलों व आहार के सेवन से सांसों की बदबू को दूर किया जा सकता है। संतरे, मौसमी, गाजर आदि के सेवन से भी मुंह में मौजूद बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। इनसे न सिर्फ सांसों की दुर्गंध दूर होती है बल्कि ओरल हेल्थ से संबंधित कई समस्याओं में ये लाभदायक हैं।

तुलसी के पत्ते
तुलसी का पौधा औषधीय गुणों की खान है। इसकी पत्तियों को हर रोज चबाने से सांस की बदबू चुटकियों में दूर हो जाती है। आप चाहें तों हर रोज दिन में दो या तीन बार तुलसी के पत्ते चबा सकते हैं।

दालचीनी की चाय
दालचीनी हमारे रसोई में मिलने वाला बेहद सामान्य मसाला है। खड़े गरम मसालों में शुमार दालचीनी की चाय पीने से मुंह से आने वाली बदबू से काफी हद तक छुटकारा पया जा सकता है।

सौंफ व धनिया
सौंफ न सिर्फ सांसों की बदबू को दूर करता है बल्कि मुंह के संक्रमण को भी खत्म करता है। सौंफ और धनिया को मिलाकर माउथफ्रेशनर बनाएं और हर रोज इसका सेवन करें। इसे बनाने के लिए एक कप सौंफ, एक कप खड़ा धनिया, आधा कप तिल व आधा कप इलायची दाने को मिलाकर एक पैन में रोस्ट करें। चाहें तो इनमें थोड़ी शक्कर मिला सकते हैं।

अदरक
अदरक कई गुणों से भरपूर होता है, लेकिन सांसों की दुर्गंध से निजात दिलाने में इसका कोई जवाब नहीं। आप अदरक को साफ करके बारीक टुकड़ें में काट लें। एक ट्रे पर फैला कर इस पर नमक व काली मिर्च पाउडर छिड़क लें और कम से कम चार-पांच दिनों तक सुखाएं। फिर इसे एक एयर टाइट डिब्बे में भर कर रखें और रोज भोजन के बाद थोड़ा सा माउथ फ्रेशनर लें।

नारियल के भी हो सकते हैं कुछ नकारात्मक प्रभाव

नारियल के नकारात्मक प्रभाव
नारियल फाइबर और आवश्यक विटामिन का एक पौष्टिक व प्राकृतिक स्रोत है। नारियल फल से दूध, तेल, रस, पानी और गूदा मिलता है, जिसे ताजा या सूखा कर, दोनों प्रकार से खाया जा सकता है। हालांकि यह यह कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है, लेकिन नारियल तेल में संतृप्त वसा की उच्च मात्रा भी होती है, जिसके चलते यह उच्च कोलेस्ट्रॉल या वजन बढ़ने का कारण भी बन सकता है। कुछ दुर्लभ मामलों में, नारियल के अधिक सेवन से एलर्जी भी हो सकती है। तो यह कहने में कोई आश्चर्य की बात नहीं कि नारियल के भी कुछ नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। चलिये जानें क्यों और कौंन से।

उच्च कोलेस्ट्रॉल
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन नारियल के सेवन को लेकर निगरानी की सिफारिश करती है। क्योंकि इसमें संतृप्त वसा की उच्च मात्रा होती है। वसा के इस प्रकार से कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन या एलडीएल, कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है, जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। नारियल तेल में प्रति चम्मच 11 ग्राम संतृप्त वसा होती है। जबकि कटे हुए लगभग 28 ग्राम नारियल में 16 ग्राम संतृप्त वसा होती है।

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एलर्जी रिएक्शन
खाद्य एलर्जी से पीड़ित लोगों, खासतौर पर पेड़ नट से एलर्जी वाले, को सावधानी के साथ नारियल का उपभोग करना चाहिए। नारियल को अमेरिकन फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा एक ट्री नट माना गया है। नारियल से एलर्जी वाले ज्यादातर लोग इसके फल में मौजूद प्रोटीन के प्रति प्रतिक्रिया देते हैं, ना कि तेल के। नारियल तेल से एलर्जी दुर्लभ हैं, लेकिन होने पर जीवन के लिए खतरा हो सकती हैं।

हृदय रोग
कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर आपकी धमनियों में रुकावट पैदा कर सकता है। जो कि हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। तो यदि आप उच्च कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित हैं तो ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन को नियमित करें, जिनमें नारियल तेल या दूध होता है।

वजन बढ़ना
कच्चा नारियल, इसका तेल या दूध आदि का ​​अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है। 28 ग्राम नापरियल में लगभग 187 कैलोरी होती हैं, जबकि एक कब नारियल के दूध में 445 कैलोरी होती हैं। इसमें संतृप्त वसा भी काफी होती है, जो वजन बढ़ा सकती है।

इंसुलिन प्रतिरोधक क्षमता
खाद्य तेलों पर शोध करने वाले एमजी विश्वविद्यालय के चिकित्सा अधिकारी एवं शोध वैज्ञानिकों के मुताबिक नारियल तेल बालों, त्वचा और स्वास्थ्य के लिए तो फायदेमंद हो सकता है, किंतु यदि खाने में इसका अधिक इस्तेमाल किया जाए तो यह शरीर में इंसुलिन प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने का खतरा पैदा कर सकता है।

मधुमेह का प्रमुख कारण
एमजी विश्वविद्यालय के चिकित्सा अधिकारी डॉ. बैजू के अनुसार खाने में नारियल तेल का अधिक उपयोग मधुमेह का कारण हो सकता है। जोकि केरल में इंसुलिन प्रतिरोधकता की एक प्रमुख समस्या भी है। इसमें वसा अम्लों की प्रचुर मात्रा होती है। छोटे और मध्यम श्रृंखला वाले वसा अम्लों में कार्बन परमाणुओं की संख्या 14 से कम होती है। जबकि नारियल तेल में मिलने वाले 80 प्रतिशत से अधिक वसा अम्ल इसी श्रेणी के होते हैं।

और भी नुकसान
अन्य अधिकांश खाद्य तेलों में सिर्फ लंबी श्रृंखला वाले वसा अम्ल होते हैं। लेकिन यदि कार्बोहाड्रेट की अधिकता वाले भोजन के साथ नारियल तेल का सेवन किया जाए तो लीवर एवं पिंडलियों में ग्लूकोज का अपचयन रुक जाता है। जिस कारण ग्लूकोज का उपयोग कम हो जाता है और लीवर के बीटा कोशिकाओं को ग्लूकोज का उपापचय पूरा करने के लिए ज्यादा इंसुलिन की आवश्यकता पड़ती है।

10 कारगर घरेलू उपाय, जो किडनी के स्‍टोन से निजात दिलाएं

किडनी में स्‍टोन
किडनी में स्‍टोन की समस्‍या आजकल आम हो चली है। इसकी बड़ी वजह खान-पान की गलत आदतें होती हैं। किडनी में स्‍टोन यूरीन सिस्टम का एक रोग है जिसमें किडनी के अन्दर छोटे-छोटे पत्थर जैसी कठोर वस्तुएं बन जाती हैं। आमतौर पर यह ये पथरियां यूरीन के रास्ते शरीर से बाहर निकाल जाती है। बहुत से ऐसे घरेलू उपाय है जिनको अपनाकर इनसे निजात पाई जा सकती है। आइए जाने ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में।

करेला
करेला वैसे तो बहुत कड़वा होता है और आमतौर पर लोग इसे कम पसंद करते है। परन्‍तु पथरी में यह रामबाण की तरह काम करता है। करेले में मैग्‍नीशियम और फॉस्‍फोरस नामक तत्‍व होते हैं, जो पथरी को बनने से रोकते हैं।

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अंगूर
अंगूर में एल्ब्यूमिन और सोडियम क्लोराइड बहुत ही कम मात्रा में होता हैं, इसलिए किडनी में स्‍टोन के उपचार के लिए बहुत ही उत्तम माना जाता है। साथ ही अंगूर प्राकृतिक मूत्रवर्धक के रूप में उत्कृष्ट रूप में कार्य करता है क्योंकि इनमें पोटेशियम नमक और पानी भरपूर मात्रा में होते हैं।

केला
पथरी की समस्‍या से निपटने के लिए केला खाना चाहिए क्‍योंकि इसमें विटामिन बी 6 होता है। विटामिन बी 6 ऑक्जेलेट क्रिस्टल को बनने से रोकता और तोड़ता है। साथ ही विटामिन बी-6, विटामिन बी के अन्य विटामिन के साथ सेवन करना किडनी में स्‍टोन के इलाज में काफी मददगार होता है। एक शोध के मुताबिक विटामिन-बी की 100 से 150 मिलीग्राम दैनिक खुराक गुर्दे की पथरी की चिकित्सीय उपचार में बहुत फायदेमंद हो सकता है।

नींबू का रस और जैतून का तेल
नींबू का रस और जैतून के तेल का मिश्रण, गुर्दे की पथरी के लिए सबसे प्रभावी प्राकृतिक उपचार में से एक है। पत्‍थरी का पहला लक्षण होता है दर्द का होना। दर्द होने पर 60 मिली लीटर नींबू के रस में उतनी ही मात्रा में आर्गेनिक जैतून का तेल मिला कर सेवन करने से आराम मिलता है। नींबू का रस और जैतून का तेल पूरे स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहता है और आसानी से उपलब्ध भी हो जाता हैं।

बथुए का साग
किडनी में स्‍टोन को निकालने में बथुए का साग बहुत ही कारगर होता है। इसके लिए आप आधा किलो बथुए के साग को उबाल कर छान लें। अब इस पानी में जरा सी काली मिर्च, जीरा और हल्‍का सा सेंधा नमक मिलाकर, दिन में चार बार पीने से बहुत ही फायदा होता है।

प्‍याज
प्‍याज में पथरी नाशक तत्‍व होते है इसका प्रयोग कर आप किडनी में स्‍टोन से निजात पा सकते है। लगभग 70 ग्राम प्‍याज को पीसकर और उसका रस निकाल कर पियें। सुबह खाली पेट प्‍याज के रस का नियमित सेवन करने से पथरी छोटे-छोटे टुकडे होकर निकल जाती है।

अजवाइन
अजवाइन एक महान यूरीन ऐक्ट्यूऐटर है और किडनी के लिए टॉनिक के रूप में काम करता है। किडनी में स्‍टोन के गठन को रोकने के लिए अजवाइन का इस्‍तेमाल मसाले के रूप में या चाय में नियमित रूप से किया जा सकता है।

गाजर
गाजर में पायरोफॉस्फेट अम्ल पाया जाता हैं जो किडनी में स्‍टोन बनने की प्रक्रिया को रोकता है। साथ ही गाजर में पाया जाने वाला केरोटिन यूरीन की आंतरिक दीवारों को टूटने-फूटने से भी बचाता है।

तुलसी
तुलसी की चाय समग्र किडनी स्वास्थ्य के लिए बहुत ही सफल प्राकृतिक उपचार है। यह किडनी में स्‍टोन के उपचार के लिए एक आदर्श समाधान है। शुद्ध तुलसी का रस लेने से पथरी को यूरीन के रास्‍ते निकलने में मदद मिलती है। कम से कम एक म‍हीना तुलसी के पतों के रस के साथ शहद लेने से आप प्रभाव महसूस कर सकते है। साथ ही आप तुलसी के कुछ ताजे पत्तों को रोजाना चबा भी सकते हैं।

बीमारियों पर काबू पाने में मददगार हैं ये योग मुद्राएं

योग मुद्राएं
योग प्राचीन कला है जिसके फायदे और महत्व को आज देश ही नहीं पूरी दुनिया मानती है। यह आधुनिक विज्ञान के साथ अध्यात्म ज्ञान को जोड़कर हमें स्‍वास्‍थ्‍य लाभ पहुंचाता है।योग में ना सिर्फ आसन बल्‍कि मुद्राएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन योग मुद्राओ से आप कई रोगों का निदान व बचाव कर सकते हैं। हर योग मुद्रा विशिष्ट है प्रत्येक में गहरा रहस्‍य छिपा है। यदि नियमित रूप से इन मुद्राओं को किया जाए तो, शरीर में वायु संबंधी बीमारियां नहीं होती। तो चलिये जानें क्या हैं ये योग मुद्राएं और इनके लाभ।

ज्ञान मुद्रा
यह मुद्रा ज्ञान और ध्यान के लिये प्रसिद्ध है। इसे करने के लिए पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं (अंगूठे को तर्जनी अंगुली के सिरे पर लगाएं और बाकी तीनों अंगुलियों को सीधा रखें)। ध्यान लगाने के लिए इसी मुद्रा को किया जाता है। ज्ञान मुद्रा मस्तिष्क के स्नायुओं को बल देती है और स्मरण शक्ति, एकाग्रता शक्ति, संकल्प शक्ति को बढ़ाती है। इसके नियमित अभ्यास से अनिद्रा दूर होती है तथा क्रोध को काबू करने की क्षमता बढ़ती है।

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वायु मुद्रा
वायु मुद्रा करने के लिए तर्जनी अंगुली को मोड़कर अंगूठे के मूल में लगाकर हल्का सा दबाएं और बाकी की सारी उंगलियों को सीधा कर दें। इस मुद्रा में बेठए हुए रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी रहनी चाहिए। वायु मुद्रा मुद्रा वात रोगों बेहद लाभकारी होती है। साथ ही यह साइटिका, कमर दर्द, गर्दन दर्द, पार्किंसन, गठिया, लकवा, जोड़ों का दर्द व घुटने का दर्द में भी लाभ देती है।

आकाश मुद्रा
आकाश मुद्रा करने के लिए मध्यमा अंगुली को अंगूठे के अग्रभाग से लगा लें और बाकी की अंगुलियों को बिल्कुल सीधा कर लें। इस मुद्रा को नियमित रूप से करने से कान के रोग, बहरेपन, कान में लगातार व्यर्थ की आवाजें सुनाई देना व हड्डियों की कमजोरी आदि दूर होती हैं।

रज हस्त मुद्रा
रज हस्त मुद्रा विशेष रूप से स्त्रियों के लिए है। लेकिन इस मुद्रा का लाभ केवल स्त्रियों को ही नहीं बल्कि यदि पुरुष इस मुद्रा को करता है तो उनके वीर्य संबंधी रोग दूर होते हैं। इसे करने के लिए बाकि तीनों उंगलियों को सीधी रखते हुए कनिष्ठा (छोटी अंगुली) अंगुली को हथेली की जड़ में मोड़कर लगाएं। इससे रज मुद्रा बन जाती है।

शून्य मुद्रा
शून्य मुद्रा करने के लिए मध्यमा अंगुली को मोड़कर अंगूठे के मूल से लगाकर अंगूठे से हल्का सा दबाएं और बाकी उंगलियों को सीधी कर लें, शून्य मुद्रा बन जाएगी। इससे गले के रोग व थाइराइड आदि में लाभ होता है, साथ ही दांत मजबूत बनते हैं और कान की बीमारियां दूर होती हैं।

शंख मुद्रा
शंख मुद्रा बनाने के लिए बाएं हाथ के अंगुठे को दाएं हाथ की हथेली में स्थापित करें और मुठ्ठी बंद कर लें। अब उंगलियों को दाहिने हाथ के अंगूठे से छुलाएं। इस मुद्रा से हाथों की आकृति शंख जैसी हो जाती है, इसीलिए भी इसे शंख मुद्रा कहा जाता है। यदि आप जैसे शंख बजाते हैं वैसे ही बजाने की कोशिश करेंगे तो हाथों की इस मुद्रा में भी शंख के समान आवाज आएगी। इस मुद्रा को करने से गले से जुड़े रोग ठीक होते हैं।

सहज हस्त मुद्रा
सहज हस्त मुद्रा बनाने के लिए दोनों हाथों के अंगूठे के पहले पोर को सबसे छोटी अंगुली के प्रथम पोर से मिलाने पर सहज मुद्रा बन जाती है। बाकी की सारी उंगलियां को आपस नहीं मिलाया जाता है। इस मुद्रा का अभ्यास करने से शरीर सुंदर और कोमल बनता है, शरीर का रुखापन दूर होता है और त्वचा संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।

पृथ्वी मुद्रा
पृथ्वी मुद्रा बनाने के लिए अनामिका अंगुली को अंगूठे के अग्रभाग से लगाकर बाकी अंगुलियां को सीधा कर लें। यह मुद्रा शरीर की दुर्बलता को दूर कर वजन बढ़ाने में मदद करती है, यह शरीर में खून के दौरे को ठीक कर शरीर में स्फूर्ति, कान्ति एवं तेज उत्पन्न करती है और मासपेशियों में मजबूती लाती है।

सूर्य मुद्रा
सूर्य मुद्रा में आने के लिए अपनी अनामिका अंगुली को अंगूठे के मूल में लगाकर अंगूठे से हल्का दबाकर बाकी अगुलियों को सीधा करके रखना होता है। सूर्य मुद्रा करने से मोटापा कम होता है, शरीर में उष्णता बढ़ाती है और मधुमेह व लीवर के रोगों में लाभ पहुंचाती है। इस मुद्रा को गर्मीयों में अधिक न करें।

नारियल तेल से होने वाले स्वास्‍थ्‍य लाभ

नारियल का तेल
क्‍या आप जानते हैं कि कई स्‍थानों पर विशेषकर दक्षिण भारत में नारियल तेल का इस्‍तेमाल खाना पकाने के लिए किया जाता है। यह कई पोषक तत्‍वों का अवशोषण भी करता है। नारियल तेल में इसके अलावा भी कई स्‍वास्‍थ्‍य गुण हैं। आइए जानें नारियल तेल से मिलने वाले फायदों के बारे में-

त्वचा के लिए फायदेमंद
वैसे तो नारियल का तेल हर प्रकार की त्‍वचा के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन रूखी, बेजान और उम्र से प्रभावित हो रही त्‍वचा पर यह कमाल का असर दिखाता है। यह बहुत अच्छा मॉइश्चराइजर है। इसमें मौजूद एंटीएजिंग गुण उम्र के प्रभाव को कम करने में मददगार होते हैं। नारियल तेल त्वचा के विषाक्त पदार्थों को हटाने का काम करता है। इसके इस्‍तेमाल से चेहरे पर असमय झुर्रियां नहीं आतीं।

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भूख को कंट्रोल
अगर आपको बार-बार भूख लगती है तो नारियल तेल का सेवन करें। इस तेल में कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी अधिक होते हैं जो भूख नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। इस तरह से आप नारियल तेल का सेवन कर अपनी बार-बार भूख लगने की आदत पर काबू कर सकते हैं।

डायबिटीज में फायदेमंद
डायबिटीज रोगियों के लिए नारियल तेल फायदेमंद होता है। नारियल तेल अग्नाशय में एंजाइम के उत्पादन की मांग को भी कम करता है। जिससे भोजन के समय इन्सुलिन अधिक मात्रा में तैयार होता है।

जोड़ों के दर्द में लाभकारी
कैल्शियम हड्डियों के विकास के लिए जरूरी होता है। नारियल तेल से जरुरी खनिजों जैसे कैल्शियम व मैग्नेशियम के अवशोषण में मदद मिलती है। य‍ह महिलाओं में जोड़ों के दर्द की सामान्‍य बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करता है।

तनाव दूर भगाये
तनाव को दूर करने के लिए भी नारियल तेल का इस्‍तेमाल किया जा सकता है। तनाव दूर करने के लिए कनपटियों और माथे पर हल्के हाथ से इसकी मालिश करें, आराम मिलेगा। सिरदर्द में इससे शीघ्र लाभ मिलता है। सिर में नारियल के तेल की मालिश करने से ठंडक मिलती है।

घाव भरें जल्‍दी
नारियल तेल में एंटीवाइरस और एंटी-बैक्‍टीरियल गुण भी मौजूद होते हैं। यह घावों को जल्‍द भरने में मदद करते हैं। यह क्षतिग्रस्त ऊत्तकों की मरम्मत में भी सहायक होता है।

सनस्‍क्रीन का काम
नारियल तेल के सेवन से विटामिन ई व अन्‍य पोषक तत्‍व मिलते हैं। जिसके कारण ये बेहतरीन सनस्‍क्रीन की तरह काम करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट गुण त्‍वचा को फ्री-रैडिकल्‍स से होने वाले नुकसान से सुरक्षित करता है।

वजन घटाने में मददगार
नारियल तेल में फैट की मात्रा कम होने के कारण वजन को कम करने के लिए इसका सेवन किया जा सकता है। नारियल तेल युक्त भोजन करने से शरीर की चुस्ती-फुर्ती बढ़ती है, चयापचय क्रिया तेज होती है और शरीर का वजन भी कम होता है।

संक्रमण की रोकथाम
नारियल तेल त्वचा के यीस्ट संक्रमण की रोकथाम करने में मदद करता है। यह सिर की रूखी त्वचा पर भी बेहतर असर दिखाता है। नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाने से रूसी एवं खुश्की से छुटकारा मिलता है।

फलों से त्‍वचा को कैसे बनायें गोरा

फलों से निखारें त्‍वचा
फल केवल खाने के लिए नहीं होते बल्कि इनका प्रयोग करके आप त्‍वचा को गोरा भी बना सकते हैं। फलों में ब्‍लीचिंग के गुण मौजूद होते हैं जो त्‍वचा को निखारते हैं। इन फलों का पेस्‍ट चेहरे पर लगाने से आप कुछ ही दिनों में अपनी त्‍वचा को निखार कर गोरा बना सकते हैं। फलों को खाने से भी त्‍वचा में निखार आता है। तो आज से ताजे फलों का सेवन त्‍वचा को निखारने और कांतिमय बनाने के लिए कीजिए।

पपीता
पपीता से अपनी सांवली त्‍वचा को गोरा बना सकते हैं। एक पपीता लेकर उसे दो टुकड़ों में काट लीजिए, इसके गूदे को निकालकर पीस कीजिए, इसमें एक चम्‍मच दूध या दही मिलाइये, 3-4 बूंद नींबू का रस मिलायें, इन सबको मिलाकर पेस्‍ट बनाकर चेहरे पर लगायें। 15-20 मिनट बाद हल्‍के गुनगुने पानी से इसे साफ कर लीजिए। मुंह धुलते वक्‍त साबुन का प्रयोग न करें।

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स्‍ट्रॉबेरी
2 -3 ताजे स्‍ट्रॉबेरी लेकर उसे अच्‍छे से पीस लीजिए, इसे चेहरे पर मॉस्‍क की तरह लगाइये। इस पेस्‍ट में आप नींबू की कुछ बूंदे डाल सकते हैं, इससे चेहरे की रंगत में और निखार आयेगा। अगर इस पेस्‍ट को और अच्‍छा बनाना चाहते हैं तो इसमें नींबू के अलावा कुछ बूंदे शहद की भी डालें। इस पेस्‍ट को चेहरे पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दीजिए। फिर चेहरे को सामान्‍य पानी से धो लें, कुछ दिनों में ही आप गोरे हो जायेंगे।

संतरा
संतरे में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है और यह त्‍वचा की रंगत बहुत जल्‍दी निखारता है। ताजा संतरा लेकर उसका जूस निकाल लीजिए, इसमें दो बूंद दही की मिलायें, इस पेस्‍ट को सोने से पहले चेहरे पर लगाने से त्‍वचा में निखार आयेगा और आपका चेहरा गोरा हो जायेगा।

नींबू का प्रयोग
ताजे नींबू को लेकर अपने चेहरे पर आराम से रगड़ें, या फिर नींबू का रस निकालकर उसमें कुछ बूंदे शहद की मिलाकर चेहरे पर लगायें। इस पेस्‍ट को 15-20 मिनट बाद धो लें, चेहरा खिल उठेगा।

सेब है फायदेमंद
नियमित एक सेब का सेवन आपको डॉक्‍टर से दूर रखता है, लेकिन इसके रस को त्‍वचा पर लगायें तो त्‍वचा का रंग गोरा भी हो जाता है। सेब के रस में नींबू और शहद की कुछ बूंदे मिलाकर पेस्‍ट बना लीजिए। इस पेस्‍ट को चेहरे पर लगाकर 15-20 मिनट बाद धो लें। 1-2 महीने तक इसका नियमित प्रयोग करने से त्‍वचा गोरी हो जायेगी।

अंगूर का रस
2:3 ताजे अंगूर लेकर उसे पीस लीजिए, इसमें शहद ही 2-3 बूंदे मिलाकर पेस्‍ट बनाइये। इस पेस्‍ट को चेहरे पर लगाकर 20 मिनट बाद चेहरे को धो लें। त्‍वचा गोरी हो जायेगी।

अनार का प्रयोग
अनार के छिलकों को सुखाकर उसे पीसकर पावडर बना लीजिए। एक चम्‍मच पावडर में 4-5 बूंदे गुलाबजल की मिलाकर चेहरे और गर्दन पर लगायें। इससे चेहरे के दाग-धब्‍बे व झाइयां खतम होंगी साथ ही त्‍वचा का रंग भी गोरा हो जायेगा।

आम का प्रयोग
आम खाने में बहुत ही स्‍वादिष्‍ट होता है, साथ ही त्‍वचा को भी निखारता है। आधी कटोरी पके आम का जूस लेकर उसमें दो चम्‍मच दही मिलकार पेस्‍ट बना लीजिए। इस पेस्‍ट को चेहरे पर लगाकर 20 मिनट बाद धो लें। नियमित प्रयोग करने से कुछ ही दिनों में चेहरे का रंग गोरा हो जायेगा।

अनानास
दो चम्‍मच अनानास का रस लेकर उसमें 4-5 बूंदे नींबू और शहद की डालें, इसका पेस्‍ट बनाकर चेहरे पर लगायें, 20 मिनट बाद इसे धो लें। 2 महीने तक नियमित प्रयोग करने से त्‍वचा का रंग निखर जायेगा।

एक चम्मच तुलसी का रस देगा आपको अनगिनत फायदे

तुलसी के पत्ते
तुलसी को अगर सभी जड़ी बुटियों का राजा कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। तुलसी में फाइटोन्यूट्रीयेंट्स नामक तत्व पाया जाता है, जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। यही नहीं, जो रासायनिक तत्व तुलसी के फूल और पत्तों में पाए जाते हैं, वे हमें तमाम किस्म की बीमारियों से निजाद दिलाने में सहायक हैं। साथ ही इसमें कई किस्म के विटामिन और मिनरल मौजूद होते हैं। इसके पर्याप्त लाभ हासिल करने के लिए इसे सूखा भी खाया जा सकता है और चाहें, तो इसके रस का पान भी किया जा सकता है। इसे फ्लेवर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कहने का मतलब यह है कि तुलसी में कई किस्म के लाभ होते हैं, जिससे सामान्यतः लोग अंजान होते हैं। आइए हम इस बाबत आपकी मदद करते हैं।

एंटीऑक्सीडेंट
तुलसी में मौजूद तत्व एंटीआक्सीडेंट की भूमिका अदा करते हैं। लेकिन हां, आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि पत्ते ताजा और साफ हों। इसमें कैंसर रोधी तत्व भी मौजूद होते हैं। यही नहीं सर्दी जुकाम के रोकथाम हेतु भी कई लोग तुलसी का उपयोग करते हैं।

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बुखार
यूं तो तुलसी को सर्दी जुकाम के रोकथाम के लिए सभी जानते हैं। जी, हां! तुलसी के सिर्फ कुछ पत्ते आपके शरीर के गर्म तापमान को झट से कम कर सकते हैं। यही नहीं तुलसी रस के सेवन से आप चाहें तो मलेरिया और डेंगू के लक्षणों को भी खत्म कर सकते हैं। आप चाहें, तो तुलसी के पत्तों को गर्म पानी में उबाल भी सकते हैं। अगर बुखार काफी समय से न उतर रहा हो, तो इसके लिए आपको चाहिए कि तुलसी के साथ इलायची मिलाकर उसे एक कप पानी में गर्म करें। इसका सेवन कई बार करें। आप महसूस करेंगे कि बुखार काफी कम हो गया है साथ ही सर्दी जुकाम भी छूमंतर हो चुका है।

प्रतिरक्षी तंत्र बूस्टर
तमाम सर्वेक्षणों से यह साबित हो चुका है कि तुलसी के पत्तों में ऐसे तत्व मौजूद होते हैं, जो कि प्रतिरक्षी तंत्र बूस्टर के रूप में काम करते हैं। इसमें मौजूद रासायनिक तत्व हमारी एंटीबॉडीज को 20 फीसदी तक ज्यादा मजबूत बनाता है। मतलब यह है कि हमारा इम्यून सिस्टम को तुलसी पत्ते से खासा ताकत मिलती है। यही नहीं यदि किसी को इम्यून सिस्टम में किसी तरह की इंफेक्शन हो यानी संक्रमण हुआ तो उससे भी लड़ने में तुलसी की महति भूमिका है। वैसे आपको बताते चलें कि तुलसी के सूखे पत्ते की तुलना में इसके ताजा पत्तों में ज्यादा लाभ होता है। अतः संभव हो तो तुलसी के ताजा पत्तों का ही रस पीएं।

खासी
सर्दी के साथ-साथ यदि आपको खासी की शिकायत भी बनी हुई है तो भी तुलसी को विकल्प के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। दरअसल तुलसी का रस कफ सिरप सरीखा काम करता है। इसके लिए आपको 8 से 10 पत्तों सहित 5 लवंग गर्म पानी में दस मिनट तक उबालना है। बादमें इस रस को पीना है। इससे आपकी खासी छूमंतर हो जाएगी।

प्रज्वलनरोधी
तुलसी के पत्तों में कुछ खास किस्म के तेल होते हैं मसलन इयूजेनोल, सिटरल, लिनालूल आदि। ये तेल असल में प्रज्वलनरोधी के रूप में काम करते हैं। 10 से 12 पत्तों को गर्म पानी में उबालेंऔर जलन कम करने हेतु इसे पीते रहें। आप चाहें तो तुलसी पत्ते के पेस्ट में नींबू का रस मिलाकर इसका सेवन कर सकते हैं। इससे इंफेक्शन से हो रही जलन में कमी आती है। यही नहीं यदि आपको रैशेज या एग्जीमा के कारण हुई जलन की शिकायत है तो भी तुलसी के रस को इस रोग के निवारक के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

खतरनाक बीमारियों के लिए रामबाण है कलौंजी का तेल!

बीमारियों के लिए रामबाण है कलौंजी का तेल
अगर हम आपसे कहें कि आप खतरनाक बीमारियों का इलाज घर बैठे आसानी से कर सकते हैं तो शायद आपको यकीन नहीं होगा। लेकिन यह सच है कलौंजी के तेल की मदद से आप ऐसे कर सकते हैं। जी हां कलौंजी के तेल में गंभीर से गंभीर बीमारियों से लड़ने की क्षमता छिपी होती है। कलौंजी का तेल ऐसी चमत्कारिक घरेलू दवा है जो कैंसर से लेकर डायबिटीज और किडनी जैसी कई गंभीर बीमारियों से एक साथ निजात दिलाने में मदद करता है। आइए जानें कलौंजी के तेल के फायदों के बारे में जानें।

कलौंजी के गुण
कलौंजी के तेल बहुत ही आसानी से उपलब्‍ध होने वाली बेहद ही प्रभावी और उपयोगी घरेलू उपाय है। कलौंजी के तेल में दो बेहद ही प्रभावकारी थाइमोक्विनोन और थाइमोहाइड्रोक्विनोन नामक तत्‍व पाये जाते हैं जो अपने हीलिंग गुणों के कारण जाने जाते हैं। यह दोनों तत्व साथ में मिलकर सभी बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। इसके औषधीय गुणों के कारण कलौंजी को हर मर्ज की दवा माना जाता है।

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कैंसर का इलाज
कलौंजी का तेल शरीर में कैंसर की कोशिकाओं को विकसित होने से रोकता है और उन्हें नष्ट करता है। यह कैंसर रोगियों में स्वस्थ कोशिकाओं की रक्षा करता है। इसमें मौजूद थाइमोक्विनोन एक बायो-एक्टिव तत्‍व, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी कैंसर कारक है। कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को कलौंजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक गिलास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लेना चाहिए।

डायबिटीज के मरीजों के लिए वरदान
डायबिटीज के रोगियों को एक कप कलौंजी के बीज, एक कप राई, आधा कप अनार के छिलके को पीस कर चूर्ण बना लेना चाहिए। आधे चम्मच कलौंजी के तेल के साथ इस चूर्ण को रोजाना ब्रेकअप से पहले लेना चाहिए। इस उपाय को लगातार एक महीने तक करने से आपको फर्क महसूस होने लगेगा।

अस्‍थमा और सिरदर्द का उपचार
अस्‍थमा की शिकायत होने पर छाती और पीठ पर कलौंजी के तेल की मालिश करें या पानी में तेल डालकर उस पानी से स्‍टीम लें। इसके अलावा कलौंजी का तेल सिरदर्द के उपचार में भी मदद करता है। सिरदर्द को कम करने के लिए माथे पर कलौंजी तेल का मसाज करना चाहिए। सिरदर्द को कम करने के लिए कलौंजी के तेल की (आधा चम्मच) दिन में दो बार पीना लाभकारी होगा। नियमित रूप से कलौंजी का तेल लेने से माइग्रेन का इलाज के इलाज में भी मदद मिलती है।

वजन घटायें
अगर आप अपने बढ़ते वजन से परेशान है तो कलौंजी के तेल को अपनायें। वजन कम करने के लिए आधा चम्‍मच कलौंजी के तेल और 2 चम्‍मच शहद को मिक्‍स करके गुनगुने पानी के साथ दिन में तीन बार लें। कुछ ही दिनों में आपको फर्क महसूस होने लगेगा। अगर आप भी हमेशा स्वस्थ और तंदरुस्त रहना चाहते हैं तो रोजाना कलौंजी का तेल इस्तेमाल कीजिए।

कसूरी मेथी के इन 5 प्रमुख फायदों के बारे में क्या आप जानते हैं?

फायदेमंद है कसूरी मेथी
कसूरी मेथी को अंग्रेजी में फेनूग्रीक सीड बोलते हैं और हिंदी में इसे मेथी के नाम से ही जाना जाता है। इसका प्रयोग पौधे और बीज दोनों रूप में किया जाता है। भारत में यह बहुत ही लोकप्रिय मसाला है, जिसका प्रयोग लगभग हर घर में किया जाता है। हरी सब्जी के रूप में यह ‘मेथी साग’ के नाम से अधिक लोकप्रिय है। इसकी पत्तियों और बीज का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। इसमें कई सारे पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। पेट की समस्या से लेकर ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रित करने वाले गुण के अलावा, इसमें बालों और त्वचा को निखारने के भी गुण मौजूद होते हैं। इस स्लाइडशो में कसूरी मेथी से होने वाले गुणों के बारे में जानें।

पेट की समस्या करें दूर
अस्वस्थ‍ खानपान के कारण आजकल पेट में गैस की समस्या आम हो गई है। ऐसे में मेथी की पत्तियां लीवर को मजबूत बनाकर पेट की दूसरी समस्याओं को भी दूर करती हैं। पेचिश और डायरिया की समस्या होने पर भी यह लाभदायक है। इसकी पत्तियों के अलावा बीज को पीसकर पाउडर बनाकर भी प्रयोग में ला सकते हैं। पेट की समस्या होने पर पत्तियों को सुखाकर पीस लें और इसमें नींबू की कुछ बूंदें मिक्स करें। इसके बाद इसे उबले हुए पानी के साथ लें।

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कोलेस्ट्रॉल कम करे
शरीर में एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अगर अधिक हो जाए, तो समस्या गंभीर हो सकती है। शरीर में जमा बैड कोलेस्ट्रॉल को निकालने के लिए कसूरी मेथी का प्रयोग करें। इसके लिए पानी में मेथी की पत्तियों को डालकर पूरी रात के लिए छोड़ दीजिए और अगले दिन पानी को छानकर पीजिए। इससे शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ेगी।

मधुमेह में फायदेमंद
मधुमेह होने के बाद देखभाल की बहुत अधिक जरूरत पड़ती है, दिन में कुछ भी खा लेने से कई बार शरीर में ब्‍लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। इसे नियंत्रित करने के लिए मेथी का प्रयोग करें। इसमें एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं, जो ब्‍लड ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करते हैं। यह टाइप-2 डायबिटीज होने की संभावना को भी कम करता है। मधुमेह के रोगी अगर इसका नियमित सेव करें, तो उनका शुगर नियंत्रण में रहेगा।

दिल के लिए फायदेमंद
दिल के सबसे बड़े दुश्मन एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल हैं। शरीर में इनकी अधिकता से दिल कमजोर होने लगता है। वहीं दूसरी तरफ मेथी में वे सारे गुण मौजूद होते हैं, जिनसे ये सभी समस्याएं दूर होती हैं। यह दिल को स्वस्थ रखने के साथ खून के थक्के बनने से भी रोकता है। इसके सेवन से दिल के दौरे की संभावना को कम किया जा सकता है।

त्वचा और बालों के लिए
त्वचा में मौजूद दाग-धब्बों को दूर करने के लिए कसूरी मेथी का प्रयोग करें। अगर चेहरे पर कोई निशान मौजूद है और वह नहीं जा रहा है, तो मेथी की पत्तियों को लगाने से निशान मिट जाएंगा। मेथी को पीसकर लें। इसमें पानी मिक्स करें। इसका पेस्ट तैयार करके चेहरे पर लगाएं। कुछ मिनट बाद मुंह धो लें। इससे चेहरा बेदाग हो जाएगा। ऐसे ही आप इस विधि को अपनी स्कैल्प के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे आफके बाल मुलायम और मजबूत होंगे। सप्ताह में दो बार ऐसा करने से बालों का झड़ना भी बंद हो जाएगा।

इन 7 कारणों से आप अभी पीना चाहेंगे मसाला चाय

मसाला चाय की चुस्‍की
हम भारतीय को अपनी चाय के कप से बहुत प्‍यार होता है, लेकिन जब हरी चाय यानी ग्रीन टी की बात आती है तो हम बहुत उलझन में पड़ जाते हैं। हालांकि ग्रीन टी के बहुत सारे स्‍वास्‍थ्‍य लाभ है लेकिन हमारी देसी मसाला चाय ग्रीन टी की तुलना में बहुत ही स्‍वस्‍थ और स्‍वाद में कहीं बेहतर होती है। इसके अलावा इसे बनाने भी बहुत आसान होता है और मसाला चाय बनाने के लिए आपको निर्माताओं पर निर्भर रहने की भी जरूरत नहीं होती है। इसके लिए आपको लौंग, इलायची, अदरक, दालचीनी, तुलसी और कुछ चाय की पत्‍ती की जरूरत होती है और यह सब मसाले सभी भारतीय रसोई में आसानी से उपलब्‍ध हो जाते हैं। यहां आपकी चाय को अद्वितीय और स्‍वस्‍थ बनाने वाली कुछ बातों के बारे में बताया गया है जिनको जानने के बाद इस चाय को पीना कभी नहीं छोड़ेगें।

एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर
मसाला चाय बनाने में इस्‍तेमाल होने वाले सभी मसाले केवल व्‍यक्तिगत स्‍वास्‍थ्‍य लाभ ही नहीं देते बल्कि सूजन का मुकाबला करने के लिए शरीर में तालमेल बनाने के काम भी करते हैं। सूजन को कम करने में मदद करने वाला सबसे महत्‍वपूर्ण तत्‍व अदरक है। लौंग सूजन को कम करने में मददगार दूसरा अच्‍छा उपाय है। यह शरीर की मांसपेशियों की सूजन को कम करने में आपकी मदद करता है। यह दोनों मसाले बहुत ही शक्तिशाली दर्द निवारक है।

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थकान से लड़ें
दिन भर की थकान के बाद गर्मा-गर्म मसाला चाय का एक प्‍याला किसी जादू से कम नहीं होता। इसमें मौजूद टैनिन नामक तत्‍व शरीर को शांत और पुनर्जीवित करने का काम करता है। इसके अलावा चाय में कैफीन एक उत्‍तेजक की तरह काम करता है। हांलाकि इसमें कॉफी की तुलना में बहुत कम मात्रा में कैफीन होता है, लेकिन वह उसी की तरह प्रभावशाली होता है। चाय में मौजूद यह मिश्रण थकान को दूर करने का सबसे अच्‍छा तरीका है।

कोल्‍ड और फ्लू को दूर भगाये
मसाला चाय में मौजूद एंटीबैक्‍टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी पैरासिटिक गुणों के कारण यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और आम संक्रमण से बचने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा लौंग, दालचीनी, इलायची और अदरक के प्रभाव के कारण यह खांसी और जुकाम को दूर रखने का एक शानदार तरीका है।

पाचन में सुधार करें
आपको यह जानकर ताज्‍जुब हो रहा होगा, कि यह कैसे संभव है। लेकिन यह सच है। मसाला चाय में मौजूद मसाले जैसे लौंग, तुलसी, अदरक और इलायची के कारण यह एसिडिटी से परेशान लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। हालांकि मसाला चाय की प्रकृति अत्‍यधिक अम्‍लीय होती है लेकिन इसमें अदरक मिलाने के बाद यह पाचन तंत्र को दुरुस्‍त रखने में मदद करती है और वास्‍तव में यह चाय के अम्‍लीय प्रकृति को भी दूर करती है।

चयापचय को बढ़ावा दें
एक अच्‍छा और सक्रिय चयापचय को आमतौर से वजन घटाने से जोड़ा जाता है, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि अच्‍छा चयापचय शरीर को आहार को पचाने और भोजन के उपयोग में मदद करने जैसी अन्‍य बातों के लिए भी जिम्‍मेदार होता है। अपने स्वास्थ्य का एक अनिवार्य हिस्सा होने के नाते, चाय पीने से आपके पूरे पाचन तंत्र में सुधार होता है। इसके अलावा आयुर्वेद में, चाय को गर्मी पैदा करने वाले भोजन के रूप में जाना जाता है और इसलिए यह आपके चयापचय में तेजी लाने में मदद करता है।

दिल के लिए अच्‍छी होती है काली चाय
काली चाय (मसाला चाय के मुख्य घटकों में से एक) मजबूत एंटी ऑक्सीडेंट गुणों के लिए जानी जाती है। इसके अलावा, लौंग और इलायची जैसे मसाले भी खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा में सुधार करने में मदद करते हैं। इस प्रकार, धमनी ब्लॉकों में पट्टिका गठन की राशि को कम करने में मदद करती है। चाय में मौजूद टैनिन भी रक्त वाहिकाओं को विस्फारित कर हृदय गति और रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए जाना जाता है।

डायबिटीज से बचायें
लौंग, दालचीनी और इलायची इन सभी की मौजूदगी से शरीर में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है और यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करके मधुमेह को रोकने में मदद करने के लिए जाना जाता है। दालचीनी तेज दिमाग पाने और अल्‍जाइमर जैसे रोगों की शुरुआत को रोकने में मददगार होती है और लौंग शरीर को शर्करा के बेहतर उपयोग में मदद करती है।

मिर्गी दूर करने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय

मिर्गी रोग के उपाय
मिर्गी को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां फैली होती है लेकिन यह एक नाडीमंडल संबंधित रोग है। जिसमें मस्तिष्क की विद्युतीय प्रक्रिया में व्यवधान पडने से शरीर के अंगों में दौरा पड़ने लगता है। मिर्गी का दौरा पड़ने पर शरीर अकड़ जाता है, आंखों की पुतलियां उलट जाती हैं। हाथ, पैर और चेहरे के मांसपेशियों में खिंचाव होने लगता है। मिर्गी होने के कई कारण हो सकते है जैसे रोगी के शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने के कारण मस्तिष्क के कोषों पर दबाब बनना, स्नायु सम्बंधी रोग, ट्यूमर रोग, मानसिक तनाव, संक्रमक ज्वर आदि के कारण भी यह रोग पैदा हो जाता है। मिर्गी रोग भगाने के लिये बालासन, नाड़ी शोधन, कपोतासन, शीर्षासन और चमत्‍कारआसन बहुत फायदेमंद होता है। इससे बचने के लिए कुछ घरेलू उपायों के बारे में पढ़े।

तुलसी है रामबाण
तुलसी कई बीमारियों में रामबाण की तरह कम करता है। तुलसी में काफी मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो मस्तिष्क में फ्री रेडिकल्स को ठीक करते हैं। रोजाना तुलसी के 20 पत्ते चबाकर खाने से रोग की गंभीरता में गिरावट देखी जाती है।तुलसी के पत्तों को पीसकर शरीर पर मलने से मिरगी के रोगी को लाभ होता है।तुलसी के पत्तों के रस में जरा सा सेंधा नमक मिलाकर 1 -1 बूंद नाक में टपकाने से मिरगी के रोगी को लाभ होता है।तुलसी की पत्तियों के साथ कपूर सुंघाने से मिर्गी के रोगी को होश आ जाता है।

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प्रोटीन वाला भोजन
मिर्गी के रोगी को ज्यादा फैट वाला और कम कार्बोहाइड्रेड वाला डायट लेना चाहिए। मिर्गी के रोगी को प्रोटीन और विटामिन युक्त भोजन करना चाहिए।मिर्गी के रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय गुनगुने पानी के साथ त्रिफला के चूर्ण का सेवन करना चाहिए। तथा फिर सोयाबीन को दूध के साथ खाना चाहिए इसके बाद कच्ची हरे पत्तेदार सब्जियां खाने चाहिए। बकरी का दूध मिरगी के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होता है। 2 कप दूध में चौथाई कप मेंहदी के पत्तों का रस मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाना खाने के 2 घंटे बाद कुछ सप्ताह तक लगातार सेवन करने से मिर्गी के रोग में लाभ मिलता है।

रस का सेवन
शहतूत और अंगूर के रस का सेवन मिर्गी के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। रोजाना सुबह खाली पेट आधा किलो शहतूत और अंगूर का रस लें।नींबू के रस के साथ गोरखमुण्डी को खाने से मिर्गी के दौरे आने बन्द हो जाते हैं।प्याज के रस के साथ थोड़ा सा पानी मिलाकर सुबह पीने से मिर्गी के दौरे पड़ने बन्द हो जाते हैं।प्याज के रस के साथ थोड़ा सा पानी मिलाकर सुबह पीने से मिर्गी के दौरे पड़ने बन्द हो जाते हैं।

पेठा या कद्दू
कद्दू या पेठा सबसे कारगर घरेलू इलाज है। इसमें पाये जाने वाले पोषक तत्वों से मस्तिष्क के नाडी-रसायन संतुलित हो जाते हैं जिससे मिर्गी रोग की गंभीरता में गिरावट आ जाती है। पेठे की सब्जी भी बनाई जाती है और आप इसकी सब्जी का भी सेवन कर सकते हैं, लेकिन इसका जूस रोज़ाना पीने से काफी फायदा होता है। अगर इसका स्वाद अच्छा ना लगे तो इसमें चीनी और मुलहटी का पावडर भी मिलाया जा सकता है।

दालचीनी से होने वाले साइड इफेक्ट के बारे में जानिए

दालचीनी के साइड इफेक्ट
दालचीनी जीनस सिनामोन के पेड़ों की भीतरी छाल है। यह एक मसाला ही नहीं औषधि भी है। यह खाने में जायका बढ़ाने के साथ-साथ मोटापे से लेकर डायबिटीज तक कई समस्‍याओं का समाधान करती है। हालांकि इसके बहुत सारे स्‍वास्‍थ्‍य लाभ है, लेकिन कुछ लोगों को इसके सेवन से नुकसान भी हो सकता है। आइए दालचीनी के साइड इफेक्‍ट के बारे में जानकारी लेते हैं।

समय से पहले प्रसव
गर्भावस्‍था में कुछ महिलाओं को दालचीनी के सेवन से अपच और पेट दर्द की समस्‍या से छुटकारा पाने में मदद मिलती है, लेकिन इसे गर्भावस्‍था के दौरान नहीं लिया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्‍योंकि यह गर्भाशय में संकुचन पैदा कर सकता है, और कुछ मामलों में तो यह समय से पहले प्रसव का कारण भी बनता है। इसलिए गर्भवती को नियमित रूप से दालचीनी के सेवन से बचना चाहिए और इसका सेवन कभी-कभार ही करना चाहिए।

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लीवर फेलियर का कारण
दालचीनी के अधिकांश प्रकार में लगभग 5 प्रतिशत कुमरिन (Coumarin) होता है, इसलिए इसका ज्‍यादा सेवन लीवर फेलियर का कारण बन सकता है। इसकी बजाय, आपको सीलोन दालचीनी का प्रयोग करना चाहिए क्‍योंकि इसमें यह पदार्थ केवल 0.04 प्रतिशत शामिल होता है।

खून पतला करें
कैसिया दालचीनी आपके ब्‍लड को पतला करती है, और यह मानना यह कुछ मामलों में अच्‍छा होता है बिल्‍कुल भी सच नहीं है। सीलोन दालचीनी ब्‍लड को इस तरह पतला नहीं करती है, इसलिए अगर आप ब्‍लड को पतला करने की दवा ले रहे हैं तो आपको कैसिया दालचीनी से बचना और सीलोन दालचीनी लेनी चाहिए।

त्वचा में जलन
दालचीनी के तेल को बिना कुछ मिलाये सीधा त्‍वचा पर लगाने से जलन पैदा हो सकती है। इसलिए इस तेल के इस्‍तेमाल के समय आपको विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए।

पेट में जलन
अत्यधिक मात्रा में दालचीनी के सेवन से पेट के अंदरूनी हिस्से में जलन का अनुभव हो सकता है। गस्ट्रोइंटेस्टिनल समस्‍या जैसे पेट का अल्‍सर से ग्रस्‍त लोगों में दालचीनी के साइड इफेक्‍ट बहुत ज्‍यादा देखें जा सकते हैं।

पुदीने के तेल के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के बारे में जानें

पुदीने के तेल के स्वास्थ्य लाभ
लगभग सभी आवश्‍यक तेलों में से पुदीने का तेल सबसे ज्‍यादा उपयोगी और स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक माना जाता है। इसे विश्व की सबसे पुरानी औषधि भी कहा जाता है। इस तेल में विटामिन ‘ए’ और ‘सी’ के साथ मैंगनीज, मैग्नीशियम, कैल्शियम, फोलेट, पोटेशियम और कॉपर जैसे मिनरल पाए जाते हैं। इसके अलावा यह ओमेगा 3 फैटी एसिड भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। आइए इस स्‍लाइड शो के माध्‍यम से जानें कि आप पुदीने के तेल के इस्तेमाल से कैसे रोगमुक्त हो सकते हैं।

पाचन क्रिया को दुरुस्‍त रखे
औषधीय गुणों से भरपूर पुदीने का तेल पेट की समस्‍याओं जैसे अपच, गैस और पेट में मरोड़ आदि के लिए वरदान माना जाता है। समस्‍या होने पर थोडा सा पुदीने का तेल खाने में डाले या खाने के बाद इस तेल की कुछ बूंदें एक गिलास गर्म पानी में डालकर पीएं। यह आपके भूख न लगने की समस्या का भी बेहतरीन इलाज है। यह दस्त, मतली, पेट में अन्य प्रकार की गड़बड़ी आदि समस्याओं को ठीक करने में सक्षम है।

दांतों की देखभाल
पुदीने के तेल में एंटी-सेप्टिक गुण होते हैं और यह सांसों की बदबू को दूर करता है। यह आपके दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ बनाता है तथा कीटाणुओं से लड़ता है। यह दांत दर्द में लाभदायक होने के साथ पुदीने के तेल को कई टूथपेस्ट में भी मिक्‍स किया जाता है।

सांस संबंधी रोगों में लाभकारी
पुदीने के तेल में मौजूद मेंथॉल से आपकी सांसों की तकलीफ काफी प्रभावी रूप से दूर होती है। यह एक उपयोगी एक्सपेक्टरेंट (expectorant) है, जिसकी वजह से यह आपको तुरंत राहत प्रदान करता है। पुदीने का तेल सांस संबंधित बीमारियां जैसे साइनसाइटिस, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस में भी लाभदायक है। अगर सर्दियों में आपका नाक बंद हो गया है, तो पुदीने के तेल को अपनी चेस्‍ट पर मलें या पानी में डालकर इसकी भाप लें। ऐसा करने से आपको तुरंत राहत मिलेगी।

सिरदर्द दूर करे
सिरदर्द की समस्या को दूर करने के लिए पुदीने का तेल काफी प्रभावी उपचार है। इस तेल को लेकर पानी मिलाकर मिक्‍स कर लें। इसे अपने सिर पर लगाकर अच्छे से मालिश करें। या पुदीने के तेल की कुछ बूंदें अपने रुमाल पर या कलाई पर डालकर सूंघे। यह न सिर्फ दर्द को दूर करता है, बल्कि सिर के उस भाग को सुकून भी प्रदान करता है।

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाये
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग आसानी से बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए आप पुदीने के तेल का प्रयोग कर सकते हैं। पुदीने के तेल में मौजूद एंटी-बैक्‍टीरियल और एंटी-फंगल गुण प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर बीमारियों के इलाज में मदद करता है।