घरेलू उपाय 4 home medicine

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सुबह एक ग्लास = रोज 3 किलो चर्बी गायब!

पाचन क्रिया दुरुस्‍त रखें
पेट संबंधित बीमारियों के इलाज में केसर बहुत फायदेमंद होता है। बदहजमी, पेट-दर्द, पेट में मरोड़, गैस, एसिडिटी आदि हाजमे से संबंधित शिकायतों से राहत दिलाने में काफी मदद करता है। यह हमारी पाचन क्रिया को भी दुरुस्‍त रखता है।

मासिक धर्म की औषधि
केसर का नियमित सेवन महिलाओं के लिए बहुत अच्‍छा रहता है। महिलाओं की कई शिकायतें जैसे – मासिक चक्र में अनियमिता, गर्भाशय की सूजन, मासिक चक्र के समय दर्द होने जैसी समस्याओं में केसर का सेवन करने से आराम मिलता है।

नवजात के लिए अमृत
अक्‍सर नवजात को सर्दी-जुकाम की समस्‍या घेर लेती है। इस समस्‍या से नवजात को बचाने के लिए मां के दूध में केसर मिलाकर उसके नाक और माथे पर मलने से लाभ होता है। या केसर, जायफल और लौंग का लेप बनाकर नवजात की छाती और पीठ पर लगाने से फायदा होता है। सर्दी का प्रकोप कम होता है और उसे आराम मिलता है।

दिमाग में तेजी
केसर को चन्दन के साथ घिसकर इसका लेप माथे पर लगाने से सिर, आंखों और दिमाग को शीतलता मिलती है। इस लेप को लगाने से दिमाग भी तेज होता है।

गंजापन दूर करें
गंजे लोगों के लिये तो केसर संजीवनी बूटी की तरह काम करती है। जिनके बाल बीच से उड़ जाते हैं, वह थोड़ी सी मुलेठी को दूध में पीस कर उसमें चुटकी भर केसर डाल कर पेस्ट बना लें। सोते समय सिर में लगाने से गंजेपन की समस्या दूर होती है। रूसी की समस्या हो या फिर बाल झड़ रहे हों, सभी समस्‍याओं में यह नुस्‍खा काम आता है।

सिर दर्द से राहत
सिर दर्द को दूर करने के लिए केसर का उपयोग किया जा सकता है। सिर दर्द होने पर चंदन और केसर को मिलाकर सिर पर इसका लेप लगाने से सिर दर्द में राहत मिलती है।

अनिद्रा दूर करें
अनिद्रा की शिकायत को दूर करने में भी केसर काफी उपयोगी होता है। इसके साथ ही यह अवसाद को भी दूर करने में मदद करता है। रात को सोने से पहले दूध में केसर डालकर पीने से अनिद्रा की शिकायत दूर होती है।

बुखार में उपयोगी
केसर में ‘क्रोसिन’ नाम का तत्‍व पाया जाता है, जो वैज्ञानिक रूप से बुखार को दूर करने में उपयोगी माना जाता है। इसके साथ ही यह एकाग्रता, स्‍मरण शक्ति और रिकॉल क्षमता को भी बढ़ाने का काम करता है।

पाचन, संक्रामक रोगों और आंखों की परेशानियों में फायदेमंद है जायफल

पाचनतंत्र के लिए फायदेमंद
खाने में अगर आप जायफल का इस्तेमाल करत हैं तो ये पेट संबंधी कई रोगों जैसे अपच, एसिडिटी और कब्ज में राहत दिलाता है। मीठी चीजों पर थोड़ा सा जायफल का पाउडर छिड़कने से इसका जायका भी अच्छा हो जाता है और इससे बहुत अच्छी खुशबू भी आती है। जायफल का सेवन भूख को बढ़ाने में मददगार है और डायरिया से भी बचाता है।

संक्रामक रोग रहेंगे दूर
जायफल में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं इसलिए ये शरीर को हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस से बचाता है। इसके प्रयोग से शरीर को संक्रामक रोगों से खतरे की संभावना कम हो जाती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। जायफल के पाउडर को किसी भी इंफेक्शन वाली जगह पर रगड़ने से इसमें राहत मिलती है और इसे खाने से शरीर से इन इंफेक्शन्स का प्रभाव कम होता है।

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मुंह से बदबू
मुहं से बदबू आने पर जायफल का प्रयोग विशेष लाभकारी है। मुंह में दुर्गंध का प्रमुख कारण वायरस और बैक्टीरिया होते हैं जो गले के आसपास के हिस्से में जमे रहते हैं और तेजी से बढ़ते रहते हैं। जायफल में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं इसलिए ये मुंह में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करता है और इसकी खुशबू से मुंह की दुर्गंध कम होती जाती है।

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आंखों के लिए फायदेमंद
जायफल आंखों के लिए बहुत फायदेमंद है। जायफल में कई ऐसे एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन्स होते हैं जो आंखों संबंधित रोगों से हमें बचाते हैं और आंखों की रौशनी भी बढ़ाते हैं। अगर आपकी आंखों में दर्द, जलन या सूजन है तो जायफल को पानी के साथ पत्थर पर घिसकर इसका लेप तैयार कर लें और फिर इसे अपनी आंखों की बाहरी त्वचा पर लगाएं। ध्यान दें जायफल आंखों के अंदर न चला जाए, वर्ना जलन की समस्या हो सकती है।

झुर्रियों और झाइयों में
चेहरे पर झुर्रियों और झाइयों में भी जायफल फायदेमंद है। झाईयों और झुर्रियों को हटाने के लिए आपको जायफल को पानी के साथ पत्थर पर घिसना चाहिए। घिसने के बाद इसका लेप बना लें और इस लेप को झाईयों और झुर्रियों पर लगाएं। इससे आपकी त्वचा में निखार आएगा आप पर उम्र का प्रभाव भी कम होगा।

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सिर्फ 2 दिन में वजन घटाता है नींबू के छिलकों का ऐसा प्रयोग

वजन घटाते हैं नींबू के छिलके
नींबू के फायदों के बारे में तो हम सब जानते हैं। तभी तो नींबू का रस हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है। लेकिन, नींबू के छिलकों का क्या। उन्हें तो हम अकसर फेंक देते हैं। लेकिन, क्या आप नींबू के छिलकों के फायदों और पोषक गुणों के बारे में जानते हैं। हममें से अध‍िकतर लोग नींबू के छिलकों के गुणों से अनजान होते हैं। लेकिन, इसके छिलके भी कुछ कम नहीं। आइए जानते हैं इसके छिलकों के फायदों के बारे में।

हड्डियां बनाये मजबूत
नींबू के छिलके आपकी हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करते हैं। इसमें उच्च मात्रा में कैल्श‍ियम और विटामिन सी होता है, जो हड्डियों को स्वस्थ बनाये रखने में मदद करता है। इसके अलावा यह हड्ड‍ियों से जुड़ीं बीमारियों जैसे ऑस्ट‍ियोपोरोसिस, रहेयूमेटॉयड अर्थराइटिस और इंफ्लेमेटरी पोलीअर्थराइटिस से भी बचाने में मदद करता है।

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ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को दूर करे
ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से निजात दिलाने में नींबू के छिलके काफी महत्वपूर्ण होते हैं। नींबू के छिलकों में भारी मात्रा में फ्लेवानॉयड होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को शरीर से दूर करने में मदद करते हैं।

टॉक्सिन हटाये
हमारे शरीर में कई विषैले पदार्थ यानी टॉक्सिन मौजूद होते हैं। ये पदार्थ न केवल हमारे शरीर को अंदर से कमजोर बनाते हैं, बल्कि साथ ही साथ हमारे भीतर अल्कोहल और अन्य नुकसानदेह खाद्य पदार्थों के सेवन की लालसा भी बढ़ाते हैं। नींबू के छिलके अपने खट्टे स्वाद और स्वभाव के कारण, इन विषैले पदार्थों को दूर करने में मदद करते हैं।

कैंसर से लड़े
इस बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। लेकिन, नींबू के छिलके कैंसर से बचाने और उसके इलाज में काफी मददगार होते हैं। इसमें मौजूद तत्त्व कैंसर की कोश‍िकाओं से लड़ने में मददगार होते हैं।

कोलेस्ट्रॉल घटाये
यह कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने में भी मदद करते हैं। शरीर में कोलेस्ट्रॉल की अध‍िक मात्रा दिल की सेहत को नुकसान पहुंचाती है। नींबू के छिलकों में मौजूद पॉलीफिनॉल कोलेस्ट्रॉल को कम कर आपके शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

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दिल को रखे सेहतमंद
नींबू के छिलके में मौजूद पोटेश‍ियम रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है। सही रक्तचाप से हमारा दिल भी सही रहता है। इसके साथ ही नींबू के छिलके हमारे दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। और हमें दिल के दौरे और डायबिटीज से बचाते हैं।

मुंह का स्वास्थ्य रहे सही
मुंह के स्वास्थ्य को सही रखने में भी नींबू के छिलके काफी मददगार होते हैं। विटामिन सी की कमी से कमजोर दांत और मसूड़ों से खून आने की समस्या होती है। विटामिन सी कमी से स्कर्वी और जिंजिविटस हो जाता है। नींबू के छिलके में सिट्रिक एसिड भरपूर मात्रा में होता है, जो विटामिन सी की कमी से हुए नुकसान की भरपाई करने में मदद करता है। यह दांतों और मसूड़ों से संबंध‍ित बीमारियों को भी दूर रखता है।

वजन घटाये
नींबू के छिलके वजन घटाने में भी मदद करते हैं। इनमें पेक्टिन नाम का तत्व होता है, जो शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को दूर रखता है। तो अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो नींबू के छिलकों का सेवन जरूर करें।

त्वचा रहे ख‍िली-ख‍िली
झुर्रियों, एक्ने, पिग्मेंटेशन और गहरे निशानों से बचाने में नींबू के छिलकों का कोई सानी नहीं। इसमे मौजूद फ्री-रेडिकल्स इस प्रक्रिया में काफी अहम किरदार निभाते हैं। इसके साथ ही इसमं एंटी-ऑक्सीडेंट्स त्वचा को डिटॉक्सीफाई करते हैं। जिससे आपका रूप निखरता है।

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पेट के कीड़ों से छुटकारा दिलाये घरेलू उपाय
पेट के कीड़े आपके गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रेक्ट आंत के मुख्य दीवारों को संक्रमित करते हैं। दो तरह के कीड़े प्रोटोजोआ और हेलेमिंथ आपको प्रभावित करते हैं। यह सूक्षम परजीवी हैं और वयस्क अवस्था में नग्न आंखों से दिखाई देते हैं। यह कीड़े दूषित आहार, पानी और त्वचा के माध्यम से आपके शरीर में प्रवेश करते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य सामान्य कारणों जैसे स्वच्छता में कमी, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और अधपका आहार भी पेट में कीड़ों का कारण होता है। हालांकि कीड़ों के प्रकार के अनुसार आप पेट के कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए ओवर-द-काउंटर दवा ले सकते हैं। लेकिन यहां दिये घरेलू उपचार भी आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

कद्दू के बीजों का कमाल
कद्दू के बीज में विटामिन, मिनरल, अमीनो एसिड, कार्बोहाइड्रेट और फैटी एसिड मौजूद होते हैं। ये राउंड वर्म और थ्रैड वर्म के लिए प्राकृतिक उपचार के रूप में काम करते हैं। गोल कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए अपने पसंद के फ्रूट जूस में कद्दू के बीज के पाउडर को मिलाकर पीये। या आप कीड़ों की समस्‍या को दूर करने के लिए सोया दूध में कद्दू के बीज और प्‍याज को मिलाकर भी ले सकते हैं।

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एंटी-बैक्‍टीरियल गुणों से भरपूर लहसुन
लहसुन राउंड वर्म, हुक वर्म, थ्रैड वर्म और टेप वर्म जैसे पेट के कीड़ों से लड़ने का एक और असरकार उपाय है। कीड़े पेट को संक्रमित कर, पाचन तंत्र के कार्यों को बाधित करते है। लेकिन लहसुन में मौजूद एंटी-बैक्‍टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-सेप्टिक गुणों के कारण आप कीड़ों की समस्‍या से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। कीड़ों की समस्‍या होने पर एक सप्‍ताह नियमित रूप से हर रोज कच्‍चे लहसुन को खाली पेट खाये या एक कप दूध में लहसुन की दो कली को मिलाकर अच्‍छे से उबालकर, उसे थोड़ा सा ठंडा करके पीये।

थीमोल तत्‍व से भरपूर अजावइन
अजवाइन का भी पेट के कीड़ों को दूर करने के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकता है। अजवाइन में मौजूद थीमोल नामक तत्‍व में पेट के अवांछित कीड़ों के विकास को रोकने की क्षमता होती है। आयुर्वेंद में तो पेट के कीड़ों के इलाज के लिए अजवाइन के साथ गुड खाने की सलाह दी जाती हैं। समस्‍या होने पर खाली पेट सुबह थोड़े सा गुड़ खाकर, आंधे घंटे प्र‍तीक्षा करें। फिर ए‍क गिलास पानी के साथ आधा चम्‍मच अजवाइन खाये। कीड़े की समस्‍या पूरी तरह दूर होने तक इस उपाय को दिन में एक बार दो सप्‍ताह तक करें।

उत्कृष्ट प्राकृतिक उपचार हल्दी
हल्दी पेट के कीड़े के लिए एक और उत्कृष्ट प्राकृतिक उपचार है। यह आंतरिक एंटी-सेप्टिक की तरह काम करती है और इसमें मौजूद एंटी-माइक्रोबीयल गुण पेट के कीड़ों को मारने में मदद करते है। इसके अलावा हल्‍दी सूजन, अत्यधिक गैस, उल्टी और पेट में दर्द के लक्षण को दूर करने में मदद करती है। कीड़ों की समस्‍या से बचने के लिए कच्चे हल्दी के रस में चुटकी नमक मिलाकर खाली पेट सुबह पीने से लाभ मिलता है।

लौंग का जादू
लौंग अपने एंटी-सेप्टिक, एंटी-बैक्‍टीरियल और एंटी परसिटिक गुणों के कारण जाना जाता है, जो प्रभावी ढंग से शरीर के अंदर कीड़ों को मारने में मदद करता है। कीड़ों की समस्‍या से बचने के लिए एक कप गर्म पानी में लौंग के पाउडर की एक चम्‍मच मिलाकर, कुछ मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। फिर इस मिश्रण पी लें। पेट के कीड़ों से बचने के लिए इस मिश्रण का एक सप्‍ताह तक सेवन करें।

विषाक्त पदार्थों को दूर करें नीम
नीम पेट के कीड़े के लिए एक और प्रभावी प्राकृतिक उपचार है। इसमें मौजूद एंटी-परासिटिक गुण कीड़े को हटाने के साथ-साथ विषाक्त पदार्थों से छुटकारा पाने में भी मदद करते हैं। नीम की पत्तियों को पीसकर उसका पेस्ट बना लें। और पेट के कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए एक आधा चम्मच पेस्ट को पानी के साथ हर सुबह एक सप्ताह तक खाली पेट ले।

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बीटा-कैरोटीन से समृद्ध गाजर
गाजर बीटा-कैरोटीन की उच्‍च मात्रा के कारण जाना जाता है, साथ ही यह विटामिन ए का भी अग्रदूत माना जाता है। इसके अलावा यह पेट के कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकता है। गाजर में विटामिन सी और जिंक की मौजूदगी प्रतिरक्षा प्रणाली को समर्थन देती है। और एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली कीड़ों से अधिक कुशलता के साथ लड़ सकती है। पेट की कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए आप नियमित रूप से हर सुबह खाली पेट गाजर का जूस लें।

कस्टर्ड एप्पल के 7 कमाल के स्वास्थ्य लाभ

कस्टर्ड एप्पल के लाभ
कस्टर्ड एप्पल अर्थात शरीफा एक मीठा फल ही नहीं बल्कि एक औषधि भी है। यह आसानी से हजम होने वाला और अल्सर व अम्ल पित्त के रोग में लाभकारी शरीफा आयरन व विटामिन-सी का एक अच्छा स्रोत भी है। साथ ही इसमें मैग्‍नीशियम व पौटेशियम भी होते हैं। कस्‍टर्ड एप्‍पल में एंटी-डायबिटिक गुण भी होता है। तो चलिये जानें कि कस्टर्ड एप्पल के कमाल के स्वास्थ्य क्‍या-क्‍या हैं।

सौंदर्य के लिये
कस्टर्ड एप्पल में विटामिन ए व सी होते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। साथ ही कस्टर्ड एप्पल बालों के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है। एजिंग व त्वचा पर होने वाले निशानों से भी बचाता है।

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फोड़े-फुंसी व जलन
कस्टर्ड एप्पल के पत्तों को पीस कर फोड़े-फुंसी पर लगाने से वे जल्द ही ठीक हो जाते हैं। साथ ही शरीफा का सेवन सेवन करने या इसके गूदे से बने शरबत के सवन से शरीर की जलन ठीक हो जाती है।

दिल के लिये फायदेमंद
कस्टर्ड एप्पल में मौजूद मैग्निशियम दिल को कार्डिएक अटैक से बचाता है और मांसपेशियों को भी रिलेक्स करता है। इसके अलावा इसका नियमित सेवन करने से हृदय रोगों से भी बचाव होता है।

बालों के लिये
कस्टर्ड एप्पल के बीजों को बकरी के दूध के साथ पीस कर बालों में लगाने से बाल झड़ने की समस्या कम होती है। साथ ही इससे जुएं भी मर जाती हैं। लेकिन ध्यान रहे कि ये आंखों तक न पहुंचे, क्योंकि इससे आंखों में जलन हो सकती है

पाचन सुधारे
कस्टर्ड एप्पल में कॉपर और फाइबर मौजूद होते हैं जोकि पाचन शक्ति को बढ़ाते हैं और कब्ज की समस्या को भी दूर करते हैं। माना जाता है कि सुखाए हुए कस्टर्ड एप्पल को पीसकर इसका पाउडर पानी के साथ लेने से डायरिया में आराम होता है।

अतिसार और पेचिश
कच्चा कस्टर्ड एप्पल खाने से अतिसार और पेचिश आदि में आराम होता है। इसके सेवन से शरीर में मांस बनता है और पतले होने की समस्या से निजात मिलती है। यह पाचन में आसान होता है, जिसके चलते इसे कभी भी खाया जा सकता है।

मधुमेह में लाभदायक
कस्टर्ड एप्पल में मौजूद फाइबर शुगर के अवशोषण को धीमा करता है, जिससे टाइप-2 मधुमेह का जोखिम कम होता है। जो लोग डायबिटीज को नियंत्रित करना चाहते हैं, उनके लिये शरीफा खाना अच्छा होता है।

डायबिटीज का काल है रस से भरा ये फल, स्‍वाद में है नंबर 1

स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक है शहतूत
अनोखे आकार वाला शहतूत बहुत ही स्‍वादिष्‍ट फल है। इसमें पोटैशियम, कैल्शियम, फाइबर, आयरन, कॉपर जैसे माइक्रो न्यूट्रिंएट तत्वों की भरपूर मात्रा होने के साथ-साथ यह विटामिन सी और ग्‍लूकोज का भी अच्‍छा स्रोत है। गर्मी में शरीर में पानी की आवश्‍यकता अधिक होने के कारण, शहतूत रामबाण साबित होता है। इस फल में लगभग 91 प्रतिशत पानी होने के कारण, इसके सेवन से शरीर में पानी का संतुलन बना रहता है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट रक्त शुद्ध करता है। कब्ज की शिकायत या एनीमिया के रोगियों को इसके सेवन से फायदा मिलता है। इतना ही नहीं, यह खाना पचाने में भी सहायक होता है। इसके अलावा इसकी पत्तियां भी स्‍वास्‍थ्‍य गुणों से भरपूर होती है। आइए हम इस अद्भुत फल के स्‍वास्‍थ्‍य लाभों के बारे में जानते हैं।

धमनी प्‍लॉक से लड़ने में मददगार
शहतूत की पत्‍तों के अर्क ध‍मनियों में कोलेस्‍ट्रॉल युक्‍त प्‍लॉक का बढ़ाने वाली अथेरोस्क्लेरोसिस की प्रगति, दबाने में कारगर होती है। यह माना जाता है कि यह अर्क एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के ऑक्सीकरण रोकने में मदद करता है, जो अथेरोस्‍क्‍लेरोसिस प्‍लॉक के विकास में एक प्रमुख कारक है।

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एंटीऑक्सीडेंट का स्रोत
शहतूत के पत्‍तों और फल में पाया जाने वाला एंटीऑक्‍सीडेंट फ्री रेडिकल्‍स से होने वाले नुकसान से आपकी रक्षा करता है। टेक्सास के हेल्‍थ साइंस सेंट्रर की यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित एक शोध के अनुसार, एंटीऑक्सीडेंट, लंबी उम्र जीने में मददगार होता है। डेली एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक अध्ययन में पाया गया कि शहतूत के जूस में एंटीऑक्सीडेंट संतरे से दोगुना होता है।

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ब्‍लड शुगर को नियंत्रित करे
शहतूत में मौजूद यौगिक शरीर में ब्‍लड शुगर के स्‍तर के संतुलन को बढावा देने में भी मददगार होते हैं। चीन की कई पारंपरिक दवाओं में ब्‍लड शुगर को नीचे से सामान्‍य स्‍तर पर लाने के लिए शहतूत के पत्तों को इस्‍तेमाल किया जाता है। इसमें शुगर की मात्र लगभग 30 प्रतिशत होती है, इस कारण मधुमेह के मरीज भी इसका सेवन कर सकते हैं।

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सूजन और लालिमा को कम करें
चीनी दवा के कई चिकित्‍सक, सूजन और लालिमा के इलाज के लिए शहतूत का इस्‍तेमाल करते हैं। एक रोमानियाई अध्‍ययन में पाया गया कि कुरकुमीन और शहतूत की पत्‍तों को मिलाकर जलन का इलाज प्राकृतिक रूप से किया जा सकता है।

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पोषक तत्वों का स्रोत
सूखा शहतूत प्रोटीन, विटामिन सी और के और आयरन से भरपूर होता है। आप दिन में किसी भी समय इस सूखे शहतूत का नाश्‍ता कर सकते हैं। इसके अलावा, फाइबर और अन्य पोषक तत्वों का समृद्ध स्रोत होने के कारण इस पौधे के पत्‍ते भी शहतूत की तरह ही पौष्टिक होते हैं।

प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाये
शहतूत में पाया जाने वाला एल्‍कलॉइड, मैक्रोफेज को सक्रिय करता है, यह सफेद रक्‍त कोशिकाएं प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्‍तेजित करने में मदद करती है। यह मैक्रोफेज प्रतिरक्षा प्रणाली को हाई अलर्ट में डालकर स्‍वस्‍थ रहने में मदद करते हैं।

चेहरे की झुर्रियां दूर करें
अगर आप भी झुर्रियों से परेशान हैं तो अब चिंता करने की कोई बात नहीं। इसके लिए शहतूत का जूस पीजिए। आपका चेहरा जवान हो जाएगा। शहतूत में एंटी एजिंग यानी उम्र को रोकने वाला गुण होते है। साथ ही झुर्रियों को चेहरे से गायब कर त्वचा को जवां बनाये रखने में मदद करती है।

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बोन फ्रैक्‍चर के लिए प्राकृतिक उपाय
अगर आपकी किसी हड्डी में फ्रैक्चर होता है तो आपको तुरंत चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए। टूटी हुई हड्डी को स्थिर कर देने के बाद आप उसे ठीक करने के लिए प्राकृतिक उपचार की मदद लेना शुरू कर सकते हैं। हालांकि बोन फ्रैक्‍चर को आधे समय में ठीक करने के लिए कोई जादूई औषधि नहीं है, लेकिन कुछ उपायों को अपनाकर आप ठीक होने के समय को कम से कम कर सकते हैं। सेंट्रर फोर बेटर बोन के अनुसार, यह उपाय टूटी हुई हड्डी को जल्‍द ठीक करने में आपकी मदद कर सकते हैं।

कैल्शियम से भरपूर आहार
हड्डियों में प्रमुख मिनरल कैल्शियम है, इसलिए कैल्शियम हड्डियों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए आवश्‍यक है। बोन फ्रैक्‍यर को जल्‍द ठीक करने के लिए आपको इस महत्‍वपूर्ण मिनरल को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। समुद्र सब्जियों, हरी पत्तेदार सब्जियों, मछली, सालमन, सार्डिन, और डेयरी उत्‍पाद जैसे दही, केफिर, और अमासै में यह भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

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आवश्‍यक अमीनो एसिड है लाइसिन
लाइसिन एक आवश्यक अमीनो एसिड होता है, जो मानव विकास को बढ़ावा देने, प्रतिरक्षा समारोह बढ़ाने, केंद्रीय तंत्रिका ऊतक के समारोह में सुधार करने और हड्डियों और मांसपेशियों में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कैल्शियम के अवशोषण में बहुत महत्‍वपूर्ण होता है। इसलिए इसे अपने नियमित आहार दिनचर्या में शामिल करें। मछली, चिकन, बीफ, दूध, पनीर, सेम, अंकुरित मूंग, फलियां और फलों और सब्जियों में अधिक लाइसिन होता है।
Image Source : h-ype.com

विटामिन ‘के’ युक्‍त आहार
विटामिन के रक्‍त के थक्‍कों और हड्डी के गठन के लिए बहुत आवश्‍यक होता है। केल, ब्रोकोली, पालक और अन्‍य हरी सब्जियों में विटामिन के-1 पाया जाता है। जबकि कच्‍चे डेयरी उत्‍पाद जैसे चीज और केफिर में विटामिन के-2 भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

स्वच्छ लीन प्रोटीन
शरीर प्रोटीन के बिना खोये हुए ऊतकों का पुननिर्माण करने में असमर्थ होता है। इसके अलावा लीन प्रोटीन मे फैट या कार्बोहाइड्रेट के मुकाबले दुगनी गर्माहट की शक्ति होती है…. यह आपके मेटाबोलिज्‍म को रफ्तार देता है। इसलिए आपको बोन फ्रैक्‍चर को जल्‍द ठीक करने के लिए अपने आहार में लीन प्रोटीन को शामिल करना होगा। प्रोटीन के आम स्रोतों मे लीन मीट, पॉल्ट्री, मछली, अंडे, चीज, बीन्स और नट्स होते हैं।

सूरज से लें विटामिन डी
विटामिन डी एक हार्मोन है जो फास्फोरस, कैल्शियम और हड्डियों के मेटाबॉलिज्‍म और न्यूरोमस्क्यूलर कार्यों को नियंत्रित करता है। यह मजबूत हड्डियों और मांसपेशियों के लिए आवश्यक है। विटामिन डी के बिना हमारा शरीर स्वस्थ हड्डियों के लिए जरूरी कैल्शियम को ठीक ढंग से अवशोशित नहीं कर सकता। धूप के संपर्क में आना विटामिन डी के निर्माण के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

कोलेजन के निर्माण के लिए विटामिन सी
विटामिन सी कोलेजन के निर्माण के लिए आवश्‍यक होता है और कोलेजन त्‍वचा और ऊतकों का एक आवश्‍यक घटक है। इसलिए अपने आहार में विटामिन सी के सेवन को बढा़ये। विटामिन सी आपको फल और सब्जियों जैसे खट्टे फल, लाल मिर्च, स्‍ट्रॉबेरी और टमाटर में भरपूर मात्रा में मिलता है।

हड्डियों को मजबूत बनाये जिंक
जिंक हड्डियों के लिए अनिवार्य तत्‍व है और जिंक के बिना आपका शरीर हड्डियों को मजबूत नहीं बना सकता। हड्डी के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक केमिकल प्रतिक्रिया जिंक की आवश्यकता होती है। जिंक के सेवन को बढ़ाने के लिए अपने आहार में मांस, कद्दू के बीज और पालक को शामिल करें।

इस तरह खाएं आंवला, हमेशा सामान्य रहेगा कोलेस्ट्रॉल

आंवले के लाभ
आंवला एक पौष्टिक फल है जिसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसकी खास बात यह है कि इसमें मौजूद विटामिन गर्म करने और सुखाने से भी खत्‍म नहीं होता। आंवला गुणों का भंडार है जो आसानी से उपलब्‍ध होता है। इसके चमत्कारी गुणों के कारण इसे अमृत फल भी कहा जाता है। इसके अनेकों औषधीय लाभ भी हैं।

बालों के लिए
बाल केरोटीन प्रोटीन से बना होता है, यह बालों को सुंदर, मजबूत और घना बनाता है। यह प्रोटीन आंवले में पाया जाता है। इसलिए अपने आहार में आंवले को शामिल करें। आंवला से बालों का विकास भी होता है, यह प्राकृतिक कंडीशनर के तौर पर भी काम करता है। आंवला बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है, और उनके प्राकृतिक रंग और चमक को बनाए रखता है।

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कोलेस्ट्रॉल में लाभकारी
लिवर को कोलेस्ट्रॉल का मुख्य स्रोत माना जाता है और शरीर में उपयोग न होने वाला कोलेस्ट्रॉल खून की नलिकाओं में जम जाता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। आंवले में मौजूद विटामिन ‘सी’ इस कॉलेस्ट्रॉल को खून की नलिकाओं से घुलाने में मदद करता है जिससे शरीलर का ब्लड प्रेशर सामान्‍य रहता है।

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आंखों की बीमारियां को करें दूर
आंखों की समस्याओं को दूर करने के लिए आंवले का प्रयोग करना चाहिए, आंवले के नियमित सेवन से आंखों की रोशनी भी बढ़ती है। प्रतिदिन एक बड़ा चम्‍मच आंवले का रस शहद के साथ मिलाकर चाटने से मोतियाबिन्‍द में लाभ होता है। आंखों की खुजली, लालिमा और लगातर पानी निकलने में भी यह फायदेमंद साबित होता है।

मजबूत करें इम्यून सिस्टम
शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होने आप तमाम बीमारियों से बच सकते हैं, और आंवले में इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत बनाने की अद्भुत क्षमता होती है। आंवले के नियमित इस्‍तेमाल से आप अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर सकते हैं।

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डायबिटीज को करें नियंत्रित
डायबिटीज के मरीजों के लिए आंवला बहुत फायदेमंद होता है। यदि आप डायबिटीज से परेशान है तो आंवले के गुणकारी एंटीऑक्‍सीडेंट्स पर विश्‍वास कर सकते हैं। डायबिटीज होने पर हल्दी के चूर्ण के साथ आंवले का सेवन करें, इससे फायदा होगा। या फिर आंवला, जामुन और करेले का पाउडर एक चम्मच प्रतिदिन दोनों समय लें। इससे भी डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

दिल को सेहतमंद रखें
आंवला दिल की सेहत के लिए बहुत अच्‍छा होता है। इसलिए दिल को सेहतमंद रखने के लिए रोज आंवला खाने की आदत डालें। इससे दिल की मांसपेशियां मजबूत होंगी और शरीर में रक्‍त संचार अच्‍छे से होगा। दिल के मरीज मुरब्बा भी खा सकते हैं।

संक्रमण से सुरक्षा
आंवला अपने एंटीबैक्टीरियल और एस्ट्रिजेंट गुणों के कारण संक्रमण से शरीर को बचाता है। चूंकि यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है जो बीमारियों और संक्रमण से हमारी सुरक्षा करता है। विटामिन सी का बेहतरीन स्रोत होने की वजह से यह शरीर से सभी टॉक्सिन्स को बाहर निकाल देता है।

एसिडिटी दूर करें
आधुनिक जीवनशैली की एक और देन है एसिडिटी और इस समस्‍या से शायद हममें से सभी कभी-कभी शिकार हुए हैं। एसिडिटी होने पर एक ग्राम आंवले का पावडर दूध या पानी में शक्कर के साथ मिलाकर दोनों समय पीने से लाभ मिलता है।

खांसी और बलगम में लाभकारी
आंवला खांसी में भी फायदेमंद होता है। खांसी आने पर दिन में तीन बार आंवले का मुरब्बा गाय के दूध के साथ खाएं। अगर ज्यादा तेज खांसी आ रही हो तो आंवले को शहद में मिलाकर खाने से खांसी ठीक हो जाती है। यह बलगम में भी फायदेमंद है।

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गुलाब जल के फायदे
गुलाब के फूल को भला कौन नहीं जानता हैं। फूलों का राजा माना जाने वाला गुलाब एक जाना पहचाना फूल है। यह फूल होने के साथ-साथ एक जड़ी बूटी भी है। गुलाब का हमारे जीवन में अपना ही महत्‍व है। सौंदर्य अपील और सुखदायक खुशबू के अलावा, गुलाब का फूल हमें कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता हैं। इस स्‍लाइड शो में कुछ स्‍वास्‍थ्‍य लाभ है जो आपको गुलाब जल, गुलाब के फल और तेल से मिलती हैं।

आंखों के लिए है अमृत
गुलाब जल थकी हुई आंखों को तुरंत राहत प्रदान करने में बहुत कारगर होता है। आंखों में गुलाब जल के इस्‍तेमाल से आंखों में नई चमक आती है, और वह स्‍वस्‍थ लगती हैं। अगर आप कंप्‍यूटर के सामने बहुत ज्‍यादा समय बिताते हैं तो गुलाब जल आपका दोस्‍त साबित हो सकता है।

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गुलाब के तेल में एस्ट्रिंजेंट
गुलाब के तेल में एस्ट्रिंजेंट के अद्भुत गुण होने के कारण यह मसूड़ों और बालों की जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करता है। साथ ही यह त्‍वचा की देखभाल, मांसपेशियों में मजबूती, आंतों और रक्त वाहिकाओं में भी मदद करता है। गुलाब के तेल का रक्त वाहिकाओं से अनुबन्ध होने के कारण यह घाव और चोट से निकलने वाले रक्त के प्रवाह को रोकने में बहुत कारगर होता है।

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त्वचा की देखभाल
त्वचा के लिए फायदेमंद विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध कराने के कारण गुलाब जल त्‍वचा की देखभाल के लिए बहुत लोकप्रिय है। गुलाब जल के इस्‍तेमाल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एक सर्वश्रेष्‍ठ टोनर भी है। गुलाब जल में प्राकृतिक एस्ट्रिंजेंट होने के यह एक सर्वश्रेष्‍ठ टोनर भी है। रोज रात को इसे चेहरे पर लगाने से त्‍वचा टाइट होती। यह त्वचा के पीएच संतुलन को बनाएं रखता है, मुंहासों को दूर करने में मदद करता है और बैक्टीरिया के संक्रमण से त्वचा की रक्षा करता है। Image Source: Getty Images

बालों की देखभाल
गुलाब जल का एक और आश्चर्यजनक स्वास्थ्य लाभ है इसमें बालों की देखभाल के प्रभावी गुण होते है। बालों की जड़ों में ब्‍लड के सर्कुलेशन में सुधार करता है जिससे बालों के स्‍वस्‍थ विकास में मदद मिलती है। इसके अलावा यह बालों को मजबूत और लचीला बनाने के लिए एक प्रभावी और प्राकृतिक कंडीशनर भी है।

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एंटीडेप्रेसेंट
हालांकि गुलाब आपके चेहरे पर एक प्‍यारी से मुस्‍कान ला सकता है, लेकिन इसका तेल भी कम नहीं है। इसका तेल आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति बढ़ा सकता हैं। गुलाब का तेल अवसाद और चिंता से लड़ने में मदद करता हैं। यह गुलाब का तेल अवसाद को कम करने के लिए एक कारगर उपाय के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता है क्‍योंकि यह सकारात्‍मक विचारों और भावनाओं को आह्वान करता है। Image Source: Getty Images

गुलाब का फल
गुलाब के फल विटामिन ए, बी 3, सी, डी और ई से भरपूर होता है। इसमें उच्‍च मात्रा में मौजूद विटामिन सी के कारण डायरिया के इलाज के लिए इसका इस्‍तेमाल किया जाता है। गुलाब के फल में फ्लवोनोइड्स, बायोफ्लवोनोइड्स, सिट्रिक एसिड, फ्रुक्टोज, मैलिक एसिड, टैनिन और जिंक भी होता है।

एंटी फ्लॉजिस्टिक (सूजन कम करने वाला)
बुखार आने से रोकना भी गुलाब के तेल का एक अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ है। इसमें मौजूद एंटी इंफ्मेंटेरी तत्‍व सूक्ष्म जीवाणु संक्रमण के कारण सूजन, रसायन, अपच और निर्जलीकरण को कम करने में मदद करता हैं। Image Source: Getty Images

हर्बल चाय
गुलाब जल का इस्‍तेमाल एक हर्बल चाय के रूप में किया जाता है। यह पेट के रोगों और मूत्राशय में होने वाले संक्रमण को दूर करने के काम आती है। हर्बल गुलाब जल चाय एक शांत प्रभाव प्रदान करती है। इस सुखदायक चाय को घूंट आप कभी भी भर सकते हैं यह आपको आराम महसूस कराने में मदद करेगी। Image Source: Getty Images

एंटीसेप्टिक
घावों के इलाज के लिए गुलाब का तेल बहुत अच्‍छा उपाय है। गुलाब के तेल में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण घावों को भरता है और इसकी खुशबू से आपको रिलैक्‍स महसूस होता है। घाव पर गुलाब के तेल के इस्‍तेमाल से सेप्टिक बनने और संक्रमण के विकास से बचाने में मदद मिलती है। Image Source: Getty Images

दिनभर नींद और थकान से परेशान रहते हैं तो आजमाएं ये 5 आसान टिप्‍स

जब हमेशा नींद सताये
सामान्य शब्दों में कहें तो असमय नींद आने का आशय नींद के एहसास से है, यानी नींद कभी भी आपको अपनी आगोश में ले सकती है। इस स्थिति को हाइपरसोमनिया या सोमनोलेंस कहते हैं। जब हम नींद पूरी नहीं कर पाते तब यह समस्या होती है। ऐसी समस्या दिन में अधिक देखने को मिलती है। लेकिन अगर यह समस्या गंभीर हो जाये तो इसे हल्के में बिलकुल न लें। इसके लिए तनाव, अवसाद, उत्सुकता जैसी मनोभावनायें जिम्मेदार हो सकती हैं। दवाओं के सेवन से भी ऐसी समस्या हो सकती है। अस्वस्थ खानपान, दर्द, व्यायाम न करना, एल्कोहल, थायराइड आदि भी इसके लिए जिम्मेमदार कारक हो सकते हैं। इससे पहले कि यह समस्या आपकी जीवनशैली को प्रभावित करे इससे बचने के लिए प्राकृतिक तरीके आजमायें।

पर्याप्त नींद लीजिए
उनींदापन की समस्या से बचने के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। इसलिए अपनी दिनचर्या में सोने के लिए कम से कम 7 से 9 घंटे जरूर निका‍लें। इसके अलावा रोज सोने का एक निश्चित समय बनायें, क्योंकि 7-9 घंटे नींद पूरी करने से अधिक जरूरी है निश्चित समय पर सोना और उठना। कोशिश करें कि बेड पर 10 बजे चले जायें और सुबह जल्दी उठें। इससे नींद संबंधित बीमारी नहीं होगी और आप स्वेस्थ रहेंगे।

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सुबह की धूप लें
सुबह उठने के बाद कुछ देर धूप जरूर लीजिए। इससे आप दिनभर उर्जावान रहेंगे और नींद भी नहीं आयेगी। सूर्य की किरणें विटामिन डी का अच्छा स्रोत हैं। विटामिन डी की कमी से नींद संबंधित समस्या होती है, ऐसा 2013 में ‘क्लींनिकल स्लीप मेडिसिन’ जर्नल में प्रकाशित एक शोध में साबित भी हो चुका है। इसलिए सुबह उठकर कम से कम 15 मिनट के लिए धूप सेंके, इस दौरान किसी तरह की सनस्क्रीन न लगायें।

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ठंडे पानी से चेहरा धुलें
दिन में जब भी आपको नींद सताने लगे तब ठंडे पानी की छींटे चेहरे पर मारें। दरअसल ठंडे पानी से मुंह धुलने पर अचानक से तापमान में बदलाव आता है, क्यों कि शरीर का तापमान गरम होता है और ठंडे पानी के संपर्क में आने के बाद आप एनर्जेटिक हो जायेंगे। इसे और अधिक फायदेमंद बनाने के लिए मुंह धुलकर आप एअर कंडीशनर के सामने थोड़ी देर खड़े हो सकते हैं, यह वॉटर थेरेपी की तरह काम करेगा। सुबह ठंडे पानी से नहाने पर दिन में नींद नहीं आती है, क्योंहकि इससे रक्त संचार सुचारु रहता है।

सुबह उठकर ग्रीन टी पियें
सुबह की शुरूआत एक कप ग्रीन टी से करें। ग्रीन टी पीने से शरीर की क्षमता और ऊर्जा का स्तर बढ़ता है, इससे कई घंटे तक नींद नहीं आती। इसके अलावा सुबह ग्रीन टी पीने से मानसिक स्तर भी बढ़ता है और तनाव नहीं होता। इसमें मौजूद पॉलीफेनल से रात में अच्छी नींद भी आती है। सुबह के अलावा आप दिन में 2 कप ग्रीन टी और पी सकते हैं।

हेल्दी ब्रेकफास्ट बहुत जरूरी
अगर आप सुबह का नाश्ता भूल जाते हैं तो इससे कई समस्यायें होती हैं, मोटापे के अलावा पूरा दिन आलस में ही बीतता है। इसलिए हेल्दी और हैवी ब्रेकफास्ट बहुत जरूरी है। कई शोधों में भी यह बात साबित हो चुकी है कि सुबह ब्रेकफास्ट करने से पूरे दिन शरीर एनर्जेटिक रहता है। सुबह के नाश्ते में वसा कम हो, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट अधिक हो। ओटमील, अंडा, दही, ब्राउन ब्रेड, ताजे फल और सूखे मेवे को अपने ब्रेकफास्ट मेनू में शामिल करें। इसके अलावा लंच में बहुत अधिक न खायें और 2-3 घंटे के अंतराल पर हेल्दी‍ स्नैक्‍स लेते रहें। रात को सोने से 2 घंटे पहले डिनर जरूर कर लें।

दूसरे तरीके भी हैं
इसके अलावा दिन में नींद से बचने के लिए दूसरे तरीके भी हैं। रोज 30 मिनट व्यायाम करें, नींबू-पानी पियें, कभी-कभी एरोमाथेरेपी लें, ऐसे आहार (पेस्ट्री, पास्ता, आलू, चावल, आदि) से बचें जिससे नींद आती हो। अगर बहुत अधिक नींद सताये तो 20 मिनट की पॉवर नैप ले सकते हैं। खुद से बॉडी मसाज देने से भी नींद भाग जायेगी। तेज आवाज में पसंदीदा गाना सुनकर भी असमय नींद से बच सकते हैं। काम के दौरान 5 मिनट टहलकर भी नींद दूर कर सकते हैं। जहां काम कर रहे हैं वहां का माहौल सकारात्ममक बनायें, इससे काम करने में मन लगेगा साथ ही ऐसी समस्यायें आपसे दूर रहेंगी। समस्या गंभीर हो तो एक बार डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

डायबिटीज से कोसों दूर रखेंगी खानपान की ये 5 अच्‍छी आदतें

ब्राउन ब्रैड का लंग और घर पर बना खाना

हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने हाल ही में कुछ दशक पहले हुए नर्स स्वास्थ्य अध्ययन से लगभग 100,000 प्रतिभागियों पर मौजूद डेटा का विश्लेषण किया। उन्हें पता चला कि वे लोग जिन्होंने घर के बने दो लंच और डिनर (एक सप्ताह में 11-14 भोजन) किये, उनमें सप्ताह में छः भोजन करने वालों से मधुमेह के जोखिम 13 प्रतिशत कम था। इसके अलावा घर का बना खाना खाने वालों का वज़न भी कम बढ़ा, जोकि डायबटीज में एक अहम भूमिका निभाता है।

साबुत अनाज का सेवन करना
जर्नल ऑफ डायबिटोलॉजिया में प्रकाशित शोध के अनुसार वे लोग जो अनाज आधारित फाइबर (अपने दोपहर के भोजन में दलिया और लंच सलाद में क्यूनोआ) की 10 ग्राम मात्रा का सेवन करते हैं, उनमें 25 प्रतिशत तक मधुमेह का खतरा कम होता है।

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रोजाना के नाश्ते में अखरोट का सेवन
वो लोग जिन्हें डायबिटीज का जोखिम था, उन्होंने जब तीन महीनों तक रोज़ाना एक मुठ्ठी अखरोट खाया तो उनके रक्त वाहिका समारोह में सुधार हुआ और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर में भी कमी आयी (टाइप 2 मधुमेह के लिए दोनों जोखिम कारक हैं)। अध्ययन के लेखक व येल यूनिवर्सिटी प्रिवेंशन रिसर्च सेंटर में कार्यरत डेविड एल कट्ज़ के अनुसार अपनी डाइट में अखरोट को शामिल करने से विशेष रूप से कार्डियोमेटाबॉलिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।  इसके सेवन से वजन बढ़ने का जोखिम भी नहीं होता है।

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डाइट में टमाटर, आलू, केला आदि शामिल करना

एक शोध के अनुसार इन सभी में पोटेशियम व एक ऐसा मिनरल होता है, जो डायबिटीज से पीड़ित रोगियों की किडनी हेल्थ को सुधारता है। इसलिये अपनी रोज़ाना की डाइट में टमाटर, आलू व केला को शामिल करें।

दही जरूर खाएं

एक बड़े हार्वर्ड अध्ययन के अनुसार दिन में दही का एक अतिरिक्त कटोरा खाने से टाइप – 2 डायबिटीज का जोखिम 18 तक कम होता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि दही के प्रोबायोटिक्स इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता में सुधार लाने और सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन अभी इस तथ्य के लिये अधिक क्लिनिकल परीक्षणों की आवश्यक है।

थायराइड का काल हैं ये 7 आयुर्वेदिक चीजें, जड़ से खत्म करती है रोग

थायराइड के लिए जड़ी बूटी
थायराइड ग्रंथि के ठीक से काम न करने से रक्त में थायराक्सिन नामक हार्मोन का स्तर पर प्रभाव पड़ता है। इस प्रभाव को दो श्रेणी हाइपरथायराइडिज्म और हाइपोथायाराइडिज्म में रखा जाता है। इस स्थिति में वजन बढ़ने या घटने की समस्या होती है। इस महत्वपूर्ण हार्मोनल ग्रंथि को स्वस्थ व संतुलित बनाये रखने के लिए कुछ जड़ी बूटियां उपयोगी साबित हो सकती है।

मुलेठी
मुलेठी थायराइड ग्‍लैंड में संतुलन बना कर रखता है जिससे थायराइड के मरीजों में होने वाली थकान एनर्जी में बदलती है। 2011 में, टेक्सास में बायोसाइंसेज और टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के अनुसार, मुलेठी में पाया जाने वाला प्रमुख घटक ट्रीटरपेनोइड ग्लाइसेरीथेनिक एसिड अत्यधिक आक्रामक होता है जो थायराइड कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है।

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अश्वगंधा
अश्वगंधा एक ऐसी जड़ी बूटी है जिसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट गुण हार्मोन की सही मात्रा में उत्पादन कर थायराइड को रोकने का कम काम करता है। हार्मोन संतुलन के साथ, अश्वगंधा में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव के कारण यह प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार कर तनाव से मुक्ति दिलाता है।

गेहूं का ज्‍वारा
गेहूं का ज्‍वारा प्रकृति की अनमोल देन है। इसमें अनेक औषधीय और रोग निवारक गुण पाए जाते हैं। गेहूं का ज्‍वारा रक्त व रक्त संचार संबंधी रोगों, रक्त की कमी, उच्च रक्तचाप, सर्दी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, साइनस, पाचन संबंधी रोग और थायराइड ग्रंथि के रोग में काम आता है।

अलसी
अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह एसिड थायरायड ग्रंथि के सही तरीके से काम करने में आवश्‍यक भूमिका निभाता है। हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों को अलसी और अलसी के तेल का प्रयोग जरूर करना चाहिए।

अदरक
अदरक जिंक, मैग्नीशियम और पौटेशियम का एक अच्छा स्रोत है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण थायराइड की कार्यक्षमता में सुधार लाने में मदद करते हैं। हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों को अपने आहार में इसको शामिल करना चाहिए। अदरक का उपयोग आहार में भिन्‍न-भिन्‍न प्रकार से कर सकते हैं।

इचिन्‍सिया
इचिन्‍सिया एक लोकप्रिय जड़ी-बूटी है, इसका उपयोग प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करने के लिए किया जाता है। इचिन्‍सिया में मौजूद तत्व हाइपोथायरायडिज्म से पी‍ड़‍ित लोगों के इससे निजात दिलाते हैं। यानि कि इचिन्‍सिया का सेवन थायराइड को दूर रखता है।

ब्लैडररैक
यह एक प्रकार का हर्ब है जिसका प्रयोग हाइपोथायराडिज्म समेत कई बीमारियों में होता है। इस समुद्री शैवाल में प्राकृतिक आयोडीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो थायराइड ग्रंथि को संतुलित करने के लिए जाना जाता है।

बाकोपा
अगर आप थायराइड की समस्या से ग्रस्त हैं तो आप बाकोपा नामक जड़ी बूटी की मदद ले सकते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक बकपा एक शक्तिशाली जड़ी बूटी जो थायराइड ग्रंथि को संतुलित करने के काम करती है।

काले अखरोट
सीफूड के अलावा काले अखरोट को आयोडीन का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। विभिन्‍न अनुसंधान से पता चलता है कि आयोडीन एक आवश्‍यक पोषक तत्‍व है जो थायराइड ग्रंथि के स्वास्थ्य और कामकाज को ठीक रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

एंटीबायोटिक दवा का ज्यादा इस्तेमाल क्यों? जब इन 5 प्राकृतिक चीजों में हैं ये गुण

हल्दी
हल्दी जितनी फायदेमंद शरीर के लिए है उतनी ही फायदेमंद त्वचा के लिए है इसलिए तमाम रोगों के साथ-साथ हल्दी सौंदर्य के लिए भी प्रयोग की जाती है। आर्थराइटिस, हार्ट बर्न, पेट में कीड़े, पेट दर्द, सिरदर्द, दांत का दर्द, डिप्रेशन, फेफड़ों के इंफेक्शन, ब्रॉन्कायटिस आदि में हल्दी के प्रयोग से फायदा मिलता है। इसके अलावा हल्दी दर्द और सूजन को भी तेजी से कम करती है।

लहसुन
लहसुन में भी ढेर सारे गुण होते हैं। लहसुन प्राकृतिक रूप से दर्द और सूजन को कम करता है। लहसुन में एंटी-बायोटिक, एंटी-वायरल, एंटी-पैरासाइटल, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-फंगल गुण होते हैं। इसके अलावा लहसुन में ढेर सारे एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर को कई रोगों से बचाते हैं। लहसुन दिल की बीमारियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। रोजाना सुबह दो कली लहसुन को गुनगुने पानी के साथ खाने से वजन भी कम होता है।

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शहद
शहद में एंटीबायोटिक गुणों के साथ-साथ एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं इसलिए बहुत सारे इंफेक्शन्स में डॉक्टर स्वयं इसके सेवन की सलाह देते हैं। मुंह के छालों में शहद लगाने और खाने से बहुत राहत मिलती है। इसके अलावा शहद त्वचा संबंधी कई रोगों में भी बहुत काम आता है। जलने, कटने, कील, मुंहासे, चोट, सूजन आदि कई तरह की समस्याओं में शहद से हमें लाभ मिलता है।

लौंग
लौंग हर्ब्स में सबसे ज्यादा गुणकारी मानी जाती है क्योंकि इसमें एंटीबायोटिक, एंटी-सेप्टिक, एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-फंगल और एंटी-वायरल सभी गुण होते हैं। लौंग का प्रयोग भी अलग-अलग परेशानियों जैसे दांत दर्द, सिरदर्द, अस्थमा और अपच आदि में करते हैं। इसके अलावा लौंग हमारे खून में मौजूद अशुद्धियों को दूर करता है।

अदरक
अदरक अपने एंटीबायोटिक गुणों के कारण ही सर्दी, जुकाम, नजला और बुखार जैसी सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए जानी जाती है। खांसी और जुकाम का असली कारण शरीर में वायरस और इंफेक्शन ही है। ऐसे में अदरक के सेवन से वायरस और बैक्टीरिया मर जाते हैं और हमें इन रोगों से राहत मिलती है। अदरक एक नेचुरल पेन किलर भी है और ये सांस और पाचन संबंधी बीमारियों को भी ठीक करती है।

अपच और जोड़ों के दर्द से तुरंत राहत दिलाता है काला नमक, जानिये इसके अन्य लाभ

जोड़ों के दर्द में
काले नमक के प्रयोग से जोड़ों का दर्द भी ठीक हो सकता है। दरअसल मांसपेशियों के दर्द और जोड़ों के दर्द में काला नमक की सिंकाई से आराम मिलता है। सिंकाई के दौरान काला नमक में मौजूद तत्व जोड़ों के पोर में पहुंचकर दर्द में आराम दिलाते हैं। इसके लिए एक कपड़े में थोड़ा सा काला नमक बांध लें और उसकी पोटली बना लें। अब तवा या पैन को गरम कर पोटली को गरम कर लें और दर्द वाली जगह पर सिंकाई करें। दिन में दो बार सिंकाई करने से इस तरह के दर्द में तुरंत राहत मिलती है।

अपच को ठीक करता है
पेट की तमाम समस्याओं को काला नमक आसानी से ठीक कर देता है। काला नमक मुंह में लार वाली ग्रंथि को सक्रिय कर देता है इसलिए इसकी खुश्बू से कई बार लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। काला नमक पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड और प्रोटीन को डाइजेस्ट करने वाले एन्जाइम को बढ़ाने में मदद करता है। पेट की समस्या जैसे अपच, कब्ज, एसिडिटी और गैस में एक गिलास पानी में एक नींबू का रस और काला नमक मिलाकर पीने से राहत मिलती है।

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वजन घटाता है काला नमक
काले नमक के प्रयोग से आपका वजन भी घटता है। शरीर में पाचन की क्रिया ठीक रहती है तो आहार में लिए गए सभी पोषक तत्व शरीर को अच्छी तरह मिल पाते हैं और शरीर स्वस्थ रहता है। काला नमक स्वादिष्ट होता है इसलिए इसके लगातार प्रयोग से आपको ऊब भी नहीं होती है। वजन कम करने के लिए एक ग्लास पानी में एक नींबू निचोड़ लें और स्वाद अनुसार काला नमक मिला लें और इसे पियें। काला नमक शरीर में वसा को एकत्रित होने से रोकता है। गर्मियों में प्यास लगने पर आप दिन में तीन-चार बार इसका प्रयोग कर सकते हैं।

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डायबिटीज में भी है लाभकारी
काले नमक में सोडियम की मात्रा कम होती है और ये ब्लड शुगर को भी नियंत्रित करता है इसलिए डायबिटीज के मरीजों के लिए सफेद नमक से बेहतर काला नमक का प्रयोग है। डायबिटीज अगर शुरुआती स्तर पर है तो काले नमक के प्रयोग से ये ठीक भी हो जाती है। इसके अलावा सोडियम की मात्रा कम होने से काले नमक के प्रयोग से दिल और गुर्दे के रोगों से भी संभावना भी घटती है।

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भूख बढ़ाता है काला नमक
काले नमक के प्रयोग से आपकी भूख बढ़ती है क्योंकि आप जो कुछ खाते हैं वो आसानी से और जल्दी से पच जाता है इसलिए शरीर ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल कर पाता है। अगर आपको कम भूख लगती है या सामान्य तौर पर भी आप काला नमक को सलाद, दही, छाछ, नींबू-पानी आदि के साथ प्रयोग कर सकते हैं। इससे आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी और शरीर में सोडियम की मात्रा भी नहीं बढ़ेगी।

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घर में मौजूद इन मसालों के प्रयोग से 7 दिन में त्‍वचा होगी गोरी

मसालों से लाएं त्वचा में निखार
हमारी रसोई की शान यानी मसाले न सिर्फ खाने में स्‍वाद बढ़ाते हैं, बल्कि हमें सेहतमंद रखने में भी मददगार होते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि कुछ मसाले आपकी खूबसूरती बढ़ाने में भी मदद करते हैं। जी हां दालचीनी, जीरा, हल्‍दी, कालीमिर्च जैसे कई ऐसे मसाले हैं जो हमारी खूबसूरती में चार-चांद लगाने में मदद करते हैं। इनका उपयोग करके बिना किसी साइड इफेक्‍ट के प्राकृतिक रुप से सुंदरता को बढ़ाया जा सकता हैं। ऐसा करने से हमारा ब्यूटी प्रोडक्ट पर होने वाला खर्चा भी बचेगा। तो देर किस बात की आइए ऐसे की कुछ मसालों के बारे में जानें।

झुर्रियां दूर भगाएं जीरा
जीरा आपकी सेहत के लिए लाभदायक होता है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होते हैं जिससे आपका पाचन ठीक रहता है। जीरे में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट, एंजाइम्स, विटामिन तथा मिनरल त्वचा को हेल्दी रखते हैं। इसके एंटी एजिंग गुण त्वचा में झुर्रियों को आने से रोकते हैं तथा त्वचा सुंदर और चमकदार बनाते हैं।

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टैनिंग दूर करें दालचीनी
आप खाने में खूशबू तथा स्वाद बढाने के लिए दालचीनी का इस्तेमाल करते है। लेकिन इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट, मिनरल्स तथा विटामिन्स शरीर में रक्त के प्रवाह को ठीक रखते हैं। और इसे शुद्ध करते हैं। जिससे आपकी खूबसूरती में निखार आता है। टैनिंग हटाने के लिए भी दालचीनी एक बहुत ही बढि़या उपाय है। इसके लिए एक छोटा केला, 2 चम्मच दही, 1 बड़ा चम्मच दालचीनी पाउडर और आधा नींबू का रस मिलाकर अच्‍छे से मिक्‍स कर लें। इस पैक की एक पतली परत अपने चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर ठंडे पानी से धो लें।

मुंहासे दूर भगाएं कालीमिर्च
किचन में आसानी से उपलब्‍ध होने वाला मसाला काली मिर्च त्‍वचा से विषैले तत्‍वों को बाहर निकालने में मदद करती है। इसे पीसकर आप अपने फेसपैक में मिलाएं तथा स्क्रब के तरह प्रयोग करते हुए चेहरे की गंदगी और मैल को साफ कर सकते हैं। इसके अलावा शहद और काली मिर्च से बना फेस पैक मुहांसों की समस्‍या से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। इसे बनाने के लिए एक चम्‍मच शहद और आधी चम्‍मच काली मिर्च पाउडर को मिलाकर फेस पैक बना लें। फिर से चेहरे पर लगाकर आधे घंटे के लिए सूखने के लिए छोड़ दें। फिर इसे पानी से धो लें।

त्‍वचा दमकाये हल्‍दी
रसोई में मौजूद हल्दी से भी आप सुंदर और दमकती हुई त्वचा पा सकते हैं। हल्दी में एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्‍सीडेंट गुण मुंहासे और झुर्रियों से निजात दिलाने में मदद करते हैं। साथ ही त्वचा से मृत कोशिकाओं को हटाते है और अद्भुत चमक देते है। एक गिलास दूध में हल्दी डालकर पीने से खून साफ होता है जिससे स्किन में ग्लो आता है। थोड़ी सी हल्दी को बेसन के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें और इसे शरीर पर उबटन के तरह से इस्तेमाल करें इससे आपकी त्वचा दमकने लगेगी।

टोनर का काम करें सौंफ
चाय को खुशबू और बेहतरीन स्वाद देने वाली सौंफ त्वचा को स्वस्थ और मुहांसों को दूर करने में मदद करती है। सुबह शाम खाली पेट 10 -10 ग्राम सौंफ खूब चबा-चबा कर भोजन के बाद खाने से त्वचा के रंग में धीरे-धीरे निखर आता जाता है। टोनर के रूप में भी सौंफ का उपयोग किया जा सकता है। सौंफ के बीजों को धीमी आंच पर पानी में तब तक उबालें जब तक कि इनका रंग न बदल जाए। अब इस पानी को ठंडा होने दें और फिर इसे चेहरे पर लगाएं। इससे त्वचा में निखार आता है।

कब्‍ज, पेटदर्द व खांसी को तुरंत दूर करता है कालीमिर्च और अदरक का ऐसा मिश्रण

कब्ज की दिक्कत
आज शहरों में रहने वाला हर दूसरा इंसान शाम को भोजन करने के बजाय फास्टफुड और चटपटा भोजन ही खाना पंसद करता है। जबकि ये भोजन हल्के होने के बजाय पेट को भारी करने का काम करते हैं और कब्ज की समस्या पैदा करते हैं। अगर आपकी भी रुटीन लाइफ ऐसी है और आपको कब्ज की समस्या है तो रात को पानी में अदरक और काली मिर्च उबालें और उसे पिएं। इससे कब्ज की समस्या नहीं होगी।

खांसी दूर करे
बदलते मौसम में इंसान को सबसे पहले सर्द-गर्म ही होता है जिसका पहला लक्षण है- खांसी। यदि समय पर इस मौसमी खांसी का उपचार नहीं किया जाता है तो यह गंभीर रोग बन जाता है। तो अगर आपको खांसी की समस्या है तो काली मिर्च को पीसकर उसका पाउडर बनायें। फिर देशी घी में उसे भूनकर उसका सेवन करें। गरम शहद में अदरक का रस मिलाकर पीने से भी इससे राहत मिलती है।

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बुखार का रामबाण इलाज
कालीमिर्च और अदरक का घोल तो बुखार का रामबाण इलाज है। बुखार ठीक करने के लिए सुबह शाम पानी में अदरक और काली मिर्च उबाल कर पिएं। इससे प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और बुखार ठीक हो जाता है।

पेट दर्द से राहत दिलाए
पीरियड के दौरान कई महिलाओं को पेट दर्द की समस्या होती है। ये दर्द कई बार खून अच्छी तरह से नहीं निकलने के कारण होता है। ऐसी स्थिति में अदरक और काली मिर्च का इस्तेमाल करें। इसके लिए 2 से 3 ग्राम अदरक, 4 काली मिर्च और एक बड़ी इलायची पीसकर पानी में उबाल लें। अब इसे गुनगुना होने पर पियें। पेट दर्द से राहत मिलेगी।

मुंह की दुर्गध दूर करे
कई लोगों के मुंह से दुर्गंध आने की समस्या होती है जिसके कारण उन्हें दूसरों के सामने हंसी का पात्र बनना पड़ता है। मुंह की दुर्गंध दूर करने के लिए सुबह-सुबह अदरक और कालीमिर्च को पानी में उबालें और उससे कुल्ला कर लें। इससे मुंह की दुर्गन्ध दूर हो जाती है।

पित्त की थैली में जमी पथरी को खत्म करते हैं ये उपाय

पित्त की पथरी के लिए उपाय
पित्त में पथरी का बनना एक भयंकर पीड़ादायक रोग है। पित्त में कोलेस्‍टॉल और पिग्‍मेन्‍ट नामक दो तरह की बनती है। लेकिन लगभग अस्सी प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रॉल से ही बनती हैं। पित्त लिवर में बनता है और इसका भंडारण गॉल ब्लैडर में होता है। यह पित्त फैट युक्त भोजन को पचाने में मदद करता है। लेकिन जब पित्त में कोलेस्ट्रॉल और बिलरुबिन की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो पथरी का निर्माण होता है। पित्त की पथरी को घरेलू उपचार के माध्‍यम से ठीक किया जा सकता है।

सेब का रस और सेब साइडर सिरका
बेशक, सेब डॉक्टर को दूर रखने में मदद करता है। इसलिए एक गिलास सेब के रस में सेब साइडर सिरका का एक बड़ा चम्मच मिलाकर नियमित रूप दिन में एक बार सेवन करना चाहिए। सेब में मेलिक एसिड होता है जो पित्त पथरी नरमी में सहायता करता है और सिरका पत्थर के कारण कोलेस्ट्रॉल बनाने से लीवर को रोकता है। यह एक पित्त की पथरी के हमले के दौरान दर्द को कम करने एक त्वरित उपाय है।

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नाशपती
नाशपती पित्त की पथरी के लिए बहुत फायदेमंद होती है। अमेरिका मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत पित्त में पथरी कोलेस्‍ट्रॉल के बनने से होती है। नाशपाती में पेक्टिन होता है इन पत्थरों को आसानी से फ्लश आउट के लिए कोलेस्ट्रॉल से भरे पित्त पथरी को बांधता है।

चुकंदर, खीरा और गाजर का रस
पित्ताशय की थैली को साफ और मजबूत करने और लीवर की सफाई के लिए चुकंदर का रस, ककड़ी का रस और गाजर के रस को बराबर मात्रा में मिलाये। यह संयोजन आपको पेट और खून की सफाई में भी मदद करता है। खीरे में मौजूद उच्च पानी सामग्री और गाजर में विटामिन सी की उच्च मात्रा मूत्राशय से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है।

सिंहपर्णी
सिंहपर्णी के पत्ते लीवर का समर्थन, मूत्राशय के कामकाज में सहायता, पित्त उत्सर्जन को बढ़ावा, और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। एक कप पानी में एक बड़ा चम्‍मच सिंहपर्णी के पत्तों को मिलाये। फिर इसे अवशोषित करने के‍ लिये पांच मिनट के लिए रख दें। अब इसमें एक चम्‍मच शहद मिलाये। मधुमेह रोगियों को इस उपचार से बचना चाहिए।

पुदीना
पुदीने में टेरपेन नामक प्राकृतिक तत्‍व होता है, जो पित्त से पथरी को घुलाने के लिए जाना जाता है। यह पित्त प्रवाह और अन्य पाचक रस को उत्तेजित करता है, इसलिए यह पाचन में भी सहायक होता है। पित्त की पथरी के लिए घरेलू उपाय के रूप में पुदीने की चाय का इस्‍तेमाल करें।

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इसबगोल
एक उच्च फाइबर आहार, पित्ताशय की थैली की पथरी के इलाज के लिए बहुत आवश्यक है। इसबगोल घुलनशील फाइबर का अच्‍छा स्रोत होने के कारण पित्त में कोलेस्ट्रॉल को बांधता है और पथरी के गठन को रोकने में मदद करता है। आप इसे अपने अन्‍य फाइबर युक्त भोजन के साथ या रात को बिस्‍तर पर जाने से पहले एक गिलास पानी के साथ ले सकते हैं।

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नींबू का रस
नींबू का रस प्रकृतिक रूप से अम्लीय होने के कारण यह सिरके की तरह कार्य करता है और लीवर में कोलेस्ट्रॉल को बनने से रोकता है। हर रोज खाली पेट चार नींबू का रस लें। इस प्रक्रिया को एक हफ्ते तक अपनाएं। इससे पथरी की समस्या आसानी से दूर हो सकती है।

लाल शिमला मिर्च
2013 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, शरीर में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पथरी की समस्‍या कम करता है। एक लाल शिमला मिर्च में लगभग 95 मिलीग्राम विटामिन सी होता है, यह मात्रा पथरी को रोकने के लिए काफी होती है। इसलिए अपने आहार में शिमला मिर्च को शामिल करें।

वाइन
शोधकर्ताओं ने पाया कि 1/2 गिलास वाइन पित्त की पथरी के हमलों को लगभग चालीस प्रतिशत तक कम कर सकता है। इसलिए वाइन के एक गिलास को अपनी दिनचर्या में शमिल करें इससे ज्यादा नहीं।

वजन, लंबाई और इम्यूनिटी बढ़ाने में कारगर है अश्वगंधा ये हैं इसके 5 बड़े फायदे

लंबाई बढ़ाती है अश्वगंधा
अश्वगंधा आपकी हाइट बढ़ाने में भी कारगर है। जिन लोगों की हाइट रुक गई है उन्हें रोजाना अश्वगंधा का प्रयोग करना चाहिए। इसके लिए एक ग्लास दूध में एक चौथाई चम्मच अश्वगंधा मिलाकर रोज सुबह-शाम पियें और साथ में ताड़ासन का नियमित अभ्यास करें। एक महीने में ही आपकी लंबाई में आपको चमत्कारी परिवर्तन दिखने लगेगा। ध्यान रखें कि जल्दी लाभ के चक्कर में अश्वगंधा का इस्तेमाल ज्यादा न करें क्योंकि इसकी तासीर बहुत गर्म होती है और ये शरीर को नुक्सान भी कर सकता है।

वजन बढ़ाने में कारगर
बहुत से लोग अपने दुबले-पतले शरीर को लेकर परेशान रहते हैं। तमाम उपायों के बाद भी उनका वजन नहीं बढ़ता है। ऐसे लोगों को अश्वगंधा का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि आयुर्वेद में वजन बढ़ाने के लिए अश्वगंधा को विशेष महत्व दिया गया है। इसके प्रयोग के लिए एक ग्लास दूध में 2-3 ग्राम अश्वगंधा पाउडर को मिलाकर सुबह और शाम इसका सेवन करें। एक सप्ताह में ही आपको फर्क दिखना शुरू हो जाएगा।

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इम्यूनिटी करती है दुरुस्त
अगर आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है तो इसे कई तरह के रोग और परेशानियां घेर लेते हैं। जैसे बार-बार बुखार आना, जुकाम होना, सिर दर्द होना, इंफेक्शन होना आदि। इसके साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता के कम होने पर सभी बीमारियों का प्रभाव आप पर जल्दी होता है इसलिए इसे दुरुस्त रखना बेहद जरूरी है। अश्वगंधा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्यूनिटी को बढ़ाता है। इसके लिए 50 ग्राम अश्वगंधा, 50 ग्राम हरड़ और 100 ग्राम आंवला को सुखाकर पीस लें और इसमें 350 ग्राम मिश्री मिला लें। अब इस पाउडर को एयर टाइट कंटेनर में रख लें और रोज रात में सोने से पहले एक ग्लास दूध में एक चम्मच मिलाकर पियें। ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगा।

थायराइड में है फायदेमंद
थायराइड गले में होने वाली एक गंभीर बीमारी है क्योंकि इसकी वजह से शरीर में कई अन्य बीमारियां घर करने लगती हैं। थायराइड के कारण बहुत से लोगों का शरीर फूलने लगता है। ये समस्या आमतौर पर महिलाओं में ज्यादा होती है। अश्वगंधा थायराइड के इलाज में भी कारगर है। इसके लिए आधे 1 से 2 ग्राम अश्वगंधा को काली चाय में मिलाकर पियें। आप चाहें तो इसमें तुलसी की पत्तियां भी डाल सकते हैं क्योंकि उनमें भी एंटी-बैक्टीरयल और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं।

पेट की समस्याओं में मिलती है राहत
अगर आपको आंतों या लिवर की कोई समस्या है तो अश्वगंधा के प्रयोग से वो भी ठीक हो जाती है। कब्ज, एसिडिटी, लिवर की कमजोरी आदि के लिए अश्वगंधा का इस्तेमाल लाभप्रद है। इसके लिए आप एक चौथाई चम्मच अश्वगंधा के चूर्ण में आधा चम्मच मिश्री मिलाकर इसका सेवन करें। पेट में गैस की समस्या से राहत मिलेगी और लिवर मजबूत होगा।

मुंहासों को सिर्फ घंटेभर में दूर करता है कच्चा दूध, जानें कैसे?

पुरुषों में मुंहासों की समस्‍या
शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण होने वाली मुंहासों की समस्‍या आज सिर्फ किशोरों की समस्‍या नहीं रह गई है। बढ़ते प्रदूषण, अनियमित खान-पान, तनाव और नशे की आदत के कारण यह समस्‍या हर उम्र के लोगों में आम हो चुकी है। इससे महिला और पुरूषों दोनों ही अछूते नहीं हैं। पुरुष इससे निजात पाने के लिए बाजार में उपलब्‍ध उपाय अजमाते हैं। लेकिन आपके घर में कई ऐसे उपाय हैं, जिनसे आप इस समस्‍या से निजात पा सकते हैं। आइए जानें पुरूषों के लिए मुंहासे दूर करने के घरेलू उपायों के बारे में।

नींबू का रस
पुरुषों की त्‍वचा महिलाओं के मुकाबले थोड़ी सख्‍त होती है, इसलिए उनके लिए उपाय भी महिलाओं से अलग होते है। पुरुषों के लिए मुंहासे ठीक करने के लिए नींबू का रस बहुत ही फायदेमंद होता है। नींबू चेहरे से एक्सट्रा ऑयल को खींच लेता है। नींबू के रस को चार गुना ग्लिसरीन में मिलाकर चेहरे पर रगड़ने से कील-मुंहासे ठीक हो जाते है।

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दालचीनी और शहद का लेप
दालचीनी और शहद का लेप पुरुषों में मुंहासों पर जादू का काम करता है। दो सप्‍ताह तक इसका नियमित इस्‍तेमाल मुंहासे दूर कर देता है। इसे लगाने के लिए तीन बड़े चम्मच शहद तथा एक बड़ा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर लेप तैयार कर लें। सोने से पहले इस लेप को मुंहासों पर लगाएं और अगली सुबह गुनगुने पानी से धो लें।

जायफल का प्रयोग
मुंहासे होने पर जायफल को दूध के साथ पीसकर या एक चम्मच जायफल तथा चौथाई काली मिर्च को दूध में मिलाकर लेप तैयार कर लें। अब पुरुष इस लेप को मुंहासों पर लगाएं। फिर यह बिल्कुल जादुई सा असर दिखाता है। इस लेप से मुंहासे सख्त नहीं हो पाते और दब जाते है और कील-मुंहासे बिना कोई निशान छोड़ गायब हो जाते हैं।

काली मिर्च और गुलाब जल का लेप
काली मिर्च मुंहासों को दूर करने में कारगर होता है। इससे कील मुंहासे और झुर्रियां साफ होकर चेहरा चमकने लगता है। इसके लिए बीस-पच्चीस दाने काली मिर्च गुलाब जल में पीसकर रात को चेहरे पर लगायें सुबह गर्म पानी से धो लें।

नारियल तेल का प्रयोग
पुरुषों में होने वाले मुंहासों के लिए न‍ारियल का तेल उपयोगी होता है। नारियल तेल में पाये जाने वाले कुछ खास तत्‍व मुंहासों को दूर करने में मदद करते हैं। नारियल तेल को सीधे चेहरे पर लगाने से मुंहासे आसानी से दूर हो सकते हैं।

कलौंजी का लेप
कलौंजी के लेप का प्रयोग कुछ दिन लगातार करने से पुरुषों के चेहरे से मुंहासे दूर हो जाते हैं। इसके लिए सिरके में कलौंजी को पीसकर लेप बनाएं और इसे रोजाना सोने से पहले अपने मुंहासों और पूरे चेहरे पर मलें। सुबह पानी से साफ कर लें। इस प्रयोग को कुछ दिनों तक लगातार करने से चेहरे पर बहुत प्रभाव पड़ता हैं।

कच्‍चे दूध का इस्‍तेमाल
मुंहासों के लिए पुरुषों को रात के समय सोने से पहले कच्चे दूध को चेहरे पर मलना चाहिए और सुबह के समय उठकर चेहरे को अच्छी तरह से धो लेना चाहिए। इससे मुंहासे जल्दी ही ठीक हो जाते हैं।

दही और काली चिकनी मिट्टी का पैक
मुंहासों की समस्‍या से बचने के लिए पुरुष दही और काली चिकनी मिट्टी का बना फेस पैक लगाएं। इसके लिए वह दही में काली चिकनी मिट्टी को मिला लें और इस उबटन को अपने चेहरे पर लगाएं। उबटन के सुखने पर इसे धो लें। इस प्रकार की क्रिया कुछ दिनों तक करने से मुंहासे जल्दी ठीक हो जाते हैं।

लहसुन का सेवन
लहसुन की 2-3 कली प्रतिदिन लगातार 2-3 महीने सुबह खाली पेट खाने से रक्‍त शुद्ध होता है, जिससे मुंहासे नहीं होते। साथ ही कच्चे लहसुन की कली को पीसकर उसे दिन में 3-4 बार मुंहासों पर लगाने से मुंहासे थम जाते हैं। चेहरे की त्वचा के काले निशान भी मिटते हैं।

कील-मुंहासों, ऑयली स्किन और ब्‍लैकहेड्स से छुटकारा दिलाता है ये फेसपैक

कील-मुंहासे
यदि आप कील-मुंहासों जैसी समस्या से परेशान हैं तो आपको बाहर की महंगी दवाईयों पर पैसा खर्च करने की कोई जरूरत नहीं। इस फेसपैक को लगाने से आप हर समस्यां का निदान पा सकती हैं।

ग्‍लो स्किन
नीम और शहद से बने स फेसपैक को लगाने से त्वचा में नमी आ जाती है शुष्क त्वचा के लिए यह फेस पैक काफी अच्छा उपचार है।

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घाव लगने पर
शरीर पर किसी भी तरह के घाव या जलने की समस्या हो तो आप इस पेस्ट को लगा सकती हैं। शहद एक प्राकृतिक जीवाणुरोधी औषधि है जिसका उपयोग करने से हर तरह की समस्या से निजात मिलता है।

ब्‍लैकहेड्स से निजात
नीम और शहद के फेसपैक के प्रयोग से फेसपैक की मदद से आप ब्‍लैकहेड्स और वाइटहेड्स से छुटकारा पा सकती हैं।

ऑयली स्किन से छुटकारा
इस फेसपैक की मदद से तेलीय त्वचा संबंधी समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। तेलीय त्वचा के लिए यह फैसपैक सबसे अच्छा उपचार है।

बवासीर को जड़ से खत्म करते हैं ये 5 आयुर्वेदिक उपचार

बवासीर का आयुर्वेदिक उपचार
बवासीर बहुत ही पीड़ादायक रोग है। इसका दर्द असहनीय होता है। बवासीर मलाशय के आसपास की नसों की सूजन के कारण विकसित होता है। बवासीर दो तरह की होती है, अंदरूनी और बाहरी। अंदरूनी बवासीर में नसों की सूजन दिखती नहीं पर महसूस होती है, जबकि बाहरी बवासीर में यह सूजन गुदा के बिलकुल बाहर दिखती है। बवासीर को पहचानना बहुत ही आसान है। मलत्याग के समय मलाशय में अत्यधिक पीड़ा और इसके बाद रक्तस्राव, खुजली इसका लक्षण है। इसके कारण गुदे में सूजन हो जाती है। आयुर्वेदिक औषधियों को अपनाकर बवासीर से छुटकारा पाया जा सकता है।

फाइबर युक्त आहार
अच्‍छे पाचन क्रिया के लिए फाइबर से भरा आहार बहुत जरूरी होता है। इसलिए अपने आहार में रेशयुक्त आहार जैसे साबुत अनाज, ताजे फल और हरी सब्जियों को शामिल करें। साथ ही फलों के रस की जगह फल खाये।

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छाछ
बवासीर के मस्‍सों को दूर करने के लिए मट्ठा बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए करीब दो लीटर छाछ लेकर उसमे 50 ग्राम पिसा हुआ जीरा और स्‍वादानुसार नमक मिला दें। प्यास लगने पर पानी के स्‍थान पर इसे पीये। चार दिन तक ऐसा करने से मस्‍से ठीक हो जायेगें। इसके अलावा हर रोज दही खाने से बवासीर होने की संभावना कम होती है। और बवासीर में फायदा भी होता है।

त्रिफला
आयुर्वेंद की महान देन त्रिफला से हम सभी परिचित है। इसके चूर्ण का नियमित रूप से रात को सोने से पहले 1-2 चम्‍मच सेवन कब्‍ज की समस्‍या दूर करने मेंं मदद करता है। जिससे बवासीर में राहत मिलती है।

जीरा
छोटा सा जीरा पेट की समस्‍याओं बहुत काम का होता है। जीरे को भूनकर मिश्री के साथ मिलाकर चूसने से फायदा मिलता है। या आधा चम्‍मच जीरा पाउडर को एक गिलास पानी में डाल कर पियें। इसके साथ जीरे को पीसकर मस्‍सों पर लगाने से भी फायदा मिलता है।

अंजीर
सूखा अंजीर बवासीर के इलाज के लिए एक और अद्भुत आयुर्वेदिक उपचार हैं। एक या दो सूखे अंजीर को लेकर रात भर के लिए गर्म पानी में भिगों दें। सुबह खाली पेट इसको खाने से फायदा होता है।

तिल
खूनी बवासीर में खून को रोकने के लिए 10 से 12 ग्राम धुले हुए काले तिल को लगभग एक ग्राम ताजा मक्खन के साथ लेना च‍ाहिए। इसे लेने से भी बवासीर में खून आना बंद हो जाता है।

हरीतकी
हरड़ के रूप में लोकप्रिय हरीतकी कब्‍ज को दूर करने का एक बहुत अच्‍छा आयुर्वेदिक उपाय है। हरीतकी चूर्ण आधा से एक चम्मच, रात को गुनगुने पानी से लेने से या गुड़ के साथ हरड खाने से बवासीर की समस्‍या से निजात मिलता है।

बड़ी इलायची
लगभग 50 ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर रखकर भूनते हुए जला लीजिए। ठंडी होने के बाद इस इलायची को पीस चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को नियमित रूप से सुबह पानी के साथ खाली पेट लेने से बवासीर की समस्‍या ठीक हो जाती है।

आंवला
आयुर्वेद में आंवले को बहुत महत्ता प्रदान की गई है, जिससे इसे रसायन माना जाता है। यह शरीर में आरोग्य शक्ति को बढ़ाता है।आंवला पेट के लिए बहुत फायदेमंद होता है। बवासीर की समस्‍या होने पर आंवले के चूर्ण को सुबह-शाम शहद के साथ पीने से फायदा होता है।

कब्ज से गैस तक, पेट के सभी रोगों को दूर करते हैं ये आयुर्वेदिक नुस्खे

पेट की समस्‍या और औषधियां
पेट में गड़बड़ी होना आम बात है, इसके उपचार के लिए अच्‍छा ये है कि आप औषधियों का प्रयोग करें। कई औषधियां ऐसी हैं जिनका प्रयोग करके आप पेट की बीमारी को आसानी से दूर कर सकते हैं। आगे के स्‍लाइडशों में पेट के लिए प्रमुख औषधियों के बारे में जानिए।

तुलसी
तुलसी बहुत आसानी से उपलबध होने वाली औषधि है। 10 ग्राम तुलसी का रस पीने से पेट का दर्द और पेट में मरोड़ ठीक हो जाता है। तुलसी के पत्‍तों का काढ़ा बनाकर पीने से दस्‍त ठीक हो जाता है। तुलसी के नियमित सेवन करने से कब्‍ज की शिकायत नहीं होती है। तुलसी के 4 पत्‍तों का नियमित सेवन करने से पेट की बीमारियां दूर होती हैं।

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त्रिफला
त्रिफला आयुर्वेद का अनमोल उपहार है। यह एक आयुर्वेदिक पारंपरिक दवा है जो रसायन या कायाकल्‍प के नाम से भी प्रसिद्ध है। त्रिफला तीन जड़ी – बूटियों का मिश्रण है – अमलकी (एमबलिका ऑफीसीनालिस), हरीतकी (टरमिनालिया छेबुला) और विभीतकी (टरमिनालिया बेलीरिका)। त्रिफला का 100 ग्राम चूर्ण और 60 ग्राम चीनी मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से पेट की सभी बीमारियां दूर होती हैं।

ग्‍वारपाठा
ग्‍वारपाठा के गूदे को पेट पर लेप करने से पेट नर्म होकर आंतों में जमा मल ढीला होकर निकल जाता है। इसके नियमित सेवन से पेट की गांठें गल जाती हैं। 5 चम्‍मच ग्‍वारपाठे का ताजा रस, 2 चम्‍मच शहद और आधे नींबू का रस मिलाकर सुबह-शाम पीने से सभी प्रकार के पेट के रोग ठीक हो जाते हैं।

बथुआ
बथुआ आमाशय को ताकत देता है, कब्ज की शिकायत को दूर करता है। बथुए की सब्जी दस्तावर होती है, कब्ज वालों को बथुए की सब्जी प्रतिदिन खाना चाहिए। इससे कब्‍ज दूर होती है और शरीर में ताकत आती है और स्फूर्ति बनी रहती है। बथुए का रस, उबाला हुआ पानी पीएं, इससे पेट के हर प्रकार के रोग यकृत, तिल्ली, अजीर्ण, गैस, कृमि, दर्द आदि ठीक हो जाते हैं।

सोंठ
सूखी अदरक को सोंठ कहते हैं, पेट के रोग के लिए यह बहुत ही गुणकारी होता है। एक ग्राम पिसी हुई सोंठ, थोड़ी सी हींग और सेंधानमक पीसककर इसके चूर्ण को गरम पानी के साथ पीने से पेट का दर्द ठीक होता है। सोंठ, हरीतकी, बहेड़ा और आमला बराबर मात्रा में लेकर पेस्‍ट बना लीजिए, इसे गाय के घी के साथ प्रयोग सुबह करने से पेट के सारे रोग ठीक हो जाते हैं।

गिलोय
गिलोय (टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया) की एक लता होती है। इसके पत्ते पान के पत्ते के जैसे होते हैं। गैस, वात आदि में यह बहुत लाभकारी है। गिलोय का एक चम्मच चूर्ण घी के साथ लेने से वात संतुलित होता है। गिलोय का रस शहद के साथ मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पेट का दर्द ठीक होता है। गिलोय, पीपल, नीम 2-2 ग्राम मिलाकर पीस लीजिए, 250 मिली पानी में इसे डालकर इसे रात में रखिये, एक महीने तक सुबह इसके नियमित सेवन से पेट के सभी रोग दूर होते हैं।

अमरबेल
अमरबेल की पत्तियां और जड़ दोनों पेट के लिए बहुत फायदेमंद है। अमर बेल और मुनक्कों को समान मात्रा में लेकर पानी में उबालकर काढ़ा तैयार कर लें। इस काढ़े को छानकर 3 चम्मच रोजाना सोते समय देने से पेट के कीडे़ नष्ट हो जाते हैं। अमरबेल को उबालकर पेट पर बांधने से डकार आना बंद हो जाता है। आकाश बेल का रस 500 मिलीलीटर या चूर्ण 1 ग्राम को मिश्री 1 किलोग्राम में मिलाकर धीमी आंच पर गर्म करके शर्बत तैयार कर लें। इसे सुबह-शाम करीब 2 ग्राम की मात्रा में उतना ही पानी मिलाकर सेवन करने से पेट में गैस और पेट दर्द की समस्‍या का निवारण होता है।

सौंफ
सौंफ हर घर में प्रयोग किया जाने वाला मसाला है। दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से अपच और कफ की समस्या समाप्त होती है। पेट में दर्द हो तो भुनी हुई सौंफ चबाकर खाएं, दर्द ठीक हो जाएगा। जो लोग कब्ज से परेशान हैं, उनको आधा ग्राम गुलकन्द और सौंफ मिलाकर दूध के साथ रात में सोते समय लेना चाहिए, इससे कब्ज दूर हो जाएगा। सौंफ खाने से लीवर ठीक रहता है, लिहाजा, पाचन क्रिया दुरूस्त रहती है। यदि आपको खट्टी डकारें आ रही हों तो थोड़ी सी सौंफ पानी में उबालकर मिश्री डालकर पीजिए। दो-तीन बार प्रयोग करने से आराम मिल जाएगा।

अनन्नास
अनन्नास का पेड़ सड़कों के किनारे-किनारे पाए जाते हैं। अनन्नास का फल इसके बीच के हिस्से में लगता है। अनन्नास का ऊपरी भाग कांटेदार व कठोर होता है। अनन्नास का रस पेट के रोगों में लाभकारी है। अनन्नास की फांकें काटकर कालीमिर्च और सेंधा नमक के साथ भूनकर खाने से अजीर्ण में लाभ होता है। 6 ग्राम चूर्ण में शहद मिलाकर अनन्नास के रस के साथ सुबह-शाम पिलाने से 3 दिनों में बच्चों के पेट के सभी कीड़े खत्म हो जायेंगे।

आंखों की गुहेरी को ठीक करते हैं ये आसान घरेलू नुस्खे

इमली के बीज
गुहेरी में इमली के बीज भी बड़े फायदेमंद होते हैं। इसके लिए इमली के बीज निकालकर इन्हें धुल लें और रात भर भीगने के लिए पानी में छोड़ दें। सुबह इसका छिलका उतारकर इसे सिल पर या किसी साफ और कठोर जगह पर घिर लें। इसके गाढ़े पेस्ट को गुहेरी पर लगाने से दो दिन में ही गुहेरी पूरी तरह से ठीक हो जाती है।

धनिया और पुदीना
पुदीने की पत्तियों की तासीर ठंडी होने के कारण ये सूजन को घटाता है और धनिये की ताजी पत्तियों में दर्द कम करने के गुण होते हैं इसलिए ये गुहेरी में फायदेमंद हैं। इसके लिए सबसे पहले 4-5 पत्तियां धनिया और पुदीने की अच्छे से साफ करके पीस लें और इन्हें 10 मिनट फ्रिज में रख दें। इसके बाद इसे गुहेरी वाली जगह पर लगाने से वो जल्द ही ठीक हो जाएगी।

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गर्म पानी से सिंकाई
गुहारी होने पर इसकी गर्म पानी से सिंकाई करने पर ये ठीक हो जाती है। इसके लिए पहले थोड़ा सा पानी गर्म कर लें और उसमें अच्छे से साफ किया हुआ सूती कपड़ा भिगाकर निचोड़ लें और इससे फुंसी वाली जगह पर सिंकाई करें। इससे आपके आंखों की सूजन कम हो जाएगी और दर्द में भी आराम मिलेगा।

बादाम
बादाम आंखों ही नहीं पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है। इसका तेल आंखों की गुहेरी को भी ठीक करता है। इसके लिए बादाम को थोड़े से दूध में रात भर भिगा कर रख दें। सुबह इस भीगे हुए बादाम को सिल पर घिस कर लेप तैयार कर लें और इस लेप को गुहेरी पर लगाएं। आप चाहें तो सीधे बादाम का तेल गुहेरी पर लगा सकते हैं। इससे गुहेरी ठीक हो जाएगी और आंखों की रौशनी भी बढ़ेगी।

चंदन का लेप
चंदन की तासीर ठंडी होती है और ये दिमाग को ताजगी और स्फूर्ति देता है। इसी लिए पुराने समय से ही चंदन का टीका माथे पर लगाने की परंपरा है। चंदन आंखों को भी ठंडक प्रदान करता है और गुहेरी को ठीक करता है। इसके लिए चंदन की लकड़ी को सिल पर या किसी साफ पत्थर पर घिसकर इसका गाढ़ा लेप बना लें और इसे गुहेरी पर लगाएं। इससे आंखों की गुहेरी दो दिन में ठीक हो जाएगी।

फंगल इंफेक्शन को आसानी से दूर करते हैं ये 5 घरेलू नुस्खे

जैतून के पत्ते
जैतून का तेल काफी गुणकारी होता है लेकिन इसके पत्तों में भी कई गुण होते हैं। फंगल इंफेक्शन को ठीक करने के लिए जैतून के 5-6 पत्तों को पीसकर इसका पेस्ट बना लें और इसे इंफेक्शन वाली जगह पर लगा लें। इस पेस्ट को त्वचा पर आधे घंटे लगा रहने दें इसके बाद धुल लें।

एलोवेरा जेल
फंगल इंफेक्शन में एलोवेरा जेल के प्रयोग से राहत मिल सकती है लेकिन इसके लिए ताजा तोड़े गए पत्ते का जेल अच्छा होता है। इसके लिए आप एलोवेरा के ताजे पत्ते को तोड़कर इसे बीच से वर्टिकल काट लें और जेल वाले हिस्से को त्वचा पर सीधे ही रगड़ें। रगड़ने के बाद बचे हुए रेशों को त्वचा पर 30 मिनट तक रहने दें फिर गुनगुने पानी से धुल लें।

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सादी दही
दही में एसिड होता है जो हानिकारक बैक्टीरिया को मार देता है। हालांकि दही में खुद भी बैक्टीरिया होते हैं लेकिन वो बैक्टीरिया हमारे शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। फंगल इंफेक्शन के लिए आप दही को इंफेक्शन वाली जगह पर कॉटन की सहायता से लगाएं और मसाज करें। ध्यान दें इंफेक्शन वाली जगह को कभी भी हाथों से न छुएं क्योंकि ये इंफेक्शन संक्रामक होता है।

लहसुन
लहसुन में एंटी फंगल गुण मौजूद होते हैं इसलिए खाने में लहसुन के प्रयोग से फंगल इंफेक्शन का खतरा कम हो जाता है। लहसुन के प्रयोग के लिए आप लहसुन की 3-4 कलियों को पीस लें और इसके पेस्ट को इंफेक्शन वाली जगह पर लगाएं। अगर आपने इंफेक्शन वाली जगह को ज्यादा खुजलाया है तो लहसुन लगाने से एक मिनट हल्की सी जलन हो सकती है लेकिन इससे ये इंफेक्शन धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं।

हल्दी
हल्दी में भी एंटीफंगल गुण होते हैं इसलिए इसके प्रयोग से भी फंगल इंफेक्शन ठीक हो जाते हैं। इसके लिए आप इंफेक्शन वाली जगह पर कच्ची हल्दी को पीसकर लगा सकते हैं। अगर कच्ची हल्दी उपलब्ध नहीं है तो आप हल्दी पाउडर को थोड़े से पानी के साथ मिलाकर इसका गाढ़ा पेस्ट बनाकर इसे भी प्रभावित जगह पर लगा सकते हैं। हल्दी के प्रयोग से इंफेक्शन की वजह से होने वाले दाग-धब्बे भी मिट जाते हैं।

साइटिका यानि कमर और पैरों के दर्द से परेशान हैं तो अपनाएं ये नुस्खे

जीवनशैली में बदलाव
साइटिका के दर्द से बचाव के लिए आपको इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। घर, ऑफिस या किसी भी जगह पर बहुत देर तक नहीं बैठना चाहिए बल्कि हर आधेृ घंटे में कुर्सी से उठकर थोड़ी चहलकदमी जरूरी है। इसके अलावा अपनी पीठ पर झुककर बहुत भारी सामान नहीं उठाना चाहिए। अगर आपको कुर्सी पर देर तक बैठना पड़ता है तो कमर के पास एक तकिया लगा सकते हैं। इसके अलावा अपने खान-पान पर ध्यान दें और सर्दियों में पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें और रोज थोड़ी देर बॉडी जरूर स्ट्रेच करें।

व्यायाम
साइटिका का दर्द चूंकि नसों के खिंचाव या उनमें सूजन की वजह से होता है इसलिए व्यायाम इसे ठीक करने के लिए सबसे अच्छा उपाय है। इसके लिए आप ऐसे व्यायाम कर सकते हैं जिनमें कमर के आसपास की नसों पर खिंचाव पैदा होता है। इसके अलावा आप खड़े होकर अपने जांघों को स्ट्रेच कर सकते हैं। इससे दर्द में आपको राहत मिलेगी और नसें वापस अपनी सही जगह पर आ जाएंगी।

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फ्रोजन मटर की सिंकाई
दर्द वाली जगह की सिंकाई के जरिये भी साइटिक के दर्द से राहत मिल सकती है। इसके लिए जमे हुए मटर को किसी तौलिये या मोटे कपड़े में लपेट लें और इसे दर्द वाली जगह और साइटिका नसों के आसपास 15 मिनट के लिए रख दें। नसों में सूजन को कम करने के लिए इसके तुरंत बाद उसी जगह की गर्म चीज से सिंकाई करें या गुनगुने पानी से स्नान कर लें। इससे नसों की सूजन ठीक हो जाएगी और दर्द में राहत मिलेगी।

सेंधा नमक
शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन को कम करने के लिए सेंधा नमक का प्रयोग पुराने समय से किया जाता रहा है। साइटिका के दर्द से राहत पाने के लिए आप गुनगुने पानी में सेंधा नमक मिलाकर इससे स्नान कर सकते हैं। इसके अलावा आप चाहें तो गर्म पानी में सेंधा नमक मिला लें और फिर उसमें तौलिये को भिगाकर उससे सिंकाई करें। इससे सूजन और दर्द दोनों में राहत मिलेगी।

तेल की मालिश
सरसों, तिल या जैतून के तेल में दो-तीन टुकड़े तेजपत्तों के और दो-तीन कली लहसुन डालकर इसे भून लें। अब इस तेल को दर्द वाली जगह पर और कमर पर गुनगुना ही मलें और नसों को दबाएं। इससे आपका दर्द ठीक हो जाएगा और सूजन भी खत्म हो जाएगी।

शैम्‍पू में मिलाएं ये 1 चीज बाल होंगे सिल्‍की, लम्‍बे और घने

बालों पर चीनी का कमाल
बालों के प्रति सजग होना बहुत जरूरी है। दरअसल इन दिनों प्रदूषण की मार सबसे ज्यादा हमारे बालों को ही झेलनी पड़ती है। ऐसे में यदि हम अपने बालों की सही देखरेख नहीं करते, तो वे झड़ने लगते हैं। यही नहीं डैंड्रफ, रूखापन, बेजान आदि जैसी समस्या भी हो सकती है। सवाल ये उठता है कि ऐसे में समय में हमें क्या करना चाहिए? तमाम किस्म के शैम्पू कई बड़े-बड़े दावे करते हैं। बावजूद इसके वे अपने दावों पर पूर्णतया खरे नहीं उतरते। ऐसे में आप चाहें, तो अपने शैम्पू में एक चम्मच शुगर यानी चीनी मिला सकते हैं। यकीन मानें, बालों में आमूलचूल ढंग से परिवर्तन देखने को मिलेंगे। यही नहीं, अन्य कई लाभ भी हासिल होंगे। आइए जानते हैं।

सॉफ्ट और सिल्की बाल
बाल सिल्की और साफ्ट हो, तो इससे ज्यादा भला हमें क्या चाहिए? लेकिन केमिकलों के इस्तेमाल के कारण हमारे बाल रूखे और बेजान हो चुके हैं। ऐसे में जब तक बालों में केमिकलों का उपयोग करते हैं बाल अच्छे लगते हैं। लेकिन जैसे ही उसका असर खत्म हो जाता है बालों की दयनीय स्थिति आसानी से देखने को मिल जाती है। ऐसे में हमें चाहिए कि अपने शैम्पू में एक चम्मच शुगर मिला दें। …और हां, इस बात का ख्याल रखें कि बाल बार बार धोने की बजाय सप्ताह में दो या तीन बार ही धोएं। बार बार धोने से बालों की सेहत नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है।

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बालों को करे माइश्चराइज
बालों को माइश्चराइज करने में भी शुगर का बहुत बड़ा योगदान है। यदि आपको शैम्पू में शुगर मिलाने की एक वजह और चाहिए तो वह यही है। शैम्पू में एक चम्मच शुगर की मदद से बाल माइश्चराइज होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शुगर की मदद से बालों में नैचुरल लुक लौट आता है। यही नहीं केमिकलों के इस्तेमाल, जो नकारात्मक प्रभाव होते हैं, उनमें भी कमी आती है।

डेड स्किन को निकाले
शैम्पू से हमारे बालों के साथ साथ हमारी स्कैल्प भी प्रभावित होती है। कई बार तो त्वचा डेड हो जाती है। नतीजतन रैशेज, दानें आदि जैसी समस्या हो जाती है। यही नहीं कुछ लोगों ने शैम्पू या खराब पानी के इस्तेमाल के कारण स्कैल्प में लाल लाल दानों का अनुभव भी किया है। यह काफी खर्चीला इलाज मांगता है। अतः यदि कोई शैम्पू आपको सूट न करे तो उसे न लगाएं। इसके इतर जो भी शैम्पू आप लगाते हैं, उसमें एक चम्मच चीनी मिला दें। आपकी स्कैल्प में किसी तरह की समस्या जन्म नहीं ले पाएगी।

डैंड्रफ से छुटकारा
सर्दियों में गर्म पानी से सिर धोने के कारण ज्यादातर लोग डैंड्रफ की समस्या से दो चार होते हैं। ऐसे में यदि आप अपन शैम्पू में नियमित चीनी मिलाते हैं, तो और सप्ताह में कम से कम दो बार धोते हैं, तो डैंड्रफ की समस्या जड़ से खत्म हो सकती है। सौंदर्य विशेषज्ञ डा. फ्रांसिस्का फुस्को के मुताबिक चीनी मिलाने से डैंड्रफ का नामोनिशान मिट जाता है। जिन युवतियों के बाल लम्बे हैं और किसी न किसी कारणवश नियमित बाहर निकलना पड़ता है, उन्हें चाहिए कि वह शैम्पू में चीनी का इस्तेमाल अवश्य करें। यह लाभकर साबित होगा।

बेहतर ग्रोथ
कई लड़कियों की अकसर शिकायत रहती है कि उनके बाल नहीं बढ़ते। ऐसी लड़कियों को अपने शैम्पू में एक चम्मच शुगर मिलकार इस्तेमाल करना चाहिए। इससे उनके बालों की ग्रोथ होगी। साथ ही बाल सिल्की और साफ्ट भी बनेंगे। इस मिश्रण को पुरुष भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर उनके बाल मोटे और रूखे हैं। उनके लिए भी यह मिश्रण खासा उपयोगी हो सकता है।

बिना दवाई के सर्दी-जुकाम से छुटकारा दिलाएंगे ये 5 उपाय

पानी की कमी ना होने दें
आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि जुकाम होने पर पानी या किसी तरल पदार्थ के सेवन का मन नहीं करता। ऐसे में जुकाम की समस्या और बढ़ सकती है। जुकाम के दौरान मन ना करने पर भी थोड़ी-थोड़ी देर में गर्म पानी पीते रहें। इसके साथ ही अन्य लिक्विड भी लेते रहें इससे आराम मिलेगा। गर्म पानी, सूप, हल्दी मिला दूध, काली चाय, आदि का सेवन कफ ढीला करने में मदद करता है। वहीं कैफीन और एल्कोहल का सेवन न करें क्योंकि इनसे यूरीन अधिक होती है और शरीर का फ्लूएड कम होता है।

नाक साफ करें
जुकाम के दौरान जरूरी है कि नाक से निकलने वाले द्रव्य को रोका ना जाए। समय-समय पर सही तरीके से नाक की सफाई करें। इससे अंदर जमा कफ नाक के रास्ते बाहर आ जाता है और आपको हल्का महसूस होता है। अगर द्रव्य को निकलने से रोका जाए तो यह सिर में वापस चला जाता है जो कि परेशानी का कारण बन सकता है। नाक साफ करने के बाद हाथ धोना ना भूलें।

विटामिन का सेवन
जुकाम के दौरन विटामिन ए, सी और ई से भरपूर डाइट कफ और जुकाम के संक्रमण को खत्म करने और आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। विटामिन सी, एक एंटी-इंफेक्टीव विटामिन है, जो सर्दी के उपचार में काफी लाभदायक है। एक गिलास गर्म पानी में नींबू के रस के साथ एक चमच शहद मिलाकर पिएं। इस में भरपूर मात्रा में मौजूद विटामिन सी शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को बढते हैं। इसके अलावा संतरे का सेवन भी फायदेमंद हो सकता है।

मसालेदार भोजन
भारतीय मसालों से बने तीखे भोजन का सेवन जुकाम की समस्या में मददगार साबित हो सकता है। अत्यधिक ठंड और कफ से जकड़न की राहत के लिए मसाले से भरपूर डाइट काफी फायदेमंद हो सकती है। इस दौरान मीट, डेयरी उत्पाद और तले हुए भोजन से दूरी बरतनी भी उतनी ही जरूरी है।

गरारा करें
गले में दर्द की समस्या के कारण कुछ भी खाना-पीना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में एक गिलास गरम पानी में चुटकी भर नमक, चुटकी भर खाने का सोडा मिलाकर दिन में दो बार तथा सोते समय गरारे करने से गले की खराश में आराम मिलता है।

जीभ पर जमती है सफेद परत, तो इस बीमारी के लिए रहें तैयार!

जरूरी है जीभ की सफाई
मुंह की सफाई के नाम पर आमतौर पर लोग दांतों की सफाई कर लेते हैं। लेकिन मुंह के अंदर ही मौजूद जीभ की ओर ध्यान नहीं देते। नतीजतन, हमारा मुंह अस्वस्छ रह जाता है। आपके लिए जरूरी है कि आपको मालूम हो कि जीभ की सफाई किस तरह से की जानी चाहिए क्योंकि जीभ पर कई तरह के बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। जीभ के ऊपर एक सफेद परत जैसी जम जाती है। जीभ की गंदगी से दांतों में खराबी होती है और सांसों से बदबू आती है। जीभ को साफ करना बहुत आसान काम है। आइये जानते हैं कि किन घरेलू उपायों से आप अपनी जीभ की सफाई कर सकते हैं।

नमक
नमक जीभ की सफाई के लिए एक प्राकृतिक स्क्रब है। अपनी जीभ पर छोड़ा सफेद नमक छिड़कें, और फिर साफ टूथब्रश से स्क्रब करें। ध्यान रखें की टूथब्रथ मुलायम होना चाहिए। कड़े रेशों से जीभ में दर्द व छाले हो सकते हैं। इस विधि से एक हफ्ते में जीभ से सफेद परत साफ हो सकती है।

टूथब्रश
टूथब्रश जीभ की सफाई के लिए आसान घरेलू उपाय है। कुछ टूथब्रश दो उद्देश्यों के साथ आते हैं। आगे के हिस्से से दांतों की सफाई और पीछे के हिस्से से जीभ की सफाई। हर बार ब्रश कर लेने के बाद, टूथब्रश के पीछे के हिस्से को हल्के दबाव के साथ जीभ पर रगड़ें। तकरीबन एक से दो मिनट तक इस प्रक्रिया को करना चाहिए। ध्यान रहे, कम दबाव के साथ ही ऐसा करें, अन्यथा जीभ छिल सकती है।

माउथवॉश
खाना खाने के बाद खाने के कुछ अंश जीभ पर ही रह जाते हैं। पानी इन्हें साफ नहीं कर पाता। यही फिर आगे चलकर सफेद परत में तब्दील हो जाते हैं। इसलिए, खाना खाने के बाद माउथवॉश का इस्तेमाल करें। इससे जीभ पर खाने के अंश और बैक्टीरिया जमा नहीं हो पाएगा। इसके साथ ही, नियमित रूप से माउथवॉश के इस्तेमाल से सांसों की बदबू की समस्या से भी छुटकारा मिल जाएगा।

नींबू और बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडा में नींबू की कुछ बूंदे मिलाएं। इसका पेस्ट बनाएं। इस पेस्ट को जीभ पर उंगली की मदद से लाएं। कुछ देर में कुल्ला कर लें। जीभ पर जमी सफेद परत हटाने का ये बेजोड़ तरीका है। साथ ही, इससे दांत भी चमकने लगते हैं।

नमक का पानी
मुंह को नमक के पानी से धोकर भी साफ रखा जा सकता है। इसके लिए आधे ग्लास गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक डालें। इस पानी से अपने मुंह को दिन में 5-6 बार धोएं। ऐसा नियमित तौर पर करते रहने से जीभ पर जमी सफेद परत धीरे धीरे साफ हो जाती है।

दही
दही प्रो-बायोटिक होती है। इस तरह की चीज़ें कैंडिड फंगस को खत्म करती हैं। जीभ पर जमी सफेद परत कैंडिड फंगस के कारण ही होती है। इसलिए दही के प्रयोग से जीभ की सफाई की जा सकती है।

हल्दी
हल्दी एक ऐसा मसाला है जिससे जीभ की सफेद परत का इलाज किया जा सकता है। इसके लिए हल्दी पाउडर में थोड़ा सा नींबू का रस मिला लें। इस पेस्ट को जीभ पर मलें। उंगली सी मसाज जैसी करें। कुछ देर मसाज करने के बाद गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। इस विधि से जीभ की सफेद परत काफी जल्दी ठीक हो जाती है।

बंद नाक की समस्या को चुटकी में दूर करेंगे ये आसान घरेलू उपाय

भाप के प्रयोग से
बंद नाक के लिए सबसे ज्यादा प्रभावी भाप लेना ही है। भाप से आपको तुरंत राहत मिलती है और बंद नाक खुल जाती है। पानी को उबालकर उसमें कोई सुगंधित तेल या सुगंधित पत्ती डाल लें और इसकी भाप को नाक पर लें। भाप लेने से चेहरे के रोम छिद्र भी खुल जाते हैं।

लिक्विड डाइट ज्यादा लें
बंद नाक की समस्या की एक वजह नाक के अंदर नमी की कमी है। इसलिए लिक्विड डाइट लेने से साइनर पर पड़ने पर वाला प्रेशर कम होता है और शरीर में नमी बरकरार रहती है इसलिए नाक खुल जाती है।

गुनगुने पानी से नहाना
अगर नाक बंद होने की समस्या ठीक नहीं हो रही है या बार-बार हो रही है तो गुनगुने पानी से नहाने से ये ठीक हो जाती है। गुनगुने पानी से उठने वाली भाप नाक के मसल्स की सूजन को खत्म करती है, जिसकी वजह से नाक खुल जाती है।

नारियल का तेल
नारियल का तेल भी बंद नाक को खोलने का अच्छा उपाय है। इसके लिए नाक बंद होने पर नाक में कॉटन बॉल की मदद से दो बूंद गरम किया हुआ नारियल का तेल डालें और गहरी सांस लें। इससे आपकी बंद नाक तुरंत खुल जाएगी।

कपूर के प्रयोग से
कपूर में तेज सुगंध होती है जो बंद नाक को खोलने में मदद करती है। इसके लिए कपूर को छोटी सी डिब्बी में बंद करलें और जरूरत पड़ने पर डिब्बी को खोलकर सूंघें और तेज सांस लें। इससे बंद नाक तुरंत खुल जाएगी। आप चाहें तो कपूर के साथ नारियल का तेल या कोई खुशबूदार तेल मिला सकते हैं।

बलगम वाली खांसी का काल है फिटकरी का ऐसा प्रयोग

दांतो के लिए
मुंह से दुर्गंध आती हो या फिर दांतों में किसी तरह का दर्द हो, दोनों ही समस्याओं में फिटकरी का उपयोग काफी फायदेमंद है। फिटकरी एक नेचुरल माउथ वाश की तरह होता है। फिटकरी से गार्गल करने से दांतों के दर्द से राहत मिलती है।

पसीने की दुर्गंध
त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया की वजह से पसीने से बदबू आती है। अगर आपके पसीने से बहुत बदबू आती है तो आप फिटकरी का इस्तेमाल कर इस समस्या से निजात पा सकते हैं। करना बस इतना है कि फिटकरी का महीन चूर्ण बनाकर उसकी थोड़ी मात्रा पानी में मिला लें। अब इस पानी से स्नान करने से पसीने से बदबू आना बंद हो जाएगा।

खांसी में
खांसी, दमा और बलगम में भी फिटकरी का उपयोग काफी लाभकारी है। फिटकरी का महीन चूर्ण बनाकर उसे शहद के साथ मिलाकर चाटने से दमा के साथ साथ खांसी में भी काफी लाभ मिलता है।

जुएं मारने में
जैसा कि पहले बताया गया है कि फिटकरी में एंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टी होती है इसलिए इसका उपयोग सिर के जुओं को मारने में भी किया जा सकता है। अगर आपके सिर में जुएं हैं तो आप नियमित रूप से फिटकरी के पानी से स्नान किजिए। इससे जल्द ही आपको जुओं से छुटकारा मिल जाएगा।

चोट लगने पर
फिटकरी रक्त का थक्का बनाने में भी काफी लाभकारी है। अगर आपको कभी चोट लग जाती है और उससे लगातार खून आ रहा है तो आप तुरंत फिटकरी के पानी से घाव को धो लें। ऐसा करने से खून के तुरंत रुक जाने की संभावना रहती है।

सफेद बालों को सिर्फ 5 दिन में काला करते हैं ये घरेलू नुस्खे

सफेद बालों की समस्या
बालों का असमय सफेद होना एक बड़ी समस्‍या बन चुकी है। इसके लिए कई लोग कलर का इस्‍तेमाल करते हैं। हालांकि कलर बालों को जड़ से कमजोर बना सकता है। कई ऐसे घरेलू उपाय हैं, जो सफेद होते बालों की समस्‍या को दूर कर सकते हैं। आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ हमारे घरेलू नुस्‍खों की पोटली से निकले कुछ बेहद असरदार उपाय।

आंवले का कमाल
छोटा सा दिखने वाला आंवला न केवल आपकी सेहत के लिए गुणकारी है बल्कि इससे नियमित उपयोग से सफेद होते बालों की समस्‍या से भी निजात मिलती हैं। आंवले को न सिर्फ डाइट में शामिल करें बल्कि मेंहदी में मिलाकर इसके घोल से बालों की कंडिशनिंग करते रहें। चाहे तो आंवले को बारीक काट लें और गर्म नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं।

बड़े काम की छोटी सी मिर्च
काली मिर्च खाने का स्‍वाद तो बढ़ाती है, साथ ही इससे सफेद होते बाल भी काले होने लगते हैं। इसके लिए काली मिर्च के दानों को पानी में उबाल कर उस पानी को बाल धोने के बाद सिर में डालें। लंबे समय तक बालों में इस तरह करने से यह असर दिखाती है।

कॉफी और काली चाय, बालों को काला बनाये
अगर आप सफेद होते बालों से परेशान हैं तो ब्‍लैक टी और कॉफी का इस्‍तेमाल करें। सफेद हो चुके बालों को अगर आप ब्‍लैक टी या कॉफी के अर्क से धोएंगें तो आपके सफेद होते बाल दोबारा से काले होने लगेगें। ऐसा आप दो दिन में एक बार जरूर करें।

एलोवेरा में है गजब का जादू
बालों में एलोवेरा जेल लगाने से भी बालों का झडऩा और सफेद होना बंद हो जाता है। इसके लिए आप एलोवेरा जेल में नींबू का रस बना कर पेस्‍ट बना लें और इस पेस्‍ट को बालों में लगाएं।

दही से करें सफेदी पर वार
सफेद होते बालों का रंग प्राकृतिक रूप से बदलने के लिए दही का इस्‍तेमाल करें। इसके लिए हिना और दही को बराबर मात्रा में मिलाकर पेस्‍ट बना लें और इस पेस्‍ट को बालों में लगाइये। इस घरेलू उपचार को हफ्ते में एक बार लगाने से ही बाल काले होने लगते हैं।

प्‍याज करे बड़े-बड़े काज
प्याज आपके सफेद बालों को काला करने में मदद करता है। कुछ दिनों तक रोजाना नहाने से कुछ देर पहले अपने बालों में प्याज का पेस्ट लगायें। इससे आपके सफेद बाल काले होने शुरू हो ही जाएंगे, बालों में चमक आएगी और साथ ही बालों का गिरना भी रुक जाएगा।

भृंगराज और अश्वगंधा काम करें बड़ा चंगा
भृंगराज और अश्वगंधा की जड़ें बालों के लिए वरदान मानी जाती हैं। इनका पेस्‍ट बना कर नारियल तेल में मिलाकर बालों की जड़ों में एक घंटे के लिए लगाएं। फिर बालों को गुनगुने पानी से अच्‍छी तरह से धो लें। इससे बालों की कंडीशनिंग भी होगी और बाल काले भी होंगे।

दूध के अद्भुत लाभ
गाय के दूध के फायदों के बारे में कौन नहीं जानता, लेकिन क्‍या आपको यह भी पता है कि गाय का दूध सफेद बालों को भी काला बना सकता है। गाय का दूध बालों में लगाने से बाल कुदरती तौर पर काले होने लगते हैं। ऐसा हफ्ते में एक दिन करें और देखिये कैसे खिल जाते हैं आपके बाल।

कढ़ी पत्ता करे बड़े कमाल
सफेद हो रहे बालों के लिये कढ़ी पत्ता बहुत ही अच्‍छा होता है। नहाने से पहले कढ़ी पत्ते को नहाने के पानी में छोड़ दें और एक घंटे के बाद उस पानी से सिर धो लें। या फिर आंवले की तरह कढ़ी पत्ते को भी बारीक काटकर और गर्म नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं। इससे भी लाभ होगा।

पैरों की ऐंठन और दर्द से छुटकारा दिलाते है ये 11 आसान तरीके

पानी की कमी
शायद आप इस वजह से वाकिफ न हों। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो यदि आपके शरीर में पानी की कमी होगी तो आपके पैरों में ऐंठन आने की आशंका बनी रहेगी। अतः पानी की मात्रा शरीर में कम न होने दें।

पौष्टिकता की कमी
इलेक्ट्रोलाइट यानी पोटाशियम, सोडियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम में संतुलन होना बहुत जरूरी है। दरअसल ये ऐसे आवश्यक तत्व हैं जिनके चलते मसल्स में सिकुड़न और रिलैक्सेशन होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि पैरों के ऐंठन का इलाज खुद करने लगे। अतिरिक्त सप्लीमेंट लेने से आपके शरीर में नुकसान हो सकता है। बेहतर यही है कि अपने खानपान में विकल्पों को शामिल करें ताकि तमाम आवश्यक तत्व आपके शरीर में आसानी से जा सकें।

दवाओं के नुकसान
कुछ दवाओं के चलते भी पैरों में दर्द, ऐंठन और अकड़न हो सकती है। विशेषज्ञों की मानें तो कोई भी दवा बिना चिकित्सक की सलाह के नहीं लेना चाहिए। यदि किसी दवा के कारण आपके पैरों में दर्द हो तो तुरंत विशेषज्ञों से संपर्क करें। लेकिन अगर आप दर्द को दूर करने के लिए घरेलू उपायों का इस्‍तेमाल कर रहे हैं और किसी भी घरेलू उपचार के जरिये न जाए तो ऐसे में बेहतर है कि दवा का सहारा लें। किसी विशेषज्ञ से संपर्क करें और सलाह अनुसार दवा ही लें।

स्ट्रेचिंग न करना
अगर आप सही तरह से एक्सरसाइज नहीं करते तो यह समस्या हो सकती है। स्ट्रेच करें और वार्म-अप एक्सरसाइज अवश्य करें। इन तमाम वजहों को जानने के बाद यह जानना आवश्यक है कि लेग क्रैम्प यानी पैरों में ऐंठन, अकड़न आदि को कैसे रोका जा सकता है? इसके लिए आपको कुछ निम्न चीजों पर ध्यान देना होगा।

दर्द पर जोर दें
यदि सोकर उठते ही आपके पैरों में दर्द, अकड़न या ऐंठन हो तो ऐसे में जरूरी है कि आप सीधे होकर खड़े होने के बाद जहां दर्द है, उस पर जोर दें। ऐसा करने से दर्द या ऐंठन से मुक्ति मिल सकती है।

गर्म कपड़े का उपयोग
दर्द भरी जगहों पर गर्म कपड़े का उपयोग किया जा सकता है। ऐसा करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। यही नहीं मसल्स भी आरामदायक स्थिति में पहुंच जाते हैं। यदि गर्म कपड़े न लगाने हो तो गुनगुने पानी में पैरों की सिकाई भी की जा सकती है।

काल्फ स्ट्रेच
स्ट्रेच भी कई प्रकार के होते हैं। पहले यह तय करें कि आपका दर्द किस तरह का है। काल्फ स्ट्रेच के दौरान दीवार की तरफ मुंह करके खड़ा होना होता है। आपके हाथ दीवार की ओर होते हैं। एक पैर पीछे की और दूसरा पैर आगे की ओर। ठीक ऐसे जैसे बछड़े की पोजिशन होती है। ऐसा करने से पैरों को संपूर्ण स्ट्रेच मिलता है और दर्द में आराम।

टावल स्ट्रेच
यह भी स्ट्रेच करने का एक तरीका है। लेकिन इसे बैठे बैठे किया जाता है। पैरों को स्ट्रेच करें। इसके बाद टावल से पैर के उस हिस्से को बांधकर अपनी ओर खींचे जहां ऐंठन है। ऐसा करने से अंग विशेष को आराम मिलता है। ऐसा करने के बाद टावल के सहयोग से पैर को धीरे धीरे उठाना होता है।

शराब न पीयें
पैरों में दर्द और ऐंठन की हमेशा शिकायत रहती है तो बेहतर है कि शराब न पीयें। शराब कम करने के साथ साथ जरूरी है कि शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान दें। यदि आपने शराब छोड़ दी है; लेकिन शारीरिक गतिविधी न के बराबर है तो भी इसका कोई लाभ नहीं मिलने वाला। ऐंठन और अकड़ने से बचने के लिए जरूरी है कि आप निरंत शारीरिक गतिविधियों में संलग्न रहें।

संतुलित आहार लें
दर्द, ऐंठन आदि से बचने के लिए शरीर में कैल्शियम की मात्रा बनी रहनी चाहिए। यदि ऐसा न हो तो शरीर दर्द आदि समस्याओं से घिरा रहता है। अतः संतुलित आहार लेकर शरीर को दर्द से मुक्ति दिलाएं।

साइनस को जड़ से खत्‍म करते हैं ये 5 घरेलू नुस्‍खे

नुस्‍खे#1
श्वास संबंधी समस्याओं से आराम पाने के लिए, थोड़ा काला जीरे के बीज ले और उन्हें एक पतले कपड़े में बांधे। तुरंत राहत पाने के लिए इसका उपयोग सांस लेने के लिए करें।

नुस्‍खा#2
गर्म पानी में युकलिप्टुस तेल के पाइन तेल की कुछ बूँदें मिला सकते हैं और साइनस के लक्षणों से राहत पाने के लिए इसकी भांप ले सकते है।

नुस्‍खा#3
अपनी नाक और आंखों के चारों ओर नाक की रनिंग को रोकने के लिए जैतून का तेल लगाएं। यह आपकी नाक की रुकावट को साफ करने मे मदद करेगा।

नुस्‍खा#4
प्याज और लहसुन की तरह तीखे खाद्य पदार्थों साइनस के इलाज में अधिक फायदेमंद साबित होते है। आप इन खाद्य पदार्थों की एक छोटी राशि लेने के द्वारा शुरू कर सकते हैं और उन्हें धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं। आप अपने नियमित भोजन में इन खाद्य पदार्थों की राशि को शामिल कर सकते हैं।

नुस्‍खा#5
गाजर के रस में महान चिकित्सा गुणों शामिल है जो साइनस के इलाज में बहुत फायदेमंद है। आप एक ग्लास गाजर का रस अलग से या चुकंदर, खीरे या पालक के रस के साथ ले सकते है। यह साइनस के लक्षणो के उपचार में मदद करेगा।

जौ के इस उबटन से पुरूषों का चेहरा दिखेगा गोरा!

जौ का उबटन
जौ के आटे में दूध मिलाकर तैलीय त्वचा के लिए बेहतरीन उबटन भी बनाया जा सकता है इसको लगाने के आधे घण्टे बाद धोयें। जौ का आटा, बेसन से अधिक लाभकारी है। इससे तैलीय त्वचा में होने वाली सभी समस्याये दूर हो जाती है।

कैसे बनाएं उबटन
जौ के आटे का दूसरा उबटन-दो बड़े चम्मच जौ का आटा लेकर उसमें दो चम्मच दूध, थोड़ी-सी हल्दी व थोड़ा सरसों का तेल मिलाकर इस पेस्ट को चेहरे पर उबटन की तरह लगाएं, सूखने के बाद गर्म पानी से नहा लीजिए। त्वचा एकदम साफ हो जायेगी।

कैसे लगाएं
दो बड़े चम्मच जौ का आटा, एक चम्मच ग्लिसरीन, आधा चम्मच तेल, आधा चम्मच गुलाब जल इनको मिक्स करके लेप बनाकर लगायें।

उबटन के फायदे
जौ के आटे और दूध की मलाई चेहरे का सांवलापन दूर करती है। इसलिए दो बड़े चम्मच जौ के आटे में एक चम्मच मलाई मिलाकर थोड़ा-सा पानी डालकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से रंग निखरता है।

पुरुष अपनाएं ये सीक्रेट्स, हफ्तेभर में बढ़ेगी दाढ़ी

दाढ़ी बढ़ाने का तरीका
दाढ़ी से न केवल पुरुषों की खूबसूरती बढ़ती है साथ ही व्‍यक्तित्‍व को निखारने में अहम भूमिका निभाती है, इसलिए पुरुषों को दाढ़ी पसंद भी आती है। महिलाओं की तरह ही पुरूष भी अपने बालों और दाढ़ी को लेकर हमेशा सजग रहते हैं। दाढ़ी की अच्छी ग्रोथ उनके चेहरे को आर्कषक बना देती है। लेकिन कई बार युवा होते पुरूषों की दाढ़ी ठीक ढंग से नहीं आती। जो उनके व्यक्तित्व को प्रभावित करती है। अगर आपको भी दाढ़ी बढ़ाने के टिप्स चाहिए तो इस स्लाइडशो में इसके बारे में विस्तार से जानिये।

आंवले का तेल
चेहरे के बाल को बढ़ाने के लिये आंवले के तेल से चेहरे की मालिश करना एक अच्‍छा विकल्‍प है। आंवले के तेल से रोजाना अपने चेहरे की 20 मिनट तक मसाज करें और फिर उसे ठंडे पानी से धो लें। आंवले के तेल के साथ सरसों की पत्‍ती को मिलाकर भी मसाज किया जा सकता है। इसके लिये पहले आप सरसों की पत्‍ती का पेस्‍ट बना लें और फिर उसमें एक बूंद आंवला तेल मिलायें। इसके बाद उस पेस्‍ट को दाढ़ी वाले हिस्‍से पर लगायें और 20 मिनट के लिये छोड़ दें। ठंडे पानी से चेहरे को धुल कर उसे साफ कपड़े से साफ करें। ऐसा सप्‍ताह में 3 या 4 बार करने से आप घनी दाढ़ी पा सकते हैं।

नारियल का तेल
करी पत्तों को नारियल के तेल में डालकर उबालें। जब तेल हल्का ठंडा हो जाए तो अपनी दाढ़ी की मालिश करें। आमला पाउडर और नारियल तेल को मिक्स करें। आमला की मात्रा 25 फीसदी नारियल तेल से ज्यादा होनी चाहिए। इसे 2 मिनट उबालें। जब तेल ठंडा हो जाए तब इससे अपनी दाढ़ीकी मसाज करें। शेव करने से पहले हमेशा गुनगुने पानी में थोड़ा सा नारियल तेल डालकर चेहरे को अच्छी तरह धो लें।

दालचीनी और नींबू
दालचीनी के पाउडर में नीबू का रस मिलाकर पेस्‍ट तैयार कर लें। इसे चेहरे पर लगाये और 15 मिनट के लिये छोड़ दें। फिर ठंडे पानी से चेहरा साफ कर सूती कपड़े से पोछ लें। अगर आपकी त्वचा को नींबू से एलर्जी हो तो इसका प्रयोग ना करें। इससे आपकी त्वचा में जलन पैदा हो सकती है। अन्यथा अच्छे परिणाम के लिए सप्ताह में दो बार इसका प्रयोग किया जा सकता है।

यूकेलिप्‍टस तेल
मेंहदी के तेल की तरह चेहरे के बालों की बढ़त के लिए यूकेलिप्‍टस तेल भी बुत उपयोगी होता है। हालांकि इस सीधे तौर पर चेहरे पर लगाने से खुजली की समस्या हो सकती है। इसलिए इसे जैतून या तिल के तेल में मिलाकर लगाएं। आधा कप जैतून या तिल के तिल में यूकेलिप्टस तेल की 15-30 बूंदे मिला कर इसे चेहरे पर लगाएं। 30 मिनट बाद इसे ठंडे पानी से धो दें।

संतुलित भोजन
ज्यादा प्रोटीन वाले भोजन का सेवन, तनाव न लेना और ज्यादा सोना दाढ़ी को तेजी से बढ़ने में मदद कर सकता है। प्रोटीन शरीर को ऐसे पौष्टिक तत्व उपलब्ध कराता है जो ज्यादा बालों को उगाता है और सोना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसी समय पौष्टिक तत्व अपना काम करता है। साथ ही दिन में 8 ग्लास पानी पीने से भी घने और स्वस्थ बालों के विकास में मदद मिलेगी। बालों को झड़ने से रोकने के लिए जहां तक हो सके तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें।

विटामिन लें
डेड स्किन सेल्स को हटाने से नए बालों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। आप चाहें तो पुरुषों के त्वचा के लिए तैयार कोई अच्छा एक्सफोलिएट मास्क भी ट्राइ कर सकते हैं। अपने आहार और ब्यूटी प्रोडक्ट में विटामिन बी को शामिल करें। विटामिन बी1, बी6 और बी12 भी बालों को जल्दी बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही रोज बायोटीन का सेवन करें।

बालों को बढ़ने दें
शुरुआत में दाढ़ी के बाल अपूर्ण और खराब दिखेंगे। जैसे ही बाल बड़े होंगे, धीरे-धीरे बढ़ रहे फालिकल्स को खुद के बालों को विकसित करने का समय मिल जाएगा। ऐसे में बालों के बीच दिखने वाला खाली स्थान अपने आप छिप जाएगा। इसलिए धैर्य रखें और अपनी दाढ़ी को बढऩे और विकसित होने दें।

सेहत के लिए वरदान से कम नहीं है जौ, फायदे जानकर हो जाएंगे हैरान

जौ के फायदे
वैसे तो जौ एक अनाज है। लेकिन अगर हम इसके फायदे के बारे में बात करें तो शायद उंगलियों में गिन नहीं पाएंगे। जौ ऐसा अनाज है जिसके सेवन से हमारे शरीर को कई पोषक तत्व तो मिलते ही हैं साथ ही हैं साथ ही ये हमें कई बीमारियों से भी बचाता है। जौ, गेंहू की ही जाति का एक अनाज है। लेकिन ये गेंहू की अपेक्षा हल्का और मोटा अनाज है। जौ में मुख्य रूप से लेक्टिक एसिड, सैलिसिलिक एसिड, फास्फोरिक एसिड, पोटेशियम और कैल्शियम उपलब्ध होता है। आइए जानते हैं जौ के 5 बड़े फायदें।

गर्भपात
जिन लोगों को गर्भपात होता है उनके लिए जौ अमृत से कम नहीं हैं। इसके सेवन से गर्भपात की समस्या दूर होती है। जौ के आटे को घी और ड्राई फ्रूट के साथ मिलाकर लड्डू बना कर खाया जा सकता है। इसके अलावा जौ का छना हुआ आटा, तिल और शक्कर के मिश्रण को शहद के साथ मिलाकर खाने से भी गर्भपात रुकता है।

पथरी
खराब और दूषित खानपान के चलते अधिकतर लोग पथरी की समस्या से परेशान रहते हैं। इस बीमारी से पीड़ित लोग जौ को पानी में उबालें। इसे ठण्डा करने के बाद रोज 1 ग्लास पीएं। ऐसा नियमित करने से पेट की पथरी गलती है। इसके अलावा ऐसे लोग जौ की रोटी, धाणी और जौ का सत्तू भी ले सकते हैं।

डायबिटीज
डायबिटीज को अगर धीमी मौत कहें तो कुछ गलत नहीं होगा। ये बीमारी लोगों की लाइफस्टाइल पर निर्भर करती है। इसके लिए कोई एलोपेथी दवा काम नहीं करती। इसलिए इस बीमारी से छुटकारे के लिए आपको हेल्दी डाइट लेने की जरूरत है। डायबिटीज के रोगी जौ के आटे की रोटी और सत्तू बनाकर खा सकते हैं। जौ के आटे में चने का आटा मिलाकर भी खाया जा सकता है।

मोटापा
लगभग 95 प्रतिशत लोग मोटापे की समस्या से परेशान रहते हैं। जौ के सत्तू और त्रिफले के काढ़े में शहद मिलाकर पीने से मोटापा समाप्त हो जाता है। इसके अलावा जो व्यक्ति कमजोर हैं वे जौ को दूध के साथ खीर बना कर खाने से मोटे हो जाते हैं।

​रंग निखारना
जौ सिर्फ आंतरिक ही नहीं बल्कि बाहरी रूप से भी लाभकारी है। ये रंग को निखारने के लिए वरदान है। जौ का आटा, पिसी हुई हल्दी और सरसों के तेल को पानी में मिलाकर लेप बना लें। रोजाना शरीर में इसका लेप करके गर्म पानी से नहाने से रंग निखरता है।

डैंड्रफ से सिर्फ 2 दिन में छुटकारा दिलाती है इस तेल की मालिश

डैंड्रफ का इलाज
सही देखभाल के अभाव में बालों में कई समस्‍याएं हो सकती हैं। डैंड्रफ या रूसी भी उनमें से एक है। जो सिर की त्‍वचा में स्थित मृत कोशिकाओं के कारण पैदा होती है। बालों में डैंड्रफ होने से बाल बेजान हो जाते है, गिरने लगते हैं और सिर में खुजली भी रहती है। लेकिन बालों की थोड़ी सी देखभाल और घरेलू उपायों द्वारा आप न सिर्फ बालों की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं बल्कि डैंड्रफ से भी छुटकारा पा सकते हैं।

बालों की सफाई
डैंड्रफ का सबसे बड़ा कारण है स्‍कैल्‍प की ठीक तरह से सफाई न हो पाना। अधिक पसीना और सीबम उत्‍पन्‍न करने वाली ग्रंथियों के ज्‍यादा सक्रिय होने के कारण भी यह समस्‍या होती है। इसलिए डैंड्रफ की समस्‍या होने पर बालों की सफाई पर विशेष ध्‍यान देना चाहिए। ऐसे में आपको हफ्ते में दो से तीन बार बालों को किसी अच्‍छे हर्बल शैम्‍पू से धोना चाहिए।

तेल की मालिश
बालों की सभी समस्‍याओं खासकर डैंड्रफ का भी सबसे कारगर उपचार है तेल मालिश। तेल मालिश से बालों को पोषण मिलता है। सिर की मांपेशियां उत्तेजित होती है और रक्त संचार भी तेज होता है। और बाल स्‍वस्‍थ, सुन्‍दर, घने, लंबे और रूसी रहित बनते हैं। इसलिए हफ्ते में एक बार तेल लगाकर बालों की मालिश करना अति आवश्यक है।

स्‍टीम
मालिश के पश्चात बालों के रोमकूपों से गन्‍दगी व मैल साफ करने के लिए स्‍टीम देना अच्‍छा रहता है। इसके लिए गर्म पानी से तौलिया भिगोकर बालों पर अच्‍छी तरह से लपेट लें। स्‍टीम से रोमकूपों में फंसी मैल और मृत कोशिकाएं आदि निकल जाती है व तेल भी अच्‍छी तरह से सिर की त्वचा में चला जाता है जिससे बालों की जड़ें मजबूत बनती है और डैंड्रफ की समस्‍या भी दूर होती है।

फायदेमंद आंवला
स्‍वस्‍थ एवं सुन्दर बालों के लिए कैरोटिन आवश्यक तत्व है जो आंवले में पाया जाता है। बालों को पोषण देने के लिए आप आंवले का तेल लगा सकते हैं। या तुलसी और आंवले के पाउडर का लेप बनाकर इस लेप से सिर पर मालिश करें। और लगभग आधे घण्टे के लिये इस लेप लगा रहने दें। इसके बाद शैंपू से बालों को अच्छी तरह से धो लें। डैंड्रफ की समस्‍या के लिए यह बहुत ही प्रभावकारी उपाय है।

सहजन की फलियां
सहजन की पत्तियों के रस को लगाने से डैंड्रफ खत्म हो जाती है। सहजन की फलियों को उबालकर तैयार किया गया पल्प नहाते समय सिर पर शैंपू की तरह इस्तेमाल किया जाए तो यह बाजार में उपलब्ध किसी भी विटामिन ई युक्त शैंपू से बेहतर साबित होगा।

मेथी से उपचार
मेथी में निकोटिनिक एसिड और प्रोटीन पाया जाता है जो बालों की जड़ों को पोषण देता है। मेथी से उपचार के लिए 2 चम्मच मेथी को रात भर पानी में भिगो कर सुबह पीस लें। इस लेप को अपने बालों और सिर पर कम से कम 30 मिनट के लिये लगायें। 30 मिनट के बाद बालों को किसी अच्‍छे हल्‍के शैम्‍पू से धो लें। इससे रूसी हटेगी, बाल मजबूत होगें और टूटने से बचेगें।

तिल का तेल
तिल का तेल लगाने से बाल मजबूत, घने, लम्‍बे होते है और साथ ही रूसी भी दूर होती है। इसके लिए बालों मे तिल के तेल की मालिश करें। मालिश के बाद बालों को गर्म तौलिये से स्‍टीम करें। इस तरह पांच मिनट तक करें। थोड़ी देर बाद सिर धो लें।

नींबू का रस
नींबू के रस में विटामिन सी, ए, बी, फॉसफोरस और एंटीऑक्‍सीडेंट पाया जाता हैं जिससे बाल चमकदार और घने बनते हैं। अगर बालों में डैंड्रफ है तो गर्म तेल में नींबू के रस को डाल कर मालिश करने से यह दूर हो जाती है साथ ही बालों का झड़ना भी रुक जाता हैं। नहाने से पहले नींबू के रस से सिर की मालिश कर बालों को धोने से भी फायदा होता है।

दही और काली मिर्च
दही के सेवन से स्‍कैल्‍प पर नमी आती है। जिससे डैंड्रफ से छुटकारा पाया जा सकता है। डैंड्रफ की शिकायत होने पर बालों को दही में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सिर धोयें। यह हफ्ते में दो बार अवश्य करें। इससे बालों की डैंड्रफ तो दूर होगी, साथ ही बाल मुलायम, काले, लंबे व घने होंगे।

डार्क सर्कल का जड़ से सफाया करता है त्रिफला का ऐसा उपयोग

आंखों की सूजन और डार्क सर्कल
आंखें बहुत कीमती होती हैं। यह आपको दुनिया से रूबरू कराती हैं। लेकिन आंखें आपके शरीर का सबसे संवेदनशील अंग होती हैं। लेकिन, क्‍या आप अपनी आंखों को जरूरी आराम देते हैं। घंटों आपकी नजरें कंप्‍यूटर और मोबाइल पर गढ़ी रहती हैं। इससे आपकी आंखें थक जाती हैं। आंखों का मेकअप भी उन पर बुरा असर डालता है, इससे आपको सूजी व रूखी आंखें और डार्क सर्कल जैसी परेशानियां हो सकती हैा। साथ ही आपकी दृष्‍टि‍ पर भी बुरा असर पड़ता है। ऐसे में त्रिफला चूर्ण आपके काफी काम आ सकता है। यह आयुर्वेदिक उपचार आपकी आंखों की इन सब समस्‍याओं से बचाने में मददगार हो सकता है।
Image Courtesy : samaylive.com

आंखों की देखभाल
आंखों को अच्‍छे से धोने से, उनकी सेहत पर अच्‍छा असर पड़ता है। ऐसा करने से आंखें ताजा महसूस करती हैं और उनकी थकान और रूखापन भी दूर होती है। इसके साथ ही आंखों के आसपास की छोटी मसल्‍स की मसाज करने से भी आंखों को आराम मिलता है। खासतौर पर जब आप घंटों कंप्‍यूटर पर काम करते हैं।

त्रिफला का कमाल
आयुर्वेद के अनुसार, त्रिफला में कई स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक गुणों के कारण यह पाचन क्रिया के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही इसका सेवन आंखों के लिए लाभकारी माना जाता है। अगर आप आंखें धोने के लिए त्रिफला का इस्‍तेमाल करते हैं, तो इससे भी आपकी आंखों को बहुत फायदा होगा। त्रिफला तीन हर्बल उत्‍पादों आंवला, हरतकी और बिहितकी से मिलकर बनता है। यह नेचुरल ब्‍लड प्‍यूरीफायर और आई टॉनिक है। यह आंखों के आसपास की मांसपेशियों को अच्‍छी तरह काम करने में मदद करता है।

त्रिफला जल बनाने के उपाय
इसे बनाने के लिए आपको पानी और त्रिफला पाउडर की जरूरत होगी। दो गिलास पानी में दो चम्‍मच त्रिफला पाउडर मिलायें और इसे आठ घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दें। बेहतर होगा अगर आप इसे रात भर ऐसा ही रहने दें। अगली सुबह इस मिश्रण को करीब दस मिनट तक उबालें। और फिर इस मिश्रण को पूरी तरह ठंडा होने के लिए छोड़ दें। आप चाहें तो इसे ठंडा करने के लिए फ्रिज में भी रख सकते हैं।

अपना चेहरा और आंखें धोयें
जब यह मिश्रण ठंडा हो जाए तो इसे अच्‍छे से छान लें। अब इस ठंडे पानी से अपना चेहरा और आंखें धोयें। याद रखें चेहरा धोते समय आपको साबुन लगाने की जरूरत नहीं है। इसके बाद दोनों हाथों में थोड़ा त्रिफला का पानी लें। और अपने दोनों हाथों को अपनी दोनों आंखों पर रख दें। अपनी आंखें खुली रखें ताकि वे त्रिफला के पानी में डूब जाएं। अपनी पलकें झपकाकर इस पानी को फेंक दें। इस प्रक्रिया को तीन बार दोहरायें। इसके बाद अपने चेहरे और आंखों को तौलिये से सुखा लें। इसके बाद आप अपनी आंखों के लिए यहां दिये कुछ उपायों को अपनायें।

अपनी आंखों को दें आराम
इस कदम में आपको खीरे के दो टुकड़ों, गुलाब या तुलसी कुछ पत्तियों की जरूरत होगी। ये सब ठंडी होनी चाहिये ताकि इससे आंखों को आराम मिल सके। शवासन में लेट जाइये और आंखें बंद करके इनमे से कुछ भी अपनी आंखों पर रखिेये। इसके बाद गुलाब जल में रूई के फोहे को डुबोकर उसे इसके ऊपर रखें। आप चाहें तो इसके ऊपर एक कोमल मखमल का टुकड़ा भी बांध सकते हैं।

आंखों की एक्‍सरसाइज
जब आप शवासन में लेटे हों तो किसी खूबसूरत चीज के बारे में विचार करें। अगर आप ऐसा न कर पा रहे हों, तो ध्‍यान अपनी सांसों की ओर लगाने का प्रयास करें। इसके बाद धीरे-धीरे अपनी आंखों को घड़ी की दिशा में और उसकी विपरीत दिशा में घुमायें। इसके बाद आंखों को संख्‍या आठ की मुद्रा में घुमायें। इसके बाद पहले अपने पैरों और फिर अपनी आंखों को देखने का प्रयास करें। इसके बाद दायें-बायें देखें। कुछ समय तक इसी पोजीशन में रहें। इस पूरे चक्र को पांच बार दोहरायें।

आराम करें
आंखों की एक्‍सरसाइज के बाद, थोड़ी देर आराम करें। अपने दिमाग को शांत करें और अच्‍छी बातों के बारे में सोचें। बीस मिनट तक शवासन में रहें और फिर धीरे-धीरे अपने पंजों और फिर शरीर के ऊपरी भाग को हिलायें। अपनी हथेलियों को आपस में मलें और फिर इन्‍हें अपनी आंखों पर रखें। ढंकीं आंखों को ही खोलें ताकि आंखों को अचानक तेज रोशनी का सामना न करना पड़े।

अन्‍य टिप्‍स
इस क्रिया को दिन के आखिर में करें। इससे आपको शांत रहने में मदद मिलेगी। अपनी आंखों पर गर्म या गुनगुना पानी न डालें। आंखों पर पानी के छींटे न मारें इससे उन्‍हें नुकसान हो सकता है। अगर आपकी आंखों में संक्रमण हे या फिर आपने हाल ही में आंखों का ऑपरेशन आदि करवाया है, तो इस पूरी प्रक्रिया को अपनाने से पहले अपने डॉक्‍टर से परामर्श अवश्‍य करें।
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सर्दियों में औषधि के समान है दूध और गुड़ का मिश्रण, 5 बीमारियों का है काल

खून की कमी दूर करे
दूध में गुड़ मिलाकर पीने से शरीर में खून की कमी, थकान नहीं रहती है। अगर आप भी खुद को सेहतमंद बनाने चाहते हैं दूध में गुड़ मिलाकर पीना शुरू कर दीजिए।

फोड़े-फुंसी से रक्षा
अगर आपके जोड़ों में दर्द है तो भी इसका सेवन आपके लिए फायदेमंद है। दूध में गुड़ मिलाकर पीने से खून साफ होता है, जिससे फोड़े-फुंसी और घाव होने की आशंका कम हो जाती है।

कब्‍ज को करे छूमंतर
अगर आपको कब्ज की समस्या रहती है तो ग़ुड़ में दूध मिलाकर पीएं। पाचन क्रिया के लिए गुड़ से बेहतर कुछ भी नहीं है।

मांसपेशियां होगी मजबूत
मांसपेशियों की मजबूती के लिए भी दूध में गुड़ मिलाकर पीना सेहत के लिहाज से अच्छा माना जाता है। गर्भवती महिलाओं को थकावट और कमजोरी ज्यादा होती है। ऐसे में उन्हें दूध में गुड़ मिलाकर पीने की सलाह दी जाती है।

सर्दी-खांसी से छुटकारा
सर्दी खांसी होने पर भी गुड़-दूध का सेवन अच्छा माना गया। इससे सर्दी और खांसी में आराम पहुंचाता है।

अमरूद की पत्तियों में छिपा है हर बीमारी का इलाज

अमरूद की पत्तियां के फायदे
अमरूद एक पसंदीदा फल है। यह स्‍वादिष्‍ट होने के साथ-साथ कई तरह के स्‍वास्‍थ्‍य गुणों से भी भरपूर है। हालांकि, हममें से ज्‍यादातर लोग इस तथ्‍य से पूरी तरह से अनजान हैं कि अमरूद के पत्‍ते भी बहुत फायदेमंद होते है। आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि अमरूद के पत्‍तों में मौजूद अद्भुत एंटीऑक्‍सीडेंट, एंटीबैक्‍टीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण कई प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने में मदद करते है। त्‍वचा, बाल और स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल के लिये अमरूद की ताजी पत्‍तियों का रस या फिर इसकी बनी हुई चाय बहुत ही फायदेमंद होती है। आइए जानें अमरूद की पत्तियां स्‍वास्‍थ्‍य के लिए किस प्रकार से फायदेमंद होती है।

वजन में लाये कमी
अमरूद की पत्तियां जटिल स्टार्च को शुगर में बदलने की प्रक्रिया को रोकता है जिसके द्वारा शरीर के वजन को घटाने में सहायता मिलती है। अमरूद के पत्‍ते कार्बोहाइड्रेट की गति को रोकता है, जो उपलब्ध यौगिक के रूप में लीवर में टूटता है और वजन घटाने का समर्थन करता है।

मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद
जापान में यकुल्ट सेंट्रल इंस्टीट्यूट में अमरूद के पत्तों से बनी चाय पर एक शोध किया गया। शोध के निष्‍कर्ष के अनुसार, अमरूद पत्ती से बनी चाय में एल्फा-ग्लूकोसाइडिस एंजाइम गतिविधि को कम कर मधुमेह रोगियों में प्रभावी रूप से रक्त शर्करा को कम करती है। इसके अलावा यह सुक्रोज और माल्‍टोज को सोखने से शरीर को रोकती है जिससे शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है। अमरूद की पत्ती से बनी चाय 12 सप्ताह पीने से इंसुलिन के उत्पादन में वृद्धि के बिना रक्त में शर्करा के स्तर को कम कर सकते हैं।

कार्डियोवस्कुलर प्रभाव
अमरूद के पत्‍तों से बनी चाय दिल और संचार प्रणाली के लिए उपयोगी होती है। 2005 में प्रकाशित एक प्रयोगशाला अध्ययन के मुताबिक, अमरूद के पत्तों में मौजूद यौगिक रक्तचाप और हृदय की दर को कम करने में मदद करते हैं। अमरूद के पत्‍तों से बनी चाय के सेवन से ब्‍लड लिपिड, ब्‍लड में कोलेस्ट्रॉल का निम्‍न स्‍तर और अस्वस्थ ट्राइग्लिसराइड्स में सुधार करने में मदद मिलती है।

डायरिया का उपचार
अमरूद की पत्तियां डायरिया और पेचिश के लिए अद्भुत उपचार भी है। समस्‍या होने पर 30 ग्राम अमरूद की पत्तियां और एक मुट्ठी चावल के आटे को दो गिलास पानी में मिलाकर उबाल लें। डायरिया के इलाज के लिए इस मिश्रण को दिन में दो बार पीयें। पेचिश के इलाज के लिए, अमरूद की पत्तियों और जड़ों को लेकर 90 डिग्री सेल्सियस पर 20 मिनट के लिए उबालें। इस पानी को छानकर दिन में दो बार पेचिश से राहत पाने तक लें।

पाचन तंत्र को दुरुस्‍त रखें
अमरूद की पत्तियां पाचन एंजाइम के उत्‍पादन को बढ़ाकर पाचन तंत्र को दुरुस्‍त रखने में मदद करता है। शक्तिशाली एंटी-बैक्‍टीरियल एजेंट प्रभावी ढंग से पेट के अस्‍तर से हानिकारक बैक्‍टीरिया को नष्‍ट करने और बैक्‍टीरिया से विषाक्‍त एंजाइमों के प्रसार को रोकने में मदद करता है। अमरूद के पत्तों फूड प्‍वाइजनिंग, उल्टी और मतली से भी राहत प्रदान करते हैं।

एलर्जी दूर करें
अमरूद की पत्‍तियों का रस किसी भी प्रकार की एलर्जी को दूर कर सकता है। अमरूद की पत्तियों में एलर्जी अवरोधक गुण पाया जाते है यह उस वायरस को खत्‍म करता है जिससे एलर्जी पैदा होती है। साथ ही यह एलर्जी से होने वाली खुजलाहट को दूर करने में भी मददगार होता है। एलर्जी में खुजलाहट बहुत ही आम होता है। अत: एलर्जी को कम करने से खुजलाहट अपने आप कम हो जाती है।

मुंहासे की समस्‍या से निजात दिलाये
अमरूद की पत्तियों एंटीसेप्‍टिक होने के कारण बैक्‍टीरिया को दूर करने में मदद करती है। मुंहासे की समस्‍या में ताजी पत्‍तियों को पीस कर दाग धब्‍बों के साथ मुंहासो पर लगाएं। नियमित रूप से ऐसा करने से धीरे-धीरे मुंहासों की समस्‍या दूर हो जाती है।

डायबिटीज, थॉयराइड और कैंसर का काल है अमरूद

बीमारियों के लिए अमरूद
विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन बी2, ई और के, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, मैंगनीज, फोस्‍फोरस। अमरूद इन सबका बेहतरीन स्रोत है। अतः अमरूद को यदि सुपर फ्रूट कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। यही नहीं अमरूद में एक औसत संतरे की तुलना चार गुणा ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है और एक नींबू की तुलना में दस गुना ज्यादा विटामिन ए होता है। कहने का मतलब यह है कि एक अमरूद में कई गुण छिपे हैं। अमरूद की खासियत यहीं खत्म नहीं होती। अमरूद तमाम बीमारियों से भी बचाने में कारगर सिद्ध हुआ है। आइये जानते हैं किन बीमारियों से अमरूद हमारा बचाव करता है।

बेहतर आंखों की रोशनी
कामकाजी जीवनशैली में यह बात किसी से छिपी नहीं है कि निरंतर कंप्यूटर स्क्रीन में देखने के कारण सबसे ज्यादा हमारी आंखें ही प्रभावित होती हैं। ऐसे में आंखों की रोशनी का सही बनाए रखना बहुत जरूरी है। आंखों की रोशनी के लिए विटामिन ए आवश्यक तत्व है और अमरूद विटामिन ए का बेहतरीन स्रोत है। विटामिन ए आंखों को स्वस्थ रखता है, कोर्निया साफ रखता है और आंखों की सेल्स की रक्षा करता है। विटामिन ए की कमी से अकसर रतौंधी होने का खतरा बना रहता है। जबकि नियमित अमरूद खाने से रतौंधी होने की आशंका भी कम हो जाती है। उम्र के बढ़ने के साथ आंखों में होने की समस्याओं को भी अमरूद के नियमित सेवन से कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो आंखों की अच्छी रोशनी बनाए रखने के लिए अमरूद या अमरूद का जूस अवश्य लें।

दमकती त्वचा
प्रदूषण किस हद तक बढ़ गया है, इसकी चर्चा यहां करना आवश्यक नहीं है। लेकिन यह बताना जरूरी है कि प्रदूषण के कारण किस तरह हमारी त्वचा प्रभावित होती है। यही नहीं कम उम्र में ही त्वचा में झुर्रियां पड़ने की शिकायत होने लगी है। यही नहीं चेहरे में कालापन भी निंरतर बना रहता है। इन सब समस्याओं से निदान पाने के लिए अमरूद एक बेहतरी स्रोत है। अमरूद में, खासकर लाल अमरूद में एंटीआक्सीडेंट प्रोपर्टीज़ पाए जाते हैं। एंटीआक्सीडेंट हमारी त्वचा को क्षति होने से रोकते हैं। यही नहीं अमरूद के नियमित सेवन से चेहरा दमकता हुआ बअना रहता है। साथ ही रूखेपन से भी बचा जा सकता है।

मधुमेह
मौजूदा जीवनशैली की सबसे आम बीमारियों में एक मधुमेह है। शायद ही कोई ऐसा घर हो जहां मधुमेह के मरीज मौजूद न हो। वास्तव में मधुमेह तेजी से अपने पांव पसार रहा है। चीनी चिकित्सकीय प्रणाली में सालों से मधुमेह के इलाज के लिए अमरूद का इस्तेमाल हो रहा है। तमाम शोध अध्ययन भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि मधुमेह के रोगियों के लिए अमरूद बेहद लाभकारी है। अमरूद में मौजूद फाइबर शुगर स्तर को नियंत्रित करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रतिदिन एक या दो अमरूद अवश्य खाना चाहिए। जिन मरीजों में मधुमेह की स्थिति गंभीर है, वे अमरूद के पत्ते की चाय भी पी सकते हैं।

थॉयराइड नियंत्रित करना
अमरूद कॉपर का बेहतरीन स्रोत है। कॉपर थायराइड के लिए आवश्य तत्व है। वास्तव में कॉपर हारमोन के उत्पादन को नियंत्रित करता है। साथ ही अन्य मसकता को भी प्रभावित करता है। अमरूद में पोटाशियम भी पाया जाता है। यह तत्व भी थॉयराइड के लिए महत्वपूर्ण है। इन सबके इतर अमरूद हमारा वजन नियंत्रित रखता है। परिणामस्वरूप हमारी ऊर्जा बनी रहती है। थॉयराइड से बचाव के लिए स्वास्थ्य चिकित्सकों का मानना है कि अमरूद को अपनी नियमित जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। यही नहीं साथ ही अमरूद के पत्तों को चाय के रूप में सेवन करें।

हृदय सम्बंधी बीमारियों से बचाव
हृदय सम्बंधी बीमारियां भी दिनों दिन आम होती जा रही है। कम उम्र से लेकर उम्रदराज लोग हृदय सम्बंधी बीमारियों से ग्रस्त होने लगे हैं। ऐसे में जरूरी है कि हृदय सम्बंधी बीमारी से बचने के अटल उपाय ढूंढ़े जाएं। तमाम शोध अध्ययनों से इस बात की पुष्टि हुई है कि नियमित अमरूद के सेवन से रक्तचाप में कमी आती है और वसा भी कम होता है। वास्तव में इसके लिए अमरूद में मौजूद विटामिन सी, पोटाशियम जिम्मेदार हैं। असल में पोटाशियम हार्टबीट नियमित रखता है और उच्च रक्तचाव को नियंत्रित रखने में मददगार है।

कैंसर के खतरे को कम करना
अमरूद में कैंसर रोधी और ट्यूमर रोधी तत्व मसलन लाइकोपीन, विटामिन सी, पोलिफेनोल्स मौजूद हैं। अतः यह सर्वविदित है कि अमरूद के सेवन से कैंसर और ट्यूमर के खतरे को कम किया जा सकता है। इतना ही नहीं एक शोध अध्ययन में इस बात की पुष्टि हुई है कि अमरूद के नियमित सेवन से प्रोस्टेट कैंसर के साइज को भी कम किया जा सकता है। अमरूद ब्रेस्ट, मुंह, त्वचा, पेट, लंग आदि कैंसरों में भी लाभकारी सिद्ध हुआ है।

बिच्‍छू का ज़हर खत्‍म करती है हल्‍दी, जानें और 5 जबरदस्‍त फायदे

जब बिच्‍छू डंक मार दे
अगर बिच्‍छू डंक मार दे तो हल्दी को चूने के साथ मिलाकर उस स्‍थान पर लगाएं, डंक के कारण होने वाले दर्द एवम सूजन में आराम मिलता है।

त्‍वचा के लिए
हल्दी में मलाई और दूध मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे और त्वचा मे लगाने से प्राकृतिक रुप से सौंदर्य में निखार आता है एवम त्वचा मखमली तथा नर्म बनी रहती है।

नारियल तेल के साथ
कच्ची हल्दी को पीस कर गर्म करके एवम उसमे नारियल का तेल मिलाकर सुजन एवम घावो पर लगाने से अराम मिलता है।

हलवा बनाकर
हल्दी का हलवा भी बनाया जाता है जिसका सेवन करने से शरीर स्वस्थ और तंदुरुस्त बना रहता है, खास तौर पर महिलाओ द्वारा प्रसव के पश्चात सेवन करने से मांसपेशियां मजबुत होती है।

गर्म दूध
गर्म दूध के साथ पिसी हुई हल्दी मिलाकर रात को पीने से सर्दी, जुकाम एवम बदन दर्द से निजात मिलता है।

पेट के कीड़ों का रातों रात सफाया करते हैं ये 5 घरेलू नुस्‍खे

मूली
50 मिलीलीटर मूली के रस में सेंधानमक और कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से आन्त्रकृमि (आंत के कीड़े) नष्ट होते हैं।

गाजर
गाजर का रस रोजाना सुबह खाली पेट पीने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं। कच्ची गाजर खाना भी लाभकारी होता है जिन लोगों को गाजर हजम न हो वे गाजर का रस ही पिया करें। गाजर या किसी भी चीज की कांजी बनाकर कम से कम 5 हफ्तों तक लगातार पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

कालीमिर्च
एक कप मट्ठे के साथ 4-6 कालीमिर्च का चूर्ण रात को सोते समय लेने से पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं।

शहद
अजवायन का चूर्ण एक चुटकी को एक चम्मच शहद के साथ लेना चाहिए। दिन में 3 बार यह चूर्ण लेने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

कलौंजी
10 ग्राम कलौजी को पीसकर 3 चम्मच शहद के साथ सोते समय कुछ दिन नियमित रूप से सेवन कराने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

त्वचा के हर रोग का सफाया करता है घर में बना ये टोनर

तरबूज के फायदे
तरबूज एक प्राकृतिक टोनर होने के साथ ही एंटी-ऑक्सीडेंट से भी भरपूर है। इसमें 95 प्रतिशत पानी होता है। इसे रूखे चेहरे पर लगाने से चेहरा साफ होता है और नमी से खिल उठता है। लाइकोपीन जहां चेहरे की झुर्रियां मिटाता है, वहीं गर्भाशय के विकारों को भी दूर करता है। आइए जानत हैं तरबूज के अन्य फायदे।

यूवी किरणों से बचाव
तरबूज का नियमित सेवन हमारे शरीर में हानिकारक फ्री रैडिकल्स की क्षमता को कम करता है। यह गठिया, सूजन, हीट स्ट्रोक, एस्थमा और हार्ट अटैक जैसी बीमारियों से भी बचाता है। यह हमारी त्वचा पर सूर्य की यूवी किरणों का असर भी कम करता है।

एनीमिया को रखे दूर
तरबूज ख़ून बढ़ाने के साथ इसे साफ भी करता है। त्वचा रोगों के लिए यह बेहद फायदेमंद है। खाना खाने के बाद तरबूज का जूस पीने से खाना जल्दी पच जाता है। इससे नींद भी अच्छी आती है। यही नहीं, तरबूज का जूस लू से भी बचाता है।

टैनिंग प्रॉब्लम में सहायक
शरीर के जिस हिस्से पर टैनिंग हो, उस एरिया को साफ कर उस पर तरबूज का पल्प लगाएं। थोड़ी देर तक इसे लगा रहने दें और फिर पानी से धो लें। इसके अलावा खीरे और तरबूज को पीसकर पैक तैयार करें। इस पैक को चेहरे पर 10 मिनट के लिए लगाएं। इससे टैनिंग की समस्या कम हो जाएगी।

तरबूज मिटाए थकान
दिन भर धूप, धूल और प्रदूषण में रहने के बाद थकान महसूस हो रही हो तो चेहरे व गले पर तरबूज का रस 5 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। फिर चेहरा धो लें और उस पर हलका मॉयस्चराइजऱ लगाएं। इससे चेहरे की थकान मिट जाएगी। अगर त्वचा ढीली पड़ रही हो तो तरबूज और एवोकैडो का रस स्किन को टाइट करने में मदद करेगा। इनमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स तत्वों और विटमिंस की पर्याप्त मात्रा होती है।

प्रदूषण में भी फेफड़ों को स्‍वस्‍थ रखेंगी ये 10 जड़ी-बूटियां

फेफड़ों के लिए हर्ब्‍स
फेफड़ों का काम वातावरण से ऑक्‍सीजन लेना और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर उसे वातावरण में छोड़ना है। साथ ही यह शुद्ध रक्त धमनी द्वारा दिल में पहुंचता है, जहां से यह फिर से शरीर के विभिन्न अवयवों में पम्प किया जाता है, इसलिए फेफड़ों का स्‍वस्‍थ रहना जरूरी है। बहुत से हर्ब्‍स ऐसे है जिनके सेवन से फेफड़ों को स्‍वस्‍थ रखा जा सकता हैं। आगे के स्‍लाइड में उन्‍हीं के बारे में चर्चा की गई हैं।

मुनक्‍का
मुनक्‍का के ताजे और साफ 15 दाने रात में 150 मिलीलिटर पानी में भिगो दें। सुबह बीज निकालकर फेंक दें। गूदे को खूब अच्‍छी तरह चबा-चबाकर खायें। बचे हुए पानी को पी लें। एक महीने तक इसका सेवन करने से फेफड़े मजबूत होते हैं।

शहद
रोजाना सुबह एक चम्‍मच शहद का सेवन करें। एक दो महीने तक इसका सेवन करने से फेफड़ों के रोग दूर होते हैं और फेफड़े मजबूत बनते हैं।

अंगूर
अंगूर फेफड़े के सभी प्रकार के रोगों को दूर रखता है। खांसी और दमे जैसी बीमारियों में अंगूर कासेवन बहुत फायदा पहुंचाता है। हां अगर आपको डायबिटीज है तो इसका अधिक सेवन न करें।

अंजीर
फेफड़े की परेशानियों को दूर करने में अंजीर काफी मदद करती है। 5 अंजीर को एक गिलास पानी में उबाल लीजिये। दिन में दो बार इसका सेवन करने से फेफड़ों की गंदगी साफ होती है और उन्‍हें शक्ति मिलती है।

लहसुन
लहसुन को कफनाशक समझा जाता है। भोजन के बाद लहसुन का सेवन करने से छाती साफ रहती है और कई रोगों से रक्षा होती है।

मुलहठी
खांसी और खराश में मुलहठी के फायदे आप जानते ही हैं। यह फेफड़ों के लिए बहुत लाभदायक होती है। पान में डालकर मुलहठी का सेवन करने से कफ नाश होता है।

तुलसी
तुलसी के सूखे पत्‍ते, कत्‍था, कपूर और इलायची समान मात्रा में ले ल‍ीजिए। इसमें नौ गुना चीनी मिलाकर बराबर मात्रा में पीस लें। इस मिश्रण की चुटकी भर मात्रा दिन में दो बार खायें। इससे फेफड़ों में जमा कफ निकल जाता है।

एचिनासा ECHINACEA
एचिनासा एक एंटी माइक्रोबियल हर्ब है। जो रोगों से लड़ने के लिए जाना जाता है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। एचिनासा सफेद रक्त कोशिका के उत्पादन द्वारा काम करता है।

शहतूत के पत्‍ते
शहतूत के पत्‍ते चबाने से फेफड़ों के रोग, फेफड़ों की जलन, सिरदर्द और खांसी आदि दूर होती है।

घर पर करें सिर्फ ये 2 आसान काम, हफ्तेभर में आएगी दाढ़ी

रफ एंड टफ लड़के
ज्यादातर लड़कियों को रफ एंड टफ लड़के ही पसंद होते हैं। भले ही कहने को चिकने लड़कों की मिसाल दी जाती हो, लेकिन असल में लड़को पर हैवी दाढ़ी ही सूट करती है। सबसे बड़ी बात ये है कि आजकल बदलते फैशन के साथ दाढ़ी और मूछें भी स्‍टाइलिश होने लगी हैं। पुरुष इन पर हर रोज नए प्रयोग कर रहे हैं। लेकिन आज के समय में अधिकतर लड़को दाढ़ी ना आने की शिकायत होती है। ऐसे में आज हम आपको दाढ़ी बढ़ाने की ​कुछ टिप्स बता रहे हैं।

अच्छी डाइट लें
अच्छी डाइट का असर हमारे बॉडी के हर हिस्से पर पड़ता है। वहीं, बालों की ग्रोथ के लिए भी आपको एक अच्छी डाइट की जरूरत होती है। इसलिए अपने नियमित आहार में विटामिन बी को शामिल करें। विटामिन बी1, बी6 और बी12 भी बालों को जल्दी बढ़ाने में मदद करता है।

हफ्ते में 2 बार करें मसाज
मसाज करने से भी दाढ़ी की ग्रोथ पर असर पड़ता है। दाढ़ी को पोषण देने के लिए और इसे तेजी से बढ़ने में मदद करने के लिए आपको कुछ तेल के जरिए चेहरे की मसाज करनी होगी। इससे ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है। आप आंवले, जैतून और नारियल के तेल से मालिश कर सकते हैं।

लाइफस्टाइल बदलें
प्रोटीन शरीर को ऐसे पौष्टिक तत्व उपलब्ध कराता है जो ज्यादा बालों को उगाते हैं और नींद इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसी समय पौष्टिक तत्व अपना काम करते है। साथ ही दिन में 7-8 गिलास पानी पीने से भी घने और स्वस्थ बालों के विकास में मदद मिलती है। इसके अलावा बालों को झड़ने से रोकने के लिए तनावमुक्त रहने की कोशिश करें।

ना करें स्‍मोकिंग
अगर आप स्मोकिंग करते हैं, तो आपका घनी दाढ़ी और मूंछों का सपना पूरा होना मुश्किल हो सकता है। क्‍योंकि इसका असर आपकी फेशल ग्रोथ पर भी पड़ता है। डॉक्टर बताते हैं कि सिगेरट में मौजूद निकोटिन बॉडी को न्यूट्राइंट्स अब्जॉर्ब करने से रोकता है और ब्लड सर्कुलेशन को भी कम कर देता है। यानी स्मोकिंग से हेयर लॉस होता है।

प्रदूषण से बालों को बचाना है तो अपनाएं ये 3 चमत्कारी नुस्खे

बालों के लिए नुस्खे
प्रदूषण का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ने के साथ ही हमारे बालों पर भी पड़ता है। रफ और टूटते बाल हमारी पर्सनेलिटी को खराब करने में वक्त नहीं लगाते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम अपने बालों की अच्छी तरह देखभाल करें। आज हम आपको प्रदूषण से बालों को बचाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वो नुस्खे।

मेथी के बीज
मेथी के बीज बालों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। यदि आप अपने बालों को प्रदूषण से बचाना चाहते हैं तो रात में मेथी के बीजों को पानी में भिगो दें। सुबह उठकर इन्हे पीसकर लेप जैसा बना लें और फिर इस लेप को बालों पर लगा लें। ऐसा कुछ दिनों तक करने से बाल झड़ना बंद हो जाता हैं।

प्याज
प्रदूषण के चलते बालों को झड़ना और गंजेपन की समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए सिर में प्‍याज के रस में शहद मिलाकर लगाएं। यह आपको थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह वास्तव में गंजेपन से बचने के लिए यह बेहद कारगर उपाय है।

कढ़ी पत्ता
कढ़ी पत्ते में ढेरों औषधीय गुण होते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि ये बालों को भी सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह आपके बालों की झड़ने की समस्‍या को दूर कर उन्‍हें मुलायम और चमकीले भी बनाता है। इसके लिए कढ़ी पत्तों को नारियल के तेल में तब तक उबालें जब तक वह काली न हो जाए। फिर इन्हें बालों की जड़ों में लगाएं।

नींबू
पांच चम्‍मच दही, एक चम्‍मच नीबू का रस, दो चम्‍मच कच्‍चे चने का पाउडर इन सब को मिलाकर एक बहुत ही शैम्‍पू बनाया जा सकता हैं। इस मिश्रण को अपने सिर पर लगाए और एक घंटा सिर पर लगे रहने के बाद सिर धो लें इससे आपके बाल झड़ने बंद हो जाएगें।

हर तरह की खुजली से छुटकारा दिलाते हैं ये घरेलू उपचार

खुजली की समस्‍या
शरीर में खुजली होने के कई कारण होते हैं जैसे किसी खाद्य पदार्थ या दवा से एलर्जी, त्वचा का रूखा होना, ठीक से न नहाना, गंदे कपड़े पहनना, मच्छर या अन्य कीट के काटने पर, कोई चर्म रोग या पेट में कीड़े होने आदि पर खुजली की समस्या हो सकती है। रिसर्च के अनुसार, शरीर में इम्‍यून सिस्‍टम में गड़बड़ी के कारण भी खुजली हो जाती है। लेकिन खुजली होने पर किसी भी काम में मन नहीं लगता, इंसान चिड़चिड़ा हो जाता है। इसलिए इसको दूर करने के उपाय करना बहुत जरूरी होता है। तो आइए, कुछ घरेलू उपायों द्वारा खुजली को दूर करें।

नींबू
विटामिन सी से समृद्ध और ब्‍लीचिंग प्रकृति के कारण नींबू खुजली वाली त्‍वचा के लिए सबसे अच्‍छे उपायों में से एक है। नींबू में मौजूद वाष्पशील तेल में उत्तेजना को सुन्‍न करने की क्षमता होती है जिसके कारण यह जलन और सूजन को दूर करने में मदद करता है। इसके लिए नींबू को काटकर उसके रस को खुजली वाली जगह पर मलने से हर तरह की खुजली से छुटकारा मिलता है।

तुलसी
तुलसी के पत्ते थीमोल और कपूर से समृद्ध होने के कारण, इनमें त्वचा की जलन को कम करने की क्षमता होती है। खुजली होने पर तुलसी के कुछ पत्तों को लेकर उन्‍हें प्रभावित क्षेत्र पर रगड़ें। या तुलसी के पत्तों की चाय बनाकर उसे खुजली वाले स्‍थान पर लगाये।

एलोवेरा
अपने मॉइस्चराइजिंग गुणों के कारण एलोवेरा त्‍वचा के लिए वरदान होता है। खुजली वाले स्‍थान पर एलोवेरा के जैल को रगड़ने से यह त्वचा की जलन को कम करने में मदद करता है और खुजली से जल्दी ही राहत प्रदान करता है। इसके लिए घर में लगे एलोवेरा के पौधे की पत्‍ती को काट लें और उसमें से निकलने वाले जेल को खुजली वाली जगह पर लगा लें।

सेब का सिरका
बहुत से लोग सिर में रूसी को दूर करने के लिए सिरके का उपयोग करते हैं, इसी तरह से यह खुजली वाली त्‍वचा के लिए भी अच्‍छी तरह से काम करता है। इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक और एंटीफंगल गुण, इसे खुजली विरोधी एजेंट बनाता है। खुजली वाले स्‍थान पर रूई की सहायता से सेब के सिरके को लगाने से फायदा होता है।

नारियल तेल
खुजली वाली त्‍वचा के लिए नारियल को तेल बहुत अच्‍छा होता है। शुष्‍क त्‍वचा या मच्‍छर के काटने पर होने वाली खुजली के‍ लिए तो नारियल को तेल अद्भुत काम करता है। प्रभावित क्षेत्र पर सीधा इसे लगाना नारियल के तेल को इस्तेमाल करने का सबसे अच्छा तरीका है।

पुदीना
पुदीना कीड़े के काटने और खुजली के लिए बहुत अच्‍छा होता है। यह शीतल संवेदना प्रदान कर आपको तुरंत राहत का अनुभव करता है। इसकी पत्तियों को मसलकर सीधे खुजली वाले स्‍थान पर रगड़ना पुदीने को लगाने का सबसे आसान और तेज तरीका है।

बेकिंग सोडा
बेकिंग सोडा खुजली वाली त्‍वचा के लिए सबसे आम घरेलू उपाय है। यह सभी प्रकार की खुजली के लिए फायदेमंद होती है। इसमें मौजूद सुखदायक और एंटी-इफ्लेमेंटरी गुण प्राकृतिक एसिड नूट्रलाइजर (निष्प्रभाव करना) के रूप में कार्य करता है। इसके इस्‍तेमाल के लिए बेकिंग सोडा के तीन भाग मिश्रण में एक भाग पानी मिलाकर पेस्‍ट तैयार करके प्रभावित त्‍वचा पर लगाये।

ओटमील
ओटमील में मौजूद एंटी ऑक्‍सीडेंट तत्‍व, एंटी उत्तेजक तत्‍व और सुखदायक प्रभाव के कारण यह खुजली से राहत देने में मदद करता है। इसको इस्‍तेमाल करने के लिए ओटमील में पानी मिलाकर पेस्‍ट बना लें। इस पेस्‍ट को खुजली वाले स्‍थान पर 20 से 30 मिनट के लिए लगाये।

चन्‍दन
चन्‍दन और काली मिर्च भी खुजली से राहत दिलाने का बहुत आसान और असरकारी तरीका है। इसके लिए चन्दन और काली मिर्च को पीसकर महीन पेस्‍ट बना लें। इस पेस्‍ट को खुजली वाली स्‍थान पर लगा लें।

अपनाएं सिर्फ ये 5 घरेलू नुस्खे, सेहत का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा कोहरा

घरेलू नुस्खे
लगातार हवा में घुलता जहर यानि कि प्रदूषण और कोहरा हमारी सेहत के लिए बहुत ही जानलेवा साबित हो रहा है। दिल्‍ली के प्रदूषण का आलम ये है कि लोगों का चैन से सांस लेना तक दूभर हो गया है। प्रदूषण बढ़ने से ना सिर्फ अस्थमा और सांस संबंधी दिक्कतें सामने आ रही हैं बल्कि बच्चों को भी कई तरह की समस्याएं हो रही हैं। आज हम आपको कोहरे से अपनी सेहत को बचाने के कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे हैं।

काली मिर्च
काली मिर्च आपको प्रदूषण से बचने के लिए काफी हद तक मदद करती है। हर किचन में मौजूद काली मिर्च को अगर आप मसल या कूटकर पाउडर बनाकर शहद के साथ लेते हैं तो छाती में जमा सारा कफ साफ हो जाता है। दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा और सांस संबंधी दिक्कतें सामने आ रही हैं। इस समस्‍या से बचने के लिए आप काली मिर्च का इस्‍तेमाल कर सकते है।

सरसों का तेल
आपने भी जरूर दादी-नानी से सरसों के तेल के फायदे सुने होंगे। लेकिन आधुनिकता की होड़ में हम लोग इतने अंधे हो गए हैं कि उन बातों को सिर से नकार देते हैं। जिसके चलते हम बीमारियों की चपेट में आते हैं। अगर आप अपनी नासिका छिद्र के आस-पास सरसों का तेल लगा लेते हैं, तो यह धूल के कणों को आपके फेफड़ों में प्रवेश करने से रोकता है। जिसके चलते प्रदूषण आपको कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।

गुड़ और शहद
खानपान को अच्छा कर भी आप प्रदूषण से बच सकते हैं। गुड और शहद को अपनी डाइट में शामिल करने से वायु प्रदूषण से बचा जा सकता है। क्योंकि इनसे सेहत पर प्रदूषण का असर नहीं होता है। वैसे यह कोई नहीं बात नहीं है क्‍योंकि पुराने समय से ही गुड़ और शहद का इस्तेमाल शरीर को रोगों से बचाने के लिए किया जाता रहा है।

लहसुन और हल्‍दी
सोते समय हल्दी वाला दूध पीने से ना सिर्फ चोट सही होती है, बल्कि प्रदूषण से भी निजात मिलती है। यह एंटी-एलर्जिक, एंटी-बॉयोटिक व एंटी-टॉक्सिन का काम करता है। जो आपकी इम्‍यूनिटी को मजबूत बनाकर बहुत सारी बीमारियों से दूर रखता हैं। इसके अलावा लहसुन में एंटी-बॉयोटिक गुण पाए जाते हैं।

डायबिटीज, मलेरिया समेत इन 5 रोगों को दूर करती हैं इमली की पत्तियां

डायबिटीज
इमली की पत्तियों का सेवन करने से शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और इंसुलिन संवेदनशीलता भी बढ़ जाती है। इससे शुगर की बीमारी (मधुमेह) में राहत मिलती है। यह पीलिया को ठीक करने में भी मदद करती है।

मलेरिया
मलेरिया मादा एनोफ़ेलीज़ मच्छर के कारण होता है। एक शोध के मुताबिक, इमली की पत्तियों का अर्क प्लास्मिडियम फाल्सीपेरम के विकास को रोकता है, जो मच्छर द्वारा किया जाता है और मलेरिया का कारण बनता है।

स्‍कर्वी रोग
स्कर्वी विटामिन सी की कमी के कारण होता है। यह नाविक की बीमारी के रूप में भी जाना जाता है, आमतौर पर स्कर्वी मसूड़ों और नाखूनों, थकान आदि जैसे लक्षणों के साथ होता है। इमली के पत्तों में उच्च एस्कॉर्बिक एसिड सामग्री होती है, जो एंटी-स्कर्वी विटामिन के रूप में कार्य करती है।

घाव ठीक करे
इमली के पत्तों में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। जब इमली के पत्तों का रस निकाला जाता है और घावों पर लगाया जाता है, तो वे घाव को तेजी से ठीक करते हैं। इसके पत्तों का रस किसी भी अन्य संक्रमण और परजीवी विकास को रोकता है। इसके अलावा यह नई कोशिकाओं का निर्माण भी तेजी से करता है।

अल्‍सर दूर करे
अल्सर में बहुत असहनीय दर्द हो सकता है। इमली के पत्तों का रस अल्सर को ठीक करने और लक्षणों से राहत देने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

पेट फूलना, गैस व खट्टी डकार से तुरंत राहत दिलाता है ये 5 नुस्‍खा

छाछ
खाना खाने के बाद करीब सौ ग्राम छाछ या मट्ठे में 2 ग्राम अजवायन और एक चुटकी काला नमक मिलाकर पीने से गैस बनना बंद हो जाती है।

अलसी
गैस की समस्‍या से परेशान हैं तो अलसी के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से गैस की समस्‍या दूर हो जाती है।

अजवायन
दो ग्राम अजवायन को आधा ग्राम नमक के साथ चबाकर खायें। अगर अपच के चलते पेट दर्द हो रहा है तो वो भी ठीक हो जायेगा।

हिंगाष्टक चूर्ण
वैसे गैस से जुड़ी सभी दिक्कतों में हिंगाष्टक चूर्ण बहुत फायदा करता है। खाना खाने के बाद जरा सा चूर्ण पानी के साथ लें। ये गैस की समस्‍या को पूरी तरह से खत्म कर देता है।

लहसुन
गैस परेशान कर रही है तो एक लहसुन की फांक, चार मुनक्के के साथ चबाकर निगल जायें। मुनक्के के बीज निकाल कर यूज करें। गैस तुरंत बाहर निकल जायेगी।

मुंहासे और उसका दाग मिटाने का सबसे आसान 5 घरेलू नुस्‍खे

जामुन
जामुन के बीज को पानी में घिसकर चेहरे पर लगाएं। नारंगी के छिलकों को मुंहासों पर कुछ देर रगड़ें और फिर चेहरा धो लें।

छाछ
छाछ से चेहरा धोने से मुंहासे और उसके बाद पड़ने वाले दाग साफ होते हैं।

पपीते का गूदा
पके हुए पपीते का गूदा लेकर चेहर पर कुछ देर मालिश करें और फिर उसे थोड़ा सूखने तक छोड़ दें। इसके बाद चेहरे को पानी से धो लें और फिर नारियल या तिल के तेल से हल्‍की मसाज करें। इससे मुंहासों के दाग खत्‍म होंगे और चेहरा साफ होगा।

बेसन
करीब दस ग्राम बेसन और इतनी ही हल्‍दी को थोड़ी दही में मिलाकर चेहरे पर लगाएं और सूख जाने पर धो लें।

नीम, तुलसी
नीम, तुलसी, मेथी, पुदीना की थोड़ी पत्‍तियों को पीस लें। इसमें मुल्‍तानी मिट्टी, संतरे के छिलके का पाउडर और कपूरकाची मिलाकर पेस्‍ट बनायें और उसे चहरे पर लगाएं। सूखने पर धो लें।

होठों पर रोज-रोज लिप बाम लगाने से अच्‍छा है ये परमानेंट नुस्‍खा

मक्खन
रात को सोने से पहले हल्का-सा मक्खन होठों पर एक मिनट तक लगाएं, होंठ फटने बन्द हो जायेंगे।

गुलाबजल
एक छोटा चम्मच गुलाबजल में तीन से चार बूंद ग्लिसरीन को मिलाकर रख लें, इसे दिन में तीन से चार बार होंठों पर लगाएं आराम मिलेगा।

कैस्टर ऑयल
डेढ़ चम्मच कैस्टर ऑयल, 2 चम्मच बोरिक वैसलिन मिलाकर होंठों पर कम से कम 2 बार हल्के हाथों से लगाएं।

घी
गरम रोटी पर जो घी लगा होता है, उसे उंगली से होठों पर मलें, होंठ मुलायम हो जाएगें।

सरसों का तेल
सर्दी में रोज़ सुबह नाभि में दो से तीन बूंद सरसों का तेल को टपका लें, इससे होंठ फटेंगें नहीं।

पपीता खाने के ये 11 फायदे, उड़ा देंगे आपके होश!

पपीते के स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक गुण
गुणों की खान कहा जाने वाला पपीता आपके पेट के साथ आपकी त्‍वचा की खूबसूरती बढ़ने में भी आपकी मदद करता है। यह एक ऐसा फल जिसमें विटामिन सी, ए, पोटेशियम और कैल्शियम और आयरन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है इसके साथ ही स्वास्थ्य के लिए कई हितकारी गुण निहित होते हैं। पपीते के कुछ बेहतरीन स्‍वास्‍थ्‍य लाभों की सूची यहां पर दी गई है।

वजन घटाने में मददगार
मीठा होने के बावजूद कैलोरी में कम पपीते को वजन कम करने वाले लोगों को अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। इसके अलावा, पपीता में मौजूद फाइबर आपको संतुष्ट और पूर्ण महसूस करवाने के साथ आंतों के कार्यों को ठीक रखता है जिसके फलस्‍वरूप वजन घटाना आसान हो जाता है।

आंखों के लिए फायदेमंद
पपीता नेत्र रोगों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ए की मौजूदगी आंखों की रोशनी को कम होने से बचाती है। इसके सेवन से रतौंधी रोग का निवारण होता है और आंखों की ज्योति बढ़ती हैं।

कोलेस्ट्रोल कम करें
पपीते में फाइबर, विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होता है जो आपकी रक्त-शिराओं में कोलेस्ट्रोल के थक्कों को बनने देता। कोलेस्ट्रोल के थक्के दिल का दौरा पड़ने और उच्च रक्तचाप समेत कई अन्य ह्रदय रोगों का कारण बन सकते हैं।

माहवारी के दर्द से छुटकारा
पपीते में पैपेन नामक एंजाइम माहवारी के दौरान रक्त के प्रवाह को ठीक कर दर्द को दूर करने में मदद करता है। इसलिए माहवारी के दर्द से गुजर रही महिलाओं को अपने आहार में पपीता को शामिल करना चाहिए।

प्रतिरोधक क्षमता में मजबूती
आपकी इम्‍यूनिटी विभिन्‍न संक्रमणों के विरूद्ध ढाल का काम करती हैं। केवल एक पपीते में इतना विटामिन सी होता है जो आपके प्रतिदिन की विटामिन सी की आवश्यकता का लगभग 200 प्रतिशत होता है। इस तरह से ये आपकी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

डायबिटीज के रोगियों के लिए अच्छा
स्‍वाद में मीठा होने के बावजूद इसमें शुगर नाममात्र का होता है इसलिए पपीता डायबिटीज रोगियों के लिए आहार के रूप में एक बेहतरीन विकल्प है। इसके अलावा, जो लोग डायबिटीज के रोगी नहीं हैं, इसके सेवन से डायबिटीज होने के खतरों को दूर कर सकते हैं।

कैंसर को रोकने में मददगार
कुछ अध्‍ययनों के अनुसार, पपीते के सेवन से कोलन और प्रोजेक्ट कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है। पपीते में एंटी-ऑक्‍सीडेंट, फीटोन्यूट्रिएंट्स और फ्लेवोनॉयड्स प्रचूर मात्रा में होते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद विटामिन सी, बीटा कैरोटीन और विटामिन ई शरीर में कैंसर सेल को बनने से रोकते हैं। इसलिए अपने आहार में पपीता शमिल करें।

तनाव कम करें
इस कमाल के फल में तनाव को दूर करने की ताकत होती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बामा में हुए एक अध्‍ययन के अनुसार, लगभग 200 मिलीग्राम विटामिन सी स्ट्रेस हार्मोंन को संचालित करने में सक्षम होता है और पपीते में विटामिन सी प्रचुरता में उपलब्ध होता है।

पाचन को दुरुस्‍त करें
पपीते में फाइबर के साथ-साथ पपैन नामक एक एंजाइम होता है जो आपकी पाचन शक्ति को दुरुस्त रखता है। यह एंजाइम आहार को पचाने में अत्‍यंत मददगार होता है। जिन लोगों को पेट से संबंधित समस्‍या जैसे कब्‍ज की शिकायत हमेशा बनी रहती है, उन्‍हें पपीते का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।

भीगे बादाम से भी ज्‍यादा फायदेमंद है भीगे चने, जानिए कैसे?

बादाम से ज्‍यादा फायदेमंद है भीगे चने
भीगे बादाम हमारी सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, यह बात तो हम सभी जानते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि भीगे चने भीगे बादाम से भी ज्‍यादा फायदेमंद होते है। शायद आपको यह सुनकर आश्‍चर्य हो रहा होगा, लेकिन यह सच है। भीगे चने में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, फैट, फाइबर, कैल्शियम, आयरन व विटामिन्स पाए जाते हैं। जिससे यह सस्‍ती चीज बड़ी से बड़ी बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। साथ ही इससे खून साफ होता है जिससे सुंदरता बढ़ती है और यह दिमाग भी तेज करता है। अगर आप मोटापा कम करने की कोशिश कर रहे है तो नाश्‍ते में रोजाना भीगे चने का सेवन करें।
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इम्‍यूनिटी में मजबूती
शरीर को सबसे ज्‍यादा पोषण भीगे काले चने से मिलते हैं। चनों में बहुत सारे विटामिन्स और क्लोरोफिल के साथ फास्फोरस आदि मिनरल्स होते हैं जिन्हें खाने से शरीर को कोई बीमारी नहीं लगती है। रोजाना सुबह के समय भीगे चने खाने से आपको बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। इसके लिए काले चनों को रातभर भिगोकर रख लें और हर दिन सुबह दो मुट्ठी खाएं। कुछ दिनों में आपको फर्क महसूस होने लगेगा।

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डायबिटीज से बचाव
अगर आप डायबिटीज से परेशान है तो अपने आहार में भीगे चनों को शामिल करें। 25 ग्राम काले चने रात में भिगोकर सुबह खाली पेट सेवन करने से डायबिटीज दूर हो जाती है।

पेट की समस्‍याओं से राहत
चनों को रातभर पानी में भिगो दें। फिर सुबह चनों से पानी को अलग कर उसमें अदरक, जीरा और नमक को मिक्स करके खाये। चनों को इस तरह से खाने से कब्ज और पेट दर्द से राहत मिलती है।

एनर्जी से भरपूर
अगर आप पूरा दिन एनर्जी से भरपूर रहना चाहते हैं तो शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए भीगे चनों में नींबू, अदरक के टुकड़े, हल्का नमक और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं।

पुरुषों के लिए फायदेमंद
सुबह खाली पेट काले चने खाना पुरुषों के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है। चीनी के बर्तन में रात को चने भिगोकर रख दे। सुबह उठकर चनों को अच्‍छे से चबा-चबाकर खाएं। इसके लगातार सेवन करने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है और वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है। यानी पुरुषों की कमजोरी से जुड़ी समस्याएं खत्म हो जाती हैं।

चुटकियों में बालतोड़ ठीक करते हैं ये 5 घरेलू उपाय

रामबाण उपायों से करें बालतोड़ ठीक
जब शरीर के किसी भी हिस्‍से का एक भी बाल जड़ से टूट जाता है तो वहां घाव के साथ फोड़ा बन जाता है। और फिर इसमें पस बन जाती है। जिसे बालतोड़ के नाम से जाना जाता है। हालांकि बालतोड़ होना एक समान्य बात है, लेकिन इसमें असहनीय दर्द होता है और शरीर में बेचैनी बनी रहती है। दर्द इतना होता है कि कपड़ा लगने से भी पीडि़त इंसान चिल्‍ला उठता है। लेकिन अब आपको घबराने की जरूरत नहीं हैं क्‍योंकि आयुर्वेदिक उपायों के जरिए बालतोड़ के दर्द से निजात पाई जा सकती है। बालतोड़ को ठीक करने के आसान उपायों के बारे में आपको त्यागी पंचकर्मा और आयुर्वेदिक हॉस्पिटल की आयुर्वेद डॉक्‍टर शिल्पी बता रही है।
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सूजन दूर करें हल्‍दी
आयुर्वेदिक डॉक्‍टर शिल्पी का कहना है कि बालतोड़ होने पर हल्‍दी पाउडर का लेप बनाकर लगाने से बालतोड़ से जल्‍दी छुटकारा मिलता है। हल्‍दी में मौजूद एंटी-इफ्लेमेटरी और नैचुरल ब्‍लड प्‍यूरीफायर गुण बालतोड़ के कारण होने वाली सूजन और दर्द को दूर करता है।

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बालतोड़ के लिए मेहंदी
जिन लोगों को बालतोड़ वाले हिस्‍से में बहुत ज्‍यादा जलन होती है, उनके लिए मेहंदी बहुत ही उपयोगी उपाय हो सकता है। मेहंदी में मौजूद ठंडक गुण जलन को शांत करने में मदद करते हैं। जी हां पीसी हुई मेंहदी भिगोकर उसे बालतोड़ के स्थान पर गाढ़ा-गाढ़ा लेप सुबह और रात को लगाने से जलन के साथ-साथ बालतोड़ भी जल्‍दी ही ठीक हो जाता है।

एंटीबैक्टीरियल गुणों वाली नीम
नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण के साथ एंटीमाइक्रोबियल गुण होता है। यह बालतोड़ को आपकी त्वचा से पूरी तरह और बिना किसी दुष्प्रभाव के हटा देता है। इसके लिए मुट्ठी भर नीम की पत्तियों को लेकर उसको पीसकर लेप बना लें। इसे त्‍वचा के प्रभावित हिस्‍से पर लगा लें।

प्‍याज का जादू
प्‍याज में एंटीसेप्टिक गुण होते है, जिसके कारण यह बालतोड़ के उपचार में काम आता है। प्‍याज का एक स्‍लाइस घाव पर रखें और उसपर कपड़ा बांध लें। एक या दो घंटे के बाद इस कपड़े को हटा लें।

दही और जीरा पाउडर
दही और जीरे या काली मिर्च के पाउडर के इस्‍तेमाल से भी बालतोड़ को दूर किया जा सकता है। बस आपको जीरे को बारीक पीसकर उसे दही में मिलाकर पेस्‍ट बनाकर बालतोड़ पर लगाना है। इससे बालतोड़ की समस्‍या से जल्‍दी छुटकारा मिलता है। इन आयुर्वेदिक उपायों के जरिए आप बालतोड़ के दर्द से निजात पा सकते हो।

आंतों में कीड़ों का काल है ये घरेलू उपाय

आंतों के कीड़े
पेट में कीड़े पड़ जायें तो यह बहुत ही दुखदायी होता है। यह समस्‍या सबसे अधिक बच्‍चों में होती है लेकिन बड़ों की आंतों में भी कीड़े हो सकते हैं। ये कृमि लगभग 20 प्रकार के होते हैं जो अंतड़ियों में घाव पैदा कर सकते हैं। इसके कारण रोगी को बेचैनी, पेट में गैस बनना, दिल की धड़कन असामान्‍य होना, बदहजमी, पेट में दर्द, बुखार जैसी कई प्रकार की समस्‍यायें होती हैं। इसके कारण रोगी को खाने में रुचि नहीं होती और उसे चक्‍कर भी आते हैं। गंदगी के कारण ही पेट में कीड़े होते हैं। अशुद्ध और खुला भोजन करने वालों को यह समस्‍या अधिक होती है। घरेलू उपचार के जरिये इस समस्‍या का इलाज किया जा सकता है।

अजवायन
अजवायन का सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। इसके लिए अजवायन का चूर्ण आधा ग्राम और उतना ही गुड़ में गोली बनाकर दिन में तीन बार इसका सेवन मरीज को करायें। अजवायन में एंटी-बैक्‍टीरियल तत्‍व पाये जाते हैं जो कीडों को समाप्‍त कर देते हैं। अजवायन का सेवन सेव 2-3 दिन करने पर कीड़े पेट से पूरी तरह से समाप्‍त हो जायेंगे।

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काला नमक
चुटकी भर काला नमक और आधा ग्राम अजवायन चूर्ण मिला लीजिए, इस चूर्ण को रात के समय रोजाना गर्म पानी से लेने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं। अगर बड़ों को यह समस्‍या है तो काला नमक और अजवायन दोनों को बराबर मात्रा में लीजिए। सुबह-शाम इसका सेवन करने से पेट के कीड़े दूर हो जायेंगे।

अनार के छिलके
बच्‍चों और बड़ों दोनों में पेट के कीड़े हो जायें तो यह बहुत ही फायदेमंद उपचार है। अनार के छिलकों को सुखाकर इसका चूर्ण बना लीजिए। यह चूर्ण दिन में तीन बार एक-एक चम्मच लीजिए। कुछ दिनों तक इसका सेवन करने से पेट के कीड़े पूरी तरह से नष्‍ट हो जाते हैं।

नीम के पत्‍ते
नीम के पत्‍तों का सेवन करने से पेट की हर तरह की समस्‍या दूर हो जाती है। नीम के पत्‍ते एंटी-बॉयटिक होते हैं जो पेट के कीड़ों को नष्‍ट कर देते हैं। नीम के पत्‍तों को पीसकर उसमें शहद मिलकार पीने से जल्‍दी फायदा होता है और कीड़े नष्‍ट हो जाते हैं। सुबह के वक्‍त इनका सेवन करना अधिक फायदेमंद होता है।

टमाटर के जरिये
टमाटर का प्रयोग खाने का स्‍वाद बढ़ाने के साथ-साथ पेट के कीड़ों को नष्‍ट करने के लिए कर सकते हैं। टमाटर को काटकर, उसमें सेंधा नमक और कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर इसका सेवन कीजिए। इस चूर्ण का सेवन करने के बाद पेट के कीड़े मर कर गुदामार्ग से बाहर निकल जाते हैं।

लहसुन की चटनी
पेट की समस्‍या दूर करने के साथ आंतों को पूरी तरह से साफ करने के लिए लहसुन का प्रयोग करें। अगर बच्‍चे या बड़े किसी को भी पेट में कीड़े हैं तो उसे लहसुन की चटनी खिलायें। लहसुन की चटनी बनाकर उसमें थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम खाने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।

तुलसी के पत्‍ते
तुलसी भी एंटी-बैक्‍टीरियल होती है, किसी भी प्रकार के संक्रमण के उपचार के लिए इसका प्रयोग कर सकते हैं। पेट में कीड़े होने पर तुलसी के पत्तों का एक चम्मच रस दिन में दो बार पीने से पेट के कीड़े मरकर मल के साथ बाहर निकल जाते हैं। इसका सेवन करने से आंत पूरी तरह से साफ हो जाती है और पेट में गैस और कब्‍ज की भी शिकायत नहीं होती है।

कच्‍चे आम की गुठली
बच्‍चों या बड़ों की आंत में कीड़े पड़ गये हों तो कच्‍चे आम की गुठली का सेवन करने से कीड़े मल के रास्‍ते बाहर निकल जाते हैं। इसके लिए कच्चे आम की गुठली का चूर्ण दही या पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें। इसके नियमित सेवन से कुछ दिनों में ही आंत के कीड़े बाहर निकल जायेंगे।

इन कारगर उपायों से केवल 10 दिनों के अंदर अपने बालों को दोबारा उगाएं

बालों के झड़ने की समस्‍या
खूबसूरत बाल व्‍यक्तित्‍व में निखार लाने के साथ-साथ अच्‍छी सेहत का आईना भी होते हैं। बालों का बेवक्त झड़ना किसी की भी नींद उड़ा सकता है। बालों के झड़ने की समस्‍या आज एक महामारी बन गया है, जिसने दुनिया भर के लगभग हर उम्र और लिंग के लोगों को प्रभावित किया है। बालों के झड़ने की समस्‍या आपके समग्र व्यक्तित्व और आत्मविश्वास को अचानक झटका दे सकता है।

बाल झड़ने के कारण
जब बाल ऐनाजेन में प्रवेश करते हैं, तो बालों के विकास के चक्र का चरण, जिसे बालों के एक्टिव स्टेज के रूप में जाना जाता है, इसमें बालों की जड़ में कोशिकाएं तेजी से डाइविंग करना शुरू कर देती है। इस प्रकार से नए बालों का गठन होता है। बहुत से लोगों के बाल एक निश्चित अवधि में नहीं बढ़ते, और इसका मुख्‍य कारण कम सक्रिय चरण वृद्धि है। लेकिन अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्‍योंकि यहां दिये सुझावों की मदद से आपको 10 दिनों में अवरूद्ध बालों के विकास की प्रक्रिया में मदद मिलेगी।

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तनाव से लड़ें
बाल झड़ने की समस्‍या का सामना कर रहे, लोगों को अपने जीवन-शैली की जांच करनी चाहिए। नींद या तनाव के स्तर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन बालों के झड़ने को नेतृत्‍व करता है। इस समस्‍या से बचने के लिए अपनी जीवन-शैली को पुनर्निर्धारित करें और तनाव को दूर करने के हर संभव प्रयास करें।

सालमन खाओ
बालों के ना बढ़ने की मुख्‍य कारण सही पोषण की कमी है। सालमन, सार्डिन, ट्राउट और मैकरील जैसी समुद्री मछलियों में विटामिन डी और ओमेगा -3 फैटी एसिड की मौजूदगी बाल विकास को बढ़ावा देने में मदद करती हैं। अगर आप मांसाहार लेते हैं तो अपने आहार में नियमित रूप से मछली का सेवन करें। इससे देखते ही देखते आपके बाल झड़ने की समस्या खत्म हो जायेगी और साथ ही नये बाल भी उगने लगेंगे।

एवोकाडो, कद्दू के बीज और अखरोट
एवोकाडो, कद्दू के बीज और अखरोट, यह सभी खाद्य पदार्थ ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं। और शाकाहारियों के लिए किसी वरदान की तरह होते हैं। साथ ही इसमें बालों के झड़ने के कारणों में से एक कारण जिंक का अभाव, मौजूद होता है।

कस्तूरी
जिंक कोशिकाओं के उत्पादन, ऊतकों के विकास और मरम्मत के लिए महत्‍वपूर्ण होता है। साथ ही जिंक बालों के रोम को बढ़ावा देने में मदद करता है। इसके अलावा प्रोटीन आपके शरीर और बाल स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। कस्तूरी जिंक, आयरन और प्रोटीन से भरपूर होती हैं। छह कस्‍तूरी में दैनिक जरूरत का लगभग 220 प्रतिशत जिंक, 33 प्रतिशत आयरन और आठ ग्राम प्रोटीन होता है।

अंडे
बालों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए अंडा बेहद जरूरी हैं। अंडे प्रोटीन, जिंक, सेलेनियम, सल्फर और आयरन का एक समृद्ध स्रोत हैं। आयरन की कमी से प्रीमेनोपोज महिलाओं में बालों के झड़ने के मुख्य कारणों में से एक हो सकता है। साथ ही इसमें मौजूद लेसिथिन तत्व बालों के फॉलिकल्स को मजबूत बनाने का काम करते हैं। ये उनका टूटना कम करते हैं और उनमें जान भर देते हैं।

हरी पत्तेदार सब्जियां
हरी पत्‍तेदार सब्जियां आयरन का महत्‍वपूर्ण स्रोत है। बालों के गिरने की समस्‍या का अनुभव करने वाले शाकाहारियों को पालक जैसी हरी सब्‍जी का इस्‍तेमाल करना चाहिए। इसमें पशु आ‍धारित स्रोतों से कम कोलेस्‍ट्रॉल होता है। इसके अलावा, पालक और अन्य हरी सब्जियां विटामिन ‘सी’ और ‘ए’ से भरपूर होती हैं। ये दोनों कोलेजन के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

बादाम खाने के हैं 13 आश्‍चर्यजनक लाभ

रोज खायें बादाम रहें सेहतमंद
स्वस्थ‍ रहने के लिए प्रतिदिन बादाम का सेवन करें। बादाम में प्रोटीन, वसा, विटामिन और मिनेरल पर्याप्त मात्रा में होते हैं, इसलिए यह स्वास्‍थ्‍य के लिए तो अच्छा है ही, त्वचा के लिए भी अच्छा है। बादाम में मौजूद पोषक तत्व याद्दाश्त बढ़ाने का भी काम करते हैं।

दिल को बनाये सेहतमंद
बादाम आपके दिल को सेहतमंद बनाये रखने का काम करता है। शोधों में यह बात सामने आयी है कि सप्‍ताह में पांच दिन बादाम का सेवन करने वाले लोगों में सामान्‍य लोगों की अपेक्षा हृदयाघात का खतरा 50 फीसदी तक कम होता है। बादाम में मौजूद विटामिन ई, एण्टीआक्सीडेंट की तरह काम करता है। यह दिल की बीमारियों को दूर रख उसे बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है।

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सुधारे रक्‍त संचार
बादाम में पौटेशियम की मात्रा काफी अधिक होती है और साथ ही सोडियम भी काफी कम मात्रा में होता है। इससे हमारे शरीर में रक्‍त संचार सुचारू बना रहता है। रक्‍त संचार सुचारू रहने से शरीर के हर अंग में ऑक्‍सीजन सही प्रकार पहुंचती है और सभी अवयवों को सामान्‍य रूप से काम करने में मदद मिलती है।

हड्डियां बनाये मजबूत
बादाम में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। कैल्शियम हड्डियों के लिए जरूरी होता है। इसलिए बादाम का सेवन करने वालों को हड्डियों की बीमारी यानी ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा कम हो जाता है। इसके साथ ही कैल्शियम दांतों को भी मजबूत बनाने का काम करता है।

कैंसर का खतरा कम करे
बादाम में फाइबर काफी अधिक मात्रा में होता है। फाइबर हमारी पाचन क्रिया को दुरुस्‍त बनाये रखने का काम करता है। पाचन क्रिया ठीक रहने से कोलोन कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है।

शक्तिवर्द्धक
बादाम में कई पोषक तत्‍व होते हैं। इसमें प्रोटीन, मैगनीज, कॉपर, राइबोफ्लाविन आदि मौजूद होते हैं। ये सब पोषक तत्‍व शरीर को भरपूर शक्ति और ऊर्जा प्रदान करते हैं। सुबह के समय बादाम के साथ दूध का सेवन करने से शरीर को पूरी शक्ति मिलती है।

याद्दाश्त बढ़ाये
स्‍मरण शक्ति को अच्‍छा बनाये रखने के लिए बादाम को काफी उपयोगी माना जाता है। बादाम का सेवन अल्‍जाइमर और अन्‍य मस्तिष्‍क संबंधी रोगों को दूर करने में मदद करता है। रोजाना सुबह पांच बादाम भिगोकर खाने से दिमाग तेज होता है।

डायबिटीज से बचाये
शोध में यह बात सामने आयी है कि बादाम में मौजूद तत्‍व भोजन के बाद बढ़ने वाली रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने में मदद करते हैं। इससे शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर सामान्‍य बना रहता है। नियमित रूप से बादाम का सेवन करने से शरीर को डायबिटीज से लड़ने में मदद मिलती है।

प्रसव बनाये आसान
बादाम में फॉलिक एसिड होता है, जो प्रसव संबंधी समस्‍याओं से बचाने का काम करता है। फॉलिक एसिड भ्रूण के समुचित विकास में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसा माना जाता है कि जो महिलायें गर्भावस्‍था के दौरान फॉलिक एसिड का सेवन करती हैं, उनके बच्‍चे अपेक्षाकृत अधिक स्‍वस्‍थ होते हैं।

त्‍वचा का रखे ध्‍यान
बादाम का तेल बेहतरीन माश्‍चराइजर है। इसमें ऑलिन ग्‍लासेराइड एसिड होता है। जो एक्‍ने, ब्‍लैकहैड्स को दूर करता है साथ ही शुष्‍क त्‍वचा से भी निजात दिलाता है। इसमें विटमिन ई भी होता है, जो स्‍वस्‍थ त्‍वचा के लिए जरूरी माना जाता है। यह त्‍वचा पर चमक लाने का काम करता है। इसके साथ ही छोटे बच्‍चों की मालिश के लिए भी बादाम का इस्‍तेमाल किया जाता है, जिससे उनकी हड्डियां मजबूत बनती हैं।

नटखट कान्‍हा को इसलिए पसंद था मक्‍खन, जानें इसके 8 फायदे!

स्‍वास्‍थ्‍य गुणों से भरपूर मक्‍खन
मक्‍खन में कैलोरी काफी ज्यादा होने के कारण अक्‍सर वजन बढ़ने के डर से लोग इसे खाना पसंद नहीं करते। लेकिन क्या सच में मक्‍खन सेहत के लिए नुकसानदेह होता है? जी नहीं, क्‍या आप जानते हैं कि मक्‍खन में तमाम जरूरी विटामिन और एंटीआक्सीडेंट मौजूद होते हैं। इसके अलावा गाजर के बाद मक्‍खन ही एक ऐसी चीज है, जिसमें विटामिन ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है। साथ ही इसमें विटामिन ई और कुछ फैटी एसिड भी होते हैं। जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि आखिर कौन सा मक्‍खन हमारे लिये उपयुक्त होता है? पीले मक्‍खन की अपेक्षा घर में बना सफेद मक्‍खन कैलोरी में कम होता है और अगर इसे सीमित मात्रा में लिया जाये तो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। आइए मक्‍खन के फायदों के बारे में जानते हैं।
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आखिर क्‍यों बेहतर है सफेद मक्‍खन
घर में बना सफेद मक्खन पीले मक्खन की तुलना में ज्यादा पौष्टिक होता है। क्योंकि यह दूध से सीधे निकाला जाता है। साथ ही यह शरीर द्वारा जल्दी ही पचा लिया जाता है। इसमें चूंकि किसी तरह के प्रीजर्वेटिव्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता जिसके कारण यह यलो बटर की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होता है। इसमें पानी ज्यादा होता है और सोडियम की मिलावट नहीं होती। आइए जानें, संतुलित मात्रा में घर के बने मक्खन का सेवन आपको सेहत से संबंधित किन गंभीर समस्याओं से बचाता है।

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थायरॉइड के काम-काज में सुधार
सफेद मक्‍खन में आयोडीन की मात्रा अधिक होने के कारण यह थायरॉइड के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा इसमें मौजूद विटामिन ए थायरॉइड ग्‍लैंड के काम-काज और इसे मजबूत बनाने में मददगार होता है।

दिल के रोग दूर करें
मेडि‌कल रिसर्च काउंसिल के शोध के अनुसार, जो लोग घर में बने मक्खन का सेवन करते हैं उन्हें दिल के रोगों का खतरा आधा होता है। इसमें विटामिन ए, डी, के2 और ई के अलावा लेसिथिन, आयोडीन और सेलेनियम जैसे तत्व अच्छी मात्रा में होते हैं जो दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।

बच्‍चों के दिमागी विकास के लिए फायदेमंद
सफेद मक्‍खन में मौजूद कोलेस्‍ट्रॉल और फैट बच्‍चों के दिमागी विकास के लिये बहुत अच्‍छा माना जाता है। साथ ही यह बच्‍चों की आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। बच्‍चों की आंखों की रोशनी बनी रहे इसलिये उन्‍हें दूध और मक्‍खन खिलाना चाहिये।

ऑस्टियोपोरोसिस
मक्खन में विटामिन्, मिनरल और कैल्शियम की भरपूर मात्रा होती है जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। इसलिए दांतों और हड्डियों से जुड़े रोग, खासतौर पर ओस्टियोपोरोसिस के उपचार में सफेद मक्‍खन का सेवन फायदेमंद होता है।

विटामिन डी का भंडार
हमारे शरीर को कैल्शियम सोखने के लिए विटामिन डी की जरूरत होती है और मक्‍खन में विटामिन डी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसलिए विटामिन डी की कमी वाले लोगों को इसे नाश्‍ते में खाना चाहिए।

कैंसर से बचाव
मक्खन में मौजूद फैटी एसिड कैंसर से बचाव में बहुत मददगार होता है। इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट की मात्रा अधिक होने के कारण यह कैंसर या ट्यूमर से रक्षा करता है। इसके अलावा यह त्‍वचा की फ्री रेडिकल्‍स से सुरक्षा करते हैं, तभी तो शिया बटर को एंटी एजिंग क्रीम के लिये प्रयोग किया जाता है।

त्‍वचा पर कमाल का जादू करता है सिर्फ ‘1 आलूबुखारा’

चेहरे के लिए कमाल है आलूबुखारा
स्‍वाद में खट्टा मीठा और टेस्‍टी आलूबुखारा सेहत के लिए बेहद ही फायदेमंद होता है। लेकिन इसमें मौजूद प्रोटीन मिनरल और आयरन जैसे पोषक तत्‍वों के कारण आलूबूखारा शरीर के साथ-साथ चेहरे और बालों के लिए भी बहुत अच्‍छा माना जाता हैं। जी हां आलूबुखारे में विटामिन ‘ए’ और विटामिन ‘सी’ के साथ फाइबर और एंटीऑक्‍सीडेंट भी पाये जाते हैं जो आपकी त्‍वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। आइए जानें ‘1 अकेला’ आलूबुखारा आपकी त्‍वचा के लिए कितना फायदेमंद होता है।

मुंहासो के निशान हटाएं
आलूबुखारा चेहरे पर मुंहासों के दाग मिटाने के साथ चेहरे का कालापन भी दूर करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट के कारण यह दाग-धब्‍बे हटाने में मदद करता है। साथ ही यह चेहरे के ब्‍लड सर्कुलेशन को बढ़ता है जिससे त्‍वचा में ग्‍लो आता है।

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त्‍वचा को चमकदार बनाएं
अगर आप त्‍वचा को चमकदार बनाना चाहते हैं तो अपने आहार में आलूबुखारे को शामिल करें। इसमें मौजूद विटामिन सी त्‍वचा को चमकदार और लचीला बनाते है। साथ ही यह चेहरे की रंगत निखारने के साथ आपको लंबे समय तक जवां भी बनाये रखता है। साथ ही अपने डाइट में आलूबुखारे को शामिल करके आप धूप की खतरनाक किरणों से भी बच सकती हैं क्‍योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है।

उम्र के असर को बेअसर करें
विटामिन्‍स से भरपूर होने के कारण आलूबुखारा चेहरे को बढ़ती उम्र के नुकसान से बचाता है। साथ ही इस फल में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट चेहरे पर असमय झुर्रियां पड़ने नहीं देता। अगर आप अपने चेहरे को लंबे समय तक जवां बनाए रखना चाहती है तो आलूबुखारे के गुदे से चेहरे की मसाज करें। या इसका मास्‍क बनाकर अपने चेहरे पर लगाएं। आलूबुखारे में मौजूद पौष्टिक तत्‍व न केवल चेहरे को असमय झुर्रियों से बचाते है बल्कि इससे चेहरे की झाइयां भी कम होती है।

बालों के लिए वरदान
आलूबुखारे में मौजूद विटामिन सी बालों की जड़ों में ब्‍लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है। आलूबुखारे के बीज को पीसकर पानी मिक्‍स करके बालों की जड़ों में लगाने डैंड्रफ और डैंड्रफ से होने वाली खुजली दूर हो जाती है। इसके अलावा आलूबुखारे में विटामिन और प्रोटीन की ज्‍यादा मात्रा बालों को मजबूत और घना बनाते है। साथ ही विटामिन ई बालों को झड़ने से भी रोकता है। साथ ही यह बालों के प्राकृतिक रंग को भी बरकरार रखता है।

मोर पंख और अंडे के छिलके से नहीं बल्कि इन तरीकों से भगाएं छिपकली

छिपकली भगाने के जबरदस्‍त उपाय
छिपकली को देखते ही मुंह से चीख निकल आती है। जी हां छिपकली से किसे डर नहीं लगता खासकर महिलाएं तो इसे देखकर बुरी तरह से घबरा जाती है। मुझे तो छिपकली से इतना डर लगता है कि जिस कमरे में छिपकली होती है, मैं उस कमरे में जाती भी नहीं हूं। यहां तक कि मैं छिपकली को भगाने के लिए मैंने अपने घर के सभी कोने पर मोर पंख और अंडे के छिलके का रख कर देख लिया, लेकिन छिपकली उसी के आस-पास घूमती रहती है। यानी मेरा कोई भी उपाय सफल नहीं हुआ। इसलिए इसे भगाने के अन्‍य असरदार उपायों की खोज कर रही हूं। अगर आप भी मेरी तरह छिपकली को भगाने के उपायों की खोज कर रहे हैं तो इस स्‍लाइड शो को पढ़ें।

काली मिर्च का स्‍प्रे
आप काली मिर्च के स्प्रे का प्रयोग करके भी छिपकलियों को दूर भगा सकते हैं। इस स्प्रे को बनाना काफी आसान है। इसके लिए आपको किसी प्रकार के केमिकल की आवश्यकता नहीं पड़ती। स्‍प्रे बनाने के लिए बस आपको काली मिर्च पाउडर को पानी के साथ मिलाना है। अब इस मिश्रण को स्प्रे बोतल में डालें तथा इसे घर के विभिन्न कोनों में छिड़कें, जहां छिपकली होने की संभावना अधिक होती है। इसकी तेज गंध आपको छिपकलियों से आसानी से छुटकारा दिला सकती है। लेकिन ध्‍यान रहें कि प्रयोग से पहले इसे अच्छे से हिला लें।

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लहसुन और प्‍याज
एक स्‍प्रे बॉटल लेकर इसमें प्‍याज का रस और पानी भर लें। फिर इसमें कुछ बूंदें लहसुन के रस की मिलाकर, अच्‍छे से मिला लें। अब इसे घर के हर कोने में छिड़क दें, जहां-जहां छिपकली सबसे ज्‍यादा आती है। आप चाहें तो लहसुन की कली भी रख सकते है, इससे भी छिपकलियां दूर भाग जाती है। इसके अलावा प्‍याज को स्‍लाइस में काटकर उसे धागे से बांधकर लटकने से भी वहां आने वाली छिपकली भाग जाती है। प्‍याज में सल्‍फर ज्‍यादा मात्रा में होता है जिससे बुरी दुर्गंध निकलती है और छिपकली भाग जाती है।

बर्फ का ठंडा पानी
क्या आपने कभी गौर किया है कि सर्दियों के दिनों में छिपकलियां बहुत कम नजर आती हैं? यानि उसका ठंड ज्‍यादा लगती है। ऐसे में जब छिपकली नजर आए तो उस पर ठंडे बर्फ वाले पानी को स्‍प्रे से छिड़क दें। इससे उसको ठंडा लगेगा और वह भाग जाएगी। ऐसा कई दिन तक लगातार करें, ताकि वह घर ही छोड़ दें।

फिनाइल की गोलियां
अक्‍सर हम कपड़ों को कीड़ों से बचाने के लिए फिनाइल की गोलियां कपड़ों के बीच में रखते हैं। ठीक उसी तरह यह गोलियां छिपकलियों को दूर भगाती हैं। बस आपको इतना करना है कि जहां भी छिपकली दिखें, वहां दो फिनाइल की गोलियां रख दें। इसकी गंध से छिपकलियां आपके घर से दूर कर देगी।

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