घरेलू उपाय 3 home medicine

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मोटी से मोटी तोंद भी नौवें दिन गायब हो जाएगी! बस सुबह ये करे

मोशन सिकनेस की पहचान
मोशन सिकनेस होने पर उबकाई आ सकती है या फिर अपच, ज्याद पसीना आना, असहज महसूस होना, चेहरा पीला पड़ना और सिर चकराना आदि हो सकते हैं। यह समस्या सफर की शुरुआत से लेकर कुछ घंटों तक रहती है। कुछ मामलों में यह 2 से 4 दिन तक भी रह सकती है।

क्या है इसका इलाज
आमतौर पर मोशन सिकनेस के लिए एंटी हिस्टामाइन दवाइयां दी जाती हैं, जिससे भीतरी कान की संवेदना कम हो जाती है। यह दवाइयां तभी काम करती हैं, जब इसे मोशन सिकनेस शुरू होने से पहले यानी सफर से पहले ले लिया जाए।

अदरक
कहीं सफर करने से पहले एक कप अदरक की चाय पीने से मोशन सिकनेस के कारण आने वाली उल्टी नहीं होती हैं। साथ ही मतली होने पर भी एक कप अदरक चाय से आराम मिलता है।

सेब साइडर सिरका
सेब साइडर सिरका शरीर पर एक क्षारीय और पीएच संतुलन प्रभाव डालता है। मोशन सिकनेस होने पर एक कप गुनगुने पानी में एत चम्मच सेब साइडर सिरका और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से, मोशन सिकनेस ठीक हो जाती है।

पेपरमिंट
पेपरमिंट मोशन सिकनेस की समस्या से तुरंत निजात दिलाता है। पुदीना में मौजूद मेन्थॉल पेट की मांसपेशियों को शांत करता है और मतली को कम करने तथा मोशन सिकनेस की समस्या को दूर करने में मदद करता है।

नींबू
ताजे नींबू या ताजे नीबू के रस में साइट्रिक एसिड होता है, जो यात्रा के दौरान होने वाली उल्टी, मोशन शिकनेस और नाज़ुक पेट को ठीक कर सकता है। यहां तक की नींबू का खशबू भी दिमाग की मदद से इस समस्या में राहत दिला सकती है।

ग्रीन एप्पल
ग्रीन एप्पल (हरे सेब) में मौजूद पेक्टिन पेट में मौजूद एसिड को बेअसर करने में मदद करता है और इसके कारण हो रही मोशन सिकनेस की समस्या से राहत दिलाता है। इसके अलावा हरे सेब में पाई जाने वाली प्राकृतिक शर्करा पेट को ठईक रखने में मदद करती है।

सौल्ट क्रैकर्स (CRACKERS)
क्रैकर्स आसानी से पचने वाला नाश्ता होते हैं और पेट के लिए भी बहुत ही अच्छे होते हैं। नमकीन और सुगंधित और बिना मीठे वाले ये क्रैकर्स अतिरिक्त एसिड को सोख लेते हैं और मोशन सिकनेस को रोकने के लिए इस्तेमाल किये जा सकते हैं।

बालों को घना बनाने के लिए कैसे करें कड़ी पत्‍ते का इस्‍तेमाल?

लाभ पहुचाते हैं करी पत्ते
करी पत्तों में बहुत मात्रा में प्रोटीन और बीटा कैरोटीन होता है, जो बालों को क्षतिग्रस्‍त होने से रोकने के साथ ही बालों को पतला होने से रोकने में मदद करता है। यह बालों के रोम को नया जीवन प्रदान करता है। हमें इसका उपयोग सब्ज़ियों के साथ करना चाहिए जो की बहुत ही गुणकारी होता है। यह बालों के शाफ़्ट (वह बाल जो सर से थोड़ा ऊपर होते है) को भी मजबूती प्रदान करता है। इसके बारे में विस्‍तार से जानते हैं।

बालों की जड़ों को मज़बूत बनायें
ज़रूरत से ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल और प्रदूषण की वजह से बालों को काफी नुक्सान होता है। करी पत्ते में वो सारे पोषण तत्व पाये जाते हैं, जो बालों को स्वस्थ रखते हैं। करी पत्तों को पीस कर इसका लेप बना लें फिर इसे सीधे बालों की जड़ों में लगाएं या आप करी पत्ते को खा भी सकते हैं, अगर आपको इसके कड़वे स्वाद से कोई परेशानी नहीं है। इससे आपके बाल काले, लंबे और घने हो जाएंगें साथी ही बालों की जड़ें भी मज़बूत होंगी।

सुबह एक ग्लास = रोज 3 किलो चर्बी गायब!

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बालों का गिरना कम करें
करी पत्ता में विटामिन बी1 बी3 बी9 और सी होता है। इसके अलावा इसमें आयरन, कैल्शियम और फॉस्फोरस होते हैं। इसके रोज़ाना सेवन से आपके बाल काले लंबे और घने होने लगेंगे। यही नहीं यह बालों को डैंड्रफ से भी बचाती है।

करी पत्ते का तेल
करी पत्ते का एक गुच्छा ले कर उसे साफ पानी से धो लें और सूरज की धूप में तब तक सुखा लें, जब तक कि यह सूख कर कड़ा न हो जाए। फिर इसे पाउडर के रूप में पीस लें अब 200 एम एल नारियल के तेल में या फिर जैतून के तेल में लगभग 4 से 5 चम्मच कड़ी पत्ती मिक्स कर के उबाल लें। दो मिनट के बाद आंच बंद कर के तेल को ठंडा होने के लिए रख दें। तेल को छान कर किसी एयर टाइट शीशी में भर कर रख लें।

बालों के लिए बनाएं मास्क
करी पत्ते लें और इसे पीस कर इसका पेस्ट बना लें। अब इसमें थोड़ा दही मिलाएं और इसे अपने बालों पर लगाएं। इस मिश्रण को बालों में 20-25 मिनट के लिए छोड़ दें, फिर शैम्पू से बालों को धो दें। इससे आप के बाल काले और घने हो जाएंगे।

करी पत्ते की चाय बनायें
करी पत्ते को पानी में उबाल लें अब इसमें एक नींबू निचोड़ लें और चीनी मिलाएं। एक हफ्ते तक इसे पीयें। यह आपके बालों लंबा, घना, और सफ़ेद होने से बचाएगा। यही नहीं यह आपके पाचन तंत्र के लिए भी काफी फायदेमंद है।

दही और करी पत्ते का मिश्रण
आधा कप करी पत्तो को दही के साथ पीस ले व उस मिश्रण को अपने बालो पे लगाये, व कुछ मिनिटो बाद धो ले। हमें हमारे रोज के आहार के साथ करी पत्तो का भी सेवन करना चाहिए, यह बहुत ही गुणकारी होता है।

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बाल सफेद होने का इलाज
तनाव, शराब पीने, सिगरेट पीने, आयु, आनुवंशिकता के कारण समय से पहले काफी लोगो के बाल सफ़ेद हो जाते है। करी पत्तो में विटामिन ‘बी’ होता है जो बालो की जड़ो को मजबूती व पोषण प्रदान करके बालो का प्राकर्तिक रंग फिर से ले आता है।

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एड़ियों में हो कैसा भी दर्द, 5 मिनट में ठीक कर देंगे ये 5 आसान घरेलू उपाय

बर्फ की सिंकाई
एड़ियों के दर्द में बर्फ की सिंकाई से राहत पाई जा सकती है। बर्फ की ठंडे प्रभाव से मांसपेशियों में खिंचाव के कारण या नसों पर दबाव के कारण होने वाले दर्द और सूजन दोनों से राहत मिलती है। इसकी सिंकाई के लिए बर्फ के टुकड़ों को किसी प्लास्टिक बैग में या कपड़े में भर लें और फिर इसे दर्द वाली जगह पर रगड़ें। इसके अलावा पानी के बॉटल को फ्रीज करके भी दर्द वाली जगह पर सिंकाई कर सकते हैं। 15 मिनट की सिंकाई इसके लिए पर्याप्त है।

तेल की मालिश
दर्द से राहत पाने का सबसे अच्छा तरीका मसाज है। इससे दर्द से तुरंत राहत मिलती है। मसाज करने से मसल्स रिलैक्स होती हैं और ब्लड सर्कुलेशन ठीक होता है। इसके लिए जैतून का तेल, नारियल का तेल, सरसों का तेल आदि लेकर दर्द वाली जगह पर थोड़ा सा लगाएं और फिर मसाज करें। दिन में 3 बार 10-10 मिनट की मसाज करने से दर्द ठीक हो जाएगा और सूजन भी कम हो जाएगी।

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स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज
स्ट्रेचिंग के द्वारा भी एड़ियों और तलवों के सामान्य दर्द से राहत पाई जा सकती है। इसके लिए नंगे पांव दीवार के पास खड़े हो जाएं। अब दीवार का सहारा लेकर अपने एड़ियों के सहारे खड़े हो जाएं और शरीर के वजन को ऊपर की तरफ खींचें। इसी स्थिति में दीवार को हाथों से धक्का दें और दबाव बनाएं। इस स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज से एड़ियों के दर्द से आपको तुरंत राहत मिलेगी।

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हल्दी का प्रयोग
हल्दी को पुराने समय से दर्द निवारक के रूप में जाना जाता है। हल्दी में एक खास तत्व होता है जिसे कर्क्युमिन कहते हैं। ये तत्व दर्द और सूजन से राहत दिलाता है। इसके लिए एक ग्लास दूध में आधा चम्मच हल्दी डालें और इसे 5 मिनट हल्की आंच पर गर्म करें। अब इस दूध में एक चम्मच शहद मिलाएं और इसे पी लें। एड़ी ही नहीं ये दूध शरीर के किसी भी हिस्से के दर्द से राहत दिलाने में कारगर है।

सेंधा नमक और पानी
नमक पानी भी एड़ियों और तलवों के दर्द में बहुत कारगर नुस्खा है। इसके लिए किसी बड़े बर्तन में गुनगुना पानी भर लें और इसमें दो चम्मच सेंधा नमक मिला लें। अगर सेंधा नमक नहीं है तो सामान्य नमक भी ले सकते हैं। इस पानी में नमक मिलाने के बाद पैरों को इस पानी में डाल लें और 15-20 मिनट तक पैरों को सीझने दें। सेंधा नमक में मौजूद मैग्नीशियम सल्फेट दर्द और सूजन से आसानी से राहत दिलाता है। 20 मिनट बाद पैरों को सामान्य पानी से धुलकर इसपर मॉश्चराइजर लगा लें।

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बच्चों को इस तरह खिलाएं अजवाइन, पेट के सभी रोग होंगे दूर

अजवाइन के स्वास्थ्य लाभ
भारतीय खानपान में अजवाइन का प्रयोग सदियों से होता आया है। अजवाइन पाचक, रुचिकारक, तीक्ष्ण, गर्म, चटपटी, कड़वी और पित्तवर्द्धक होती है। पाचक औषधियों में इसका बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। आयुर्वेद के अनुसार अजवाइन पाचन को दुरुस्त रखती है। यह कफ, पेट तथा छाती का दर्द और कृमि रोग में फायदेमंद होती है। साथ ही हिचकी, जी मचलाना, डकार, बदहजमी, मूत्र का रुकना और पथरी आदि बीमारी में भी लाभप्रद होती है।

सर्दी जुकाम में लाभकारी
बंद नाक या सर्दी जुकाम होने पर अजवाइन को दरदरा कूट कर महीन कपड़े में बांधकर सूंघें। सर्दी में ठंड लगने पर थोड़ी-सी अजावाइन को अच्छी तरह चबाएं और चबाने के बाद पानी के साथ निगल लें। ठंड से राहत मिलेगी।

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पी‍रियड्स का दर्द दूर करें
पीरियड्स में होने वाले दर्द का कम करने के लिए इसका उपयोग अच्‍छा रहता है। 15 से 30 दिनों तक भोजन के बाद या बीच में गुनगुने पानी के साथ अजवायन का सेवन करने से दर्द कम हो जाता है।

वजन कम करने में सहायक
अजवाइन मोटापे कम करने में भी उपयोगी होती है। रात में एक चम्मच अजवाइन को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह छान कर एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर पीने से लाभ होता है। इसके नियमित सेवन से मोटापा कम होता है।

गर्भावस्‍था में लाभकारी
गर्भावस्‍था के दौरान अजवाइन का सेवन करना महिलाओं के लिए फायदेमंदह होता है। इससे न केवल ब्‍लड साफ रहता है बल्कि पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को संचालित भी करता है। डिलिवरी के बाद भी अजावइन का पानी पीना महिलाओं के लिए अच्‍छा रहता है।

पाचन तंत्र के लिए उपयोगी
पेट में कीड़े हैं तो काले नमक के साथ अजवाइन खाएं। पेट खराब होने पर अजवाइन को चबाकर खाएं और एक कप गर्म पानी पीएं। लीवर की परेशानी है तो 3 ग्राम अजवाइन और आधा ग्राम नमक भोजन के बाद लेने से काफी लाभ होगा। पाचन तंत्र में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर मट्ठे के साथ अजवाइन लें, आराम मिलेगा।

मुंह की दुर्गंध दूर भगाए
मुंह से दुर्गध आने पर थोड़ी सी अजवाइन को पानी में उबाल लें। इस पानी से दिन में दो से तीन बार कुल्ला करने पर मुंह की दुर्गंध समाप्‍त हो जाती है।

खांसी में फायदेमंद
अजवाइन का सेवन करना खांसी में भी बहुत लाभकारी होता है। खांसी होने पर अजवाइन के रस में दो चुटकी काला नमक मिलाकर उसका सेवन करें और उसके बाद गर्म पानी पी लें। इससे आपकी खांसी ठीक हो जाएगी।

मसूड़ों में सूजन दूर करें
मसूड़ों में सूजन होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूंदों को गुनगुने पानी में डालकर कुल्ला करने से सूजन कम होती है। अजवाइन से बना मंजन मसूढ़ों से जुड़ी सभी ब‍ीमारियों को दूर करता हैं। इसको बनाने के‍ लिए अजवाइन को भूनकर व पीसकर मंजन बना लें।

गठिया में लाभकारी
गठिया के दर्द से राहत पाने के लिए अजवाइन के चूर्ण की पोटली बनाकर सेकें। इससे दर्द में आराम पहुंचता है। साथ सरसों के तेल में अजवाइन डाल कर गर्म करें। इससे जोड़ों की मालिश करने पर दर्द से आराम मिलेगा। गठिया रोग को ठीक करने के लिए अजवाइन का रस आधा कप और आधा चम्मच पिसी सोंठ पानी मिलाकर लें।

विश्व हास्य दिवस : हंसी और योग की जुगलबंदी है सेहत के लिए कमाल

हंसी और योग की जुगलबंदी
सुबह- सुबह अगर आप अपने आस पास के पार्क में देखें तो बहुत से लोग एक पास खडे या बैठे नजर आ ही जायेंगे और बिना किसी बात के ठहाके लगाते दिख जाएंगे। दरअसल, यह तनाव भगाने का एक सबसे अच्‍छा तरीका है जिसे ‘लाफ्टर थेरेपी’ कहा जाता है। लेकिन जब हंसी के साथ योग को मिला दिया जाता है तो ये बन जाता है ‘लाफ्टर योग’। लाफ्टर योग सेहत के लिए बेहद लाभदायक होता है। तो चलिये जाने लाफ्टर योग और इसके लाभ….!

लाफ्टर योग
हंसी और योग को मिलाकर हास्य योग बनता है, जिसमें प्राणायाम (लंबी-लंबी सांसें लेते) के साथ हंसी के अलग-अलग कसरत करना सिखाया जाता है। हास्य योग के तहत जोर-जोर से ठहाके मारकर, बिना किसी वजह, बेबाक हंसने का अभ्यास किया जाता है। लाफ्टर योगा 1995 में भारत में डॉक्टर मदन कटारिया ने शुरू किया था। अपनी रिसर्च में डॉ. कटारिया ने पाया कि ठहाके लगाने से हंसना शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बेहतरी में मददगार है। डॉ. कटारिया के अनुसार लाफ्टर योग का सिद्धांत एक वैज्ञानिक तथ्य पर आधारित है कि शरीर नकली और असली हंसी में फर्क नहीं कर सकता है। कोई भी एक समान भौतिक व मानसिक लाभ पाता है।

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अच्छा मूड
चाहे आपका निजी जीवन हो, व्यवसायिक जीवन या फिर सामाजिक जीवन, आप जो कुछ भी करते हैं वह उसमें अहम भूमिका निभाता है आपका ‘मूड’। अगर आपका मूड अच्छा है तो आप बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं। लाफ्टर योग आपकी मस्तिष्क कोशिकाओं में एंडोरफिन नामक रसायन उत्पन्न करके कुछ ही मिनटों में आपके मूड को बेहतर कर देता है। इसे करने से आप दिनभर खुश और अच्छे मूड में रहते हैं और वास्तविक हंसी हंस पाते हैं।

स्वास्थ्य लाभ
लाफ्टर योग इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है जिससे आप न बीमार होने से बच पाते हैं, बल्कि यह आपको उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, डिप्रेशन, अर्थराइटिस, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस, कमरदर्द, फाइब्रोमाइलगिया, माइग्रेन सिरदर्द, मासिक धर्म, अस्थमा संबंधी बिमारियों तथा कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है

बढ़ता चलन
चिकित्सकों के अनुसार, भारत में लाफ्टर थेरेपी का आगाज 1995 के आस-पास शुरू हुई इस थेरेपी के देश में अब तक 7,000 से ज्यादा लाफ्टर क्लब और इसके 1 हजार से ज्यादा सदस्य बन चुके हैं। इसी दिशा में हर साल मई के पहले रविवार को ‘वर्ल्ड लाफ्टर डे’ मनाया जाता है

हंसी के फायदे
मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि जब कोई हंसता है तो मस्तिष्क के न्यूरो केमिकल्स सक्रिय होकर शरीर को बेहतर अहसास कराते हैं। दरअसल मस्तिष्क का पूरा तंत्रिका तंत्र अनेक रसायन मुक्त करता है जो व्यक्ति के मिजाज, व्यवहार और शरीर को प्रभावित करते हैं। ऐसे में हंसी संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। मांसपेशियों को आराम और मानसिक स्वास्थ्य आदि के लिहाज से इसके अनेक सकारात्मक लाभ होते हैं।

लाफ्टर थेरेपी व लाफ्टर योग में फर्क
‘लाफ्टर थेरेपी’ के अंतर्गत लगभग 2 मिनट तक हंसने की क्रिया में लिप्त रहा जाता है, जबकि ‘लाफ्टर योग थेरेपी’ नियमित अंतराल पर सामान्य श्वास व्यायाम व उत्तेजित हंसी का मिला-जुला रूप होता है। ‘दि डेल्ही लाफ्टर क्लब’ के मुताबिक, इस थेरेपी के लाभ के चलते हाल के वर्षो में इसे काफी लोकप्रियता मिली है। यह थेरेपी रक्तचाप व तनाव को कम कर सकती है और प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाती है।

हास्य योग कैसे करें
लोगों को हंसना सिखाने में हास्य योग काफी पॉप्युलर हो रहा है। इसमें शरीर के आंतरिक हास्य को बाहर निकालना सिखाया जाता है, जिससे शरीर सेहतमंद होता है। शुरुआत में नकली हंसी के साथ शुरू होने वाली यह क्रिया धीरे-धीरे हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती है और हम बिना किसी कोशिश के हंसने लगते हैं।

क्या कहती हैं रिसर्च
अमेरिका के फिजियॉलजिस्ट और लाफ्टर रिसर्चर विलियम फ्राइ बताते हैं कि जोरदार हंसी दूसरे इमोशंस के मुकाबले ज्यादा बेहतर फिजिकल एक्सरसाइज साबित होती है। इससे मसल्स एक्टिवेट होते हैं, हार्ट बीट बढ़ती है और ज्यादा ऑक्सिजन मिलने से रेस्पिरेटरी सिस्टम बेहतर बनता है। जरनल ऑफ अमेरिकन मेडिकल असोसिएशन के अनुसार, लाफ्टर योग थेरपी से लंबी बीमारी के मरीजों को काफी फायदा होता है इसलिए अमेरिका, यूरोप और खुद हमारे देश में भी कई अस्पतालों से लेकर जेलों तक में लाफ्टर थेरपी या हास्य योग कराया जाता है।

कहां जाएं
जो लोग हास्य योग सीखना चाहते हैं, वे जगह-जगह पार्कों में लगने वाले शिविरों में जाकर इसे सीख सकते हैं। इस प्रकार के ज्यादातर शिविर मुफ्त होते हैं। एक बार सही तरीका सीख लेने के बाद रोजाना घर पर अभ्यास किया जा सकता है। इसके एक सत्र में तकरीबन 15 से 40 मिनट का समय लगता है।

दांतों की सफाई ही नहीं, आपकी इन 10 परेशानियों में काम आएगा आपका टूथपेस्ट

टूथपेस्ट है बड़े काम का
टूथपेस्ट से दांत साफ करने के बारे में तो हर कोई जानता है और हर कोई साफ करता भी है। लेकिन क्या जानते हैं कि टूथपेस्ट का इस्तेमाल हम अपने रोजमर्रा के कार्यों में भी कर सकते हैं। आइए इस स्लाइड के जरिये जानें टूथपेस्ट के विभिन्न उपयोगों के बारे में।

मुंहासे दूर भगाएं
अगर आप मुंहासों की समस्या से परेशान हैं तो टूथपेस्ट आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। टूथपेस्ट में एंटीबैक्टीरियल तत्वों की वजह से त्वचा जल्द ठीक हो जाती है। इसके लिए रात को सोने से पहले मुंहासों पर टूथपेस्ट लगाएं और सुबह उठकर चेहरा धो लें। रात में टूथपेस्ट पिंपल का तेल सोख कर उसे सुखा देता है। लेकिन कई लोगों को टूथपेस्ट से एलर्जी होती है। इसलिए इस नुस्खे को अजमाने से पहले पैच टेस्ट करके जरूर देख लें।

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जूते पॉलिश करें
टूथपेस्ट से आप चमड़े के जूते भी साफ कर सकते हैं। इसके लिए जरा सा टूथपेस्ट लेकर मुलायम कपड़े से जूते पर रगड़ें और फिर साफ कपड़े से रगड़ कर साफ कर दें। इससे आपके जूते पॉलिश की तरह चमचमा जाएंगें।

गहनों को चमकाएं
अगर आप अपने सोने और चांदी के गहनों को पॉलिश करवाने के लिए ज्वैलर्स के पास जाते है तो आप टूथपेस्ट का इस्तेमाल कर यह काम घर पर भी कर सकती हैं। इसके लिए जरा सा टूथपेस्ट अपने टूथब्रश पर लगाएं और फिर इसे गहनों पर रगड़िए, आपके गहने चमक उठेंगे।

मैनिक्‍योर में उपयोगी
आप हाथों की सफाई यानि मैनिक्योर को टूथपेस्ट की सहायता से घर पर ही कर सकती हैं। इसके लिए पानी में थोड़ा सा टूथपेस्ट मिलाकर हाथों को डिप कर लें और टूथब्रश की सहायता से हाथों की सफाई करें। इससे हाथों की सफाई के साथ हाथों से बैक्टीरिया भी चले जाएंगे।

दाग-धब्‍बे दूर करें
कपड़ों से दाग-धब्बों को दूर करने में भी टूथपेस्थ बहुत काम आता है। अगर आपके कपड़ों पर स्याही या टमेटो सॉस का दाग लग गया है तो चिंता न करें। इसके लिए दाग पर बस थोड़ा सा टूथपेस्ट लेकर स्क्रब करें और अच्छे से धो लें।

कलर के रंग साफ करें
बच्चों को अक्सर आदत होती है कि वह अपने कलर से घर की दिवारों पर लिख देते हैं। अगर आपकी घर की दीवार भी बच्चे ने क्रियॉन कलर से लिखकर खराब कर दी है तो उस हिस्से पर टूथपेस्ट लगाएं और रगड़कर साफ कर दें।

सीडी पर पड़े स्‍क्रैच हटाएं
सीडी पर स्क्रैच बहुत जल्दी पड़ जाते हैं। अगर आप भी सीडी या डीवीडी पर पड़े स्क्रैच को साफ करना चाहते हैं तो आप टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें। इसके लिए बस थोड़ा सा टूथपेस्ट लेकर रगड़े और एक मुलायम कपड़े की मदद से सीडी को पोछकर स्क्रैच छुड़ा लें।

जलन से राहत दें
जलने पर या कीड़े के काटने पर भी टूथपेस्ट बहुत मददगार होता है। इसको लगाने से जलन में तुरंत राहत मिलती हैं। इसके अलावा जलने के निशान भी ठीक हो जाते हैं और दाग भी नहीं पड़ता। इसके लिए आप जले हुए स्थान पर सफेद टूथपेस्ट लगा दीजिये और सूखने दीजिये।

नाखूनों को चमकदार बनाएं
टूथपेस्ट दांतों के इनेमल की तरह नाखूनों की भी सुरक्षा करता है। नेलपॉलिश के नियमित इस्तेमाल से नाखून खराब हो जाते हैं। इसलिए अगर आपको स्वस्थ नाखून चाहिए तो टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें। इसके लिए नेल पॉलिश का हटाने के बाद कुछ देर नाखूनों पर टूथपेस्ट लगा लें। इससे नाखून चमकदार होने के साथ स्वस्थ भी बनेंगे।

अंडरआर्म्स की बदबू को 3 मिनट में दूर करेंगे ये 6 आसान उपाय

बेकिंग सोडा का प्रयोग
अंडर आर्म्स की बदबू को दूर करने का ये सबसे प्रभावी नुस्खा है। इसके लिए नींबू के रस में सिर्फ एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाना है और आपके बगलों से आने वाली बदबू पूरी तरह दूर हो जाएगी। बेकिंग पाउडर और नींबू के रस को अच्छे से मिलाएं जिससे कि इसमें गांठें ना पड़ जाएं। इसे अपनी बग़ल पर लगाएं इन्हें साफ़ करने के पहले 15 मिनट के लिए छोड़ दें। इसे अपनी बगल पर लगाने के बाद आप देखेंगे कि यह अतिरिक्त पसीने को रोककर दुर्गन्ध होने से भी बचाता है।

गुलाबजल का प्रयोग
गुलाबजल त्वचा की बदबू को दूर कर स्किन को मॉश्चराइज करने के लिए अच्छा माना जाता है। अंडरआर्म्स की बदबू को दूर करने के लिए एक कप में गुलाबजल लें और इसमें रुई को भिगाकर बगलों पर लगाएं। आप चाहें तो गुलाबजल को स्प्रे भी कर सकते हैं। अगर आप नहाते समय ही पानी में थोड़ा सा गुलाबजल मिलाकर नहाएंगे, तो इससे भी पसीने और बदबू की समस्या से राहत मिलेगी और दिन भर तरोताजा महसूस होगा।

सुबह एक ग्लास = रोज 3 किलो चर्बी गायब!

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एप्पल साइडर विनेगर
एप्पल साइडर विनेगर यानि सेब का सिरका भी अंडर-आर्म्स से आने वाली दुर्गंध को आसानी से दूर कर देता है। दरअसल बगलों की बदबू का मुख्य कारण वहां पसीने के कारण पैदा होने वाले बैक्टीरिया हैं। सिरके की मदद से उस स्थान का पीएच स्तर कम किया जा सकता है और ये सिरका त्वचा के पोर भी खोलता है। अंडर आर्म्स का पीएच स्तर कम होने से बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया नहीं पैदा हो पाते हैं। ये पसीना भी कम करता है।

नींबू का प्रयोग
नींबू के प्रयोग से भी आप पसीने और बदबू की समस्या से राहत पा सकते हैं। नींबू में भी एसिडिक गुण होते हैं और ये भी त्वचा के पीएच स्तर को कम करता है। इसके लिए नींबू को आधा काटकर इसके टुकड़े को 10 मिनट तक अंडरआर्म्स में रगड़ें। फिर सादे पानी से इसे धुल लें। आपको दिनभर बदबू की समस्या नहीं होगी।

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टमाटर
टमाटर के प्रयोग द्वारा भी आप अंडरआर्म्स की बदबू से छुटकारा पा सकते हैं। इसके लिए कुछ टमाटर लें और उसके पल्प और रस को निकाल लें। अब इस पल्प को रस के साथ ही अंडरआर्म्स में लगाएं और 15 मिनट तक सूखने दें। फिर इसे पानी से धुल लें या नहा लें। दो-तीन दिन में एक बार ऐसा करने से आप बगलों में बदबू की समस्या से राहत पा जाएंगे।

फिटकरी
फिटकरी के प्रयोग से भी बगलों से आने वाली बदबू से राहत मिलती है। इसके लिए रोज नहाने से पहले 3 मिनट तक फिटकरी को बगलों में रगड़ें और फिर नहा लें। फिटकरी त्वचा के पीएच लेवल को कम करता है इसलिए बदबू की समस्या दूर हो जाती है।

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पीलिया रोग में नीम का करें ऐसा इस्तेमाल, तुरंत मिलेगा आराम

नीम के फायदे
नीम एक चमत्कारी वृक्ष माना जाता है। भारत में एक कहावत प्रचलित है कि जिस धरती पर नीम के पेड़ होते हैं वहां मृत्यु और बीमारी कैसे हो सकती है। स्‍वाद में कड़वा नीम अपने औषधीय गुणों के कारण बहुत ही मीठा माना जाता है। नीम हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद है। यह रोगों के निदान में तो प्रयोग होता ही है, सौंदर्य प्रसाधनों का भी यह महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। नीम के पेड़ के विभिन्‍न हिस्‍से जैसे पत्ते, छाल, फल, तेल आदि हमारे जीवन को रोगमुक्‍त बनाने में सहायक होते हैं। नीम में इतने गुण है कि यह कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है। नीम में डायबिटिज, बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। नीम के तने, जड़, छाल और कच्चे फलों में शक्ति-वर्धक और रोगों से लड़ने का गुण भी पाये जाते हैं। इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुत उपयोगी होती है। इसके पत्तों में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने वाले गुण मुंहासे, छाले, खाज-खुजली, एक्जिमा वगैरह को दूर करने में मदद करते हैं।

जलने और फोड़े फुंसियों के लिए नीम
जले हुए स्‍थान पर नीम का तेल या पत्‍तों को पीस कर लगाने से आराम मिलता है। नीम की पत्तियों और तेल में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। इसलिए कटे हुए स्‍थान पर नीम का तेल लगाने से टिटनेस का भय नहीं रहता। इसके अलावा यदि आप फोड़े और फुंसियों की समस्या से बचना चाहते है तो नीम के पत्ते, छाल और फलों को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, अब इस पेस्ट को त्वचा पर लगाएं। इससे फोड़े−फुसियां तथा घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं। नीम की पत्तियों को पानी में उबाल कर तथा ठंडा करके उस पानी से मुंह धोने से मुहांसे दूर होते हैं।

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कान और दांतों के रोग के लिए नीम
कान में नीम का तेल डालने से कान दर्द या बहने की समस्‍या ठीक हो जाती है। नीम का तेल तेज गर्म करके जला लें इसे थोड़ा ठंडा करके कान में कुछ दिन तक नियमित रूप से डालने से बहरापन में भी आराम मिलने की बात कही जाती है। इसके अलावा नींद दांतों के लिए भी लाभकारी होता है। नीम का दातुन नियमित रूप से करने से दांतों में पाये जाने वाले कीटाणु नष्‍ट हो जाते हैं। इससे मसूडे मजबूत व दांत चमकीले और निरोग होते हैं। मसूड़ों से खून आने और पायरिया होने पर नीम के छाल और पत्तों को मिलाकर इस पानी से कुल्‍ला करने से लाभ होता है।

पीलिया में नीम
पीलिया में नीम का इस्‍तेमाल फायदेमंद होता है। पित्ताशय से आंत में पहुंचने वाले पित्त में रुकावट आने से पीलिया होता है। ऐसे में रोगी को नीम के पत्तों के रस में सोंठ का चूर्ण मिलाकर देना चाहिए। या फिर सिर्फ दो भाग नीम की पत्तियों का रस या छाल का क्‍वाथ और एक भाग शहद मिला कर पीने से पीलिया रोग में काफी फायदा होता है।

पथरी में लाभदायक
पथरी की समस्‍या से बचने के लिए लगभग 150 ग्राम नीम की पत्तियों को 1 लीटर पानी में पीसकर उबाल लें। इस पानी को सामान्‍य होने पर पी लें। नियमित रूप से ऐसा करने से पथरी निकल सकती है। पथरी यदि किडनी में है तो प्रतिदिन नीम के पत्तों की लगभग 2 ग्राम राख पानी के साथ लें। लाभ होगा।

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पेट संबंधी समस्‍याओं में नीम
पेट संबंधी अनेक समस्याओं से निजात पाने में नीम बहुत सहायक होता है। पेट के कीड़ों को नष्ट करने के लिए नीम के पत्तों के रस में शहद और काली मिर्च मिलाकर सेवन करें। नीम के फूलों को मसलकर गर्म पानी में डालकर छानकर पी लें इससे कब्ज दूर होती है। नीम की पत्तियों को सुखाकर शक्कर मिलाकर खाने से दस्त में आराम मिलता है।

डायबिटीज और कोलेस्‍टॉल नियंत्रण में मददगार
नीम डायबिटीज की रामबाण दवा है। व्यायाम की कमी तथा आहार में प्रोटीन की कमी से डायबिटीज होता है। सुबह के वक्‍त नीम का सत्व या जूस लेने से डायबिटीज नियंत्रण में रहती है। साथ ही नीम के तने की छाल तथा मेथी के चूर्ण का काढ़ा बनाकर कुछ दिनों तक नियमित पीने से डा‍यबिटीज में लाभ मिलता है। इसके अलावा नीम के पत्तों का जूस और एलोवेरा जूस के साथ मिलाकर रोजाना खाली पेट लेने से शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है। इसके अलावा नीम एक रक्त-शोधक औषधि है, यह कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। 200 ग्राम तक नीम पत्तियों के प्रयोग से कोलेस्‍टॉल की मात्रा काफी कम हो जाती है। नीम का महीने में 10 दिन तक सेवन करते रहने से हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है।

त्‍वचा की खूबसूरती और बालों के लिए नीम
नीम की पत्तियों का रस पीने से खून साफ होता है जिससे चेहरे की कांति बढ़ती है। नीम के तेल से पूरे शरीर की मालिश करें। इससे त्वचा रोगरहित होती है। इसके अलावा स्‍नान करते समय नीम की ताजी पत्तियों को पानी में डालकर इस पानी से स्‍नान करें। साथ ही नीम एक बेहतरीन हेयर कंडीशनर भी है, नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर और पीस कर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट में शहद मिलाकर इसे बालों में लगाने से रूसी की समस्‍या खत्‍म होती है और बाल बहुत ही मुलायम और चमकीले भी हो जाते हैं।

संक्रमण के कारण गले की सूजन और दर्द को ठीक करते हैं ये आसान उपाय

लिम्फ नोड्स में सूजन
लिम्फ नोड्स एक नहीं कई ग्रंथियां होती हैं जो शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे – जबड़े के पीछे, आर्मपिट, कान के पीछे, कान के पीछे, सिर के पीछे, आदि अंगों में होता है। इसका प्रमुख काम इम्यून सिस्टम को सुचारु करना है जिससे शरीर हानिकारक कीटाणुओं से लड़ सकता है। लेकिन किसी कारण से लिंफ नोड्स में सूजन हो जाती है, इस समस्या को लिंफेडेनोपैथी या लिंफैडेनिटिस कहते हैं। इसके कारण शरीर के दूसरे अंगों में संक्रमण भी हो सकता है। इसके अलावा कोल्ड, टांसिल, जिंजिवाइटिस, त्वचा में संक्रमण, आदि समस्यायें भी हो सकती हैं। लिंफ नोड्स की सूजन कम करने के लिए आप घरेलू नूस्खों को आजमा सकते हैं। इस स्लाइडशो में उन नुस्खों के बारे में बता रहे हैं।

गरम पानी से सिंकाई
लिंफ नोड्स में सूजन कम करने के लिए गरम पानी से सिंकाई कीजिए। जब गरम तापमान का संपर्क शरीर के दूसरे अंगों से होता है तब शरीर का रक्त संचार बढ़ जाता है और सूजन कम हो जाती है। इसके लिए पानी को गरम कीजिए और उसमें एक साफ कपड़े को भिगोकर सूजन वाली जगह पर 5 से 10 मिनट के लिए रखें। जब तक सूजन समाप्त न हो जाये इस क्रिया को दिन में कई बार दोहरायें। गरम पानी से सूजन वाली जगह की सफाई भी कर सकते हैं।

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नमक पानी
गले में या जबड़े में पायी जाने वाली लिंफ नोड में सूजन है तो नमक पानी का गरारा करने से जल्द आराम मिलता है। नमक और पानी लिंफ नोड की सूजन को कम कर देता है। इसके लिए एक कप पानी को हल्का गरम कर लीजिए, उसमें आधा चम्मच नमक मिलाइये। फिर इस पानी से गरारा कीजिए। सूजन कम होने तक दिन में कई बार इसे दोहरायें।

फायदेमंद है लहसुन
लहसुन में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो किसी भी तरह के संक्रमण को आसानी से दूर करते हैं। इसके लिए लहसुन की 2 या 3 कलियों का सेवन कीजिए। खाने में भी लहसुन का प्रयोग कीजिए। अगर समस्या अधिक गंभीर है तो लहसुन के तेल से दिन में 2 या 3 बार मालिश करें। इससे जल्द आराम मिलेगा।

सेब का सिरका
सेब का सिरका लिंफ नोड की सूजन कम करने में के लिए बहुत प्रभावशाली माना जाता है। यह शरीर के पीएच लेवेल को बढ़ा देता है जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। साथ ही इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण संक्रमण से भी बचाते हैं। इसके लिए सेब के सिरके को बराबर मात्रा में पानी से मिलाकर एक कपड़े में को इसमें भिगोकर सूजन वाली जगह पर लगायें। इसे दिन में दो बार प्रयोग करें। इसके अलावा एक चम्मच सेब का सिरका, एक चम्मच शहद को पानी में मिलाकर सेवन करने से जल्द आराम मिलता है।

बहुत गुणकारी है हल्‍दी
हल्दी में कई गुण मौजूद होते हैं, इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होता है जिससे किसी भी प्रकार की सूजन आसानी से कम हो जाती है। यह संक्रमण से भी बचाता है और इसके प्रयोग से किसी प्रकार का घाव भी आसानी से और जल्दी भर जाता है। एक चम्मच हल्दी और शहद लेकर अच्छे से मिश्रण बना लीजिए, इसे सूजन वाले हिस्से पर लगाकर 10 मिनट तक रहने दें फिर इसे हल्के गरम पानी से साफ कर लीजिए। दिन में दो बार करने से जल्द आराम मिलता है।

डेंगू के उपचार के लिए आजमायें ये घरेलू नुस्‍खे

डेंगू के लिए घरेलू नुस्खे
डेंगू का प्राकोप आजकल बहुत तेजी से फैल रहा है। यह बीमारी एडीज मच्छर द्वारा काटने से होती है। डेंगू के बारे में सबसे खास बात यह है कि इसके मच्छर दिन के समय काटते हैं तथा यह मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। डेंगू के दौरान रोगी के जोड़ों और सिर में तेज दर्द होता है और बड़ों के मुकाबले यह बच्चों में ज्यादा तेजी फैलती है। डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स का स्तर बहुत तेजी से नीचे गिरने के कारण यदि इसका इलाज तुरंत न किया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है। डेंगू से बचाव के लिए कुछ घरेलू उपाय भी हैं जिन्हें अपनाकर डेंगू से बचाव संभव है। हम आपको कुछ ऐसे ही घरेलू और प्राकृतिक नुस्खे बता रहे हैं ताकि आप खुद को डेंगू के प्रकोप से बचा सकें।

डेंगू बुखार के लिए पपीते के पत्ते
पपीते की पत्तियों को डेंगू के बुखार के लिए सबसे असरकारी दवा कही जाती है। पपीते की पत्तियों में मौजूद पपेन नामक एंजाइम शरीर की पाचन शक्ति को ठीक करता है, साथ ही शरीर में प्रोटीन को घोलने का काम करता है। इसके अलावा इस जूस से प्लेटलेट्स की मात्रा तेजी से बढ़ती है। डेंगू के उपचार के लिए पपीते की पत्तियों का ताजा जूस निकाल कर एक-एक चम्मच करके रोगी को दें। पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है।

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प्रभावशाली दवा है बकरी का दूध
बकरी का दूध बहुत से लोगों को भले ही पसंद न हो लेकिन इसके फायदे बहुत हैं। डेंगू बुखार के लिए बकरी का दूध एक और बहुत ही प्रभावशाली दवा है। बकरी के दूध में गिरते हुए प्‍लेटलेट्स को तुरंत बढ़ाने की क्षमता होती है। डेंगू के उपचार के लिए रोगी को बकरी का कच्चा दूध थोड़ा-थोड़ा करके पिलाएं, इससे प्लेटलेट्स बढ़ने के साथ-साथ जोड़ों के दर्द में भी आराम मिलेगा।
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प्लेटलेट बढ़ाने के लिए गिलोय
गिलोय की बेल का सत्व मरीज को दिन में 2-3 बार दें, या गिलोय के 7-8 पत्‍तों को लेकर कुचल लें उसमें 4-5 तुलसी की पत्तियां लेकर एक गिलास पानी में मिला कर उबालकर काढा बना लीजिए और इसमें पपीता के 3-4 पत्तों का रस मिला कर लेने दिन में तीन चार लेने से रोगी को प्लेटलेट की मात्रा में तेजी से इजाफा होता है। प्लेटलेट बढ़ाने का इस से बढ़िया कोई इलाज नहीं है। यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले तो किसी आयुर्वेदिक स्‍टोर से आप गिलोय घनवटी लेकर एक एक गोली रोगी को दिन में 3 बार दे सकते हैं।

रक्‍त की कमी पूरा करें अनार
डेंगू बुखार में रक्त की कमी को पूरा करने और प्लेटलेट्स के स्तर को बढ़ाने के लिए अनार का रस पीना चाहिए। अनार में मुख्य रूप से विटामिन ए, सी, ई, फोलिक एसिड और एंटी ऑक्सीडेंट पाये जाते हैं। जो रोगी को रोग से लड़ने की क्षमता भी प्रदान करता है। डेंगू में रोगी को नियमित रूप से ताजा अनार का जूस देना चाहिए।

विषाक्त पदार्थ बाहर निकाले मेथी के पत्ते
मेथी के पत्ते भी डेंगू के बुखार को ठीक करने में मददगार होते हैं। मेथी से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जिससे डेंगू के वायरस भी खत्म होते हैं। साथ ही यह पीड़ित का दर्द दूर कर उसे आसानी से नींद में मदद करती हैं। मेथी के पत्तों को पानी में उबालकर हर्बल चाय के रूप में इसका प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, मेथी पाउडर को भी पानी में मिलाकर पी सकते हैं।

प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनायें तुलसी
10 से 12 तुलसी के पत्ते और 4-5 काली मिर्च को गर्म पानी में उबालकर छानकर, डेंगू के मरीज को पिलाना सेहत के लिए अच्‍छा रहता है। तुलसी की यह चाय डेंगू रोगी को बेहद आराम पहुंचाती है। यह चाय दिनभर में तीन से चार बार ली जा सकती है। यह चाय आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है और एंटी-बैक्टीरियल तत्व के रूप में कार्य करती है।

अनिद्रा दूर करने के लिए दिन में एक बार जरूर आजमाएं ये 1 नुस्‍खा

अनिद्रा के लिए प्राकृतिक उपाय
अनिद्रा के कारण आपको दिनभर सिर भारी रहना, उबासियां आना, किसी भी काम में मन न लगना आदि समस्‍याओं से गुजरना पड़ता है। इसलिए आमतौर पर अनिद्रा से पी‍ड़‍ित लोग नींद की गोलियों को सहारा लेते हैं लेकिन इसके बहुत से साइड इफेक्‍ट भी है। इसलिए इन सब से बचने के लिए वैज्ञानिक शोध के अनुसार, अनिद्रा का कुछ प्रभावी हर्बल उपायों द्धारा इलाज किया जा सकता है। इसमें से कुछ इस प्रकार हैं।

लैवेंडर
पारंपरिक चिकित्‍सकों द्वारा अनिद्रा के इलाज के लिए लैवेंडर का इस्‍तेमाल किया जाता था, लेकिन हाल ही के वर्षों में क्लीनिकल रिसर्च में हुए अध्‍ययन में भी यहीं माना कि लैवेंडर स्‍लीप डिसआर्डर के इलाज के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा एसोसिएटेड स्‍लीप सोसायटी द्वारा किए गए निष्कर्ष के अनुसार, लैवेंडर के तेल अनिद्रा से राहत का एक प्रभावी साधन हो सकता है, विशेष रूप से महिलाओं और युवा लोगों में।

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शहद
अनिद्रा की समस्‍या से बचने का दूध व शहद का सेवन करना बहुत ही पुराना तरीका है। दूध व शहद इन्सुलिन के स्त्राव को नियंत्रित करता है जिससे ट्रिप्टोफेन का सही मात्रा में मस्तिष्क में स्त्राव होता है। ट्रिप्टोफेन सिरोटोनिन में बदल जाता है और सिरटोनिन, मेलेटोनिन में परिवर्तित होकर मस्तिष्‍क को आराम पहुंचता है जिससे अनिद्रा की समस्या दूर होती है।

ब्राह्मी
ब्राह्मी का इस्‍तेमाल आमतौर पर मस्तिष्‍क के लिए किया जाता है। यह मस्तिष्क के लिए एक पौष्टिक टॉनिक तो है ही साथ ही यह मस्तिष्क को शान्ति भी देता है। लगातार मानसिक कार्य करने से थकान के कारण जब व्यक्ति को अनिद्रा की समस्‍या होती है तो ब्राह्मी का आश्चर्यजनक असर देखने को मिलता है। जटामांसी मस्तिष्क और नाड़ियों के रोगों के लिए ये राम बाण औषधि है, ये धीमे लेकिन प्रभावशाली ढंग से काम करती है। अनिद्रा की समस्‍या होने पर सोने से एक घंटा पहले एक चम्‍मच जटामांसी की जड़ का चूर्ण ताजे पानी के साथ लेने से लाभ होता है।

शंखपुष्पी
जड़ी-बूटियों में शंखपुष्पी एक अत्यंत गुणकारी तथा विशेष रूप से मस्तिष्क तथा नाड़ियों को शक्ति देने वाली औषधि है। इसके फूल शंख की आकृति के होते हैं, इसलिए इसे शंखपुष्पी कहते हैं। शंखपुष्पी को शक्तिशाली मस्तिष्क टॉनिक, प्राकृतिक स्मृति उत्तेजक, और एक अच्छी तनाव दूर करने की औषधी के रूप मे माना जाता है। अनिद्रा की समस्‍या होने पर इसकी पत्तियों का चूर्ण जीरा और दूध के साथ मिश्रित करके लेने से लाभ होता है।

अश्वगंधा
अश्वगंधा की जड़, पत्तियां और तना सभी बहुत स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक होते है। यह एक अच्छा वातशामक भी है। अच्छा वातशामक होने के कारण यह थकान का निवारण भी करता है और थकान दूर होने से नींद अच्‍छी आती है। अनिद्रा की समस्‍या होने पर सर्पगंधा, अश्वगंधा और भांग तीनों को बराबर मात्रा में ले लीजिए। इसको पीसकर चूर्ण बना लीजिए। रात में सोते वक्त 3-5 ग्राम मात्रा में यह चूर्ण पानी के साथ लेने से अच्छी नींद आती है।

अलसी
अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर, लिगनेन, विटामिन बी, सेलेनियम, पोटेशियम, मैगनीशियम, जिंक आदि होते हैं। अलसी को फीलगुड फूड माना जाता है, क्योंकि अलसी से मन प्रसन्न रहता है, इसलिए इसे अनिद्रा की समस्‍या के लिए भी लाभकारी कहा जाता है। कासे की थाली में अलसी और एरण्‍ड के बीज का तेल घिसकर आंखों पर लेप करने से अनिद्रा की समस्‍या दूर हो जाती है।

सौंफ
सौंफ में कैल्शियम, सोडियम, आयरन, पोटैशियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को सेहतमंद रखते हैं। जिन लोगों को अनिद्रा की समस्‍या है उन लोगों के लिए सौंफ बहुत फायदेमंद होती है। नींद न आने पर और हर समय सुस्‍ती रहने पर 10 ग्राम सौंफ को आधा लीटर पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाएं तो थोड़ा सा नमक मिलाकर सुबह-शाम पीने से समस्‍या दूर हो जाती है।

तुलसी
तुलसी एक ऐसा पौधा है जो कई तरह के अद्भुत औषधिय गुणों से भरपूर होता है। तुलसी अनिद्रा की समस्‍या में भी बहुत फायदेमंद होती है। नींद न आने पर तुलसी के पांच पत्तों को खाने और रात को सोते समय तकिए के आस-पास फैलाकर रखने से इसकी सुगंध से नींद आने लगती है।

अजवायन
अजवायन में स्वास्थ्य, सौंदर्य, सुगंध तथा ऊर्जा प्रदान करने वाले तत्व होते हैं। पकवान का स्वाद बढ़ने के साथ-साथ पेट संबंधी अनेक रोगों जैसे वायु विकार, कृमि, अपच, कब्ज आदि को ठीक करने में मदद करता है। इसके अलावा इसका इस्‍तेमाल अनिद्रा की समस्‍या को दूर करने के लिए भी किया जाता है। नींद न आने पर लगभग आधा चम्‍मच अजवायन सुबह-शाम लेने से समस्‍या दूर हो जाती है।

दांत के कीड़ों को 5 मिनट में ठीक करते हैं ये आसान उपाय

हींग का प्रयोग
हींग दांतों में कीड़े और दर्द की समस्या को आसानी से ठीक कर सकती है। इसके लिए एक ग्लास पानी में दो चुटकी हींग और चार चुटकी सेंधा नमक डालकर उबाल लें। अब इस पानी को हल्का गुनगुना होने दें। गुनगुना होने के बाद इस पानी से कई बार कुल्ला कीजिए। कुल्ला करने के दौरान पानी को मुंह में 2-3 मिनट तक भरकर रखिए। इससे 10 मिनट में ही आपको दांतो के कीड़ों से राहत मिल जाएगी।

लौंग
आयुर्वेद में लौंग के बहुत सारे फायदे बताए गए हैं। दांतों से जुड़े हर मर्ज की दवा है लौंग। दांतों में कीड़ों की समस्या है तो 2-3 लौंग को बारीक पीस लें और फिर इसके पाउडर को कीड़े लगे दांतों पर छिड़क लें या दांतों में इसके चूर्ण को दबा लें। अब मुंह को बंद कर लें और लार बनने दें। इस लार को मुंह में 5 मिनट तक रोके रखें फिर उगल कर नार्मल पानी या गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। इसके अलावा लौंग के तेल में रूई भिगाकर कीड़े वाले दांत पर लगाने से भी कीड़े खत्म हो जाते हैं।

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लहसुन
लहसुन में बहुत सारे गुण होते हैं। ये एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-बायोटिक गुणों से भरपूर होता है। इसके अलावा लहसुन दर्द से भी राहत दिलाता है। दांतों में कीड़ा लग जाने पर लहसुन की 1-2 कली को उसी दांत से चबाएं जिसमें कीड़े लगे हों। इसके रस से कीड़े मर जाएंगे और दर्द ठीक हो जाएगा। आप चाहें तो लहसुन को पीसकर उसमें सेंधा नमक मिलाकर भी दांत में लगा सकते हैं।

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सरसों का तेल
सरसों के तेल में कई औषधीय गुण होते हैं। इस तेल से दांतों के कीड़ों के साथ-साथ दर्द और दांतों का पीलापन भी दूर हो जाता है। कीड़े लगने पर दो चुटकी सेंधा नमक में तीन-चार बूंद सरसों का तेल डालकर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को कीड़े वाले दांत के नीचे दबाएं। इससे दांतों के दर्द में राहत मिलेगी और कीड़े मर जाएंगे। अगर आप रोजाना सरसों और सेंधा नमक के इस पेस्ट से मंजन करते हैं तो आपको दांतों से संबंधित रोग कभी भी नहीं होंगे।

नीम का दातुन
नीम में ढेर सारे औषधीय गुण होते हैं। इसके एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण नीम को बैक्टीरिया, फंगस और कीटाणुओं का दुश्मन समझा जाता है। दांतों में कीड़े लग गए हैं तो नीम की पतली टहनी या छाल से दातुन करने से ये कीड़े खत्म हो जाते हैं। इससे दांत मजबूत बनते हैं और दांतों का दर्द भी आसानी से ठीक हो जाता है। इसके अलावा नीम से दातुन करने से सांसों की दुर्गंध से भी राहत मिलती है।

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पसीने वाली जगह की खुजली को दूर करने के 10 घरेलू नुस्‍खे

जॉक खुजली का घरेलू उपचार
यह एक प्रकार का फंगस इंफेक्‍शन है जो कवक के संक्रमण कारण होता है। शरीर के जिस जगह पर पसीना अधिक होता है यह संक्रमण उस जगह पर अधिक होता है। अधिक शारीरिक मेहनत करने वालों को यह संक्रमण ज्‍यादा होता है। इससे बचाव के लिए जरूरी है शरीर के ऐसे हिस्‍सों को सूखा रखें जहां पर पसीना अधिक होने की संभावना हो। फैब्रिक के कपड़े भी न पहने, क्‍योंकि इसके कारण पसीना अधिक होता है। घरेलू नुस्‍खों से इस संक्रमण का उपचार आसानी से हो सकता है।

तुलसी के पत्‍ते
तुलसी जॉक खुजली के लिए बेहतर घरेलू उपचार है, यह खुजली के कारण हो रही जलन की समस्‍या को भी दूर करती है। तुलसी के पत्‍तों में थीमोन नामक तत्‍व पाया जाता है जो जलन को दूर करता है। तो प्रभावित क्षेत्र पर तुलसी के पत्‍ते रगडि़ये।

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एलोवेरा जेल
एलोवेरा त्‍वचा के लिए बहुत फायदेमंद है। जॉक खुजली होने पर एलोवेरा के जेल को खुजली वाले स्‍थान पर लगायें। इससे खुजली नहीं होगी और त्‍वचा की जलन भी दूर हो जायेगी।
औषधी की दुनिया में एलोवेरा किसी चमत्कार से कम नहीं। एलोवेरा एक संजीवनी है यानी इसमें संजीवनी बूटी के सभी गुण मौजूद हैं। एलोवेरा से तमाम रोग दूर किए जा सकते हैं। एलोवेरा औषधीय गुणों से परिपूर्ण है।

सेब का सिरका
सेब में एंटीफंगल और एं‍टीसेप्टिक गुण होते हैं, जॉक खुजली की समस्‍या केा दूर करने के लिए इसका प्रयोग कीजिए। एक चम्‍मच सेब का सिरका पानी में मिलाकर खुजली वाली जगह पर लगाकर इसे 10 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दीजिए। समस्‍या से निजात मिलेगी।

नारियल का तेल
खुजली वाली जगह पर नारियल का तेल लगाने से भी फायदा होता है। इसके अलावा आध कप नारियल के तेल को एक चम्‍मच ग्‍लीसरीन और दो चम्‍मच गुलाबजल के साथ मिलाकर पेस्‍ट बना लें। खुजली वाली त्‍वचा पर पेस्‍ट को लगाने तुरंत आराम मिलता है।

चाय के पेड़ का तेल
हरी चाय के पेड़ की पत्तियों में एंटीफंगल गुण होते हैं, जॉक खुजली के अलावा त्‍वचा में होने वाली अन्‍य प्रकार की खुजली के उपचार के लिए इसका प्रयोग करें। साफ कॉटन का प्रयोग करके इसके तेल को खुजली वाली जगह पर लगाने से आराम मिलता है। इसे दिन में दो बार प्रयोग करें।

लहसुन
लहसुन में ऐसे प्राकृतिक रसायन पाये जाते हैं जो फंगस को तुरंत समाप्‍त कर देते हैं। लहसुन की कुछ कलियां लेकर उसे मसल दे, इसे सीधे खुजली वाली जगह पर लगाने से तुरंत आराम मिलेगा। लहसुन को ऑलिव ऑयल के साथ भी प्रयोग कर सकते हैं।

शहद का प्रयोग
शहद का सेवन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हैं, लेकिन जॉक खुजली से बचाव के लिए शहद का प्रयोग करें। शहद में हाइड्रोजन पैरॉक्साइड, ऑस्‍मोटिक इफेक्‍ट (इस प्रभाव का मतलब है कि चीनी की अधिक सांद्रता के कारण यह बैक्टीरिया की कोशिकाओं से पानी अवशेषित कर लेता है और बैक्‍टीरिया खत्‍म हो जाता है) हाई शुगर कंसंट्रेशन और पॉलीफिनोल्स वाले गुणों के कारण यह जीवाणुओं का खात्‍मा हो जाता है।

नींबू का रस
जॉक खुजली होने पर नींबू के रस का प्रयोग खुजली वाली जगह पर करने से खुजली बंद हो जाती है। इसके अलावा नींबू का रस और अलसी के तेल को बराबर मात्रा में लेकर खुजली वाली जगह पर मलने से फायदा होता है।

प्‍याज का प्रयोग
प्‍याज में एंटी-फंगल, एंटीबॉयटिक और एंटीफ्लेमेट्री गुण पाये जाते हैं, जो फंगस के प्रभाव को कम करते हैं। प्‍याज का पेस्‍ट बनाकर खुजली वाली जगह पर लगाकर 20-30 मिनट के लिए छोड़ दें, सूखने पर इसे साफ करें, तुरंत आराम मिलेगा।

पुदीने की 1 पत्‍ती इन 10 रोगों का करती है नाश, जानें कैसे

पुदीने के फायदे
पुदीने की खुशबू और स्‍वाद ताजगी भरने के लिए काफी होता है। इसमें विटामिन ‘ए’ की भरपूर मात्रा होती है। जो हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है। इसके साथ ही इसमें कई अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ भी हैं। भोजन का जायका बढ़ाने में भी पुदीने का इस्‍तेमाल किया जाता है। पेट की तकलीफ में भी पुदीने का जवाब नहीं। आइए जानते हैं कि इन हरी महकदार पत्तियों में और क्‍या-क्‍या गुण समाये हैं।

सांसें महकाये
सांसों की दुर्गंध को दूर करने के लिए पुदीने की सूखी पत्तियों के चूर्ण से मंजन करें। यह न केवल आपकी सांसों को ताजा बनाता है, बल्कि साथ कई अन्‍य दंत समस्‍याओं से भी छुटकारा दिलाता है। इसके साथ ही इससे मसूड़े भी मजबूत होते हैं।

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पिंपल दूर भगायें
पुदीने की कुछ पत्तियां लेकर पीस लें। उसमें 2-3 बूंदे नींबू का रस मिलाकर इसे चेहरे पर कुछ देर के लिए लगाएं। फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। कुछ दिन ऐसा करने से मुंहासे ठीक हो जाएंगे और चेहरे पर चमक भी आ जाएगी।

बीपी को करे काबू
पुदीना उच्‍च और निम्‍न दोनों प्रकार के बीपी में मददगार होता है। हाई बीपी से पीड़‍ित व्यक्ति को बिना चीनी एवं नमक डाले ही पुदीने का सेवन करना चाहिए। जबकि लो बीपी के रोगी को पुदीने की चटनी या रस में सेंधा नमक, काली मिर्च, किशमिश डालकर सेवन करना चाहिए।

पेट के लिए अमृत
पुदीना पेट की कई बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है। पेट की समस्‍याओं से बचने के लिए पुदीने का किसी न किसी रूप में प्रतिदिन सेवन अवश्य करना चाहिए। पुदीने की पत्तियों का ताजा रस नीबू और शहद के साथ समान मात्रा में लेने से पेट की हर बीमारियों में आराम दिलाता है।

सांस संबंधी रोगों में फायदेमंद
पुदीने में फेफड़ों में जमा हुए बलगम को शरीर से बाहर का विलक्षण गुण पाया जाता है। इसी कारण कफ से होने वाली खांसी और अस्‍थमा को दूर करता है। पुदीने को सुखाकर, इसे कपड़े से छानकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की एक चम्‍मच दिन में दो बार पानी के साथ लें।

मासिक धर्म में लाभकारी
अगर आपका मासिक धर्म समय पर नहीं आता तो आप पुदीने का सेवन करें। इसके लिए पुदीने की सूखी पत्तियों के चूर्ण को शहद के साथ समान मात्रा में मिलाकर दिन में दो से तीन बार नियमित रूप से सेवन करें। यह मासिक धर्म की परेशानियों में बहुत लाभकारी साबित होता है।

पुदीना है तो नो डिहाइड्रेशन
डिहाइड्रेशन यानि पानी की कमी की घातक अवस्‍था से बचने के लिए पुदीना बहुत ही लाभकारी है। डिहाइड्रेशन में पुदीना, प्याज और नींबू का रस बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन हो तो आधा कप पुदीने का रस हर दो घंटे के अन्‍तर में रोगी को पिलाएं।

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गर्मी, लू लगने पर
गर्मी में लू से बचने के लिए पुदीने और प्‍याज की चटनी बनाकर सेवन करें। अगर इसका सेवन नियमित रूप से किया जाए तो लू लगने की आशंका खत्म हो जाती है। अधिक गर्मी या उमस के मौसम में जी मिचलाने पर एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियों का चूर्ण और आधी छोटी इलायची के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है।

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हिचकी दूर भगाए
हिचकी में पुदीने के रस को पीने से लाभ होता है। अगर आपकी हिचकी बंद न हो तो पुदीने के पत्ते में नींबू का रस मिलाकर लें। साथ ही पुदीने के पत्तों पर शक्कर डालकर हर दो घंटे में चबाने से हिचकी में फायदा होता है। पुदीना का रस किसी घाव पर लगाने से जख्‍म जल्‍दी भर जता हैं। यदि किसी घाव से बदबू आ रही है तो इसके पत्तों का लेप लगाने से बदबू नहीं आती।

कैंसर, बालों का झड़ना और मांसपेशियों के दर्द जैसै कई रोगों में फायदेमंद है रोजमेरी

रोजमेरी के फायदे
आमतौर पर रोजमेरी का प्रयोग खाने में फ्लेवर और सुगंध लाने के लिए किया जाता है। लेकिन, इसका रोजाना इस्तेमाल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है यानी आपका शरीर बीमारियों का बेहतर ढंग से सामना कर पाता है। यानी आप अधिक स्वस्थ रहते हैं।

कैंसर से बचाव
रोजमेरी में मौजूद कारोनोसोल में कैंसर रोधी गुण पाए जाते हैं। यह ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, कोलोन कैंसर, ल्यूकेमिया और स्किन कैंसर से बचाने में मदद करता है। खाने में रोजमेरी के प्रयोग से खाने का स्वाद तो बढ़ता ही है साथ ही कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से भी आप बचे रहते हैं।

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याददाश्त बढ़ाए
रोजमेरी में याद्दाशत बढ़ाने वाले तत्व भी पाए जाते हैं। रोजमेरी में कारनोसिक नामक तत्व होता है, जो मस्तिष्क को स्वस्थ रख उसकी कार्यक्षमता बढ़ाता है। इससे स्मरण शक्ति तो तेज रहती ही है साथ ही अल्जाइमर जैसे मानसिक रोग से भी बचाव होता है।

मूड अच्छा रखे
रोजमेरी की सुगंध आपकी मनोदशा सुधारने का काम करती है। यह तनाव को दूर कर आपके दिमाग को शांति पहुंचाने का काम करता है। रोजमेरी की सुगंध वाला रूम फ्रेशनर आपके मूड में काफी सुधार लाता है।

माइग्रेन करे दूर
रोजमेरी को माइग्रेन का एक प्राकृतिक उपचार माना जाता है। रोजमेरी को एक बर्तन में उबाल लें। सिर को तौलिए से ढंक लें और दस मिनट तक ऐसे ही भाप लें। इससे रोजमेरी की महक आपके मस्तिष्क तक पहुंचेगी और माइग्रेन के दर्द में राहत मिलेगी।

दर्द में राहत
रोजमेरी के तेल को दर्द वाली जगह पर लगाने से दर्द में राहत मिलती है। किसी भी प्रकार के मसल्स पेन, जोड़ों में दर्द और अर्थाराइटिस की समस्या होने पर रोजमेरी के तेल का नियमित प्रयोग काफी फायदेमंद होता है।

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए
प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए रोजमेरी का नियमित सेवन करना अच्छा रहता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट,एंटी इंफेलेमेटरी गुण आपको स्वस्थ रखने में मददगार साबित होते हैं।

पाचन शक्ति बढ़ाए
अक्सर रोजमेरी का प्रयोग पाचन समस्या जैसे पेट में दर्द, गैस, अपच आदि से बचने के लिए किया जाता है। अक्सर मांसाहारी भोजन के सेवन से यह समस्या पैदा होती है लेकिन अगर खाना बनाते समय रोजमेरी का प्रयोग किया जाए तो इस समस्या से बचा जा सकता है।

बालों के लिए फायदेमंद
अगर आप लंबे बालों की चाहत रखते हैं तो हर रोज अपने बालों में रोजमेरी के तेल का प्रयोग करें। यह बालों को झड़ने से रोकता है साथ ही बालों का वृद्धि भी करता है।

एंटी एजिंग तत्व
रोजमेरी में एंटी एजिंग तत्व होते हैं इसलिए एंटी एजिंग क्रीम में रोजमेरी का प्रयोग होता है। यह झुर्रियों की समस्या से निजात दिलाकर कोशिकाओं को पुनर्जीवित करने का काम करती है। इसके अलावा यह स्किन टोन में सुधार और रक्त का संचार बढ़ाने का काम भी करती है।

साइनस से होने वाली परेशानियों को आसानी से दूर करते हैं ये 10 घरेलू नुस्खे

साइनस
साइनस खोपड़ी में हवा भरी हुई कैविटी होती है, जो सिर को हल्कापन व श्वास वाली हवा लाने में मदद करती है। सांस लेने में अंदर आने वाली हवा इस थैली से होकर फेफड़ों तक जाती है। इस थैली में हवा के साथ आई गंदगी यानी धूल और दूसरे तरह की गंदगियों को रोकती है और बाहर फेंक दी जाती है। साइनस का संक्रमण होने पर साइनस की झिल्ली में सूजन आ जाती है। सूजन के कारण हवा की जगह साइनस में मवाद या बलगम आदि भर जाता है, जिससे साइनस बंद हो जाते हैं।

साइनस के लक्षण
साइनस मकी वजह से माथे पर, गालों व ऊपर के जबड़े में दर्द होने लगता है। सिरदर्द आगे झुकने व लेटने से और बढ़ जाता है। कई बार तो नाक बंद होना, थकान, सर्दी के साथ बुखार, चेहरे पर सूजन व नाक से पीला या हरे रंग द्रव्य बहना आदि लक्षण होते हैं। इसे साइनोसाइटिस कहा जाता है। साइनस एक स्वास्थ्य समस्या है जिसे पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है। हालांकि कुछ एहतियात व घरेलू नुस्खों की मदद से इसके लक्षणों से राहत पायी जा सकती है।

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सही भोजन
संक्रमण के दौरान कम मात्रा में खाएं। ऐसे में साबुत अनाज, सेम, दाल, हल्की पकायी सब्जियों, सूप, आदि का सेवन करें। बलगम बनाने वाले खाद्य पदार्थों जैसे, फ्लोर प्रोडक्ट्स, अंडे, चॉकलेट, तला हुआ और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, चीनी और डेयरी उत्पादों आदि के सेवन से बचें। साथ ही खूब सारा पानी पियें।

सेब साइडर सिरका
साइनस का पहला संकेत महसूस होते ही लगभग 180ml पानी में 1-2 चम्मच अनफ़िल्टर्ड सेब साइडर सिरका और 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3 बार 5 दिनों तक लें। सेब साइडर सिरका बलगम को तोड़ता है, जिससे वह आसानी से बाहर आ जाता है।

ग्रेपफ्रूट सीड एक्स्ट्रैक्ट
ये खट्टे एक्स्ट्रैक्ट शक्तिशाली प्राकृतिक एंटीबायोटिक होते हैं। जो कि और रोगाणुओं, परजीवी, बैक्टीरिया, वायरस और कैंडीडा यीस्ट सहित 30 प्रकार के कवकों को रोकने के लिए उपयोग किये जाते हैं। साइनस संक्रमण होने पर आप इसका नाक में डालने वाला स्प्रे भी ले सकते हैं।

जीरा
साइनस एक श्वास संबंधी समस्या है। इस प्रकार की समस्याओं से राहत पाने के लिए, थोड़ा काला जीरे के बीज ले और उन्हें एक पतले कपड़े में बांधे। तुरंत राहत पाने के लिए थोड़ी देर इस कपड़े के माध्यम से सांस लें। ऐसा करने से सायनस के दर्द से राहत मिलती है।

युकलिप्टस या पाइन ऑयल
साइनस का दर्द होने पर भाप लेना फायदेमंद होता है। इसके लिए गर्म पानी में युकलिप्टुस तेल यी पाइन तेल की कुछ बूंदें मिला कर उसकी भाप लें। साइनस के लक्षणों से राहत पाने के लिए आप दिन में 1 दो 2 बार इसकी भाप ले सकते हैं।

प्याज और लहसुन
एक छोटी प्याज और लहसुन को एक साथ कूट कर पानी में उबाल कर भाप लेने से साइनस के सिरदर्द में लाभ होता है। साथ ही गर्म कपड़ा या फिर गर्म पानी की बोतल गालों के ऊपर रखकर सिकाई करने से भी फायदा होता है। यह प्रक्रिया लगभग एक मिनट के लिए दिन में तीन बार करनी चाहिए। आप अपने नियमित भोजन में प्याज और लहसुन को शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा साइनस के सिरदर्द को कम करने के लिए प्रत्येक नथुने पर प्याज के रस की दो-दो बूंदें भी रख सकते हैं।

जैतून का तेल
अपनी नाक और आंखों के चारों ओर जैतून का तेल की हल्के से मसाज करें। यह आपकी नाक की रुकावट को साफ करने मे मदद करता है और सायनस के दर्द को भी कम करता है।

सब्जियों का रस
साइनस संक्रमण के लिए सब्जियों का प्रयोग एक सबसे अच्छा घरेलू उपचार है। अगर आप 300 एमएल गाजर का रस, 100 एमएल चुकंदर का रस, 200 एमएल पालक का रस और 100 एमएल ककड़ी का रस रोज पियें तो आपको साइनस की समस्या से जल्द फायदा होगा। गाजर के रस में कामाल के चिकित्सा गुण होते हैं जो साइनस के इलाज में भी फायदेमंद हैं। आप एक ग्लास गाजर का रस को चुकंदर, खीरे या फिर पालक के रस के साथ ले सकते हैं।

गर्मी में क्‍यों खाना चाहिए तरबूज, जानें इसके 10 स्‍वास्‍थ्‍य लाभ

तरबूज के स्वास्थ्य लाभ
गर्मियों का फल तरबूज न केवल खाने में स्वादिष्ट होता है, बल्कि बहुत पौष्टिक भी होता है। अध्ययन के अनुसार, इस गहरे लाल रंग के फल को लाइकोपीन का राजा भी कहा जाता है। तरबूज में 92 प्रतिशत पानी और 8 प्रतिशत शुगर होती है। यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है। यह विटामिन ए, सी और बी6 का सबसे बडा़ स्त्रोत है। इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन के कारण यह सेल को रिपेयर कर हृदय रोग के खतरे को कम करता है। तरबूज में एंटी-ऑक्सीडेंट भी भरपूर मात्रा में होता है, रिसर्च के अनुसार, तरबूज, वजन कम करने, आंखों, बालों, त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है। और यह पेट के कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह से भी बचाता है।

दिल को स्‍वस्‍थ और फिट रखें
तरबूज में मौजूद पोटेशियम जैसा पोषक तत्‍व दिल को स्‍वस्‍थ और फिट रखने के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण होता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दिल को स्‍वस्‍थ रखने के एक वयस्क को एक दिन में 3,510 मिलीग्राम पोटेशियम उपभोग करना चाहिए।

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आंखों के लिए फायदेमंद
इसका नियमित सेवन आंखों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। तरबूज में बीटा कैरोटीन और विटामिन ए की मौजूदगी आंखों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छी होती है। इसके सेवन से रतौंधी और मोतियाबिंद जैसे रोगों से बचाव में मदद मिलती है।

प्रतिरक्षा प्रणाली में मजबूती
तरबूज में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। विटामिन सी हमारे शरीर के प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत बनाता है, जिससे हम बुखार व संक्रमण से दूर रहते हैं।

त्‍वचा और बालों के लिए
विटामिन सी का पर्याप्त सेवन कोलेजन के निर्माण और रखरखाव के लिए आवश्यक होता है। यह त्वचा और बालों के लिए संरचना प्रदान करता है। तरबूज शरीर को हाइड्रेट करने में मदद करता है जो त्वचा और बालों को स्‍वस्‍थ रखने के लिए महत्वपूर्ण होता है।

मांसपेशियों के लिए फायदेमंद
तरबूज में पोटेशियम अच्छी मात्रा में होता है जो शरीर में नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों की सेहत के लिए जरूरी है। इसके सेवन से मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है। साथ ही तरबूज और तरबूज का रस मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद करता है।

तरबूज खाने से त्वचा जवां रहती है
तरबूज में पानी की मात्रा बहुत अधिक और फ्लेवनॉयड्स और कैरीटोनॉयड्स नामक तत्व त्वचा के कसाव को बरकरार रखने में मदद करते हैं इसके अलावा यह लंबे समय तक झुर्रियों को दूर रखने में मददगार होता हैं।

अस्थमा की रोकथाम
अस्‍थमा के विकास का जोखिम उन लोगों में कम होता है जो पोषक तत्‍वों की उच्‍च राशि का उपभोग करते हैं। इन पोषक तत्‍वों में से एक विटामिन सी है जो तरबूज में पाया जाता है।

कैंसर
तरबूज मजबूत एंटीऑक्‍सीडेंट विटामिन सी और अन्‍य एंटीऑक्‍सीडेंट का अच्‍छा स्रोत है, यह कैंसर का कारण माने जाने वाले मुक्त कण के गठन से निपटने में मदद करता है। कई अध्ययनों में लाइकोपीन के सेवन को प्रोस्टेट कैंसर की रोकथाम के साथ जोड़ा गया है।

पाचन में मददगार
तरबूज पानी और फाइबर से भरपूर होने के कारण, कब्‍ज को रोकने और एक स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए नियमितता को बढ़ावा देने में मदद करता है।

हींग खाने का ये गलत तरीका दे सकती हैं 5 गंभीर बीमारियां!

जानियें क्या है हींग के नुकसान
आप अक्सर अपने खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए हींग का इस्तेमाल करते होंगे। इसके अलावा हींग कई परेशानियों में घरेलू इलाज बन कर भी आपको फायदे पहुंचाती है। ये तो बात हुई आपके स्वास्थ्य पर हींग के पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों के बारे में लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हींग के कुछ नुकसान भी होते हैं? शायद नहीं। तो आइये जानते हैं कुछ ऐसे स्वास्थ्य संबंधी नुकसानों के बारे में, जो हींग के इस्तेमाल से होते हैं।

होंठों में सूजन
हींग का सेवन करने के बाद कुछ लोगों के होंठों में असामान्य सूजन आ सकती है। होंठ पहले से बड़े या फूले हुए लगने लगते हैं। होंठों में झनझनाहट भी महसूस हो सकती है। हींग का ये साइड इफेक्ट कुछ देर के लिए ही होता है, और कुछ घंटों में अपने आप सामान्य हो जाता है। लेकिन ऐसी स्थिति बनी रहे, और सूजन चेहरे या गले तो फैल जाए, तो प्रभावित व्यक्ति को तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

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पेट में गैस या अतिसार
हींग को घरेलू या हर्बल उपचार के रूप में इस्तेमाल करने पर, इससे पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। हींग के सेवन से कुछ रोगियों को पेट में गैस व अतिसार जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा कुछ लोगों को, हींग के सेवन से पेट में जलन भी होने लगती है। पेट में ज्यादा गैस व जलन होने से डकार व उबकाई की समस्या भी सामने आती है। इस समस्या से बचने के लिए एक आसान तरीका है। हींग को हर्बल उपचार के तहत खाने से पहने, हल्का फुल्का स्नैक खा लीजिए।

स्किन रैशिज
कुछ लोगों को हींग के साइड इफेक्ट्स के रूप में स्किन रैशिज यानि त्वचा पर चकत्तों की समस्या हो जाती है। स्किन रैशिज होने पर प्रभावित व्यक्ति की त्वचा लाल हो सकती है और उसमें खुजली की समस्या महसूस हो सकती है। यदि ये समस्या थोड़ी देर के लिए रहे तो कोई बात नहीं, लेकिन अगर त्वचा पर सूजन आ जाए और दिक्कत बढ़ जाए को डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

सिर दर्द या चक्कर आना
हींग की ज्यादा मात्रा का सेवन करने से व्यक्ति के सर में दर्द हो सकता है और चक्कर भी आ सकते हैं। हींग के नकारात्मक प्रभावों से होश में रहने में दिक्कत, ध्यान न लगा पाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वैसे, ये प्रभाव थोड़ी देर तक बने रहते हैं, और कुछ देर देखभाल करने से ठीक हो जाते हैं।

हाई या लो ब्लडप्रेशर
हाई या लो ब्लडप्रेशर यानि हाईपरटेंशन या हाईपोटेंशन भी ऐसी स्थितियां हैं, जिनका संबंध हींग के सेवन से है। हींग का सेवन करने से ब्लड प्रेशन नियंत्रण पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। अगर आपको ब्लड प्रेशन की दिक्कत है तो हींग के सेवन से परहेज करें, या फिर, बहुत कम मात्रा में इसका सेवन करें।

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प्रेगनेंसी और ब्रेस्ट फीडिंग
अगर आप प्रेगनेंट हैं तो हींग का सेवन बहुत असुरक्षित है। हींग की तासीर गर्म होती है, इसलिए, प्रेगनेंसी में हींग खाने से मिसकैरेज होने का खतरा रहता है। अगर आप नवजात को अपना दूध पिलाती हैं तो भी आपके लिए हींग अच्छी नहीं है। आपके दूध के जरिये हींग का असर बच्चे तक पहुंच सकता है। और बच्चों के लिए हींग नुकसानदायक होती है क्योंकि इससे कुछ निश्चित खून संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।

लकवा
अगर आपको कभी लकवा मार चुका है, या फिर एंठन से जुड़ी गंभीर समस्या रह चुकी है तो हींग के सेवन से बचें। इससे आपको दौरा पड़ने का डर होता है। इसके अलावा, किसी भी तरह की सेंट्रल नर्वस सिस्टम से संबंधित समस्या में भी हींग खाना खतरनाक हो सकता है।

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शरीर में सूजन
शरीर में खून की कमी, पेट सम्बंधी विकार, लीवर की खराबी या फिर शारीरिक कार्य कम करने के कारण प्राय: शरीर में सूजन आ जाती है। इस रोग के बढ़ जाने पर कई अन्य रोग पनप सकते हैं इसलिए इस बारे में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। शरीर में सूजन होने पर यदि उचित आहार पर ध्‍यान दिया जाए तो इस रोग से शीघ्र ही छुटकारा पाया जा सकता है। ऐसे ही कुछ आहार के बारे में जानिए हमारे इस स्‍लाइड शो में।

तरबूज के बीज
तरबूज के बीज पैर में टखनों की सूजन में बहुत उपयोगी होते हैं। इसके लिए तरबूज के बीजों को छाया में सुखा लें। फिर इन बीजों को पीसकर उसमें से दो चम्‍मच बीजों ले लें। इन बीजों को एक कप उबलते पानी में डालकर भीगने दें। कुछ घंटों के बाद इसको छानकर पी जायें। इस पानी को दिन में चार बार कुछ दिन तक पीने से सूजन ठीक हो जाएगी।

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करेले का रस
स्‍वाद में कड़वा लेकिन सेहत के लिए फायदेमंद करेला सूजन को दूर करने में भी बहुत मददगार होता है। इसके लिए करेले का रस चार चम्मच और मकोय का अर्क (एक तरह का सफेद फूल) पांच चम्मच लें। इन दोनों को मिलाकर रोज सुबह खाली पेट सेवन करें। अगर आपको मकोय नहीं मिल रहा है तो करेले के थोड़े-से रस में एक चम्मच सोंठ का चूर्ण मिलाकर पिएं।

छोटी सी काली मिर्च के गुण
काली मिर्च में एंटीमाइक्रोबिएल और सूजन व दर्द को कम करने के गुण पाए जाते हैं। सूजन कम करने के लिए इसका इस्‍तेमाल कई चीजों के साथ मिलाकर किया जा सकता हैं। जैसे पांच काली मिर्च पीस कर चौथाई चम्मच मक्खन के साथ, तरबूज के रस में कालीमिर्च का चूर्ण डालकर या फिर सोंठ, कालीमिर्च तथा सौंफ तीनों का चूर्ण दो चम्मच की मात्रा में गुड़ के साथ।

अनानास का रस
अनानास का रस पीने से सूजन कम हो जाती है। इस फल में मिनरल्स, विटामिन बी, सी, के, फॉलेट, कार्बोहाइड्रेट, वसा, कैल्शियम, फॉस्फोरस और एन्जाइम्स पाए जाते हैं। साथ ही इसमें पाया जाने वाला ब्रोमिलेन शरीर की सूजन और गठिया में लाभदायक होता है।

धनिया की पत्तियां
आयरन से भरपूर होने के कारण धनिया की पत्तियां एनिमिया को दूर करने में तो मददगार होती ही है। साथ ही अपने एंटी टय़ुमेटिक और एंटीअर्थराइटिस के गुणों के कारण सूजन कम करने में बहुत मददगार होता है। इससे जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है। इसके सेवन के लिए धनिया की पत्तियों को पानी में उबाल लें फिर इसको छानकर इसका पानी दिन में दो बार लें या‍ फिर आप सब्जियों में भी इसका प्रयोग कर सकते हैं।

फायदेमंद है गुड
गुड स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होने के साथ ही स्वादिष्ट भी होता है। यह सूजन को दूर करने में भी लाभदायक होता है। पुराने गुड़ को सोंठ के साथ मिलाकर खाने से शरीर की सूजन जाती रहती है। या फिर दो चम्मच सूखी हल्दी तवे पर भूनकर उसमें थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर सेवन करें।

काशीफल से दूर करे सूजन
काशीफल को प्राचीन काल से ही गुणों की खान माना जाता रहा है। काशीफल के बीज भी बहुत गुणकारी होते हैं। काशीफल और इसके बीजों में विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर आदि के अच्छे स्रोत हैं। सूजन को दूर करने के लिए काशीफल के आठ-दस बीजों की चटनी बनाकर शहद के साथ चाटें।

स्वास्थ्य हो या खूबसूरती, हर चीज के लिए बेस्ट है 1 टुकड़ा एलोवेरा

एलोवेरा के फायदे
एलोवेरा को घृतकुमारी के नाम से भी जाना जाता है। इसमें एमीनो एसिड और 12 विटामिन भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। यह शरीर में खून की कमी को दूर करता है और शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। यह जितना आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए लाभप्रद होता है उतना ही आपके बालों और त्वचा के लिए भी। आइए जानें ऐलोवेरा का हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर कितना अच्‍छा प्रभाव पड़ता है।

सनबर्न से बचाएं
एलोवेरा का रस सनस्‍क्रीन का काम करता है। धूप में निकलने से पहले एलोवेरा का रस अच्छी तरह से अपनी त्वचा पर लगाने से सूरज की हानिकारक किरणें आपकी त्‍वचा को नुकसान नहीं पहुंचा पातीं।

सुबह एक ग्लास = रोज 3 किलो चर्बी गायब!

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जलने या चोट में फायदेमंद
एलोवेरा अपने एंटी बैक्टेरिया और एंटी फंगल गुण के कारण घाव को जल्दी भरता है। चोट लगने या जलने पर इसका जेल निकाल कर लगाने से आराम मिलता है। जलने के तुरन्‍त बाद इसके जेल को लगा लेने से छाले नहीं पड़ते और साथ ही जलन भी समाप्‍त हो जाती है।

वजन नियंत्रण में सहायक
अगर आप का वजन बढ़ रहा है और इसके कारण आप हमेशा आलस और थकान का अनुभव भी कर रहे हैं तो एलोवेरा जूस का सेवन करें। एलोवेरा जूस को नियमित रूप से पीने से आप भरपूर तंदुरुस्ती का अहसास करते है। इससे एनर्जी लेवल भी बढ़ता है और वजन नियंत्रित रहता है।

पाचन क्रिया बनाएं दुरूस्‍त
एलोवेरा जूस पीने से पेट की कई रोग दूर होते हैं। यह पाचन तंत्रिका को मजबूत बनाता है। इसके रोजाना उपयोग से अपच और कब्‍ज जैसी समस्‍या भी दूर रहती है। पेट में पैदा होने वाले अल्‍सर को भी यह ठीक करता है।

स्‍ट्रेच मार्क हटाए
मोटापे और प्रेगनेंसी के कारण हुए स्‍ट्रेच मार्क में भी एलोवेरा उपयोगी होता है। स्‍ट्रेच मार्क को हल्‍का करने के लिए रोज सुबह एलोवेरा जैल से मालिश करें । यह काफी हद तक आपके स्‍ट्रेच मार्क को कम कर देगा।

झुर्रियों से बचाव
झुर्रियों आपको समय से पहले बूढ़ा बना देती हैं इससे बचने के लिए रोजाना एलोवेरा जॅल से मालिश कीजिये। यह त्‍वचा को अंदर से मॉइश्‍चराइज करता है। इसका रस स्‍किन को टाइट बनाता है और इसमें मौजूद विटामिन सी और ई के कारण त्‍वचा हाइड्रेट भी बनी रहती है।

दिल की बीमारी में फायदेमंद
एलोवेरा शरीर में रक्‍त की मात्रा बढ़ाता है और साथ ही रक्‍त प्रवाह को भी सुचारू बनाये रखने में मदद करता है। एलोवेरा हाई ब्‍लड प्रेशर को सामान्‍य करता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम होता है।

बालों की समस्‍याओं में उपयोगी
बालों के लिए एलोवेरा चमत्‍कारी रूप से असर दिखाता है। बालों संबंधी जितनी भी समस्याएं हैं एलोवेरा के प्रभाव से दूर हो जाती हैं जैसे- बालों का गिरना, रूखे बाल, बालों में डेंड्रफ आदि। हफ्ते में दो बार शैंपू करने से पहले चमेली, जोजोवा या नारियल तेल में एलोवेरा का यह रस मिलाकर अच्छी तरह से अपने बालों में लगाएं।

बढ़ाए त्‍वचा की चमक
एलोवेरा शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकाल कर शरीर की अंदर से सफाई करता है। जिससे त्‍वचा में चमक आती है तथा दाग-धब्‍बों से भी दूर होते है। इसके अलावा एलोवेरा के जैल को त्‍वचा पर लगाने से एक्‍जिमा, पिंपल और सिरोसिस की समस्‍या भी दूर होती है।

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किडनी की सफाई
किडनी शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग होता है। लेकिन बदलती जीवनशैली और घटती सक्रीयता के चलते किडनी की समस्याएं बढ़ने लगी हैं। हालांकि किडनी को विषाक्त मुक्त करने व स्वस्थ रखने के लिए कुछ हर्ब की मदद ली जा सकती है। इन हर्ब की मदद से किडनी स्टोन, किडनी कैंसर और किडनी से संबंधित अन्य समस्याओं से आसानी से दूर रहा जा सकता है। तो चलिये जानें आइए जानें किडनी की सफाई के लिए 10 सर्वश्रेष्ठ हर्ब्स कौंन से हैं।

अमर बेल
अमर बेल का पीला फूल एक कमाल का हर्ब माना जाता है। इस फूल का इस्‍तेमाल कर रक्त की शुद्धि की जा सकती है। इसके अलावा यह लीवर और किडनी के स्‍वास्‍थ्‍य की सफाई कर उन्हें स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।

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करौंदा
करौंदे में बहुत सारा एंटी ऑक्‍सीडेंट पाया होता है जो कि किडनी से यूरिक एसिड को बाहर निकालता है। करौंदे को किडनी के लिये सबसे बेस्‍ट हर्ब में से एक माना जाता है। इसमें यूरिक एसिड और यूरिया को निकालने की कमाल की क्षमता होती है।

अजमोद (PARSLEY)
अजमोद में लूटेओलिन नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो फ्री रेडिकल्स को शरीर से बाहर निकालने में सहायक होता है। अजमोद में विटामिन ए और सी भी काफी होते हैं। अजमोद को किडनी की सफाई के लिए जाना जाता है। किडनी में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर यह उसे स्वस्थ रखता है।

सिंहपर्णी (DANDELION ROOT)
सिंहपर्णी की जड़ लीवर और किडनी से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने वाली एक बहद असरदार हर्ब है। न केवल किडनी से विषाक्त पदार्थों को बाहर करती है बल्कि रक्त को शुद्ध भी करती है, जिससे लीवर और किडनी की समुचित कार्यक्षमता को बढ़ावा मिलता है।

मंजिष्ठा
मंजिष्‍ठा को आयुर्वेद में एक बेहद महत्वपूर्ण अच्‍छा हर्ब माना जाता है। यह रक्त व किडनी से विषाक्त पदार्थों से दूर कर उन्हें शुद्ध करता है। इसके अलावा इसका प्रयोग प्रतिरक्षा नियामक के रूप में भी किया जाता है।

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भुटकेसी (BHUTKESI)
यह फूल एक रक्त शुद्ध करने वाला और लीवर को मजबूत बनाने वाला वाला होता है। भुटकेसी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्‍व की वजह से आमतौर पर इसका प्रयोग प्राकृतिक चिकित्‍सा में किया जाता है। भुटकेसी कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश आदि में पाया जाता है।

गोल्डनरॉड (GOLDENROD)
गोल्डनरॉड, एक प्रकार का पौधा जिसका तना छड़ी जैसा और फूल पीले रंग के होते है। गोल्डनरॉड के अलग अलग तरह से सेवन करने पर किडनी में मौजूद विषाक्त दूर होते हैं और किडनी रोगमुक्त रहती है।

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गुडूची (GUDUCHI)
शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिये ये हर्ब बेहद कारगर होता है और रक्त को शुद्ध करता है। गुडूची धूम्रपान और शराब पीने वाले लोगों के लिए काफी लाभदायक होता है, क्‍योंकि यह रक्त में पैदा होने वाले विषाक्त पदार्थों को दूर करने में मदद करता है।

धतूरे की जड़
धतूरे की जड़ शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले एसिड और विषाक्तों को बाहर कर रक्त को शुद्ध करता है। इसके अलावा ये किडनी को मजबूत बनाकार रक्त शुद्धी करने में भी सहायता करता है और पिट्यूटरी ग्रंथि से प्रोटीन को निकालकर हार्मोन संतुलन में सहायता करता है।

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गुनगुने पानी में शहद के फायदे
इस बात से हम सभी वाकिफ हैं कि सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस और शहद मिलाकर पीना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। शहद को गर्म पानी के साथ लेने से वजन कम होता है। और इसके नियमित सेवन से सेहत से जुड़ी कई समस्याओं से हमेशा के लिए निजात मिल सकती है। हम आपके लिए लेकर आए हैं गुनगुने पानी के साथ शहद का सेवन करने के फायदों के बारे में।

पाचन सुधारे
अच्छे पाचन के लिए सुबह गर्म पानी में शहद और नींबू मिलाकर पीना चाहिए। यह पेट को साफ करने में मदद करता है। यह लीवर में रस के उत्‍पादन को बढ़ाता है जिससे पाचन में मदद मिलती है। नींबू में मौजूद एसिड आपके पाचन तंत्र में मदद करता है और अवांछित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा शहद एक एंटीबैक्‍टीरियल के रूप में कार्य करता है और आपके शरीर में मौजूद किसी भी तरह के संक्रमण को दूर करने में मदद करता है।

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कब्‍ज दूर करें

यह मिश्रण कब्‍ज के लिए तत्‍काल उपाय है। यह आंत को प्रोत्‍साहित कर मल त्‍यागने में मदद करता है। इसके अलावा यह आंत्र म्‍यूकस में बढ़ावा देता है, पेट को हाइड्रेट करता है और सूखे मल को पानी में भिगो देता है। इन सब की एक साथ मौजूदगी से मल त्‍यागने में मदद करता है।

लसीका प्रणाली की सफाई में मददगार

लसीका प्रणाली में पानी और आवश्यक तरल पदार्थ की कमी हो जाती है जिससे आपको सुस्त और थका हुआ महसूस होना, कब्ज, सोने में परेशानी, उच्च या निम्न रक्तचाप, तनाव और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर असर पड़ता है। सुबह-सुबह इस मिश्रण को पीने से लसीका प्रणाली को हाइड्रेट होने में मदद मिलती है जिससे न केवल सभी उपरोक्त लक्षणों बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार होता है। image courtesy : getty image

मौखिक स्वास्थ्य में सुधार

एसिडिक प्रकृति का नींबू, शहद और गुनगुने पानी के साथ सांसों की बदबू को तुरंत दूर करने में मददगार होता है। नींबू अपनी लार ग्रंथियों को सक्रिय और आक्रामक बैक्टीरिया को मार कर मुंह शुद्ध करने में मदद करता है। सांस में बदबू का कारण जीभ पर सफेद परत का गठन (मुख्य रूप से खाद्य और बैक्टीरिया से मिलकर) भी है, यह रस इस परत को प्रभावी ढंग से हटाकर सांस की बदबू से प्राकृतिक रूप से छुटकारा दिलाता है।

मूत्रवर्धक के रूप में कार्य
शहद में बहुत ही शक्तिशाली एंटी-बैक्‍टीरियल के गुण होते हैं। इसमें कई प्रकार के संक्रमण को दूर करने की क्षमता होती है। नींबू और पानी के साथ यह मिश्रित – एक उत्कृष्ट मूत्रल (आपके शरीर से पानी बाहर निकलवाने वाला एजेंट) के रूप में कार्य करता है। यह आपके मूत्र मार्ग को साफ करने का सबसे अच्छा तरीका है। यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) से पीड़‍ित महिलाओं के लिए यह रस एक वरदान की तरह है क्‍योंकि यह संक्रमण को दूर करने में मदद करता हे।

एनर्जी लेवल बढ़ाये

शहद और गर्म पानी से शरीर में एनर्जी में भी वृद्धि होती है। शरीर में ज्यादा एनर्जी उत्पन्न होने से शरीर का मेटाबॉलिज्म और कार्यप्रणाली में भी वृद्धि होती है। शहद शरीर के अंगों को ठीक से काम करने के लिए प्रेरित करता है। सुबह में गर्म पानी नींबू के साथ लेने से आप दिन भर ऊर्जावान बने रह सकते हैं।

वजन घटाने में मददगार

शहद और नींबू के साथ गर्म पानी लेने से भूख कम लगती है। शहद और नींबू के साथ गर्म पानी में बड़ी मात्रा में फाइबर मौजूद होता है, जो भूख की इच्छा और शूगर लेवल को कम करके पर्याप्त एनर्जी प्रदान करता है। इस‍ तरह से नियमित रूप से सुबह इसका सेवन करने से दिन भर में आपके द्वारा लिए गए भोजन की मात्रा कम हो जाएगी। अपने दिन की शुरुआत गुनगुने पानी के साथ शहद और नींबू के साथ करने से आपका वजन काफी हद तक कम हो जाएगा।

त्‍वचा के लिए लाभकारी

त्‍वचा के लिए नींबू के लाभ अनगिनत है लेकिन इसके अलावा इसमें मौजूद क्‍लीजिंग तत्‍व रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है, नई रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है। पानी और शहद का मिश्रण आपकी त्वचा के लिए एक अनूठा दृढ, जीवाणुरोधी और कोलेजन बढ़ाने वाले गुण होते है। इसलिए अगर आप स्वाभाविक रूप से चमकदार त्वचा चाहती हैं तो यह पेय आपके लिए बहुत लाभकारी साबित होगा।

पोषक तत्वों और विटामिन से भरपूर
शहद और नींबू के गर्म पानी में कई जरूरी एंटी-आक्सीडेंट, विटामिन और पोषक तत्व पाए जाते हैं, इसके अलावा इसमें एंटी इफ्लेमेंटरी गुण भी मौजूद होते है। इसलिए इसके सेवन से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। साथ ही यह वजन कम करने में सहायक होती हैं।

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एवोकैडो तेल
एवोकैडो फल से निकाला गया एवोकैडो तेल, कुछ असामान्‍य और विशिष्‍ट स्‍वस्‍थ गुणों से भरपूर होता है। एवोकैडो तेल विटामिन ई और असंतृप्त वसा में उच्‍च होता है और इसमें किसी भी अन्‍य फलों की तुलना में अधिक प्रोटीन और केले की तुलना में अधिक पोटेशियम होता है। एवोकैडो तेल पोषण और औषधीय लाभ कई तरह से प्रदान करता है, जिनमें से कुछ की कथित वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्‍यम से पुष्टि की गई है।

पोषक तत्वों का अवशोषण
जर्नल ऑफ नुट्रिशन के मार्च 2005 के अंक में प्रकाशित एक अध्‍ययन के अनुसार, एवोकैडो तेल भोजन में करोटेनॉइड्स के अवशोषण को बढ़ा देता है। वसा में घुलनशील करोटेनॉइड्स आहार वसा पर निर्भर करते हैं लेकिन ज्‍यादातर खाद्य पदार्थ जो केरोटेनॉइड्स से भरपूर होते है, उनमें वसा बहुत कम होती है। एवोकैडो में असंतृप्त वसीय अम्‍लों की उच्‍च मात्रा के साथ ही उदार मात्रा में करोटेनॉइड्स भी होता है। अध्ययन में, एवोकैडो की उच्‍च और निम्‍न दोनों खुराक की सलाद बिना एवोकैडो तेल के सलाद की तुलना में अल्फा कैरोटीन, बीटा कैरोटीन और लुटेन अवशोषण को लगभग 15 प्रतिशत तक बढ़ा देता है।

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रक्तचाप कम करें
अप्रैल 2005 में जर्नल ऑफ एथनोफर्माकोलोग्य में प्रकाशित एक अध्‍ययन के अनुसार, एवोकैडो तेल रक्तचाप को कम करने में मदद करता है। प्रयोगशाला में जानवरों पर हुए अध्‍ययन के अनुसार, एवोकैडो से भरपूर आहार किडनी में आवश्यक फैटी एसिड के स्तर में परिवर्तन करते हैं जिसके परिणामस्‍वरूप किडनी रक्तचाप को नियंत्रित करने वाले हार्मोन को प्रतिक्रिया देती है। एवोकैडो तेल, दिल में फैटी एसिड संरचना को प्रभावित करता है, और साथ ही आहार में प्रचुर मात्रा में एवोकैडो तेल का इस्‍तेमाल रक्तचाप में सुधार करता है।

गठिया में मददगार
एवोकैडो और सोयाबीन तेल के अर्क के संयोजन का इस्‍तेमाल फ्रांस में दवाओं और भोजन के पूरक के रूप में डेनमार्क में विपणनकिया जाता है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण और उपास्थि विकास और मरम्मत प्रोत्साहित करने की क्षमता के कारण इसे यह दर्जा प्राप्‍त हुआ है। इन तेलों के संयोजन को घुटने और कूल्हे के पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों के उपचार के लिए सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जाता है।

सोरायसिस
जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी की पत्रिका के 2001 के अंक में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, एवोकैडो तेल और विटामिन बी 12 सोरायसिस के प्रति अच्छी तरह से प्रतिक्रिया करता है। अध्‍ययन की अवधि के दौरान जिन सोरायसिस रोगियों ने 12 सप्ताह के लिए विटामिन और एवोकैडो तेल का इस्तेमाल किया उनमें लगातार सुधार देखा गया। इसके विपरीत, अन्‍य समूह जिन्‍होंने विटामिन ई क्रीम का इस्तेमाल किया उनमें चार हफ्तों तक लाभ दिखा फिर प्रभाव थम गया। शोधकर्ताओं ने यह निष्‍कर्ष निकाला कि एवोकैडो के साथ विटामिन बी 12 सोरायसिस के लिए एक उपयोगी लंबी अवधि के सामयिक उपचार हो सकता है।

त्‍वचा में कसाव लाये
त्‍वचा में कोलेजन के कम बनने से शरीर अपना कसाव खोने लगता है। लेकिन एवोकैडो तेल कोलेजन बनने में सहायक होता है क्‍योंकि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह तेल शरीर के अंदर तक जाकर प्रभावी तरीके से त्‍वचा में कसाव लाता है।

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मसूड़ों का रोग
दिसंबर 2001 के अंक में “जर्नल ऑफ पेरिओडोन्टोलोजी” में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, एवोकैडो तेल मसूड़ों में सूजन को कम करके पेरिओडोंटल रोग को रोक सकता है – एक प्रगतिशील रोग जो जबड़े की हड्डियों और दांत के टूटने का कारण बनता है। शोधकर्ताओं के अनुसार एवोकैडो में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पेरिओडोंटल रोग से जुड़े हड्डी कटाव को रोकने में मददगार होता है।

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माउथवॉश का घटक
एवोकैडो तेल माउथवॉश में पड़ने वाला एक घटक है। जर्नल रिव्‍यू डी स्टोमाटोलॉगिए एट डी चिरुर्गी मक्सिल्लो-फैसिले के जून 2010 अंक में प्रकाशित एक अध्‍ययन के अनुसार, कुछ पौधों में मौजूद प्राकृतिक अर्क एंटीसेप्टिक गुण प्रदान करते हैं। इसका अर्थ है कि यह दंत क्षय और बुरा सांस के लिए जिम्‍मेदार बैक्‍टीरिया को मारने में मदद करता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण मुंह में हानिकारक सूजन को रोकने में मदद करते हैं।

नींद की बीमारी है नार्कोलेप्सी, इन 7 नुस्‍खों से पाएं रोग से छुटकारा

नींद से जुड़ी समस्या है नार्कोलेप्सी
नार्कोलेप्सी नींद से जुड़ी एक ऐसी समस्या है जिसमें मरीज़ कभी भी अचानक सो जाता है, और अकसर वो अप्रत्याशित जगहों पर सो जाता है। इस बीमारी में मरीज कभी भी बैठे- बैठे सो जाता है, यहां तक कि हंसते हुए या रोते हुए भी। मरीज दिन भर उनींदा और थका हुआ रहता है। कितना भी सो ले लेकिन ऐसा लगता है, जैसे वह सोया ही नहीं है। यह बीमारी ज्यादातर 15 से 25 साल की उम्र के लोगों को अपना शिकार बनाती है।

सोने का शेड्यूल बनाएं
नार्कोलेप्सी के मरीजों के लिए सोना का शेड्यूल बनाना बहुत जरूरी है। हर रोज एक ही समय पर सोने के लिए बिस्तर पर जाएं और सुबह बिस्तर छोड़ें। बेडरूम में रीडिंग या फिर टीवी देखने जैसी एक्टीविटी न करें, इससे नींद में खलल पड़ सकता है।

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नींद की झपकियां लें
पूरे दिन के दौरान बराबर अंतराल पर नींद की छोटी छोटी झपकियां लें। ये झपकी 15-20 मिनट की हो सकती हैं। झपकी लेने से आपको ताज़गी महसूस होती और अगले तीन चार घंटे के लिए आपको नींद नहीं आएगी। कुछ लोगों को यदि अधिक जरूरत हो तो झपकी का समय बढ़ाया भी जा सकता है।

निकोटिन और अल्कोहल से परहेज
कुछ लोगों को रात में अल्कोहल या फिर निकोटिन लेने की आदत होती है। अगर आपको नींद कम आने की बीमारी है या फिर नींद अधिक आने के बीमारी है, दोनों ही मामलों में निकोटिन और अल्कोहल का सेवन इन समस्याओं के लक्षण और बढ़ा सकता है। इसलिए इनका परहेज करें, खासतौर पर रात के समय।

नियमित रूप से व्यायाम करें
नियमित रूप से व्यायाम करना आपकी नींद की बीमारी को नियंत्रित कर सकता है। सोने से चार से पांच घंटे पहले अगर आप नियमित रूप से व्यायाम करने की आदत डाल लेते हैं तो आपको रात को बेहतर नींद आएगी और दिनभर आपको उनींदापन महसूस नहीं होगा।

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लाल मिर्च, कैल्सियम और मैग्नीसियम लें
कई बार इस समस्या में लाल मिर्च से मदद मिल जाती है। जूस के साथ लाल मिर्च (cayenne) का सेवन करना चाहिए। यह नार्कोलेप्सी को कम करने में प्रभावी रूप से मदद कर सकता है। इसके साथ ही साथ, कैल्सियम और मैग्नीसियम की खुराक नार्कोलेप्सी की समस्या को कम करने में मदद करती है।

ड्राईविंग और हेवी मशीन ऑपरेटिंग से बचें
जब आपको नींद आ रही हो तो आपको ड्राईविंग से बचना चाहिए क्योंकि ये आपके और सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों के लिए काफी जोखिमभरा हो सकता है। इसके अलावा, ड्राईविंग के लिए काफी कॉन्सन्ट्रेशन की जरूरत होती है जिसकी वजह से जल्दी नींद आने लगती है। यदि आपको नार्कोलेप्सी की समस्या हो तो हेवी मशीन ऑपरेटिंग से बचें।

एक्सेसिव डेटाइम स्लीपीनेस (ईडीएस) के लिए दवा लें
ईडीएस को ठीक करने के लिए सबसे ज्यादा जिस दवा का इस्तेमाल किया जाता है उसका नाम है मोडाफाइनिल (Modafinil)। नार्कोलेप्सी ट्रीटमेंट के लिए 1999 के बाद से इस दवा के इस्तेमाल की अनुमति मिल गई है। हालांकि, कुछ लोगों को इसे खाने से कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो जाते हैं। इसलिए बेहतर है कि इसे खाने से पहले डॉक्टर से एक बार सलाह ले लें।

गर्दन की अकड़न और दर्द से तुरंत छुटकारा दिलाते हैं ये 5 घरेलू नुस्‍खे

क्‍यों होती है गर्दन में अकड़न
गर्दन पर अचानक पड़ने वाले दबाव की वजह से नेक बोन से जुड़े सॉफ्ट टिश्यू और लिगामेंट को नुकसान पहुंच सकता है। गर्दन में मोच आने का प्रमुख कारण टिश्यू और लिगामेंट में चोट लगना है। इस चोट की वजह से गर्दन में दर्द, अकड़न, सिरदर्द हो सकता है। कुछ लोगों में तो इस चोट की वजह से ब्रेन नर्व भी प्रभावित होती हैं। ब्रेन नर्व का प्रभावित होना खतरनाक है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति अपंग भी हो सकता है। हालांकि सामान्य तौर पर गर्दन की मोच जीवन के लिए खतरनाक नहीं होती है और प्रॉपर केयर से कुछ समय में यह चोट अपने आप ठीक हो जाती है।

आइस पैक लगाएं
गर्दन की दर्द में आइस पैक काफी लाभ पहुंचाता है। आप चाहें तो बरफ के टुकड़े को कपड़े में बांध कर दर्द पर रख सकते हैं। इससे दर्द में काफी आराम मिलेगा। गर्दन में मोच आने पर आमतौर पर गर्दन के लिगामेंट और टेंडन में चोट आ जाती है। चोट से राहत के लिए गर्दन को आराम देना जरूरी होता है। इसलिए चोट लगने के बाद कुछ हफ्तों तक कॉलर का इस्तेमाल करें।

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भ्रामरी प्राणायाम
पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन में या कुर्सी पर रीढ़ व सिर को सीधा कर बैठ जाएं। दोनों हाथों को जमीन से ऊपर उठाकर अंगूठे या किसी अन्य अंगुली से कान को बंद कर लें। एक गहरी श्वास अंदर लेकर नाक या गले से भौंरे के गुंजार जैसी आवाज तब तक निकालें, जब तक पूरी श्वास बाहर न निकल जाए। यह भ्रामरी की एक आवृत्ति है। इसकी 15 से 20 आवृत्ति का अभ्यास कीजिए।

मसाज के बाद सिंकाई
गर्दन में दर्द होने पर तेल से हलका मालिश करें। मालिश हमेशा गर्दन से कंधे की ओर करें। मालिश के बाद गर्म पानी की थैली से या कांच की बोतल में गर्म पानी भरकर सिंकाई करें। सिंकाई के तुरंत बाद खुली हवा में न जाएं और न ही कोई ठंडा पेय पीने की कोशिश करें।

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अदरक, हींग एवं कपूर
यह एक दर्द निवारक दवा के रूप में काम करती है। अगर आप अदरक पावडर को पानी में मिला कर पियें या फिर इसे घिस कर गरम पानी में मिला कर पेस्‍ट बना कर गरदन पर लगाएं तो राहत मिलेगी।हींग एवं कपूर समान मात्रा में लेकर सरसों तेल में फेंटकर क्रीम की तरह बना लें। इस पेस्ट को गर्दन में लगाकर हल्के हाथों में मालिश करने पर दर्द आराम हो जाता है।

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इन 5 कारणों से आपको रोज सुबह पीना चाहिए अदरक जूस

अदरक के जूस के फायदे
अदरक एक कमाल की हर्ब है, जिसके बड़े सारे स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। इसे भोजन बनाने से लेकर रोगों के इलाज तक में प्रयोग किया जाता है। यह ना सिर्फ खाने का स्‍वाद बढ़ाता है बल्‍कि बीमारियों से भी निजात दिलाने में मदद करता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि अदरक खाने के अलावा इसके जूस का सेवन करने के भी कई कमाल के फायदे होते हैं। अदरक का एक कप जूस पिने से कई बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके सेवन से सर्दी-जुखाम, पेट की खराबी, गले के दर्द, जोडों के दर्द, मधुमेह, बढे हुए कोलेस्‍ट्रॉल यहां तक कि कैंसर तक से बचाव होता है। तो चलिए जानें कितना फायदेमंद है रोजानाएक कप अदरक का जूस पीना।

मधुमेह को नियंत्रित करे
अदरक में एंटी डायबिटिक गुण होते हैं, जो ब्‍लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं। एक गिलास अदरक के जूस का सेवन आपके फास्‍टिंग ग्‍लूकोज लेवल को भी नियंत्रित कर सकता है। अदरक का जूस इम्‍यून सिस्‍टम को मजबूत करता है, जो बीमारियों से लड़ता है और बीमारियों से रक्षा करता है। सुबह अदरक का जूस पीने से कई तरह की बीमारियां नष्‍ट हो जाती हैं।

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कैंसर से बचाव में मददगार
साबुत अदरक में कुछ ऐसे गुणकारी पदार्थ होते हैं, जिसमें एंटी कैंसर गुण होते हैं और वे कैंसर से बचाव में बेहद असरदार भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा अदरक का जूस जहां एक ओ ग्‍लूकोज के स्तर को सामान्य बनाए रखता है वहीं, इससे कोलेस्‍ट्रॉल का स्तर भी कम करने में मदद मिलती है।

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गठिया के दर्द में आराम दे
एक शोध के अनुसार, अदरक में दर्द कम करने वाले गुण भी होते हैं। गठिया रोग और जोड़ों के दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए इसका सेवन लाभदायक होता है। इसका जूस बनाने के लिए अदरक को धोकर इसके छोटे टुकड़े काट लें और जूसर में डाल कर पीसें और जूस निकाल लें। इस जूस में आप नींबू का रस और शहद भी मिला सकते हैं।

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लम्बे और घने बाल
लम्बे और घने बाल पाना हर किसी की चाहत होती है। लेकिन दूषित भरे खानपान, अनियमित खानपान, तनाव भरी जिंदगी और प्रदूषण भरे माहौल में रहने से लंबे बाल पाने का सपना बहुत कम लोगों का ही पूरा हो पाता है। आजकल ना सिर्फ महिलाएं बल्कि पुरुष भी झड़ते और रफ होते बालों से परेशान हैं। अगर आपको भी तमाम तरह के हेयर प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करने के बावजूद कोई असर नहीं दिख रहा है तो आज हम आपको बता रहे हैं अदरक किस तरह आपके बालों के लिए फायदेमंद है।

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अजवायन
एक पैन में अजवायन सेंक कर इसका पाउडर बना लें। इसमें काला नमक मिलाएं। इसे खाने के बाद गुनगुने पानी के साथ लेने से पेटी की गर्मी और एसिडिटी दूर होती है। अजवायन में मौजूद थायमॉल और काले नमक में अल्‍केलाइड्स होते हैं। इन दोनों को मिलाकर एसिडिटी दूर होती है।

सौंफ का प्रयोग
1 कप उबले हुए पानी में 1 चम्मच सौंफ मिलाएं। इसे पूरी रात ऐसे ही पड़े रहने दें। सुबह उठकर इसे छान लें। इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और इसे पी लें। इस मिश्रण को दिन में 3 बार पीने से पेट की गर्मी और एसिडिटी की समस्या दूर हो जाएगी। इससे पेट का फूलना और गैस की समस्या भी दूर हो जाती है।

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अदरक का रस
अदरक का रस भी पेट की गर्मी और जलन ठीक करने में सहायक है। नींबू और शहद में अदरक का रस मिलाकर पीने से, पेट की जलन शांत होती है। इसके अलावा अदरक के रस में एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं इसलिए ये पेट में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को मारता है।

टमाटर और संतरे का सेवन
कैल्शियम, फास्फोरस व विटामिन-सी से भरपूर टमाटर शरीर से जीवाणुओं को बाहर निकालने में मदद करता है। पेट की गर्मी में टमाटर खाने से लाभ मिलता है। इसका नियमित सेवन एसिडिटी और पेट की जलन से लंबे समय तक राहत दिलाता है। स्‍वाद में खट्टा होने के बावजूद टमाटर शरीर में क्षार की मात्रा बढ़ाता है। इसी तरह संतरे में मौजूद फ्रक्टोज, डेक्स्ट्रोज, खनिज एवं विटामिन शरीर में पहुंचते ही ऊर्जा प्रदान करने लगते हैं। संतरे का नियमित सेवन भी पेट की जलन और एसिडिटी से राहत पाने का उत्तम उपाय है।

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गुड़ का सेवन
सीने और पेट में जलन की मुख्य वजह भोजन के पाचन के लिए बनने वाले रस की अनियमितता है। इसलिए इस समस्या से आराम के लिए आप रोजाना भोजन के बाद एक छोटा टुकड़ा गुड़ का चूसें। ध्यान रखें इसे जल्दी-जल्दी खाना नहीं है बल्कि धीरे-धीरे चूसना है। इससे पेट की पाचन क्षमता बढ़ती है और जलन में आराम मिलता है।

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ये 10 घरेलू नुस्‍खे सेहत के लिए हैं हानिकारक, कभी न करें इस्‍तेमाल

घरेलू नुस्‍खे के नुकसान
बहुत सारी समस्‍याओं के समाधान के लिए हम घरेलू उपायों का इस्‍तेमाल करते हैं। लेकिन बहुत से ऐसे घरेलू उपाय हैं जो आपके सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए इन्‍हें घर पर करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। कुछ घरेलू उपाय जैसे मधुमक्‍खी के डंक पर ठंडा पानी डालने को परेशानी के तुरंत इलाज का प्रभावी तरीका माना जाता है। लेकिन आपको यह नहीं भूलना चाहिए हर चीज का इलाज घर पर करना कई बार स्थिति को और अधिक खराब कर सकता है। इस स्‍लाइड शो में कुछ ऐसे घरेलू उपचार दिये गए है जो चीजों को ठीक करने की बजाय आपको संकट में डाल सकते हैं।

ईयर कंडलिंग
कई लोग कान के वैक्‍स से छुटकारा पाने के लिए खतरनाक घरेलू उपचार इयर कांडलिंग का इस्‍तेमाल करते हैं जो खुजली और जलन पैदा कर सकता है। इस प्रक्रिया के दौरान जब मोमबत्ती के आकार के बीवैक्स कोन को कान के अंदर रखा जाता है और इसकी बाती को जलाया जाता हैं। तब बाती से निकलने वाली कुछ बूंदे कान के अंदर चली जाती है। इस तरह से इस प्रक्रिया के दुष्‍प्रभाव खतरनाक होते है। इस घरेलू उपाय से आप अपनी सुनने की क्षमता को भी खो सकते हैं।

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छोटे बच्‍चों के मसूडों पर शराब का इस्‍तेमाल
छोटे बच्‍चे दांत निकालते समय बहुत अधिक दर्द महसूस करते है जिससे वह अधिक चिड़चिडे हो जाते हैं और इस कारण से वह काफी रोते भी हैं। बच्‍चों के दर्द को कम करने के लिए माता-पिता अपने बच्‍चों के मसूड़ों पर शराब को रगड़ना एक घरेलू उपाय मानते हैं। लेकिन इस घरेलू उपाय से काफी हद तक बचा जाना चाहिए क्‍योंकि शराब का प्रभाव बच्‍चों पर भी वैसे ही पड़ता है जैसे बड़ों पर। इसके अलावा यह जलन भी पैदा कर सकता है।

जलने पर मक्खन लगना
जलने पर मक्‍खन लगाने को आपात स्थिति में एक बहुत बढि़या घरेलू उपाय माना जाता है, लेकिन यह उपाय आपके घाव पर संक्रमण पैदा कर सकता है। इसलिए इस घरेलू उपाय को करने से पहले इसके साइड इफेक्‍ट के बारे में एक बार सोच लें।

मुंहासों पर टूथपेस्ट लागना
टूथपेस्‍ट से दांत साफ करने के अलावा, कुछ लोग इसका इस्‍तेमाल मुंहासों को दूर करने के लिए भी करते हैं। लेकिन मुंहासों को दूर करने वाला यह घरेलू उपाय प्रभावित हिस्‍से पर जलन पैदा करके चीजों को भी बदतर बना सकता हैं।

उंगली से मस्सा काटना
कई लोग फिंगर्स से मस्‍सा को निकालने के लिए घरेलू इलाज को करते हैं। इसके लिए वह किसी तेज वस्‍तु से उसे काट देते हैं। लेकिन इस तरह से इलाज करने से आपको संक्रमण हो सकता है या चोट के निशान भी दे सकता है।

फिश बोन हड्डी को दूर करना REMOVING STUCK FISH BONE WITH FINGERS
कई लोगों के लिए उंगलियों से गले से फिश बोन हड्डी को दूर करना एक आम बात होती है। लेकिन यह स्थिति को सुधारने की बजाय बिगाड़ सकता है क्‍योंकि यह गले के अंदर के हिस्‍से को चोटिल कर सकता हैं। इसलिए इस घरेलू उपाय को न करने की सलाह दी जाती हैं।

आंखों की फुंसी को सुई से दबाना
आंखों में हुई फुंसी को कई लोग सुई से दबाना एक आम घरेलू उपचार मानते हैं। लेकिन ऐसा करना आपकी आंखों को खतरे में डाल सकता है। इस तरह से सुई से भेदने से सुई आपके आंखों के अंदर जा सकती है और आप गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं।

कान के अंदर बाल पिन डालना
कान के अंदर की गंदगी को साफ करने के लिए कुछ लोग अक्‍सर बाल पिन का इस्‍तेमाल करते हैं। इसके अलावा कई लोग माचिस की तीली पर कॉटन लपेटकर भी इस्‍तेमाल करते हैं। ऐसा करने से माचिस की तीली आपके कान के अंदर टूटकर अटक सकती हैं और आपके सुनने की क्षमता भी खो सकती है। इस तरह के घरेलू उपाय आपके लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।

कोलेस्ट्रॉल स्तर के लिए लहसुन का प्रयोग
बहुत से लोगों को मानना है कि लहसुन के सेवन से कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को रक्तचाप को कम किया जा सकता है। लेकिन लहसुन का अधिक इस्‍तेमाल वॉरफेरिन (रक्त के थक्‍के को रोकने वाली दवा) के साथ करने से रक्तस्राव में अधिक वृद्धि के जोखिम में डाल सकते हैं। यह असामान्‍य दिल की धड़कन और दिल के दौरे का कारण हो सकता है।

पाचन क्रिया को मजबूत करता है केसर का ऐसा प्रयोग, कब्ज भी होती है खत्म

केसर
तेज खुशबू वाला केसर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसका उपयोग विभिन्‍न व्‍यंजनों और मिठाईयों में किया जाता है। केसरिया रंग का केसर गर्म पानी में डालने पर गहरे पीले रंग का हो जाता है। इसमें मौजूद उष्णवीर्य, उत्तेजक, पाचक, वात-कफ नाशक गुणों के कारण इसका उपयोग कई बीम‍ारियों में किया जाता है। साथ ही यह उत्तेजक, यौनशक्ति वर्धक, त्रिदोष नाशक, वातशूल शमन करने वाला भी होता है।

गर्भावस्‍था में लाभकारी
चिकित्सा गुणों से प्रचुर केसर ऐंठन दूर करता है। गर्भावस्था में इसको लेने से ऐंठन और पेट दर्द में आराम मिलता है। साथ ही यह पाचन-प्रणाली को सुधारने के अलावा गर्भवती महिला की भूख की वृद्धि भी करता है

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