कांग्रेस की कार्य-शैली

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कांग्रेस द्वारा नेशनल हेराल्ड और नवजीवन को फिर से शुरू करने के पीछे दो कारण हैं। एक तो ये अखबार कांग्रेस की माउथपीस होगी जैसे ‘सामना’ शिव सेना की है और ‘पांचजन्य’ व ‘आर्गेनाइजर’ आरएसएस की हैं। कांग्रेस का इस उद्देश्य से नेशनल हेराल्ड व नवजीवन का पुनप्र्रकाशन करना गलत नहीं है। पर इन दोनों समाचार पत्रों को प्रारंभ करने के पीछे छिपा दूसरा उद्देश्य खतरनाक है।

यह उद्देश्य है 2019 में विदेशी धन को लीगलाइज करके नरेंद्र मोदी के विरुद्ध प्रयोग करना। कांग्रेस पहले भी यह करती रही है, पर तब नरेंद्र मोदी नहीं थे तो विदेशी धन, कालाधन या हवाला का धन लाने पर कोई पूछने वाला नहीं था। तब कांग्रेस व विपक्षी दल बड़े-बड़े एनजीओ गिरोह बनाए हुए थे या पाले हुए थे और इन्हीं गिरोहों के पास ये अकूत मात्रा में विदेशी धन मंगाते थे और प्रयोग करते थे। पर 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश विरोधी गतिविधियां चलाने के लिए बनाए गए बड़े-बड़े एनजीओ और इनको करोड़ों-अरबों डालर के विदेशी धन पर शिकंजा कस गया है। ऐसे में कांग्रेस ने इससे निपटने के लिए नया फंडा अपनाया और इन दोनों समाचार पत्रों का पुनप्र्रकाशन प्रारंभ करवाया।

ध्यान रखिए, नेशनल हेराल्ड वही है, जिसमें सोनिया गांधी व राहुल गांधी द्वारा अरबों रुपए का घोटाला कर अपनी व्यक्गित संपत्ति बनाने का आरोप है और ये दोनों इस मामले में जमानत पर हैं।

अब समझिए खेल। एक फेसबुक मित्र हैं जो मुख्यधारा की मीडिया में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेशनल हेराल्ड व नवजीवन समाचार पत्र में एक तो अनेक रास्तों से भारी मात्रा में विदेशी धन को डालकर लीगल बना रही है, दूसरी ओर जिन राज्यों में कांग्रेस या उसके समर्थकों की सरकारें हैं, वहां से सरकारी विज्ञापन के जरिए पैसे बनाए जा रहे हैं। प्रश्र यह है कि इतना धन एकत्र करने का उद्देश्य क्या है?

किसी भी समाचार पत्र से पत्रकारों को कानूनी तौर पर जोड़ा भी जा सकता है और उनको वैध तरीके से भारीभरकम भुगतान भी किया जा सकता है। कांग्रेस ने इन दोनों समाचार पत्रों के लिए हर राज्य के राजधानी से 25 सीनियर और 10 मध्यम स्तर के पत्रकारों को जोड़ा है। इन्हें 2.5 लाख से 3-4 लाख महीने के दिए जा रहे हैं। अब आप जोड़ लें सब राज्यों की राजधानी से 25-25 और 10-10 बड़े और मध्यम पत्रकार, कितनी बड़ी फौज हो गई। इन पत्रकारों का काम है मोदी और मोदी सरकार के खिलाफ लिखना, तथ्यों को तोड़मरोड़ कर सरकार की छवि नकारात्मक बनाने वाले समाचार फैलाना और प्रोपेगंडा करना। इसके अलावा सभी राज्यों में मोदी विरोधी मानसिकता वाले academicians को पेड आर्टिकल के पैनल में रखा गया है। इनलोगों को बहुत अच्छा धन लीगल तरीके से दिया जा रहा है। पहले ये धन, द वायर, क्विंट, कोबरा पोस्ट जैसे पोर्टलों को दिया जा रहा था, पर जनता में इनकी क्रेडिबिलिटी बहुत नहीं बन पायी। इसलिए इस काम का जिम्मा सीधे नेशनल हेराल्ड व नवजीवन के माध्यम से कांग्रेस की अगुवाई में किया जा रहा है।

मोदी के खिलाफ इस साजिश में तमाम वरिष्ठ नौकरशाह भी पर्दे के पीछे से लगे हैं। शासन के विभिन्न स्तरों पर बैठे इन नौकरशाहों का काम फेक इश्यूज (Issues) क्रिएट करने के लिए कांग्रेस द्वारा जोड़े गए पत्रकारों को इनपुट व आंकड़े उपलब्ध कराना है और फिर इन फेक इश्यूज पर back up आर्टिकल, समाचार और विश्लेषण तैयार करने में परोक्ष मदद करना है। इन ऑफिसर्स को मोदी और केंद्र व राज्य की भाजपा सरकारों के खिलाफ उपयोग हो सकने वाले तथ्य, आंकड़े, दस्तावेज उपलब्ध कराने हैं, जिसके आधार पर manipulate कर के ऐसी न्यूज़ तैयार की जा सके जो जनता में मोदी या भाजपा के प्रति शंका या अविश्वास पैदा कर दें। फिर इन फेक न्यूज के आधार पर मुद्दा बना कर विपक्ष हल्ला मचाए और सोशल मीडिया सहित सभी सार्वजनिक मंचों पर मोदी व भाजपा की आक्रामक तरीके से धज्जियां उड़ाई जायें .

ये नौकरशाह इसलिए कांग्रेस के साथ काम कर रहे हैं क्योंकि मोदी के भ्रष्टाचार विरोधी प्रोग्राम से सबसे ज्यादा प्रभावित ये ऑफिसर ही हुए हैं और इनकी अकूत काली संपदा आज नहीं तो कल बाहर भी लाई जाएगी और ये कानून के फंदे में भी फंसेंगे।

कांग्रेस ने जिन पत्रकारों को अपनी साजिश में जोड़ा है, उनमें कुछ तो मुख्य धारा के बड़े मीडिया संगठनों में हैं, जिन्हें पीछे के दरवाजे से जोड़ा गया है, पर अधिकतर ऐस लोग हैं, जो सक्रिय पत्रकारिता (active journalism) में नहीं है, पर उनकी साख और पहुंच इतनी है कि आज भी मीडिया का एजेंडा सेट करते हैं।

सिद्धार्थ वरदराजन, सिद्धार्थ भाटिया, एमके वेणु, विनोद दुआ, रवीश कुमार, आलोक मेहता, शेखर गुप्ता,अपूर्वानंद, उर्मिलेश, आरफा खानम शेरवानी जैसे तमाम बड़े नामों को आपने सुना होगा और देखा होगा कि झूठे तथ्यों पर शब्दों की बाजीगरी और हेरफेर करके ये मोदी के खिलाफ माहौल बनाने की पुरजोर कोशिश करते हैं। रघु रेड्डी, रघुवंश राजन, निशांत, रमेश बरुआ, शरद गुप्ता, निधि सिंह, नेहा दीक्षित, रोहिणी सिंह, नीलम गुप्ता जैसे सैकड़ों नाम हैं, जो जाने-पहचाने भले नहीं है पर, ये पत्रकारों के उस सिंडिकेट में शामिल हैं, जो देश की मीडिया का एजेंडा सेट करता है…देश भर में फैले ये लोग तथ्यों के तोड़मरोड़ कर तिल का ताड़ बनाकर जनमानस में मोदी व भाजपा के प्रति नकारात्मक छवि बनाने के अभियान में शिद्दत से लगे हैं।

ये तो कुछ नाम हैं, जिन्हें आपने मोदी से नफरत करते हुए देखा-सुना है। पर उन पत्रकारों, अकदमीशियंस, लेखकों व स्तंभकारों की सूची बहुत लंबी है, जो कांग्रेस की इस साजिश को सफल बनाने के लिए जीजान से जुटे हैं।