करीब एक साल पहले मैंने 1962 में भारत चीन के मध्य हुए नाथुला दर्रे

0
549

करीब एक साल पहले मैंने 1962 में भारत चीन के मध्य हुए नाथुला दर्रे का वृतांत लिखा था …. संक्षेप में आज फिर लिख रहा हूँ ….

आइये पहले समझते है अहीरवाल का अर्थ …. अहीरवाल का मतलब होता है अहीर/यादव/राव बाहुल्य क्षेत्र …. अहीर-लैंड या अहीर-पट्टी …. राजस्थान के अलवर से अहीरवाल शुरू होता है …. अलवर (रियासत) …. फिर हरियाणा के नारनोल रेवाड़ी लोहारू महेंद्रगढ़ तक का देश का ये विशाल भूभाग अहीरवाल कहलाता है …. महेंद्रगढ़ के बाद पुनः राजस्थान शुरू हो जाता है महेंद्रगढ़ की सीमा राजस्थान के चूरू जिले की राजगढ़ (सादुलपुर) तहसील से लगती है ….

अहीरवाल की तत्कालीन राजधानी रेवाड़ी थी …. रेवाड़ी नगरी की स्थापना अहीर राजा द्वारा की गई है …. इस क्षेत्र पर सदैव अहीरों का आधिपत्य रहा …. इस क्षेत्र के अहीर दबंग वीर बलशाली राष्ट्रभक्त मेहनती होते है …. अहीरवाल के अहीरों ने जंग-ए-आज़ादी कि लिए अनेक लड़ाइयां लड़ी है …. बलिदान दिया है …. देश के लिए अपना खून बहाया है ….

अहीरवाल के अहीरों पे खूब सारी भूमि खेती-बाड़ी है …. यहां के अहीर उच्च-शिक्षित है …. उच्च सरकारी पदों पर आसीन है …. देश सेवा के कार्य यथा आर्मी सैनिक अर्धसैनिक बलों में भी यहां के अहीर उच्च से ले के सैनिक तक के पद पर आसीन है …. राजनीति में भी यहां के अहीरों का वर्चस्व है ….

अहीरवाल के अहीर बहुत मेहनती होते है …. सैंकडों हजारों बीघा भूमि होने के बावजूद यहां के अहीर अपनी भूमि ऐश आराम के लिए कभी नहीं बेंचते …. खुद खेती बाड़ी करते है ….

1962 के भारत पाक युद्ध के दरमियान नाथुला दर्रे पर भारतीय कुमाऊं रेजिमेंट तैनात थी …. 120 जवानों वाली इस बटालियन की कमान मेजर शैतान सिंह जी भाटी (जोधपुर मारवाड़) के हाथों में थी …. एक दिन अल तड़के करीब 2000 चीनी सैनिकों ने इस दर्रे पे भीषण हमला किया …. लेकिन भारतीय सपूतों ने बजाय पीछे मुड़ने के युद्ध किया …. सीमित साधनों संसाधनों असलाह पुरानी राइफल्स के साथ भारतीय जवानों ने चीनी सैनिकों को मुंह तोड़ जवाब दिया ….

युद्ध समाप्ति के पश्चात जहां भारत के 114 सैनिक शहीद हुए …. 5 गिरफ्तार हुए …. 1 सूचना देने नीचे आये वो बच गए …. वहीं चीनी सेना के 1400 सैनिक शहीद हुए …. इस घटना की जानकारी संसार को बर्फ पिघलने के बाद करीब 3 माह बाद मिली ….

कुमाऊं रेजिमेंट का नेतृत्व जहां मेजर शैतान सिंह भाटी राजपूत कर रहे थे …. वहीं इस बटालियन के अधिसंख्यक सैनिक अहीरवाल के अहीर थे …. वीर बलशाली मजबूत कद काठी वाले अहीर …. इस बटालियन पर जब असलाह खत्म हो गया था इन वीर भारतीय अहीर सैनिकों ने चीनी सैनिकों को हाथों में उठा के दर्रे (पहाड़ों) में पटक पटक के मारना शुरू किया …. एक एक अहीर ने दस दस चीनियों को बिना असलाह के दर्रे पे पटक के फेंक के मार गिराया था …. उसके बाद शहादत को गले लगाया था ….

युद्ध समाप्ति के पश्चात मेजर शैतान सिंह जी को सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र (मरणोपरांत) मिला …. वहीं बटालियन के सैनिकों को भी अन्य सैन्य चक्र (पदक) मिले …. इस क्षेत्र के अहीर सैनिक समय समय पर देश के लिए शहादत कुर्बानी देते है …. अनेक पदक लाते है ….

अब अहीरवाल को राजनीतिक दृष्टि से समझिए …………. अहीरवाल के अहीर जातिवादी नहीं है …. 36 कौम बिरादरी के साथ मिलजुल के अत्यंत प्रेम भाईचारे से रहते है …. इस क्षेत्र में आजतक ताकतवर होने के बावजूद अहीरों ने कभी वर्ग-संघर्ष या जातीय-संघर्ष नहीं किया ….

मुलायम सिंह यादव की साइकिल पे सवार हो के …. लालू मुलायम दोनों पिछले 30-35 वर्षों से लालटेन की रोशनी में इस अहीरवाल क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे है …. लेकिन अहीरवाल में आजतक लालू मुलायम ने एक सीट नहीं जीती …. अहीरों ने अपने सजातीय नेताओं को खारिज़ कर दिया …. सीट जीतना तो दूर अहीरवाल के अहीर सपा राजद की टिकिट तक नहीं लेते …. लालू मुलायम अखिलेश जैसे जातिवादियों के मुंह पर उनके सजातीय अहीरवाल के अहीरों ने कालिख पोत रखी है …. अहीरवाल के अहीर हिंदुत्व के पुरोधा है …. इनके वोट केवल 2 राष्ट्रीय पार्टी भाजपा कांग्रेस को जाते है …. अब मोदी जी के आह्वान पर अहीरवाल के अहीरों ने भगवा लहरा रखा है ….

……………………. बाबा रामदेव इसी अहीरवाल बेल्ट से आते है …. जहां सदियों से ले के आजतक सत्ता राव साहबों की ही चलती आयी है …. अहीरवाल के अहीर है बाबा रामदेव …. हालांकि मैं एक सन्यासी की जाती लिखना नहीं चाहता पर बाबाजी ने मजबूर कर दिया ….

बाबा रामदेव से मेरे कुछ सवाल ….

(1) हरियाणा राज्य की स्थापना 1966 में हुई …. 1967 में हरियाणा के दूसरे सीएम भी एक अहीर बने …. राव बीरेंद्र सिंह …. जिस राज्य क्षेत्र ने एक अहीर को मुख्यमंत्री बनाया क्या उस राज्य में एक तरुण अहीर के साथ जातीय भेदभाव होगा ?? …. हाऊ फनी ना ?? ….

(2) देश का संविधान आज से 68 वर्ष 7 दिन पूर्व 26 जनवरी 1950 को लगा …. कठोर जातीय उन्मूलन के कानून बने …. अब तो अश्पृश्यता समाप्त होने की कगार पे है …. बाबाजी की आयु 52 वर्ष है उस वक़्त भी छुवाछुत कम या ना के बराबर थी …. फिर बाबाजी के साथ भेदभाव कैसे हुआ ?? ….

(3) 50 वर्ष के बाबाजी है …. 50 वर्ष ज्यादा अवधि नहीं होती …. क्या बाबाजी के पास इस घटना के साक्ष्य के लिए कोई जीवित व्यक्ति प्रमाण है ?? ….

(4) बाबाजी ये अहीर निम्न जाति कब से हो गयी ?? …. वो भी अहीरवाल में जहां पे सत्ता अहीरों की रही …. रेवाड़ी शहर की स्थापना अहीरों ने की …. क्षेत्र अहीर बाहुल्य है …. राजा सदैव अहीर रहा है …. विधायक सांसद प्रधान पंच मेयर सब अहीर होते है ….

ये तो ठीक वैसे ही हो गया …. हमारे राजस्थान में जाट उच्च जाती है …. 20 वर्ष पहले तक सामान्य श्रेणी में थे फिर ओबीसी में सम्मिलित कर लिए गए …. जबकि हरियाणा के जाट आज भी सामान्य श्रेणी में है …. हरियाणा राजस्थान के जाटों का खून एक …. ब्लड एक …. गोत्र जातियां उप-जातियां कुल एवं कुल देवता एक …. फिर भी एक राज्य के जाट सामान्य वर्ग में एक के ओबीसी वर्ग में ….

ठीक ऐसे ही अहीर सामान्य श्रेणी है …. मंडल आयोग की वी. पी. सिंह (पूर्व प्रधानमंत्री) द्वारा सिफारिशें लागू करने के बाद कुछ राज्यों में अहीरों को ओबीसी का दर्ज़ा मिला ….

बाबा रामदेव जिस कालखंड का वृतांत दिखा रहे है उस दौर में अहीर सामान्य उच्च श्रेणी में थे …. फिर मंदिर में बाबाजी के साथ भेदभाव कैसे हुआ ?? ….

अहीरवाल क्षेत्र के अहीरों की सामाजिक आर्थिक राजनीतिक हैसियत …. शौर्य ताकत पराक्रम इसी पोस्ट में मैंने ऊपर विस्तार से लिखा है ….

अहीरवाल के अहीर बाहुल्य क्षेत्र …. अहीर बाहुल्य गांव में …. एक सामान्य उच्च श्रेणी की जाती अहीरों के छोरे रामदेव के साथ …. एक बुजुर्ग असहाय ब्राह्मण पुजारी ने कैसे अन्याय अत्याचार किया ?? …. वो भी तब जब पूरे देश सहित अहीरवाल के अहीर भी ब्राह्मणों का विशेष सम्मान करते है …. अहीरवाल के वीर दबंग बलशाली बाहुबली अहीर सदियों से अहीरवाल में 36 कौम बिरादरी के साथ परस्पर प्रेम भाईचारे अपनत्व से रह रहे है ….

लोकप्रियता सफलता हासिल करने में सालों लगते है बाबाजी …. खत्म करने में एक पल लगता है ….

लगता है बाबाजी आपको दौलत और शौहरत हजम नहीं हुई ….

बाबाजी आप हिंदुओं को जातियों में बांटने वाला …. आपस मे लड़वाने वाला वो वर्षों पुराना घिसा पीटा फॉर्मूला अपना रहे हो …. जो सदियों से मुगल अंग्रेज और कांग्रेस अपना रहे है ….

चुनावी वर्ष में राजपूतों के बाद अबकी टारगेट ब्राह्मणों यादवों को बनाया गया है ….

लेकिन बाबाजी अपने कलुषित इरादों में कामयाब ना हो पाओगे ….

रहने दो जानेमन तुमसे ना हो पायेगा !!!! ….