अगर सुबह उठते ही कर लिया ये एक काम, तो होगी पैसो की बरसात

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इसके साथ साथ कहा जाता है की मन्त्र जाप करने से हमारे हिवन की कई परेशानियाँ दूर हो जाती हैं साथ ही हमारी सारी मनोकामनाएं भी पूर्ण हो जाती हैं क्योकि मात्र जाप के द्वारा हम अपनी बातें इश्वर तक पहुँचाने में सक्षम होते है लेकिन मंत्र जाप के भी कुछ  नियम होते है जो कि हमारी ज्योतिष में इसका महत्व बतलाया गया है। आपकी जानकारी के लिये आपको बता दे कि मंत्र जप एक ऐसा उपाय है जिससे किसी भी प्रकार की समस्या को दूर किया जा सकता है, सभी शास्त्रों में मंत्रों को बहुत शक्तिशाली और चमत्कारी बताया है।

आज हम आपको जो नियम  बताने वाले है उनसे सुख-शान्ति ,समृद्धि  के साथ-साथ आपके स्वास्थ्य में भी सुधार आने लगेगा, पर ध्यान रहे  कि ये मंत्र आस्था से जुड़े हुए है इसीलिए अगर आपका मन इन मंत्रों को स्वीकार करता है तभी इसका जाप करें, अन्यथा ना करें और मंत्र जाप करते समय अपने मन को शांत चित्त रखने का प्रयास  करें ।आपको बता दे की  किसी भी मंत्र को बार बार दोहराना या उच्चारण करना ही मन्त्र जाप कहलाता है, और ये बात भी बिल्कुल सत्य है की हम सभी कभी न कभी, जाने अनजाने में किसी न किसी समय पर मन्त्र का उच्चारण  जरुर ही करते हैं,  और यही सच्चा जप है|

मंत्र जाप अर्थ है की जिसका मनन करने से संसार का यथार्थ स्वरूप विदित हो, भव-बन्धनों से मुक्ति मिले और जो सफलता के मार्ग पर अग्रसर करे उसे  ही मन्त्र कहते हैं। मंत्र जाप से  मनचाही वस्तु प्राप्त की जा सकती है , हिंदू धर्म में मंत्रों का विशेष महत्व है, मंत्रों के माध्यम से अनेक कठिन काम भी आसानी से किए जा सकते हैं। आज हम आपको ऐसे ही  10 मन्त्र  के बारे में बता रहे हैं जो सुबह उठने से लेकर रात को सोने से पहले तक हर मनुष्य को अवश्य बोलना चाहिए। ये मंत्र कुछ इस प्रकार से है

जब हम सुबह उठते है सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियां देखकर इस  मन्त्र  का उच्चारण करें इसे मन्त्र को दर्शन मंत्र कहा जाता है

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वति।

करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ।।

धरती पर पैर रखने से पहले ये मंत्र बोलें

समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले ।

विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्वमे ॥

 

दातून या मंजन करने  से पूर्व  ये मंत्र बोलें

आयुर्बलं यशो वर्च: प्रजा: पशुवसूनि च।

ब्रह्म प्रज्ञां च मेधां च त्वं नो देहि वनस्पते।।

स्नान करने से पहले इस  मंत्र का उच्चारण करें

स्नान मन्त्र गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।

नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु॥

सूर्य को अर्ध्य देते समय ये मंत्र बोलें

ॐ भास्कराय विद्महे, महातेजाय धीमहि

तन्नो सूर्य:प्रचोदयात

भोजन करने  से पहले ये मंत्र बोलें

ॐ सह नाववतु, सह नौ भुनक्तु, सह वीर्यं करवावहै ।

तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकर प्राण वल्लभे।

ज्ञान वैराग्य सिद्धयर्थ भिखां देहि च पार्वति।।

ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।

ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्म समाधिना ।।

भोजन समाप्त करने  के उपरांत  ये मंत्र बोलें

अगस्त्यम कुम्भकर्णम च शनिं च बडवानलनम।

भोजनं परिपाकारथ स्मरेत भीमं च पंचमं ।।

अन्नाद् भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसंभवः।

यज्ञाद भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्म समुद् भवः।।

अध्ययन (पढाई) से पहले ये मंत्र बोलें (सरस्वती मंत्र)
ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।

कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।

संध्या को पूजा करते समय  ये मंत्र बोलें (गायत्री मंत्र)

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य

धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

रात्रि  को सोने से पूर्व  ये मंत्र बोलें जिसे विशेष विष्णु शयन मंत्र कहा जाता है

अच्युतं केशवं विष्णुं हरिं सोमं जनार्दनम्।

हसं नारायणं कृष्णं जपते दु:स्वप्रशान्तये।